मंगलवार, 15 नवंबर 2011

कम्प्यूटर पर कई घंटो तक काम करने के बाद भी कैसे रहें तरोताजा?

आजकल कम्प्यूटर हम सभी की जिंदगी की जरुरत बन गया है। वर्कप्लेस हो या घर हम बिना कम्प्यूटर के अपना काम नहीं कर सकते हैं। यही कारण है कि कम्प्यूटर पर काम करते हुए थकान हो जाने के बावजूद भी हम लगातार कम्प्यूटर पर काम करते रहते हैं। ऐसे में ये भी एक परेशानी है कि हम कम्प्यूटर पर काम को करते हुए भी किस तरह अपने वर्क में 100 प्रतिशत तक दे सकते हैं। अगर आपके साथ भी यही समस्या है कि आप कम्प्यूटर पर बहुत ज्यादा काम के बोझ के कारण होने वाली थकान के चलते ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं तो हम देते हैं आपको कुछ ऐसे टिप्स जिनसे आप कम्प्यूटर पर कई घंटो तक काम करने के बावजूद भी तरोताजा रह सकते हैं।

- बेवजह कम्प्यूटर का इस्तेमाल न करें।

- कम्प्यूटर पर कार्य करते समय कुर्सी सही डिजाइन की होनी चाहिए। 

- कुर्सी में पूरी पीठ हत्थे पर होनी चाहिए। जिससे बैठते समय कमर, पीठ और हाथों को सहारा मिले। 

- की-बोर्ड माउस को 90 कोण पर मुड़ी कोहनी की सीध में रखें, बेहतर होगा की बोर्ड थोड़ा ढलान पर हों।

- जांघे जमीन के समांतर टखने समकोण पर मुड़े हो, आवश्यक होने पर पैरों को फुट रेस्ट सहारा दें। 

- कम्प्यूटर पर कार्य करते समय फोन को कंधों और गर्दन से दबा कर बात न करें।

- देर तक टेलीफोन से बात करने के लिए हेडफोन उपयोग करें।

- कार्य करते समय शरीर ढीला रखें मन शांत रखें।

- की-बोर्ड माउस का उपयोग कम करने के लिए आवाज पहचान कर कार्य करने वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

- मॉनीटर की चमक, परावर्तन कम करने के लिए एण्टीग्लेमर कोटिंग या ग्लास लगाएं।

आयुर्वेदिक नुस्खा: ये महिलाओं को सुडौल बनाएगा और कमजोरी मिटाएगा




महिलाएं स्वभाव से बहुत ही भावुक होती है। कहते हैं ममता, प्यार, दया और सेवा ये सभी गुण उनमें जन्म से ही होते हैं। इसीलिए वे शादी के बंधन में बंधने के बाद पराए घर को अपनाकर अपने दिन-रात उनकी सेवा में लगा देती है। ऐसे में अधिकतर महिलाएं अपने ऊपर ध्यान नहीं दे पाती हैं। ध्यान नहीं देने के कारण वे कई बार अपनी बीमारियों को छिपाए रखती हैं। इस तरह अंदर ही अंदर वे कमजोर होती जाती हैं। श्वेत रक्त प्रदर, रक्त प्रदर , मासिक धर्म की अनियमितता, कमजोरी दुबलापन, सिरदर्द, कमरदर्द आदि। ये सभी बीमारियां शरीर को स्वस्थ और सुडौल नहीं रहने देती हैं।  इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसा आयुर्वेदिक नुस्खा जो महिलाओं की हर तरह की कमजोरी को दूर करता है।

नुस्खा- स्वर्ण भस्म या वर्क दस ग्राम, मोती पिष्टी बीस ग्राम, शुद्ध हिंगुल तीस ग्राम, सफेद मिर्च चालीस ग्राम, शुद्ध खर्पर अस्सी ग्राम। गाय के दूध का मक्खन पच्चीस ग्राम थोड़ा सा नींबू का रस पहले स्वर्ण भस्म या वर्क और हिंगुल को मिला कर एक जान कर लें। फिर शेष द्रव्य मिलाकर मक्खन के साथ घुटाई करें। फिर नींबु का रस कपड़े की चार तह करके छान लें और इसमें मिलाकर चिकनापन दूर होने तक घुटाई करनी चाहिए।आठ-दस दिन तक घुटाई करनी होगी। फिर उसकी एक-एक रत्ती की गोलियंा बना लें।

सेवन की विधि-  1 या 2 गोली सुबह शाम एक चम्मच च्यवनप्राश के साथ सेवन करें। इस दवाई का सेवन करने से महिलाओं को प्रदर रोग, शारीरिक क्षीणता, और कमजोरी आदिसे मुक्ति मिलती है और शरीर स्वस्थ और सुडौल बनता है। यह दवाई ''स्वर्ण मालिनी'' वसंत के नाम से बाजार में भी मिलती है। इसके सेवन से शरीर बलशाली होता है। शरीर के सभी अंगों को ताकत मिलती है।

सूखे अदरक के ये अनोखे प्रयोग कर देंगे इन सारे रोगों की छुट्टी

भोजन ठीक तरह से नहीं पचता है,भोजन के ठीक से नहीं पचने के कारण शरीर में कितने ही रोग पैदा हो जाते है,अनियमित खानपान से गैस और कफ दूषित हो जाते हैं। सोंठ कब्ज एवं कफवात नाशक, आमवात नाशक है। उदररोग, वातरोग, बावासीर, आफरा, आदि रोगों का नाश करती है। सोंठ में कफनाशक गुण होने के कारण यह खांसी और कफ रोगों में उपयोगी है।

सोंठ का उपयोग प्राचीनकाल से ही होता आ रहा है। सोंठ एक उष्ण जमीकंद हैं जो अदरक के रूप में जमीन से खोदकर निकाली जाती है और सुखाकर सोंठ बनती है। मनुष्य में जीने की शक्ति और रोगों से लडऩे की प्रतिरोधक क्षमता पैदा करती हैं। यह औषधी उत्तेजक, पाचक और शांतिकारक हैं। इसके सेवन से पाचन क्रिया शुद्ध होती है। सोंठ उष्ण होने से वायु के कुपित होने पर होने वाले रोगों को नष्ट करती है।

आधा सिरदर्द- सोंठ का चंदन की घिसकर लेप करें।

आंखों के रोग- सोंठ नीम के पत्ते या निंबोली पीसकर उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक डालकर गोलियां बना लें। गोली को मामूली गर्म कर आंखों पर बांधने से आंखों की पीड़ा कम होती है।

कमरदर्द- कमरदर्द में सोंठ का चूर्ण आधा चम्मच दो कप पानी में उबालकर आधा कप रह जाए। तब छानकर ठंडाकर उसमें दो चम्मच अरण्डी तेल मिला क रोज रात को पीएं।

उदर रोग- चार ग्राम सोंठ का काढ़ा बनाकर पिलाएं एवं साथ में अजवाइन की बनाकर पिलाएं। साथ में अजवाइन की फक्की लगाने से उदर रोग नष्ट होता है।

खांसी-  सोंठ चूर्ण के साथ मुलहटी का चूर्ण एक चम्मच गुनगुने पानी में लेने पर छाती में जमा कफ बाहर निकलता है और खांसी में आराम मिलता है। 

कब्ज- सोंठ का चूर्ण एक चम्मच गरम पानी को उबालकर पिलाएं। 

मंदाग्रि- सोंठ चूर्ण गुड़ में मिलाकर खाने से पाचन क्रिया बढ़ती है।

प्रसव के बाद- सोंठ एवं सफेद मूसली का चूर्ण, कतीरा गोंद के साथ खाने पर प्रसव की कमजोरी एवं कमर दर्द में कमी आ जाती है। 

सोमवार, 14 नवंबर 2011

दादी मां के नुस्खे: इन्हें अपनाएंगे तो नहीं जाना पड़ेगा बार-बार डॉक्टर के पास


आजकल के बदलते वातावरणीय प्रदूषण, खान-पान में मिलावट व शुद्धता की कमी के चलते कई तरह की बीमारियां हो सकती है। अच्छी सेहत सभी चाहते हैं लेकिन छोटी-मोटी समस्याएं हम सभी को हो सकती है। कुछ समस्याएं ऐसी होती है जिनके लिए डॉक्टर के पास भी नहीं जाया जा सकता है। ऐसी ही कुछ समस्याओं के लिए हम आपको बताने जा रहे है कुछ घरेलु नुस्खे -:



- गैस की तकलीफ से तुरंत राहत पाने के लिए लहसुन की 2 कली छीलकर 2 चम्मच शुद्ध घी के साथ चबाकर खाएं फौरन आराम होगा।



- ताजा हरा धनिया मसलकर सूंघने से छींके आना बंद हो जाती हैं।





- प्याज का रस लगाने से मस्सो के छोटे-छोटे टुकड़े होकर जड़ से गिर जाते हैं।





- यदि नींद न आने की शिकायत है, तो रात्रि में सोते समय तलवों पर सरसों का तेल लगाएं।





- प्याज के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टियां आना तत्काल बंद हो जाती हैं।





- सूखे तेजपान के पत्तों को बारीक पीसकर हर तीसरे दिन एक बार मंजन करने से दांत चमकने लगते हैं।





- हिचकी चलती हो तो 1-2 चम्मच ताजा शुद्ध घी, गरम कर सेवन करें।





- यदि आवाज बैठी हुई है या गले में खराश है, तो सुबह उठते समय और रात को सोते समय छोटी इलायची चबा-चबाकर खाएं तथा गुनगुना पानी पीएं।
खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर काफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें। जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से बुखार पलटकर भी नहीं आएगा।

 सावधानी- हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह प्रयोग नहीं करना चाहिये।

पेटदर्द से परेशान हैं तो आपके लिए वरदान हैं ये चटपटे नुस्खे

पेट में दर्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं। लेकिन अधिकतर पेट दर्द का कारण भोजन न पचना होता है। पेट में किसी भी तरह का दर्द हो बोतल में गर्म पानी भरकर सेंकने से आराम मिलता है। जब तक पेटदर्द शांत न हो जाए तब तक कुछ नहीं खाना चाहिए। 

अपच होने पर पेट भारी होकर फूल जाता है,इससे पेट दर्द और बैचेनी जलन और कभी कभी मितली आने लगती है, खट्टी डकारें आती है,पेट में भारीपन महसूस होता है, पेटदर्द और उल्टी आदि की शिकायतें होती है। पेटदर्द मिटाने के लिए कड़वी दवाईयां ले लेकर आप परेशान हो चूके हैं तो आजमाइए पेट दर्द दूर भगाने वाले कुछ टेस्टी नुस्खे-

 - दो चम्मच मेथी दाना में नमक मिलाकर सुबह-शाम दो बार गर्म पानी से लें।

 -  सौंफ और सेंधा नमक मिलाकर पीसकर दो चम्मच गर्म पानी से लें। 

 -  काली मिर्च, हींग, सौंठ समान मात्रा में पीसकर सुबह शाम गर्म पानी से आधा चम्मच लें।

 -  पिसी लाल मिर्च गुड़ में मिलाकर खाने से पेट दर्द में लाभ होता है।

 -  दो इलायची पीसकर शहद मिलाकर चाटने से लाभ होता है।

 -  अनार के दानों पर काली मिर्च और नमक डाल कर चूसें।

 -  नींबू की फांक पर काला नमक, काली मिर्च व जीरा डालकर गर्म करके चूसें।  

 -  २ ग्राम अजवाइन में एक ग्राम नमक मिलाकर गर्म पानी से लें।

दिनचर्या में इतना सा सुधार करेंगे तो बचे रहेंगे डाइबिटीज से हमेशा

आज के दौर में मुझे तनाव नहीं है... यह वाक्य शायद ही किसी के हों, क्योंकि तनाव हमारे जीवन को एक अभिन्न पहलू बनता जा रहा है थोड़ा बहुत तनाव जीवन में स्वाभाविक होता है, परन्तु जब यह अपनी पराकाष्ठा को पार कर जाय ,तो मानसिक विकारों के साथ-साथ हृदय सहित डाइबिटीज जैसे रोगों को निमंत्रण देता है। दुनिया में डाइबिटीज जैसे शारीरिक विकारों की उत्पत्ति के पीछे भी अनियमित खानपान एवं तनावयुक्त दिनचर्या एक बड़ा कारण है, आज दुनिया में जिस प्रकार डाइबिटीज  के रोगी बढ़ रहे हैं ,भारत भी इस मामले में एक कदम आगे है, यूं ही नहीं हमें डाइबिटीज की राजधानी में रहने का गौरव दिया गया है। 

लेकिन हमारी संस्कृति, धर्म एवं जीवन जीने के सिद्धांतों ने इसे हजारों वर्ष पहले ही भांप लिया था, शायद हमारे आचार्यों की दिव्य दूरदृष्टि का यह कमाल ही रहा होगा कि आयुर्वेद एवं योग में ऐसे कई उपाय बताये गए ,जिससे जीवन को जीने की सही कला विकसित हुई ,लेकिन यह भी एक कटु सत्य है, कि हमने आधुनिकता एवं भौतिकता की अंधी दौड़ में इन सबको कहीं भुला दिया और आधुनिक पश्चिमी जीवनशैली का अनुकरण करने लग गए ,इसकी फलश्रुति डाइबिटीज जैसी शारीरिक विकृतियों के रूप में सामने आयी। आज पुरी दुनिया योग एवं आयुर्वेद को अपना कर यह साबित कर रही है, कि हमारे आचार्यों का विज्ञान तथ्यों से पूर्ण था। आयुर्वेद में सदियों पूर्व प्रमेह रोग के रूप में डाइबिटीज को समाहित किया था, एवं इसके मूल कारणों में आरामतलबी जीवन एवं खानपान को बतलाया गया था। आइए आज हम कुछ ऐसे उपायों पर चर्चा करेंगे जिससे आपको इस विकृति को शरीर में सुकृति के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

-आप कफ बढाने वाले खान-पान एवं दिनचर्या (दिन में सोने) से बचें।

-नियमित व्यायाम से आप डाइबिटीज सहित हृदय रोगों से भी बचे रह सकते हैं इसके लिए योग अभ्यास ( पश्चिमोत्तासन एवं हलासन का अभ्यास ) एक महत्वपूर्ण साधन है।

-संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।

-रोज खाने के बाद थोड़ी देर जरूर टहले।

-धूम्रपान व मद्यपान से बचें।

-जामुन के गुठली का चूर्ण ,नीम के पत्र  का चूर्ण,बेल के पत्र का चूर्ण ,शिलाजीत , गुडमार ,करेला बीज एवं त्रिफला का चूर्ण चिकित्सक के परामर्श से लेना डाइबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होगा।

-कुछ आयुर्वेदिक औषधियां जैसे वसंतकुसुमाकर रस ,त्रिबंग भस्म ,शिलाजीत,चंद्रप्रभावटी इस रोग में दी जानेवाली प्रचलित औषधी हैं।

नहीं लेनी पड़ेगी ब्लडप्रेशर व कोलेस्ट्रोल के लिए रोज दवाई, अजमाएं ये नुस्खा

अनार के गुणों से तो आप समय-समय पर परिचित होते रहे हैं, लेकिन हाल का एक शोध आपकी इस सुन्दर फल के बारे में नयी सोच को पैदा करेगा इजराएल के वेस्टर्न गेली मेडिकल सेंटर में लीलेक शेमा और उनके साथियों का एक शोध यह सिद्ध कर रहा है , कि गुर्दे (कीडनी ) से सम्बंधित बीमारी से पीडि़त रोगी में अनार का रस अपने एंटी-ओक्सीडेंट गुणों की प्रचुरता के कारण कोलेस्ट्रोल एवं रक्तचाप को कम करने में मदद करता है।

यह अध्ययन 101 डायलीसिस ले रहे रोगियों को अनार का रस साढ़े तीन ओंस की मात्रा में सप्ताह में तीन बार देकर किया गया। एक वर्ष तक लगातार प्रयोग के उपरान्त यह पाया गया, कि 22 प्रतिशत  रोगियों ने प्लेसीबो समूह की अपेक्षा, उच्च रक्तचाप की दवाओं को लेना छोड़ दिया था। इस अध्ययन से यह साबित हुआ है, कि अनार का रस पीने से आपके रक्त के कोलेस्ट्रोल स्तर के साथ रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है तो ,आज से ही शुरू करें पीना, अनार का रस, इसलिए तो सत्य कहा है एक अनार सौ बीमार

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