बुधवार, 30 मार्च 2011

दस्त और डीहाईड्रेशन में सावधानियां

दस्त या अतिसार स्वयं तो रोग है ही, यदि ये बने रहें तो शरीर में पानी की कमी हो जाना लाजमी है। यह शरीर में पानी की कमी ही डीहाईड्रेशन है, जो कि दस्तों से भी अधिक खतरनाक है। अत: दस्तों का सही, तुरंत इलाज करना जरूरी है। बार-बार शौच जाना बहुत कमजोरी भी ला देता है।

कारण : 1. अशुध्द दूषित पानी पीना, 2. अंतड़ियों में भोजन का सड़ना, 3. आवश्यकता से अधिक खाना, 4. किसी अन्य रोग के कारण एन्टीबायोटिक दवाएं खाना, 5. ऐसी दवाएं खाना जो दस्त लगाती हों, 6. भोजन की किसी प्रकार से एलर्जी हो जाना, 7. बासी भोजन खाने से, 8. फल से जो गल-सड़ गये हों, 9. पुरानी मिठाई से, 10. गंदे, मक्खियों वाले, धूल वाले कटे फल आदि खाने से भी, 11. घबराहट, मानसिक दबाव, भय तथा तनाव भी दस्त लगा देते हैं।
उपचार : दस्तों से बचने के लिए निम्नलिखित उपचार कर सकते हैं-
जीरा तथा सौंफ से- एक चम्मच जीरा, एक चम्मच सौंफ लेकर तवे पर भून लें। फिर चकला-बेलना पर या सिल पर पीसें। इसे खाकर ताजा पानी पी लें। ऐसी तीन खुराक एक दिन में लेनी है। कुल चार दिन उपचार करना है। यह चूर्ण इकट्ठा, एक बार बनाकर भी रख सकते हैं।
ईसबगोल की भूसी से- ईसबगोल की भूसी के दो चम्मच लें। एक डिश प्लेट दही में मिलाकर खाएं। ऐसी तीन खुराक दिन में लें। तीन दिनों तक लेते रहें। आराम मिलेगा।
अदरक का रस- एक प्याला उबला हुआ पानी लें। इसमें अदरक का ताजा रस एक चम्मच डालें। कुछ देर रखा रहने दें। जब गुनगुना हो जाए तो पी लें। ऐसी चार खुराक हर घंटे-डेढ़ घंटे के बाद लें। दो ही दिनों में आराम मिल जायेगा।
डीहाईड्रेशन से बचें- इस रोग में डीहाईड्रेशन का बहुत डर रहता है। इससे बचने का प्रयत्न करना जरूरी है।
1. उबाल कर, ठंडा करके पानी पीने की आदत डाले।
2. इलेक्ट्राल को घोलकर पीते रहें।
3. गुनगुने पानी में चीनी, नमक और नींबू स्वाद के अनुसार मात्रा में डालें और पी लें। दिन भर पीते रहें जब तक दस्त परेशान कर रहे हों। ऐसा करने से पानी की कमी नहीं होती और रोग भी जल्दी शांत होता है। इस रोग से कमजोरी भी आ जाती है। अत: जल्दी से जल्दी इलाज कर अपना बचाव करें।

दो सेब खाने से भाग जाएगा आपका गुस्सा

आजकल हर व्यक्ति के ऊपर जरूरत से ज्यादा काम का बोझ और जिम्मेदारियां आ गई हैं। इन्हीं कारणों को लेकर आज ज्यादातर लोगों का स्वभाव चिढ़चिढ़ा हो गया है।कई कोशिशों के बाद भी वे अपने गुस्से पर कन्ट्रोल नहीं कर पाते हैं।

कई बार उनका यही गुस्सा कई मुसीबतों का कारण भी बन जाता है। लेकिन अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है नीचे एक कारगर घरेलू नुस्खा बताया जा रहा है जिसको आजमा कर आप अपने गुस्से को हमेशा के लिए दूर कर सकते है।

- दो पके हुए सेब बिना छीले ही सुबह सुबह खाली पेट खूब चबा चबाकर खाएं। लगातार पन्द्रह दिन सेब खाने से किसी भी तरह का गुस्सा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

विशेष- जिन लोगों का दिमाग कमजोर हो या जिन स्टूडेण्टस को याद न रहने की समस्या हो वे इस नुस्खे को जरूर आजमाएं। इस नुस्खे को आजमाने से मेमोरी शार्प होती है।

मंगलवार, 29 मार्च 2011

हेल्दी रखती हैं नैचरल चीजें

एक परफेक्ट मील के लिए जरूरी है कि आप सही चीजों को मिक्स करें और इनमें बैलेंस बनाए रखें। आपको बताते हैं कुछ बेसिक रूल्स, जिन्हें अपनाकर आपका खाना टेस्टी होने के साथ ही हेल्दी भी हो जाएगा:

रूल 1
उन्हीं सब्जियों और फलों का इस्तेमाल करें, जो सीजन में हैं। क्या आपने जून के महीने में सेब खाए हैं? इस मौसम में सेब बिना रस वाला और टेस्टलेस होता है। यह याद रखें कि अगर सब्जियां व फल सीजन के बाहर मिल रहे हैं, तो वे आर्टिफिशल तरीके से तैयार किए गए हैं और हेल्थ के लिहाज से अनहेल्दी हैं। इसलिए सीजन के मुताबिक ही फल और सब्जियां खरीदें।

रूल 2
लोकल फल और सब्जियां ही खरीदें। सुपरमार्केट में रखी पैकेट सब्जियां हेल्दी नहीं होती। ये आधी पकी ले ली जाती हैं और फिर इन्हें आर्टिफिशल तरीके से पकाया जाता है। इन्हें ताजा रखने के लिए केमिकल के साथ रखा जाता है, जिससे इनके तत्व खत्म हो जाते हैं। इसलिए सब्जियां हमेशा सब्जी वाले से ताजा ही खरीदें।

रूल 3
नेचर के साथ चलें। वही खाएं, जो आपके रहने की जगह में ज्यादा पाया जाता है। उदाहरण के तौर पर ठंडी जगहों पर रहने वाले एस्कीमोज बहुत सारा फैट खाते हैं, क्योंकि यह उनको सूट करता है। लेकिन अगर हम इतना फैट खाएं, तो यह जानलेवा हो सकता है। भारत में फल, सब्जियां, मसाले और सब्जियां बहुत मिलती हैं, इसलिए हमें इन्हें ही ज्यादा खाना चाहिए।

रूल 4
दिन का पहला आहार नाश्ता पौष्टिक व स्वादिष्ट होगा, तो आप दिनभर एनर्जी से भरपूर रहेंगे। इसके लिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं। बस फ्रिज से अपनी पसंद के फूटस चुनें। आजकल के मौसम में पाइनेपल, मैंगो, केला, बेरीज और सेब अच्छे फल हैं। इन्हें अच्छी तरह धोकर एक प्लेट में छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और ठंडा करने के लिए फ्रीज में रख दें।

नाश्ते के समय सलाद को फ्रीज से निकालें और उसमें पुदीना और नारियल डालकर ऊपर से फ्रेश दही डाल दें। ठंडा- ठंडा सलाद तैयार। खरबूजा, संतरे, तरबूज का सलाद भी गर्मियों के दिन में मजेदार सलाद हो सकता है। इस मौसम में अपने फ्रीज में खूब मात्रा में खीरा, टमाटर, बंद गोभी और नीबू रखें। इससे आप जब चाहें इस पोषक युक्त आहार का आनंद उठा सकती हैं।

एक कटोरा दलिया या ओटमील में ब्राउन शुगर, कसा खजूर, किशमिश, बादाम और ब्राउन शुगर मिलाएं। यह नाश्ता आपको दिनभर एनर्जी से भरपूर रखेगा और लंच टाइम तक भूख नहीं लगने देगा।

रूल 5
ज्यादा तेल इस्तेमाल न करें। अपने वेज या नॉनवेज खाने पर पहले तेल लगा लें और फिर पैन में पकाएं। इससे बिल्कुल भी एक्स्ट्रा तेल नहीं लगता है। तेल, घी या मक्खन को कम या ज्यादा गर्म न होने दें, यह हानिकारक होता है।

रूल 6
प्योर सामग्री का इस्तेमाल करें। जैसे, धनिया के पूरे बीजों का इस्तेमाल करें, क्योंकि बीजों में सारे तत्व बने रहते हैं। सारे मसालों के बीज रखें और तब ही पीसें, जब जरूरत हो। अगर वह पहले से पीसे हों, तो वह प्रोटीन के साथ-साथ टेस्ट भी खो देते हैं। बाहर से मसालों का पाउडर बिल्कुल न खरीदें। इनमें कलर व मात्रा बढ़ाने के लिए कुछ मिला दिया जाता है।

रूल 7
सही सब्जी, फिश, मीट कुछ भी खाएं। इसे बनाने की सामग्री लें और बनने में पूरा समय दें। इससे खाना टेस्टी बनेगा और आप खाने का पूरी तरह एंजॉय भी कर पाएंगे।

नमक खाते ही उतर जाएगा बुखार

गर्मियों में अधिकाशं लोगों को किसी न किसी कारण से बुखार की शिकायत हो ही जाती है। कभी वायरल फीवर के नाम पर तो कभी मलेरिया जैसे नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले लेता है। फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं। कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। पर घबराइए नहीं सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। इसके प्रयोग किसी भी तरह के बुखार को उतार देता है।

भुना नमक बनाने की विधि- खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर कॉफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें।जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से आपको बुखार कभी पलट कर नहीं आएगा।

विशेष-हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह वि धि नहीं अपनानी चाहिए।

- यह प्रयोग एक दम खाली पेट करना चाहिए इसके बाद कुछ खाना नहीं चाहिए और ध्यान रखें कि इस दौरान रोगी को ठण्ड न लगे।

- अगर रोगी को प्यास ज्यादा लगे तो उसे पानी को गर्म कर उसे ठण्डा करके दें।

- इस नुस्खे को अजमाने के बाद रोगी को करीब 48 घंटे तक कुछ खाने को न दें। और उसके बाद उसे दूध, चाय या हल्का दलिया बनाकर खिलाऐं।

क्या आप अपने जोड़ो के दर्द से परेशान हैं...?

यदि किसी व्यक्ति को गठिया, साइटिका या रीढ़ की हड्डी या अन्य हड्डी से जुड़ी कोई परेशानी है तो उसके लिए गृद्धासन काफी कारगर उपाय हैं। इसके नियमित अभ्यास से काफी फायदा होता है।

गृद्धासन की विधि

- समतल स्थान पर कंबल आदि बिछाकर जमीन पर सीधा खड़े हो जाएं।

- फिर दाएं पैर को घुटनें से मोड़कर बाएं पैर में रस्सी की तरह लपेटकर खड़े हो जाएं तथा पूरे शरीर का भार एक पैर पर डालें।

- इस तरह दोनों हाथों को भी आपस में इस तरह से लपेटे की अंगूलियां गिद्ध की चोंच की तरह बन जाएं।

- हाथों को मुंह के सामने रखें।

- आसन की इस स्थिति में कुछ देर तक रहें और सामान्य स्थिति में आकर इस क्रिया को दूसरे पैरों से भी करें।

- इसमें घुटनों को हमेशा मुड़े हुए रखें। इस आसन का अभ्यास शुरु में कठिन होता है।

- इस आसन को शुरु में करते समय किसी दूसरे की सहायता ले सकते हैं। बाद में बिना किसी की सहायता से ही करें। इस आसन में शरीर का पूर्ण भार एक पैर पर ही टिका होता है। इसमें शरीर का संतुलन बनाना आवश्यक है।

आसन से रोगों में लाभ

इससे पिण्डलियों की मांसपेशियां विकसित व सख्त बनती है। इस से पैरों व हाथों की हड्डियां मजबूत होती है तथा रीढ़ की हड्डी भी मजबूत होती है। यह हाथ-पैरों को विकसित एवं पुष्ट करता है। यह गठिया तथा पुरानी वातरोग, साइटिका पेन को ठीक करता हैं।

सावधानी

यदि आह्यपको किसी तरह की बीमारी है तो किसी योग प्रशिक्षक से परामर्श अवश्य करें।

ये पांच खाने ऐसे हैं जिसमें है सबसे ज्यादा ताकत!

एजेंसी। जीने के लिए खाना जरुरी है लेकिन कई बार खाने में बरती गई लापरवाही जिंदगी के लिए खतरा बन जाती है। हालांकि इंसान ने खाने की इतनी किस्में ईजाद की हैं कि ये बताना बहुत मुश्किल है कि कौन सी किस्म सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं खाने की ऐसी पांच चीजों के बारे में जिनमें सेहत बख्शने की असीम संभावना है....
१. पालक : साग की इस वेराइटी को विटामिन का पावर हाउस कहा जाता है। इसमें ए, सी, ई, के, बी-6 जैसे विटामिन एक साथ पाए जाते हैं। पालक में स्कीन और ब्रेस्ट कैंसर से लड़ने की सबसे ज्यादा ताकत होती है। मजे की बात है कि इसमें कोलेस्ट्राल बिल्कुल नही होता।
२. गाजर : रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में गाजर का कोई मुकाबला नही है। एक कप कतरे हुए गाजर में 52 कैलोरी होती है इसके बावजूद इसमें कोलेस्ट्राल बिल्कुल नही होता। बच्चों के विकास में ये सबसे ज्यादा मददगार होता है। फेफड़े, स्कीन और मुंह के कैंसर से बचाने के लिए इसे रामबाण माना जाता है।
३. केल या गोभी : शरीर में बनने वाले विषैलें पदाथरें को रोकने में इस गोभी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सब्जियों की किसी भी किस्म की तुलना में इसमें पौष्टिकता सबसे अधिक होती है।
४. ब्राकली यानि हरी फूलगोभी : कैंसर और जन्म के साथ होने वाली बीमारियों से लड़ने में ये गोभी बेहद कारगर होती है। ये न सिर्फ हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है बल्कि, हड्डियों को मजबूत करने की इसमें गजब की क्षमता होती है।
५. अमरुद : अमरुद को दिन का हीरा कहते हैं क्योंकि दिल की बीमारियों को दूर रखने और कब्ज जैसी सामान्य समस्या को खत्म करने में इसका कोई जोड़ नही है। शुगर यानि मधुमेह की रोकथाम के लिए भी इस फल को औषधि की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

सोमवार, 28 मार्च 2011

हर रोज खाएं 7 अखरोट

अगर आप अपने शरीर में ऑक्‍सीडेंट्स को कम करना चाहते हैं तो हर रोज 7 अखरोट खाएं।

पेंसिलवेनिया के स्क्रैन्टॉन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता विनसन का कहना है कि अखरोट में मूंगफली, बादाम, पिस्ता और अन्य मेवा से ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं।

इसलिए स्वास्थ्य लाभ के लिए हर रोज करीब सात अखरोट खाने चाहिए। अखरोट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स विटामिन ई जितने गुणकारी होते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में मौजूद प्राकृतिक रसायनों को नष्ट होने से रोककर कैंसर, मधुमेह और दिल की बीमारी से रोकथाम करता है। साथ ही शरीर की त्‍वचा को निखारने का काम भी करता है।

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