शुक्रवार, 13 मई 2011

फुलटाइम रिचार्ज रहें इस अनूठे तरीके से!!

थकान एक ऐसी बेनाम बीमारी है जो अघोषित रूप से अपना असर दिखाती है। चिकित्सा वैज्ञानिकों ने आज बड़ी से बड़ी बीमारी को काबू में कर लिया है या तकरीबन करीब पहुंच गए हैं। लेकिन थकान या अनिच्छा एक ऐसी अदृश्य बीमारी है जिसका आज तक कोई माकूल हल नहीं मिल पाया है। यहां हम दे रहे हैं स्वचिकित्सा से जुड़ा एक ऐसा प्रयोग जो पूरी तरह से प्राकृतिक और निरापद है। इस प्रयोग का प्रभाव या असर आप सिर्फ चंद मिनिटों में ही जान सकते हैं। तो आइये जानते हैं इस आसान प्रयोग को....

डेस्क या टेबिल पर कोहनी टिकाकर बैठें, हाथों को सीने के सामने से लाते हुए हथेलियों को गालों के ऊपर से लाते हुए अपनी आंखें बंद करें। यदि आप घर में हैं तो लेटकर भी यह क्रिया दोहरा सकते हैं। ऐसा करते समय अपने घुटनों को मोड़ कर रखें। दोनों हथेलियों को तब तक आपस में रगड़ें जब तक कि वे गर्म न हो जाएं, फिर उन्हें बंद आंखों के ऊपर रखें। गहरी सांसें भरें, इस तरह कि बंद आंखों के अंधेरे को महसूस कर सकें, थकी आंखों पर हथेलियों की गर्माहट का अनुभव करें। इसे महसूस करते हुए मस्तिष्क को खाली कर लें। गहरी सांसें लें, किसी भी समस्या और तनाव का अनुभव न होने पाए। पांच-दस मिनट तक ऐसा करें। रात्रि में सोने से पहले एक बाल्टी में नमक मिला पानी लें। इस पानी में घुटनों तक पैरों को 15 मिनिटों तक डुबाकर रखें, एसा करने से पूरे दिन भर की थकान और नकारात्मक ऊर्जा जादुई रूप से गायब हो जाएगी।

10 मिनिट तक इसे सूंघते ही सारी थकान हो जाएगी छूमंतर!!

ध्वनि चिकित्सा, रंग चिकित्सा और स्पर्श चिकित्सा की तरह की एक अद्भुत चिकित्सा का नाम है गंध चिकित्सा। रंग चिकित्सा की खाशियत है कि यह पूरी तरह से विज्ञान सम्मत तो है ही लेकिन कई मामलों में दूसरी चिकित्सा पद्धतियों से भी ज्यादा असरदार एवं कारगर होती है।

हम यहां गंध चिकित्सा से जुड़े कुछ बेहद असरदार और शानदार प्रयोग दे रहे हैं जो चंद मिनिटों में ही तन-मन दोनों की थकान को मिटाकर आपको चुस्ती-फुर्ती से लबालब भर देगी...

दोपहर का समय वह होता है जब आपका ऊर्जा स्तर गिरने लगता है और खुद को दोबारा से ऊर्जावान बनाना जरूरी होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना हैं कि दोपहर के समय आप दस मिनट अपनी सभी अवांछित फाइल्स, कार्यक्रम, फोन और ईमेल निपटाने के बारे में सोचें। एक बार जरूरी कार्य निपट जाएं तो थोड़ा सुस्ता लें। कोई सुगंधित तेल लेकर माथे पर लगा लें, इससे आपको राहत महसूस होगी।

अनूठा प्रयोग

यूकेलिप्टस, लेमनग्रास या रोजमेरी के सुगंधित तेल की चार बूंद किसी छोटी सी बोतल में लें। इसमें आधा पानी भरकर आसपास इसका छिड़काव करें। घड़ी की दिशा के अनुसार अपने चारों ओर स्प्रे करें, कोने में, डेस्क या कंप्यूटर के आसपास भी स्प्रे कर सकते हैं।

बुधवार, 11 मई 2011

दन्तशूल(toothache) के घरेलू उपचार


दांत,मसूढों और जबडों में होने वाली पीडा को दंतशूल से परिभाषित किया जाता है। हममें से कई लोगों को ऐसी पीडा अकस्मात हो जाया करती है। दांत में कभी सामान्य तो कभी असहनीय दर्द उठता है। रोगी को चेन नहीं पडता। मसूडों में सूजन आ जाती है। दांतों में सूक्छम जीवाणुओं का संक्रमण हो जाने से स्थिति और बिगड जाती है। मसूढों में घाव बन जाते हैं जो अत्यंत कष्टदायी होते हैं।दांत में सडने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है और उनमें केविटी बनने लगती है।जब सडन की वजह से दांत की नाडियां प्रभावित हो जाती हैं तो पीडा अत्यधिक बढ जाती है।
प्राकृतिक उपचार दंत पीडा में लाभकारी होते हैं। सदियों से हमारे बडे-बूढे दांत के दर्द में घरेलू पदार्थों का उपयोग करते आये हैं। यहां हम ऐसे ही प्राकृतिक उपचारों की चर्चा कर रहे हैं।

१) बाय बिडंग १० ग्राम,सफ़ेद फ़िटकरी १० ग्राम लेकर तीन लिटर जल में उबालकर जब मिश्रण एक लिटर रह जाए तो आंच से उतारकर ठंडा करके एक बोत्तल में भर लें। दवा तैयार है। इस क्वाथ से सुबह -शाम कुल्ले करते रहने से दांत की पीडा दूर होती है और दांत भी मजबूत बनते हैं।

२) लहसुन में जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। लहसुन की एक कली थोडे से सैंधा नमक के साथ पीसें फ़िर इसे दुखने वाले दांत पर रख कर दबाएं। तत्काल लाभ होता है। प्रतिदिन एक लहसुन कली चबाकर खाने से दांत की तकलीफ़ से छुटकारा मिलता है।

३) हींग दंतशूल में गुणकारी है। दांत की गुहा(केविटी) में थोडी सी हींग भरदें। कष्ट में राहत मिलेगी।

४) तंबाखू और नमक महीन पीसलें। इस टूथ पावडर से रोज दंतमंजन करने से दंतशूल से मुक्ति मिल जाती है।

५) बर्फ़ के प्रयोग से कई लोगों को दांत के दर्द में फ़ायदा होता है। बर्फ़ का टुकडा दुखने वाले दांत के ऊपर या पास में रखें। बर्फ़ उस जगह को सुन्न करके लाभ पहुंचाता है।

६) कुछ रोगी गरम सेक से लाभान्वित होते हैं। गरम पानी की ्थैली से सेक करना प्रयोजनीय है।

७) प्याज कीटाणुनाशक है। प्याज को कूटकर लुग्दी दांत पर रखना हितकर उपचार है। एक छोटा प्याज नित्य भली प्रकार चबाकर खाने की सलाह दी जाती है। इससे दांत में निवास करने वाले जीवाणु नष्ट होंगे।

८) लौंग के तैल का फ़ाया दांत की केविटी में रखने से तुरंत फ़ायदा होगा। दांत के दर्द के रोगी को दिन में ३-४ बार एक लौंग मुंह में रखकर चूसने की सलाह दी जाती है।

९) नमक मिले गरम पानी के कुल्ले करने से दंतशूल नियंत्रित होता है। करीब ३०० मिलि पानी मे एक बडा चम्मच नमक डालकर तैयार करें।दिन में तीन बार कुल्ले करना उचित है।

१०) पुदिने की सूखी पत्तियां पीडा वाले दांत के चारों ओर रखें। १०-१५ मिनिट की अवधि तक रखें। ऐसा दिन में १० बार करने से लाभ मिलेगा।

११) दो ग्राम हींग नींबू के रस में पीसकर पेस्ट जैसा बनाले। इस पेस्ट से दंत मंजन करते रहने से दंतशूल का निवारण होता है।

१२। मेरा अनुभव है कि विटामिन सी ५०० एम.जी. दिन में दो बार और केल्सियम ५००एम.जी दिन में एक बार लेते रहने से दांत के कई रोग नियंत्रित होंगे और दांत भी मजबूत बनेंगे।

१३) मुख्य बात ये है कि सुबह-शाम दांतों की स्वच्छता करते रहें। दांतों के बीच की ्जगह में अन्न कण फ़ंसे रह जाते हैं और उनमें जीवाणु पैदा होकर दंत विकार उत्पन्न करते हैं।

१४) शकर का उपयोग हानिकारक है। इससे दांतो में जीवाणु पैदा होते हैं। मीठी वसुएं हानिकारक हैं। लेकिन कडवे,ख्ट्टे,कसेले स्वाद के पदार्थ दांतों के लिये हितकर होते है। नींबू,आंवला,टमाटर ,नारंगी का नियमित उपयोग लाभकारी है। इन फ़लों मे जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। मसूढों से अत्यधिक मात्रा में खून जाता हो तो नींबू का ताजा रस पीना लाभकारी है।

१५) हरी सब्जियां,रसदार फ़ल भोजन में प्रचुरता से शामिल करें।

१६) दांतों की केविटी में दंत चिकित्सक केमिकल मसाला भरकर इलाज करते हैं। सभी प्रकार के जतन करने पर भी दांत की पीडा शांत न हो तो दांत उखडवाना ही आखिरी उपाय है।

मंगलवार, 10 मई 2011

पौरुष बल बढ़ाने और यौन समस्याएं मिटाने का 1 सरल तरीका

उत्तेजक विचार और राजसी व तामसी खान-पान निश्चित रूप से इंसान को असंयमी और रोगी बनाते हैं। सीमा से अधिक खुलापन और अप्राकृतिक जीवनशैली, दोनों ने मिलकर आधुनिक मनुष्य को शरीर तथा मन दोनों से कमजोर और रोगी बना दिया है। अन्न से विचार बनते हैं और विचार ही किसी के व्यक्तित्व को गढऩे का कार्य करते हैं। प्रदूषित आचार, विचार, आहार और विहार ने ही आधुनिक इंसान को स्वप्रदोष, शीघ्रपतन, मधुमेह, बहुमूत्रता....और अंत में नपुंसकता जैसे गंभीर रोग उपहार में दिये हैं। तो चलते हैं एक ऐसे जांचे-परखे हुए एक बेहद आसान योगिक उपाय की तरफ जो अधिकांश यौन रोगों से छुटकारा दिलाकर आपकी पौरुष शक्ति को बढ़ाता व स्थिर रखता है....

ब्रह्मचर्यासन एक ऐसा आसन है जो खाने के बाद और सोने से पहले किया जाए तो स्वप्नदोष होना जैसी समस्या पर विराम लग जाता है। इस आसन से ब्रह्मचर्य का पालन करने में भी मदद मिलती है। इसलिए इसे ब्रह्मचर्यासन कहा जाता है।

साधारणतया योगासन भोजन के बाद नहीं किये जाते परंतु कुछ ऐसे आसन हैं जो भोजन के बाद भी किये जाते हैं। उन्हीं आसनों में से एक है ब्रह्मचर्यासन। यह आसन रात्रि-भोजन के बाद सोने से पहले करने से विशेष लाभ होता है।

ब्रह्मचर्यासन के नियमित अभ्यास से ब्रह्मचर्य-पालन में खूब सहायता मिलती है यानी कि इसके अभ्यास से अखंड ब्रह्मचर्य की सिद्धि होती है। इसलिए योगियों ने इसका नाम ब्रह्मचर्यासन रखा है।

ब्रह्मचर्यासन की विधि-

समतल स्थान पर कंबल बिछाकर घुटनों के बल बैठ जायें। तत्पश्चात् दोनों पैरों को अपनी-अपनी दिशा में इस तरह फैला दें कि नितम्ब और गुदा का भाग जमीन से लगा रहे। हाथों को घुटनों पर रख के शांत चित्त से बैठे रहें।

ब्रह्मचर्यासन के लाभ-

इस आसन के अभ्यास से वीर्यवाहिनी नाड़ी का प्रवाह शीघ्र ही ऊध्र्वगामी हो जाता है और सिवनी नाड़ी की उष्णता कम हो जाती है, जिससे यह आसन स्वप्नदोषादि बीमारियों को दूर करने में परम लाभकारी सिद्ध हुआ है।

जिन व्यक्तियों को बार-बार स्वप्नदोष होता है, उन्हें सोने से पहले पांच से दस मिनट तक इस आसन का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। इससे उपस्थ इन्द्रिय में काफी शक्ति आती है और एकाग्रता में वृद्धि होती है।

सावधानियां-

इस आसन को करते समय शरीर के साथ किसी प्रकार की जोर-जबरदस्ती न करें। प्रारंम्भिक दिनों में इसे कम समय के लिये ही करें। किसी भी प्रकार के अधिक दवाब या तनाव से बचें। आसनों का अभ्यास किसी जानकार मार्गदर्शक की देख-रेख में करना ही ज्यादा सुरक्षित होता है।

दांतों का दर्द अब भूल जाओ... दांत टिकेंगे पूरे 100 साल

कुछ दिनों पहले छपी एक खबर ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। वह खबर यह थी कि किसी लड़की ने पिछले 9-10 सालों से टूथ ब्रश यानी मंजन नहीं किया और हैरत में डालने वाली बात यह रही कि ऐसा होने के बावजूद उसे दांतों से संबंधित कोई समस्या नहीं है। इस तथ्य से एक बात तो जाहिर है कि बाजार में उपलब्ध तरह-तरह के टूथ पेस्ट अपनेबड़े-बड़े वादों पर खरे नहीं उतरे हैं।

असल में दांतों से जुड़ी हर समस्या के पीछे हमारी गलत खानपान और रहन-सहन की आधुनिक जीवन शैली है। चाय-कॉफी जैसे बेहद गर्म पेय तथा कोलड्रिक्स दोनों ही दांतों की जड़ों को कमजोर और खोखला कर देते हैं। सात्विक, ताजा तथा प्राकृतिक खानपान और सफाई के प्रति जागरूकता ही हमें दातों की समस्या से स्थाई छुटकार दिला सककी है। तो आइये हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे ही आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपचार के तरीके जो यकीनन आपको दांतों से जुड़ी हर दिक्कत से मुक्ति दिलाएंगे....

आजकल गलत खान-पान और ठीक से देखरेख न करने के कारण लोगों में दांत के दर्द की समस्या आम हो गई है। छोटे छोटे बच्चों को अक्सर दांत में दर्द होने की शिकायत होती है। आयुर्वेद में दांतों में दर्द की समस्या का बहुत आसान उपाय बताया है।

आयुर्वेद में एक कहावत है-

नमक महीन लीजिए, अरु सरसों का तेल।

नित्य मले रीसन मिटे, छूट जाए सब मैल।

सैंधा नमक को कपड़े से छान लें। नमक को हाथ पर रखकर उसमें सरसों का तेल मिला लें। इस मिश्रण से दातों पर हल्के-हल्के मसाज करें बाद में साफ पानी से कुल्ला कर लें। इस विधि को अपनाने से आपको दातों की कई समस्याओं से निजात मिल जाएगी। इससे दातों में दांतों में पीलापन नहीं आता, दांत साफ और मजबूत होते हैं, कीड़े नहीं लगते, दर्द, मसूड़ों की सूजन, इनसे खून निकलना बन्द हो जाता है।

अन्य टिप्स- रोजाना सोने से पहले थोड़े से पानी में सेंधा नमक मिलाकर कुल्ला करने से दांतों की समस्या खत्म हो जाती है।

रविवार, 8 मई 2011

क्या खायें, क्या न खायें

हम और आप कैलोरी किस तरह खर्च करें, कौन-सा भोजन ग्रहण करें, कौन-सा भोजन न करें और किस तरह के व्यायाम करने से फायदा होगा, यह सब हमारे ब्लड ग्रुप से निर्धारित होता है, आइए जानें-’ईट, राइट फार योर टाइप’, में बताए गये कुछ नुस्खे-
ब्लड ग्रुप ‘ओ’ – जिनका ब्लड ग्रुप ‘ओ’ है उन्हें प्रोटीन की उच्च मात्रा वाला आहार लेना चाहिए। जिसमें लाल मांस भी शामिल है। ऐसे व्यक्तियों के लिए फल-सब्जी का सेवन उचित होगा। दूध तथा दूध से बने उत्पाद से भी ऐसे व्यक्तियों को बचना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों के लिए भारी व्यायाम करना लाजिमी है।
ब्लड ग्रुप ‘ए’ – जिन व्यक्तियों का ब्लड ग्रुप ‘ए’ है, उन्हें शाकाहार बनना चाहिए। ऐसे व्यक्ति के लिए कार्बोहाईडेट से भरपूर परन्तु वसा की कम यात्रा वाला भोजन करना चाहिए। इस ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति का रक्त अपेक्षाकृत गाढ़ा होता है और इनकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली बहुत संवेदनशील होती है। इन्हें दूध उत्पाद तथा मांस आदि नहीं खाना चाहिए। इनके लिए हल्का-फुल्का व्यायाम उचित है।
ब्लड ग्रुप ‘बी’ – जिन व्यक्तियों का ब्लड ग्रुप ‘बी’ है। वे कई किस्म का भोजन अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों को फल सब्जी से भरपूर संतुलित आहार लेना चाहिए जिसमें अनाज, मछली तथा दूध उत्पाद की समुचित मात्रा शामिल हो। इन व्यक्तियों के लिए तैरने या टहलने जैसा व्यायाम उचित है।
ब्लड ग्रुप ‘ए बी’ – ‘ए बी’ ग्रुप वाले व्यक्ति को ‘ए’ और ‘बी’ ब्लड ग्रुप का सीधा फायदा होता है और साथ ही उसकी सीमाएं भी हैं। इन्हें शांति और आराम पहुंचाने वाले योगाभ्यास करने चाहिए।

गर्मी में ताजगी लाते तरल पदार्थ

मौसम अनुसार हमें अपनी त्वचा की कैसे देखभाल करनी है, उन उपायों को तो हम ध्यान में रख लेते हैं पर मौसम अनुसार अपने शरीर को स्वस्थ कैसे रखना है, इस पर ध्यान नहीं देते जबकि यह अति आवश्यक है। इसी प्रकार गर्मी आने पर हम तेज धूप से अपने आपको कैसे बचा कर रखें, इसका ध्यान करते हुए शरीर में आने वाली कमजोरी को दूर कैसे करें। इस पर भी पूरा ध्यान देना चाहिये। गर्मियों में पसीना अधिक आने से शरीर में ऊर्जा कम होती है।
इस ऊर्जा को बनाए रखने के लिये हमें तरह पेयों पर विशेष ध्यान देना होगा ताकि शरीर में पानी भी कमी न हो। शरीर को अंदर तक ठंडा रखने के लिये हमें दिनभर में पानी का सेवन पर्याप्त मात्रा में करना चाहिये। अगर अधिक पानी नहीं पी पाते हैं तो रूहअफजा पानी में डालकर लें। नींबू पानी भी ले सकते हैं। सॉफ्ट ड्रिंक्स, रेडीमेड, जूस शरीर को ऊर्जा तो देते हैं और ठंडक भी पर सेहत के लिहाज से इनका अधिक सेवन नुकासनदेह होता है।
पानी का करें सेवन
दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी तो अवश्य पीना चाहिये। पानी से शरीर को कई लाभ होते हैं। शरीर में नमी बनी रहती है। शरीर से विषैले पदार्थ पसीने और मलमूत्र के द्वारा निकलते हैं। वैसे रूम टेम्परेचर वाला पानी पीने के लिये उत्तम होता है जो स्वास्थ्य हेतु अच्छा माना जाता है। दिन में चाहें तो एक दो बार गुनगुना पानी भी पी सकते है। इस सबसे पाचन शक्ति ठीक रहती है। कमजोर पाचन शक्ति वालों को ठंडा पानी नुकसान पहुंचाता है। पानी के अलावा नींबू पानी, नारियल पानी का सेवन भी कर सकते हैं। झटपट एनर्जी हेतु जूस, पानी में शहद, मीठी लस्सी भी ले सकते हैं पर इनका नियममित सेवन ठीक नहीं।
फ्रूट और वेजिेटबल जूस
फ्रेश फ्रूट जूस शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देता है क्योंकि फ्रूट्स में नेचुरल शुगर की मात्रा अधिक होती है जो जूस के रूप में खून में जल्दी धुल जाता है और शरीर को ऊर्जा प्राप्त होती है। अधिक जूस भी शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
जूस बच्चों, रोगियों और वृध्द लोगों के लिये अधिक लाभप्रद होता है। निरोगी लोगों को फ्रूट्स का सेवन अधिक करना चाहिये ताकि शरीर को उपयुक्त मात्रा में रेशा प्राप्त हो सके। वेजिटेबल जूस से शरीर को सब्जियों की मात्रा तरल रूप से मिल जाती है जिससे शरीर को लाभ मिलता है।
जूस बाजार से रेहड़ियों से न पीकर घर पर अच्छी तरह से फ्रूटस, वेजिटेबल्स को धोकर जूस निकालें और पियें तो लाभ पूरा मिलेगा।
हर्बल टी
हर्बल टी मैं कैफीन की मात्रा न होने से शरीर के लिये यह सर्वोत्तम है। नियमित सेवन करने से पाचन संबंधी समस्याओं में लाभ मिलता है। हर्बल टी में कई फ्लेवर्स उपलब्ध हैं। अपनी पसंद अनुसार हर्बल टी पीने की आदत स्वास्थ्य हेतु लाभप्रद होती है।
लस्सी का सेवन करें
डबल टोंड दूध के दही से बनी लस्सी शरीर को अंदर तक ठंडा करती है। गर्मियों में इसका नियमित सेवन लाभप्रद है। लस्सी आप फीकी, हल्के नमक, जीरे वाली ले सकते हैं।
डी कैफिनेटेड काफी
डी कैफिनेटेड काफी में कैफीन की मात्रा बहुत कम होती है। काफी के शौकीन लोगों को इसका सेवन गर्मियों में करना चाहिये पर ध्यान रखें इसमें ाीम और दूध की मात्रा कम रखें। चीनी भी कम और पानी साफ होना चाहिये।
स्मुदीज
गर्मियों में फ्रेश फ्रूट्स को काटकर मिक्सी में अच्छी तरह मिक्स कर लें। आधी कटोरी दही भी उसमें मिला लें।
फिर उसे कुछ देर के लिये फ्रीजर में रख कर सेवन करें। अगर आपने उसी समय उसका सेवन करना है तो उसमें घर में बनी बर्फ के एक दोपीस चूरा कर मिलाकर सेवन करें। स्मूदीज पीने से शरीर को काफी ऊर्जा महसूस होगी।


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