काली मिर्च का पाउडर मुनक्का दाख के साथ लपेट लें। काली मिर्च से लिपटी हुईं मुनक्का दाखों को तवे पर थोड़े से शुद्ध देसी घी के साथ हल्की आंच पर सेक लें। पर्याप्त सिकी हुई मुनक्का को दो-दो की संख्या में मुंह में रखकर चूंसते रहें। आप देखेंगे कि कुछ ही घंटों में आपकी खांसी जड़ से मिट चुकी है।
रविवार, 15 मई 2011
देशी नुस्खा जो मंहगी दवाओं से कई कदम आगे है!!
काली मिर्च का पाउडर मुनक्का दाख के साथ लपेट लें। काली मिर्च से लिपटी हुईं मुनक्का दाखों को तवे पर थोड़े से शुद्ध देसी घी के साथ हल्की आंच पर सेक लें। पर्याप्त सिकी हुई मुनक्का को दो-दो की संख्या में मुंह में रखकर चूंसते रहें। आप देखेंगे कि कुछ ही घंटों में आपकी खांसी जड़ से मिट चुकी है।
रिकार्डतोड़ गरमी में कैसे रहें आइस कूल
मुद्रा करने की विधि
किसी शांत और शुद्ध वातावरण वाले स्थान पर कंबल या आसन बिछाकर पद्मासन में बैठ जाएं। फिर होठों को पतली सी नली के रूप में मोड़कर कौए की चोंच जैसा आकार बना लें। इसके बाद अपना पूरा ध्यान नाक के आगे के भाग पर लगाएं। अब मुंह से धीरे-धीरे गहरी सांस लेकर होठों को बंद कर लें और सांस को नाक से बाहर छोड़े। इस क्रिया को कम से कम 10 मिनिट तक करें।
इस क्रिया के लाभ
काकी मुद्रा करने से श्वास संबंधी कई बीमारियां दूर होती हैं और हम इन बीमारियों से हमेशा बचे रहते हैं। इससे होठों की सुंदरता बढ़ती है। इसमें मुंह से अंदर जाने वाली हवा का संपर्क मुंह की दीवारों से होता है। इस मुद्रा को करने से शरीर से बहुत से रोग दूर हो जातें है। इस मुद्रा के निरंतर अभ्यास से अम्लपित्त का बढऩा कम हो जाता है। इससे हमारा पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करता है और कई पेट संबंधी बीमारियां नहीं होती हैं।
शुक्रवार, 13 मई 2011
अनेक रोगों की असरकारक दवा इमली
पुरानी इमली बहुत ही गुणकारी होती है। सूखी पुरानी इमली संदीपक, भेदक, हल्की, हृदय के लिये हितकारी, कफ एवं वात रोगों में पथ्यकारी तथा कृमिनाशक होती है। इसके बीज संग्रहणी, अतिसार, रक्तार्श, सोमरोग, प्रदर, प्रेमह, बिच्छू आदि विषैले जीवों के काटने के दर्द में उपयोगी है। इमली को हमेशा पानी में कांच या मिट्टी के पात्र में ही भिंगोना चाहिये, तांबा, पीतल, कांसा या लोहे के पात्र में कभी नहीं। इमली के कुछ विशेष उपयोग इस प्रकार है :-
कब्ज : बहुत पुरानी इमली का शर्बत बनाकर पीने से कब्ज दूर होती है।
खाज-खुजली :- इमली के बीज नींबू के रस में पीसकर लगाने से खाज दूर होती है।
लू लगना :- गर्मी में एकदम बाहर निकलने से शरीर का जलीयांश शुष्क होकर तीव्र ज्वर हो जाता है। इसे लू लगना कहते हैं। इससे बचने के लिये लू के समय बाहर निकलने पर इमली का शर्बत पी लेने पर लू की आशंका नहीं रहती।
स्वप्नदोष : इमली के बीजों को चौगुने दूध में भिंगोकर रख दें। दो दिन बाद छिलका निकालकर पीस लें। प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन इसका करने से धातु पुष्ट होती है और स्वप्नदोष दूर होता है।
नपुंसकता : इमली के बीजों की गिरी, वटजटा, सिंघाड़ा, तालमखाना, कमरकस, कतीरागोंद, बबूल का गोंद, बीजबंद, समुद्रदोष, तुख्यमलंगा, कौंच के बीच, रीठे की गिरी, छोटी इलाइयची प्रत्येक को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें और समभाग मिश्री की चाशनी मिलाकर जमा दें। सुबह-शाम 6-6 माशा सेवन करने से और ऊपर से गाय का दूध पीने से वीर्यहीनता, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन मिटकर नपुंसकता दूर होती है।
श्वेद प्रदर : बिना ऋतुकाल स्त्री की योनि से सफेद, लाल नीला, पीला स्राव होता रहे तो यह प्रदर रोग समझना चाहिये। अप्राकृतिक भोजन, अजीर्ण, अतिमैथुन, गर्भस्राव, क्रोध, शोक, चिंता ज्यादा चटपटे पदार्थों के सेवन आदि से यह रोग होता है। यह रोग कई प्रकार का होता है। इससे स्त्री का शरीर दिनों दिन कमजोर और रक्तहीन होता चला जाता है। इससे बचने के लिये लोहे की छोटी कड़ाही या तवे पर थोड़ी रेत डालकर चूल्हे पर चढ़ाकर खूब गर्म करें। बाद में इमली के बीज इसमें डाल दें और कड़छी चलाते रहें। अधभुने हो जाने पर गर्म दशा में ही इनके छिलके निकाल लें।
बीजों को लोहे के हमामदस्ते में अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण के वजन के बराबर मिश्री या शक्कर मिला लें। प्रात: सायं 1-2 तोले की मात्रा में गाय के दूध के साथ या पानी से कुछ दिन लगातार सेवन करने से श्वेत प्रदर का रोग समाप्त हो जाता है।
सांप का विष : इमली के बीजों को पत्थर पर थोड़े जल में घिसकर रख लें। सांप के काटे हुए स्थान पर ब्लेड से चीरकर दबाकर वहां से काला रक्त निकालकर घिसे हुए बीजों को एक-दो बीज की मात्रा में चिपका दें। ये बीज विष चूसना आरंभ कर देंगे। थोड़ी-थोड़ी देर बाद बीज बदलते रहें और बदले हुए बीजों की जमीन में गाड़ दें। बीज उस समय तक बदलते रहें, जब तक कि पूरा विष न उतर जाए।
विश्राम भी उतना ही जरूरी है जितना काम
माना कि काम हमारे लिए बहुत जरूरी है। काम नहीं करेंगे तो आजीविका भी नहीं कमा पाएंगे। मगर शरीर से काम लेने के लिए विश्राम भी अत्यन्त आवश्यक है ताकि शरीर थकावट दूर कर फिर से काम करने योग्य हो सके। शरीर से लगातार काम नहीं लिया जा सकता। प्रयोग में लाई शक्ति की क्षतिपूर्ति जरूरी है।
* जब भी विश्राम करना हो, निश्चित, एकांत ढूंढ़ें। शोर-शराबे से दूर रहें।
* विश्राम के समय शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें, तनाव रहित। अपनी थकान को ध्यान में रखकर विश्राम का समय तय करें।
* खाली मस्तिष्क होगा तो मानसिक थकान जल्दी दूर कर लेंगे।
* गर्मी में, दोपहर के भोजन के बाद आराम करें। थोड़ी देर सोएं। सर्दी में दोपहर के भोजन के बाद सोन नहीं चाहिए। आलस्य आ जाएगा।
* सोने का पूरा कमरा तथा बिस्तर साफ सुथरे हों। आंखों पर रोशनी तथा कानों में शोर नहीं पड़ना चाहिए। सोना समय मुंह न ढंकें।
* खाना खाने के तुरंत बाद नहीं सोना चाहिए। दो घंटे का गैप रखें।
* किसी एक करवट न सोएं। पीठ या पेट के बल भी नहीं। दांयी करवट से सोना शुरू करें।
* आराम करते समय या विश्राम करते समय अपनी समस्याओं को झटक दें। दिमाग को खाली रखें। वरना थकावट बढ़ जाएगी।
* जब कार्यों के कारण विशेष हालात हों और खूब थक जाएं तो ऐसे में देश, काल, समय, स्थान, किसी भी बात, परवाह न करें, शरीर को विश्राम दें।
* सोते समय विशेषकर ध्यान रखेंकि वस्त्र ढीले हो। तंग न हो। नहीं तो विश्राम नहीं कर पाएंगे। अच्छी नींद नहीं ले सकेंगे।
* सिंगल पलंग पर एख ही को या उबल बैंड पर दो को ही सोन चाहिए। नहीं तो बेआरामी बनी रहेगी। शरीर चुस्त नहीं रह पाएगा।
यौवन व सौन्दर्य तेजी से बढ़ता है इससे
बकासन एक ऐसा आसान आसन है जिसमें हमारे शरीर की अवस्था बगुले के जैसी हो जाती है, इसी वजह से इसे बकासन कहा जाता है। इस आसन से हमारे शरीर की आंतरिक और बाह्य शक्ति में गुणोत्तर वृद्धि होती है। कुछ ही दिनों में इस आसन के लाभ नजर आने लगते हैं।
बकासन की विधि
समतल पर स्थान पर कंबल आदि बिछाकर बैठ जाएं। अब दोनों हाथों को अपने सामने भूमि पर रखें। सांस सामान्य रखें। दोनों घुटनों को हाथों की कोहनियों पर स्थिर कीजिएं। सांस अंदर की ओर लेते हुए शरीर का पूरा भार धीरे-धीरे हथेलियों पर आने दें और अपना शरीर ऊपर की ओर उठा लें। यह आसन काफी कठिन है परंतु निरंतर अभ्यास होने पर आसन की पूर्ण अवस्था प्राप्त की जा सकती है। परंतु ध्यान रखें यदि आपके हाथों में कोई परेशानी या बीमारी हो तो यह आसन ना करें।
बकासन के लाभबकासन में हमारे शरीर का पूरा भार हाथों पर होता है अत: इस आसन से हमारे हाथों के स्नायुओं को विषेश बल एवं आरोग्य मिलता है। मुख की कान्ति बढ़ती है। सुंदरता में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी होती है। जवानी बनी रहती है। शरीर हष्ट-पुष्ट बना रहता है। इस आसन को निरंतर करने से शरीर की कई छोटी-छोटी बीमारियां हमेशा दूर रहती है।
सावधानियां
किसी अनुभवी या जानकार योग प्रशिक्षक की देख-रेख में ही इस आसन का अभ्यास करें। शरीर के साथ किसी भी प्रकार की जोर जबरदस्ती नुकसानदेह भी हो सकती है।
फुलटाइम रिचार्ज रहें इस अनूठे तरीके से!!
डेस्क या टेबिल पर कोहनी टिकाकर बैठें, हाथों को सीने के सामने से लाते हुए हथेलियों को गालों के ऊपर से लाते हुए अपनी आंखें बंद करें। यदि आप घर में हैं तो लेटकर भी यह क्रिया दोहरा सकते हैं। ऐसा करते समय अपने घुटनों को मोड़ कर रखें। दोनों हथेलियों को तब तक आपस में रगड़ें जब तक कि वे गर्म न हो जाएं, फिर उन्हें बंद आंखों के ऊपर रखें। गहरी सांसें भरें, इस तरह कि बंद आंखों के अंधेरे को महसूस कर सकें, थकी आंखों पर हथेलियों की गर्माहट का अनुभव करें। इसे महसूस करते हुए मस्तिष्क को खाली कर लें। गहरी सांसें लें, किसी भी समस्या और तनाव का अनुभव न होने पाए। पांच-दस मिनट तक ऐसा करें। रात्रि में सोने से पहले एक बाल्टी में नमक मिला पानी लें। इस पानी में घुटनों तक पैरों को 15 मिनिटों तक डुबाकर रखें, एसा करने से पूरे दिन भर की थकान और नकारात्मक ऊर्जा जादुई रूप से गायब हो जाएगी।
10 मिनिट तक इसे सूंघते ही सारी थकान हो जाएगी छूमंतर!!
हम यहां गंध चिकित्सा से जुड़े कुछ बेहद असरदार और शानदार प्रयोग दे रहे हैं जो चंद मिनिटों में ही तन-मन दोनों की थकान को मिटाकर आपको चुस्ती-फुर्ती से लबालब भर देगी...
दोपहर का समय वह होता है जब आपका ऊर्जा स्तर गिरने लगता है और खुद को दोबारा से ऊर्जावान बनाना जरूरी होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना हैं कि दोपहर के समय आप दस मिनट अपनी सभी अवांछित फाइल्स, कार्यक्रम, फोन और ईमेल निपटाने के बारे में सोचें। एक बार जरूरी कार्य निपट जाएं तो थोड़ा सुस्ता लें। कोई सुगंधित तेल लेकर माथे पर लगा लें, इससे आपको राहत महसूस होगी।
अनूठा प्रयोग
यूकेलिप्टस, लेमनग्रास या रोजमेरी के सुगंधित तेल की चार बूंद किसी छोटी सी बोतल में लें। इसमें आधा पानी भरकर आसपास इसका छिड़काव करें। घड़ी की दिशा के अनुसार अपने चारों ओर स्प्रे करें, कोने में, डेस्क या कंप्यूटर के आसपास भी स्प्रे कर सकते हैं।
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