रविवार, 12 जून 2011

1 गिलास ऐसे ज्यूस से करें इन घातक बीमारियों का अंत

अच्छे स्वास्थ्य के लिये प्राकृतिक जीवनशैली और सीजनल फलों का नियमित रूप से सेवन करना चाहिये। यह बात किसी के लिये भी नई नहीं है। फल बेहतर स्वास्थ्य के लिये बेहद फायदेमंद होते हैं यह बात सभी की जानकारी में है और लोग अपनी सुविधा और क्षमता के अनुसार ही फलों को अपने डेली रुटीन में शामिल भी करते हैं। लेकिन इसी जानकारी को थोड़ा और आगे बढ़ाकर देखें तो वह और भी ज्यादा प्रशन्न होने वाली है। हाल ही में हुआ एक नवीन वैज्ञानिक शोध यह सिद्ध करता है कि फल न केवल स्वस्थ रहने के लिये बल्कि बीमार होने पर उससे छुटकारा पाने में भी काफी कारगर होते हैं।

तनाव आज एक मानसिक रोग के रूप में व्यापक महामारी का रूप लेता जा रहा है। मानसिक तनाव ही आगे चलकर अनिद्रा, डिपे्रशन, फ्रस्टेशन जैसी बीमारियों का रूप ले लेता है। सुखद समाचार यह है कि तनाव और तनाव से पैदा होने वाली दूसरी तमात बीमारियों में अनार फल का ज्यूस बेहद फायदेमंद होता है। अगर आप वर्क प्रेशर से जूझ रहे हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है रोज एक ग्लास अनार का जूस पीना शुरु कर दीजिए वर्क प्रेशर कम हो जाएगा।

ब्रिटेन के क्वीदन मारग्रेट यूनीवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि रोज आधा लीटर अनार का जूस लेने से ब्लड प्रेशर सामान्य बना रहता है साथ ही यह स्ट्रेस हार्मोन भी व्यंक्ति पर हावी नहीं होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर आप तनाव से जूझ रहे हैं तो दो सप्तारह तक अनार का जूस रोज पिएं। तनाव दूर हो जाएगा।यूं तो सभी फलों के जूस में अलग अलग फायदे हैं लेकिन अनार का जूस तनाव से मुक्त रखने में सर्वाधिक कारगर मददगार की भूमिका निभाता है।

विशेष:
 ब्लड प्रेशर, स्ट्रेस, अनिद्रा, फ्रस्टेशन, डिप्रेशन आदि समस्याओं में ताजा अनार ज्यूस बहुत तेजी से फायदा पहुंचाता है। इसलिये इनमें से किसी भी रोग से ग्रसित व्यक्ति को इसे तत्काल अपने रुटीन में शामिल करना चाहिये।

मुंह की बदबू और छाले होंगे चुटकियों में रफूचक्कर

आज असंतुलित खान-पान की वजह के कारण मुंह में छाले होना, पेट का खराब होना आम समस्या हो गई है। कई तरह की दवाईयां इस्तेमाल करने के बाद भी लोगों के मुंह के छाले ठीक नहीं हो पातेहैं। घबराइए नहीं जो छाले किसी भी दवा से ठीक नहीं हो रहे हैं वे नीचे दिए जा रहे नुस्खों से निश्चित ही ठीक हो जाऐंगे।

1. छोटी हरड़ को बारीक  पीसकर छालों पर दिन में दो तीन बार लगाने से मुंह तथा जबान दोनों  के छाले ठीक हो जाते हैं।

2. तुलसी की चार पांच पत्तियां रोजना सुबह और शाम को चबाकर ऊपर से थोड़ा पानी पी लें( ऐसा चार पांच दिनों तक करें) ।

3. करीब दो ग्राम  सुहागे का पावडर बनाकर थोड़ी सी ग्लिसरीन में मिलाकर छालों पर दिन में दो तीन बार लगाएं छालों में जल्दी फायदा होगा।

इन सभी प्रयोगों की यह खाशियत है कि इनके प्रयोग से मुंह के छालों से तो छुटकारा मिलता ही है साथ ही मुंह की दुर्गंध से भी निजात मिलती है।

विशेष-  जिन लोगों को बार-बार छाले होने की शिकायत रहती उन्हें टमाटर ज्यादा खाने चाहिए।

महिलाएं सुन्दर-सुडोल और हेंडसम बनेंगे पुरुष ऐसा करने से


असंतुलित खान-पान और अन्य कारणों के चलते कई महिलाओं का शरीर पूर्ण विकसित नहीं हो पाता है उनके लिए गोमुखासन काफी लाभदायक है। इस आसन के नियमित प्रयोग से महिलाओं को पूर्ण सौंदर्य प्राप्त होता है। साथ ही फेफड़ों से संबंधित बीमारियां तथा अन्य बीमारियों को दूर रखता है गोमुखासन। इस आसन में हमारी स्थिति गाय के मुख के समान हो जाती है, इसलिए इसे गोमुखासन कहते हैं। स्वाध्याय एवं भजन, स्मरण आदि में इस आसन का प्रयोग किया जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभकारी हैं।

गोमुखासन की विधि

किसी शुद्ध वातावरण वाले स्थान पर कंबल आदि बिछाकर बैठकर जाएं। अब अपने बाएं पैर को घुटनों से मोड़कर दाएं पैर के नीचे से निकालते हुए एड़ी को पीछे की तरफ  नितम्ब के पास सटाकर रखें। अब दाएं पैर को भी बाएं पैर के ऊपर रखकर एड़ी को पीछे नितम्ब के पास सटाकर रखें। इसके बाद बाएं हाथों को कोहनी से मोड़कर कमर के बगल से पीठ के पीछे लें जाएं तथा दाहिने हाथ को कोहनी से मोड़कर कंधे के ऊपर सिर के पास पीछे की ओर ले जाएं। दोनों हाथों की उंगलियों को हुक की तरह आपस में फंसा लें। सिर व रीढ़ को बिल्कुल सीधा रखें और सीने को भी तानकर रखें। इस स्थिति में कम से कम 2 मिनिट रुकें।फिर हाथ व पैर की स्थिति बदलकर दूसरी तरफ भी इस आसन को इसी तरह करें। इसके बाद 2 मिनट तक आराम करें और पुन: आसन को करें। यह आसन दोनों तरफ से 4-4 बार करना चाहिए। सांस सामान्य रखें।

गोमुखासन के लाभ

इस आसन से फेफड़े से सम्बन्धी बीमारियों में विशेष लाभ होता है। इस आसन से छाती चौड़ी व मजबूत होती है। कंधों, घुटनों, जांघ, कुहनियों, कमर व टखनों को मजबूती मिलती है तथा हाथ, कंधों व पैर भी शक्तिशाली बनते हैं। इससे शरीर में ताजगी, स्फूर्ति व शक्ति का विकास होता हैं। यह आसन दमा (सांस के रोग) तथा क्षय (टी.बी.) के रोगियों को जरुर करना चाहिए। यह पीठ दर्द, वात रोग, कन्धें के कड़ेपन, अपच, हर्नियां तथा आंतों की बीमारियों को दूर करता है। यह अण्डकोष से सम्बन्धित रोग को दूर करता है। इससे प्रमेह, मूत्रकृच्छ, गठिया, मधुमेह, धातु विकार, स्वप्नदोष, शुक्र तारल्य आदि रोग खत्म होता है। यह गुर्दे के विषाक्त (विष वाला) द्रव्यों को बाहर निकालकर रुके हुए पेशाब को बाहर करता है। जिसके घुटनों मे दर्द रहता है या गुदा सम्बन्धित रोग है उन्हें भी गोमुखासन करना चाहिए।

स्त्री-पुरुष दोनों को लाभ

यह आसन उन महिलाओं को अवश्य करना चाहिए, जिनके स्तन किसी कारण से दबे, छोटे तथा अविकसित रह गए हों। यह स्त्रियों के सौन्दर्यता को बढ़ाता है और यह प्रदर रोग में भी लाभकारी हैं। चोड़ी छाती का होना पुरुषों के व्यक्तित्व को प्रभावशाली और आकर्षक बनाता है। गोमुखासन से पुरुषों सा सीना चोड़ा और मजबूत बनता है।

 

शुक्रवार, 3 जून 2011

पौष्टिक आटा



गुरुदेव ने आटा को पौष्टिक बनने के लिए निम्नलिखित composition बताया है:
गेहूं - ५ kg
सोयाबीन - १ kg
मक्का - १ kg
जाऊ - १ kg
इसके अलावा अपने रूचि और पाचन के अनुसार बाजरी भी डाल सकते हैं।

काजू प्रयोग



पैरो की एडियों में दरारे हो, पेट में कृमि हो तो बच्चों को २/३ काजू शहद के साथ अच्छी तरह तरह से चबा चबा कर खाने दे…और बड़े है तो ५/७ काजू…..कृमि,कोढ़, काले मसुडो आदि में आराम होगा |काजू प्रयोग से मन भी मजबूत होता है

गुरुवार, 2 जून 2011

कैसा भी बुखार हो, तुरंत भगाएगा ये दादी मा का नुस्खा

बुखार सेहत से जुड़ी हुई एक आम समस्या है। हर किसी को किसी न किसी कारण से बुखार की शिकायत हो ही जाती है। कभी वायरल फीवर के रूप में तो कभी घातक मलेरिया बनकर  अलग-अलग नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले ही लेता है। फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा, इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं। कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। यहां हम एक ऐसा दिलस्प मगर 100 फीसदी अचूक और कारगर उपाय जो किसी भी तरह के बुखार में अपना प्रभाव दिखाकर रहता है। इस प्रयोग में भुने हुए नमक को मरीज को दिया जाता है, जिसका प्रभाव कुछ ही समय में सामने आ जाता है...

प्रयोग विधि:

खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर काफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें। जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से बुखार पलटकर भी नहीं आएगा।

विशेष:

- हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह प्रयोग नहीं करना चाहिये।

- यह एक पुराना घरेलू नुस्खा है, इसके साथ ही आधुनिक चिकित्सक की सलाह भी अवश्य लें।

- यह प्रयोग एक दम खाली पेट करना चाहिए इसके बाद कुछ खाना नहीं चाहिए और ध्यान रखें कि इस दौरान रोगी  को

  ठण्ड न लगे।

- अगर रोगी को प्यास ज्यादा लगे तो उसे पानी को गर्म कर उसे ठण्डा करके दें।

- इस नुस्खे को अजमाने के बाद रोगी को करीब 48 घंटे तक कुछ खाने को न दें। और उसके बाद उसे दूध, चाय या

  हल्का दलिया बनाकर खिलाऐं।

पौरुष बल बढ़ाने और यौन समस्याएं मिटाने का 1 सरल तरीका


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