बुधवार, 15 जून 2011

Health 5


मुँह के छालेः

पके हुए ताजे नारियल से दूध निकालकर मुँह के अंदर कई बार लगाने व यह दूध पीने से आराम मिलता है।

मेथी दाना

स्वास्थ्य का खजानाः मेथी दाना
मेथी सस्ती व सर्वत्र सुलभ होने के साथ-साथ हमारे स्वास्थ्य की परम मित्र भी है। मेथीदाना तीखा उष्ण, वात व कफनाशक, पित्तवर्धक, पाचकशक्ति बढ़ाने वाला, हृदय के लिए हितकर व बलवर्धक है। यह ज्वर, उलटी, खाँसी, बवासीर, कृमि व क्षय रोग को नष्ट करता है।
मेथीति हिनस्ति वातकफज्वरान्।
वायु, कफ व ज्वर का नाश करने के कारण इसे मेथिका कहते हैं।
मेथीदाना पुष्टिकारक, शक्ति और स्फूर्तिदायक टॉनिक है। पुराने जमाने में जब सीमेंट का आविष्कार नहीं हुआ था, तब भवन निर्माण में चूने के साथ पिसी मेथी का उपयोग किया जाता था, जिससे भवन की मजबूती बढ़ जाती थी। ऐसे ही रोज सुबह-शाम 1 से 3 ग्राम मेथी पानी में भिगोकर, चबा के या छाया में सुखा कर, पीस के खाने से शरीर के जोड़ों में दर्द नहीं होता, जोड़ मजबूत रहते हैं तथा जीवन भर गठिया, आमवात, लकवा, मधुमेह, रक्तचाप आदि रोगों की सम्भावना बहुत कम हो जाती है। इसके नित्य सेवन से पेट बड़ा नहीं होता, मोटापा नहीं आता। मेथीदाना दुबलापन भी दूर करता है। सुबह-शाम इसे पानी के साथ निगलने से कैसा भी कब्ज हो, दूर हो जाता है। यह आँतों का परिमार्जन कर पेट को निरोग बनाता है, गैस को नष्ट करता है। इसकी मूँग के साथ सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं। यह मधुमेह के रोगियों के लिए खूब लाभदायी है।
सावधानीः मेथी दाने का सेवन शरद ऋतु में, पित्तजन्य रोगों में तथा उष्ण प्रकृतिवालों को नहीं करना चाहिए।


प्राकृतिक रंग बनाने की सरल विधियाँ

केसरिया रंगः पलाश के फूलों से यह रंग सरलता से तैयार किया जा सकता है। पलाश के फूलों को रात को पानी में भिगो दें। सुबह इस केसरिया रंग को ऐसे ही प्रयोग में लायें या उबालकर होली का आनंद उठायें। यह रंग होली खेलने के लिए सबसे बढ़िया है। शास्त्रों में भी पलाश के फूलों से होली खेलने का वर्णन आता है। इसमें औषधिय गुण होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह कफ, पित्त, कुष्ठ, दाह, मूत्रकृच्छ, वायु तथा रक्तदोष का नाश करता है। रक्तसंचार को नियमित व मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के साथ ही यह मानसिक शक्ति तथा इच्छाशक्ति में भी वृद्धि करता है।
सूखा हरा रंगः मेंहदी या हिना का पाउडर तथा गेहूँ या अन्य अनाज के आटे को समान मात्रा में मिलाकर सूखा हरा रंग बनायें। आँवला चूर्ण व मेंहदी को मिलाने से भूरा रंग बनता है, जो त्वचा व बालों के लिए लाभदायी है।
सूखा पीला रंगः हल्दी व बेसन मिला के अथवा अमलतास व गेंदे के फूलों को छाया में सुखाकर पीस के पीला रंग प्राप्त कर सकते हैं।
गीला पीला रंगः एक चम्मच हल्दी दो लीटर पानी में उबालें या मिठाइयों में पड़ने वाले रंग जो खाने के काम आते हैं, उनका भी उपयोग कर सकते हैं। अमलतास या गेंदे के फूलों को रात को पानी भिगोकर रखें, सुबह उबालें।
लाल रंगः लाल चंदन (रक्त चंदन) पाउडर को सूखे लाल रंग के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। यह त्वचा के लिए लाभदायक व सौंदर्यवर्धक है। दो चम्मच लाल चंदन एक लीटर पानी में डालकर उबालने से लाल रंग प्राप्त होता है, जिसमें आवश्यकतानुसार पानी मिलायें।


पढ़ते समय नींद आना
जिनको पढ़ते समय नींद आती हो, वे पान के पत्ते में १ लौंग डालकर चबा लें, तो नींद नहीं आयेगी ।

अनिद्रा के रोग में
  • ३ ग्राम तरबूज के सफ़ेद बीज पीस के उसमें ३ ग्राम खसखस पीस के सुबह अथवा शाम को १ हफ्ते तक खाएं ।
  • ६ ग्राम खसखस २५० ग्राम पानी में पीस के छान लें और उसमें २०-२५ ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह या शाम पियें ।
  • मीठे सेब का मुरब्बा खाएं ।
  • रात को दूध पियें ।
  • रात को सोते समय ॐ का लम्बा उच्चारण १५ मिनट तक करें ।

क्रोधी व्यक्ति के लिए

जिन्हें गुस्सा आता हो, वे सुबह २ मीठे सेब खूब चबा चबा कर खाएं ।

गर्भवती के लिए
गर्भवती गर्भ की पुष्टि के लिए भोजन के बाद मक्खन -मिश्री चाटे ।


मेथीदाना

मेथीदाना का पाउडर रात को पानी में भिगा दो । सुबह उसी पानी में घुमा के पियो । पेट की गड़बडी, वायुदोष, घुटनों का दर्द, बढ़ी हुई चर्बी, पाचन की तकलीफ, मधुमेह आदि में लाभ होगा ।


ह्रदय की तकलीफ

ह्रदय की धड़कन ज्यादा है, खून कम होता है, दिल का दौरा पड़ने की संभावना है तो रात को १५ दाने द्राक्ष/मुनक्का के धो के १/२ कप पानी में भिगा दो । सुबह थोड़ा गर्म करके दाने खा लो और पानी पी लो । ऐसा ३० दिन करें । दिल मजबूत होगा । अगर गर्भवती कमज़ोर है तो वो भी कर सकती है ।

'रसायन' के लाभ
2 से 3 ग्राम हरड़ चूर्ण में समभाग शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लेने से'रसायन' के लाभ प्राप्त होते हैं।

Health 4


सांप के काटने पर

सांप के काटने पर पलाश के पेड़ की छाल रगड़ के, सौंठ डाल कर काढ़ा बना के १२-१२ ग्राम हर घंटे में दो, विष उतर जाएगा ।


मिर्गी

मिर्गी में पलाश के पेड़ की जड़ का रस नाक में डालो ।


मधुमेह

मधुमेह में पलाश के पत्ते पानी से पीस के उसका रस पियें ।



आई फ्लू / eye flu

आँखे आई हों तो पलाश के पत्तों का रस शहद के साथ मिलाकर आँखों में डालें ।



खुजली में
अरंडी का तेल लगाने से खुजली में आराम होता है ।


क्रोधी व्यक्ति के लिए

गुस्सा ज्यादा आता हो तो पलाश के छोटे छोटे पत्तों की सब्जी खाने से गुस्साक्रोधऔर पित्त शांत होता है 


दाद व खुजली

पलाश के बीजों का चूर्ण व नींबू मिलाकर लगाने से खुजली व दाद मिटता है ।


पत्तल में भोजन के लाभ

  • पलाश के पत्तल में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।
  • केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।


बच्चों के पेट में कीड़े

बच्चों को पेट में कृमि हैं तो पलाश के फूल , बीज का चूर्ण व नींबू चटा दें ।


नेत्रज्योति व नेत्रों की तकलीफ के लिए

नेत्रज्योति में गड़बड़ है तो शहद व पलाश के फूलों का रस नेत्रों में डालें तो नेत्र ज्योति व नेत्रों की तकलीफ दूर होती है ।


गोरी संतान के लिए

१ पलाश का फूल कूट के दूध में उबाल के रोज़ पीने से गोरी व तेजस्वी संतान होती है ।


अगर माँ का दूध ना बनता हो तो
अगर कोई माँ बनी है और बच्चे के लिए पर्याप्त दूध नहीं बनता है तो जीरा, सौंफ और मिश्री समभाग करके १०-१० ग्राम सुबह-शाम खूब चबा-चबा कर खाएं । दूध प्रचुर मात्रा में बनेगा ।



भूत-प्रेत की बाधा

घर में भूत प्रेत की बाधा हो, अथवा बच्चों पे भूत प्रेत की हवा लग जाती है तो उस भूत को और बाधा को मिटाने के लिए होली का उत्सव के दूसरे दिन (धुलेंडी) को होली की राख घर में रख दें । जिस बच्चे को ऊपर की हवा का डर हो उस की नाभि में और ललाट पर तिलक करो, तो भूत प्रेत का प्रभाव भी गायब हो जायेगा ।


बुरी नज़र से बचने के लिए

नज़र लगने का डर हो तो घोड़े के बाल को अंगूठी में मढ़ा के पहना दो, नज़र चली जाएगी ।


होली के बाद खान-पान में सावधानी

होली के बाद नीम की २० से २५ कोपलें २-३ काली मिर्च के साथ खूब चबा-चबाकर खानी चाहिये । यह प्रयोग २०-२५ दिन करने से वर्ष भर चर्म रोग , रक्त विकार और ज्वर आदि रोगों से रक्षा होती है तथा रोग प्रतिकारक शक्ति बनी रहती है । इसके अलावा कड़वे नीम के फूलों का रस सप्ताह या १५ दिन तक पीने से भी त्वचा रोग व मलेरिया से बचाव होता है । सप्ताह भर या १५ दिन तक बिना नमक का भोजन करने से आयु और प्रसन्नता में बढ़ोतरी होती है।


कब्जनाशक प्रयोगः

कब्ज अनेक रोगों का गढ़ है। कब्ज दूर करने के लिए निम्न उपाय करें।
रात को हरड़ पानी में भिगोकर रखें। सुबह थोड़ी सी हरड़ उसी पानी में रगड़ें और थोड़ा सा नमक मिलाकर पियें।
सूर्योदय से पहले खाली पेट रात का रखा हुआ पानी आवश्यकतानुसार पियें (गुनगुना हो तो उत्तम)।
मेथी के पत्तों की सब्जी खायें।
धनिया, पुदीना, काला नमक व काली मिर्च की चटनी भोजन के साथ लें।
श्वास बाहर निकालकर गुदाद्वार का संकोचन विस्तरण (अश्विनी मुद्रा) करने को स्थलबस्ति कहते हैं। यह प्रयोग रोज तीन-चार बार करने से भी कब्ज दूर होता है और वीर्यहानि, स्वप्नदोष एवं प्रदर रोग से रक्षा होती है। व्यक्तित्व विकसित होता है।

आमवातः

आमवात के रोगियों को अमरबेल, अरण्डी और सहजन के पत्तों को पानी में उबालकर हलके गर्म पानी से स्नान करने से सूजन तथा दर्द में आराम मिलता है।


खाँसी

अदरक का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर दिन में तीन-चार बार चाटने से कफ, खाँसी में आराम मिलता है।

Health 3


पायरिया

पायरिया (दाँत से खून, मवाद आना) में संतरे का सेवन व उसकी छाल के चूर्ण का मंजन लाभदायी है।

सगर्भावस्था में

गर्भवती महिलाओं को दोपहर के समय संतरा खिलाने से उनकी शारीरिक शक्ति बनी रहती है तथा बालक स्वस्थ व सुंदर होता है। इसके सेवन से सगर्भावस्था में जी मिचलाना, उलटी आदि शिकायतें भी दूर होती हैं।

पेट की गड़बड़ियों में

संतरे के रस में थोड़ा सा काला नमक व सोंठ मिलाकर लेने से अजीर्ण, 
अफरा, अग्निमांद्य आदि पेट की गड़बड़ियों में राहत मिलती है।


पुराना कब्ज

सुबह दो संतरे के रस में थोड़ा ताजा ठंडा पानी मिलाकर नियमित लेने से पुराना से पुराना कब्ज दूर हो जाता है।

कमजोर व्यक्ति

अत्यंत कमजोर व्यक्ति को संतरे का रस थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में 2-3 बार देने से शरीर पुष्ट होने लगता है। बच्चों के सूखा रोग में जब शरीर का विकास रुक जाता है तब संतरे का रस पिलाने से उसे नवजीवन प्राप्त होता है।


बवासीर

बवासीर में पलाश के कोमल पत्तों की सब्जी बनाकर खाएं ।


हड्डियाँ मज़बूत करने के लिए

पलाश के गोंद का पाउडर १-२ ग्राम, दूध के साथ लेने से हड्डियाँ मजबूत होती हैं ।


वीर्यवान बनने के लिए

पलाश का गोंद पचने में भारी होता है, लेकिन आंवले के रस के साथ लें तो हिजड़ा भी मर्द बन जाए...........तो मर्दों की तो बात ही क्या ..........



Health 21


निम्न रक्तचाप में

10 बूँद बरगद का दूध, लहसुन का रस आधा चम्मच तथा तुलसी का रस आधा चम्मच इन तीनों को मिलाकर चाटने से निम्न रक्तचाप में आराम मिलता है।


गाँठ

शरीर में कहीं गठान हो तो प्रारम्भिक स्थिति में तो गाँठ बैठ जाती है और बढ़ी हुई स्थिति में पककर फूट जाती है।


अतिसार में

दूध को नाभि में भरकर थोड़ी देर लेटने से अतिसार में आराम होता है।


चोट-मोच और गठिया रोग में

चोट-मोच और गठिया रोग में सूजन पर इसके दूध का लेप करने से आराम मिलता है। यह सूजन को बढ़ने से रोकता है।


बिवाइयाँ

हाथ पैर में बिवाइयाँ फटी हों तो उसमें बरगद का दूध लगाने से ठीक हो जाती हैं।


दाँत का दर्द

दाँतों में बड़ का दूध लगाने से दाँत का दर्द समाप्त हो जाता है।

बल-वीर्यवर्धक,मासिक स्राव तथा खूनी बवासीर में

स्वप्नदोष आदि रोगों में बड़ का दूध अत्यन्त लाभकारी है। सूर्योदयक से पूर्व 2-3 बताशों में 3-3 बूँद बड़ का दूध टपकाकर उन्हें खा जायें। प्रतिदिन 1-1 दिन बूँद मात्रा बढ़ाते जायें। 8-10 दिन के बाद मात्रा कम करते-करते अपनी शुरूवाली मात्रा पर आ जायें। यह प्रयोग कम से कम 40 दिन अवश्य करें। बवासीर, धातु-दौर्बल्य, शीघ्र पतन, प्रमेह, स्वप्नदोष आदि रोगों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है। इससे हृदय व मस्तिष्क को शक्ति मिलती है तथा पेशाब की रूकावट में आराम होता है। यह प्रयोग बल-वीर्यवर्धक व पौष्टिक है। इसे किसी भी मौसम में किया जा सकता है। इसे सुबह-शाम करने से अत्यधिक मासिक स्राव तथा खूनी बवासीर में रक्तस्राव बंद हो जाता है।


संतरे का शरबतः

संतरे का शरबतः पाव किलो संतरे के रस में एक किलो मिश्री चाशनी बनाकर काँच की बोतल में रखें। ताजे संतरे न मिलने पर इसका उपयोग करें।
सावधानीः कफजन्य विकार, त्वचारोग, सूजन व जोड़ों के दर्द में तथा भोजन के तुरंत बाद संतरे का सेवन न करें। संतरा खट्टा न हो, मीठा हो इसकी सावधानी रखें।


मुँहासे व चेहरे के दाग

संतरे के ताजे छिलकों को पीसकर लेप करने से मुँहासे व चेहरे के दाग मिट जाते हैं, त्वचा का रंग निखरता है।

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