सोमवार, 26 सितंबर 2011

क्या आप गैस और एसीडिटी से परेशान हैं?

आयुर्वेद में पेट की गड़बडिय़ों को उदर रोगों के अंतर्गत वर्णित किया गया है और अधिकांश रोगों में इसे भी एक महत्वपूर्ण कारण माना गया है। आपको आज हम कुछ ऐसी ही गड़बडिय़ों को दूर करने का आयुर्वेदिक उपाय बताते हैं।आयुर्वेद में पेट की गड़बडिय़ों में ग्रहणी,अतिसार,अरुचि,प्रवाहिका आदि रोग आते हैं,इनमें अधिकांश उदर रोगों का कारण मन्दाग्नि होता है, कुछ सरल आयुर्वेदिक नुस्खे आपको इन गड़बडिय़ों से बचा सकते हैं।

- नियमित रूप से 1-2 चम्मच सोंफ  का प्रयोग अग्नि को दीप्त करता है।

-1-1.5 ग्राम त्रिकटु (सौंठ,मरीच एवं पिप्पली ) चूर्ण  का प्रयोग भी अरुचि एवं अग्निमांद को दूर करता है।

-भोजन भूख से थोड़ा कम एवं मितभुक हो कर ही करना चाहिए।

-कुटज चूर्ण, विडंग चूर्ण एवं अविपत्तिकर चूर्ण को सममात्रा में मिलाकर 1-1.5 ग्राम की मात्रा में लेना पेट की गड़बड़ी को दूर करता है।

-हिन्ग्वासटक चूर्ण एवं लवणभास्कर चूर्ण का प्रयोग 1.5 से तीन ग्राम की मात्रा में करना पेट में अफारा या गैस बनाने के समस्या को दूर करता है।

-पंचसकार चूर्ण की 2.5 से 5 ग्राम की एक-एक मात्रा मल को साफकर पेट को हल्का रखता है।

-केवल त्रिफला चूर्ण की  नियमित 2.5-से 5 ग्राम की मात्रा उदर विकारों में रामबाण औषधि है।

-एक हरड ,दो बहेड़ा  एवं चार आंवलें का प्रयोग सभी प्रकार की  पेट से सम्बन्धित विकृतियों  को दूर करता है।

-भोजन में नमक की मात्रा 24 घंटे में 2.5ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए ,साथ ही अत्यधिक चटपटे पदार्थों के सेवन भी बचना चाहिए।

-भोजन ग्रहण करने के तत्काल बाद शयन की प्रवृति से बचना चाहिए।

-भोजन के साथ जल पीने के प्रवृति से भी बचना चाहिए।

-भोजन बहुत जल्दी -जल्दी बिना चबाकर नहीं लेना चाहिए।

- पूरे दिन में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ जल का  पान करना चाहिए।

-पथ्य (खाए जाने योग्य ) एवं अपथ्य ( न खाए जाने योग्य ) भोजन का ध्यान रखकर किया गया भोजन उदर रोगों को दूर रखता है।

ये हैं कुछ सामान्य पर उपयोगी बातें जिनका दैनिक जीवन में प्रयोग स्वस्थ एवं आराम से युक्त रोगमुक्त जीवन प्रदान करता है।

मोटापा घटाएं और बुखार भगाएं बस थोड़ा सा नींबू खाएं

आम तौर पर नीबू को गर्मी का राम-बाण कहा जाता है, लेकिन हर मौसम में नीबू के रस में बहुत शक्ति होती है। आपको ये बात हैरान करने वाली लगेगी कि नीबू के जूस में शक्ति आती है लेकिन ये मोटापा नहीं बढ़ाता है बल्कि इसका सही तरीके सेवन मोटापे को कम जरूर कर सकता है। साथ ही इसके सेवन से अन्य कई रोग भी दूर हो सकते हैं।

 - नीबू के छिलकों को कोहनियों, घुटनों और नाखूनों पर रगड़ें। त्वचा का कालापन दूर होता है।

- जोड़ों के दर्द के रोगियों को जिस स्थान पर दर्द होता है, वहां पर नीबू के रस की मालिश करें। इससे दर्द ठीक हो जाएगा।

-चर्म रोगों में नीबू अत्यंत लाभकारी है। नीबू का रस, पानी में डालकर स्नान करने से खाज-खुजली, दाद आदि रोग नहीं होते हैं।

-एक चम्मच मलाई में नीबू निचोड़कर चेहरे पर लगाने से कील-मुंहासे साफ  होते हैं।

- रोज रात में सोने से पहले आंखों में एक-एक बूँद गुलाबजल डालने से आंखें स्वस्थ और सुंदर बनी रहती हैं।

-एक गिलास पानी में एक चाय का चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन बिना मुंह धोए पीने से पेट साफ  होता है और चेहरे पर निखार आता है।

- तैलीय त्वचा से मुक्ति के लिए एक बड़ा चम्मच बेसन, एक छोटा चम्मच गुलाबजल, और चुटकी भर हल्दी में आधा नीबू मिलाकर बनाए गए लेप को चेहरे पर बीस मिनट तक लगाएँ और सादे पानी से धो दें।

- नीबू के रस में पिसा हुआ आंवला मिलाकर नहाने से पूर्व बालों में खूब मल लिया करें तो बाल सफेद होने से रुक जाएंगे व झडऩा भी बंद हो जाएंगे।

- मलेरिया के रोगी को काला नमक व काली मिर्च बारीक पीसकर नीबू में भरकर गर्म कर चूसने को दें। थोड़ी देर में बुखार कम होने लगेगा।

- एक नीबू, थोड़ा नमक व 250 ग्राम हल्का गर्म पानी मिलाकर सुबह उठकर पीने से मोटापा कम होता है।

-ब्लड प्रेशर के रोगियों को दिन में 2-3 बार नीबू का रस पानी में घोलकर पीना चाहिए। इससे उच्च रक्तचाप में राहत मिलती है।

- बालों से रूसी दूर करने और उन्हें चमकदार बनाने के लिए 1 एक नीबू का रस बालों में लगाए और दस मिनट बाद धो दें।

रविवार, 25 सितंबर 2011

खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए चंद आयुर्वेदिक नुस्खे

चरक  संहिता में वर्णित है गुणवान संतान और कामसुख की कामना से वाजीकरण हेतु प्रयुक्त आयुर्वेदिक नुस्खे का प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में किया जाना चाहिए। वात्स्ययान के कामसूत्र में कहा गया है ' काम का उद्देश्य कामसुख और संतानोत्पत्ति है। इसी प्रकार वाजीकरण (अश्वशक्ति) का उद्देश्य गुणवान संतान तथा कामसुख की प्राप्ति है। आयुर्वेद में धर्मयुक्त काम को पुरषार्थ को बढाने तथा मोक्ष प्राप्ति का साधन माना गया है। व्यवहारिक तौर पर भी यह देखा जाता है कि वाजीकरण (शरीर को अश्वशक्ति प्रदान करने वाली )औषधियां शरीर में मेधा ,ओज ,बल एवं तनाव को कम करती हैं।

काम की प्रबल और सम्मोहक शक्ति को देखकर इसे देवता कहा गया है तथा वसंतपंचमी के रूप में त्यौहार के रूप में मनाने का प्रचलन आज भी है। आज की व्यस्ततम जीवनशैली ,तनावभरी दिनचर्या और भौतिक सुख सुविधायें जुटाने की लालसा ने इस पवित्र कर्म के मूल में निहित भाव एवं उद्देश्य को समाप्त कर दिया है। काम आज दाम्पत्य जीवन की औपचारिकता भर रह गया है ,इन्ही कारणों से यौन संबंधों को लेकर असंतुष्ट  युगलों  की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है, ऐसी स्थिति में आयुर्वेद एवं आयुर्वेदिक औषधियां मददगार हो सकती है जिनका प्रयोग वैद्यकीय निरीक्षण में होना चाहिए-

-असगंध ,विधारा,शतावर ,सफ़ेद मूसली ,तालमखाना के बीज ,कौंच बीज प्रत्येक 50-50 ग्राम की  मात्रा में लेकर दरदरा कर कपडे से छान लें तथा 350 ग्राम मिश्री मिला लें, इस नुस्खे को 5-10 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम ठन्डे दूध से लें ,लगातार एक माह तक लेने से यौन सामथ्र्य में वृद्धि  अवश्य होगी।

-दालचीनी ,अकरकरा ,मुनक्का और श्वेतगुंजा को एक साथ पीसकर इन्द्रिय पर लेप करें तथा सम्भोग के समय कपडे से पोछ डालें ,यह योग इन्द्रियों में रक्त  के संचरण को बढाता है।

-शुद्ध शिलाजीत 500 मिलीग्राम की मात्रा में ठन्डे  दूध में घोलकर सुबह शाम पीने से भी लाभ मिलता है।

-शीघ्रपतन की शिकायत हो तो धाय के फूल ,मुलेठी ,नागकेशर ,बबूलफली इनको बराबर मात्रा में लेकर इसमें आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर ,इस योग को 5-5 ग्राम की मात्रा में सेवन लगातार एक माह तक करें ,इससे शीघ्रपतन में लाभ मिलता है।

-कामोत्तेजना का बढाने के लिए कौंचबीज चूर्ण ,सफ़ेद मूसली ,तालमखाना ,अस्वगंधा चूर्ण को बराबर मात्रा में तैयार कर 10-10 ग्राम की मात्रा में ठन्डे दूध से सेवन  करें निश्चित लाभ मिलेगा।

ये चंद नुस्खें हैं, जिनका प्रयोग यौनशक्ति,यौनऊर्जा एवं पुरुषार्थ को बढाने में मददगार है।

जब बदलते मौसम में ना सहा जा रहा हो फटे होठों का दर्द तो....

गुलाबी होंठ किसी के भी व्यक्तित्व को और अधिक निखार देते हैं। लेकिन बदलते मौसम के कारण होंठ फटना एक आम समस्या है। ऐसे में कई बार सिर्फ वैसलीन और लिप बाम से होंठों का फटना नहीं रूक पाता है।होठों को विशेष देखभाल की जरूरत होती हैं। अगर होंठों की सही तरीके से देखभाल की जाएं तो होंठ गुलाब की पंखुडिय़ों की तरह गुलाबी रहते हैं। नीचे लिखी कुछ घरेलु टिप्स अपनाकर आप भी अपने होठों की सुंदरता बनाएं रख सकते हैं।

  - नहाने से पहले हथेली में चौथाई मुंगफली का तेल लेकर अंगुली से हथेली पर रगड़ें और फिर होंठों पर इस तेल की मालिश करें।

  - सोने से पहले सरसों का तेल नाभि पर लगाने से होंठ नहीं फटते।

  - घी में जरा-सा नमक मिलाकर होठों और नाभि पर लगाने से लाभ होता है।

  - इलायची पीस कर उसमें मक्खन मिलाकर कम से कम सात दिनों तक लगाएं।

  - गुलाब के एक फूल को पीसकर उसमें थोड़ी सी मलाई या दूध जमने वाली मलाई मिलाकर होंठो पर लेप कर दें।

  - थोड़ा-सा शहद लेकर होंठों पर उंगली से धीरे-धीरे मलें।

  - जैतून का तेल और वैसलीन मिलाकर दिन में तीन या चार बार फटे होंठों पर लगाएं।

  - थोड़ा-सा शहद लेकर होंठों पर उंगली से धीरे-धीरे मलें।

शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

पांच चीजें ऐसी जिन्हें खाकर आप बन सकते हैं ताकतवर

कहते हैं अगर संतुलित भोजन लिया जाए तो कभी बीमारियां पास नहीं आती हैं। लेकिन अधिकतर लोगों को यह पता नहीं होता की कौन सा भोजन अधिक ताकत देता है तो आइए आज हम आपको ऐसी पांच चीजों की जानकारी देते हैं जिन्हें आप अपने भोजन में शामिल करके ताकतवर बन सकते हैं।

अमरुद-अमरुद को दिन का हीरा कहते हैं क्योंकि दिल की बीमारियों को दूर रखने और कब्ज जैसी सामान्य समस्या को खत्म करने में इसका कोई जोड़ नही है। शुगर यानि मधुमेह की रोकथाम के लिए भी इस फल को औषधि की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

हरी फूल गोभी- जन्म के साथ होने वाली बीमारियों से लडऩे में ये गोभी बेहद कारगर होती है। ये न सिर्फ हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है बल्कि, हड्डियों को मजबूत करने की इसमें गजब की क्षमता होती है।

पालक- इसमें कई विटामिन एक साथ पाए जाते हैं। पालक में स्कीन और ब्रेस्ट कैंसर से लडऩे की सबसे ज्यादा ताकत होती है। मजे की बात है कि इसमें कोलेस्ट्राल बिल्कुल नही होता।

गाजर- रोगों से लडऩे की क्षमता बढ़ाने में गाजर का कोई मुकाबला नही है। एक कप कतरे हुए गाजर में 52 कैलोरी होती है इसके बावजूद इसमें कोलेस्ट्राल बिल्कुल नही होता। बच्चों के विकास में ये सबसे ज्यादा मददगार होता है। फेफड़े, स्कीन और मुंह के कैंसर से बचाने के लिए इसे रामबाण माना जाता है।

गोभी : शरीर में बनने वाले विषैलें पदार्थ को रोकने में इस गोभी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सब्जियों की किसी भी किस्म की तुलना में इसमें पौष्टिकता सबसे अधिक होती है।

ये हैं सिगरेट छुड़वाने के देसी उपाय

धुम्रपान हर तरह से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। सिगरेट-बीड़ी का हर कश इंसान को मौत के करीब ले जाता है। एक अध्ययन में पता चला है कि उच्चरक्तचाप से पीडि़त व्यक्ति के धुम्रपान करने पर नपुंसक होने का खतरा 27 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। यहां तक कि धुम्रपान छोड़ चुके ऐसे पुरुषों के धुम्रपान नहीं करने वालों की तुलना में नपुसंक होने की संभावना 11 प्रतिशत अधिक होती है। अगर आप भी स्मोकिंग की आदत से परेशान हैं तो अपनाएं ये आसान उपाय....



नींबु- बीड़, सिगरेट, जर्दे का सेवन की आदत हो तो इनका सेवन करना बंद कर दें और जब इनके सेवन की इच्छा हो तो नींबू चुसें। कुछ बूंदे नींबु के रस की जीभ पर डालकरी स्वाद खट्टा कर लें। इससे उसके सेवन की इच्छा तुरंत समाप्त हो जाएगी। इस तरह जब-जब भी सेवन करने की इच्छा हो तो नींबू का सेवन करें।

 सौंफ- सौंफ को घी में सुखाकर तवे पर सुखा लें। जब भी सिगरेट पीने की इच्छा हो आधा-आधा चम्मच चबाते रहें।  इससे सिगरेट पीने की इच्छा समाप्त हो जाएगी।

अजवाइन- 50 ग्राम अजवाइन और 50 ग्राम मोटी सौंफ को घी में सेंककर डिब्बी में भरकर रख लें। जब भी सिगरेट पीने की इच्छा हो, इस मिश्रण को आधा चम्मच लेकर चबाएं।

अनोखा तरीका: बिना दवाई छू मंतर होंगे पेट और गले के रोग

शंख को भारतीय परंपरा में मांगलिक वस्तु माना गया है। शंख का प्रयोग देव पूजा में होता है। शंख शब्द का अर्थ होता है कल्याण को उत्पन्न करने वाले। इसीलिए शंख बजाकर ही मंदिर में भगवान को उठाया जाता है।

विधि- बाएं हाथ के अंगुठे को दाएं हाथ की हथेली में स्थापित करें और मुठ्ठी को बंद करें। अंगुलियों को दाहिने हाथ के अंगूठे से स्पर्श कराएं। इस तरह चारों अंगुलियों से अग्रि तत्व का संयोग होता है। इस मुद्रा से हाथों की आकृति शंख के सामान हो जाती है। उसे शंख मुद्रा कहा जाता है। ऊपर के भाग में अंगुलियों और अंगूठे के बीच जो खुला भाग रहता है। उसका आकार शंख जैसा होता है। मुंह लगाकर जैसे शंख बजाते हैं वैसे ही बजाने की कोशिश करेंगे तो शंख के समान आवाज आएगी। आरंभ में इसे 16 मिनट किया जाए। फिर उसे 48 मिनट तक किया जा सकता है।

लाभ- वाणी के दोष दूर होते हैं।

- टान्सिल और गले की बीमारियां भी दूर होती है।

- नाभि केन्द्र व्यवस्थित हो जाता है।

- पेट के सारे रोग दूर होते हैं। पाचन तंत्र सुधरता है।

सावधानियां- अंगूठे को दबाने से एक्युप्रेशर के अनुसार थाइराइड प्रभावित होता है। इसलिए अगर इस मुद्रा को करने के बाद अगर आप दुबले या मोटे हो रहें है तो इस मुद्रा को बंद कर देना चाहिए।

Featured post

बीमारी क्यों आती है?

 हर वस्तु, हर विचार, हर #व्यापार, हर #रिश्ता – सब कुछ #पंचतत्व से बना है। नाम बदले, रूप बदले, स्वाद बदले – लेकिन #तत्व नहीं बदलता। चावल व...