गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011

ऐसे खाएं खाना तो दिल से जुड़ी हर बीमारी से महफूज रहेंगे...

बदलते दौर में आदतों के साथ-साथ कई नई समस्याएं भी अलग-अलग रूप धारण कर लेती हैं। दिल की बीमारी कुछ इन्हीं समस्याओं में से एक है। वर्तमान में जो भी परिस्थितियां हों, लेकिन आने वाला समय सेहत के लिए और भी खतरनाक होने वाला है। जानकारों की मानें तो कम हो रही शारीरिक भाग-दौड़ और बढ़ते मानसिक भार के कारण आने वाले समय में लगभग हर व्यक्ति को रक्तचाप और दिल की बीमारी हो सकती है।

ऐसे में दवाओं का बोझ कहां तक आप बरदाश्त कर पाते हैं, ये आपके इम्यून सिस्टम पर भी निर्भर करता है। इससे बचने के लिए भोजन से जुड़ी कुछ चीजों को शामिल करना जरूरी है। कहते हैं अगर रोजाना संतुलित रूप से भोजन लिया जाए तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। भोजन में कुछ चीजें शामिल करके हृदयरोग से बचा जा सकता है तो आइये जानते हैं खाने से जुड़ी कुछ ऐसी ही घरेलू चीजों के विषय में जिनका सही तरीके से नियमित प्रयोग आपको दिल से जुड़े हर खतरे से महफूज रखता है-



 टमाटर - इसमें विटामिन सी, बीटाकेरोटीन, लाइकोपीन, विटामिन ए व पोटेशियम प्रचूर मात्रा में पाया जाता है जिससे दिल की बीमारी का खतरा कम हो जाता है।

 गाजर - बढ़ी हुई धड़कन को कम करने के लिए गाजर बहुत ही लाभदायक है। गाजर का रस पीएं, सब्जी खाएं व सलाद के रूप में प्रयोग करें

लहसुन - भोजन में इसका प्रयोग करें। खाली पेट सुबह के समय दो कलियां पानी के साथ भी निगलने से फायदा मिलता है।

प्याज- इसका प्रयोग सलाद के रूप में कर सकते हैं। इसके प्रयोग से रक्त का प्रवाह ठीक रहता है। कमजोर हृदय होने पर जिनको घबराहट होती है या हृदय की धड़कन बढ़ जाती है उनके लिए प्याज बहुत ही लाभदायक है।

सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

जब खाना खाने का मन ही न करे तो आजमाएं ये अचूक फंडे

कहते हैं भूखे पेट भजन ना होय - यह उक्ति अक्षरश:  सत्य है, और भूख न लगना अनेक रोगों में एक लक्षण भी होता है।

-अगर भूख लगी हो और भोजन भी स्वादिष्ट हो ,फिऱ भी भोजन अच्छा न लग रहा हो तो -अरुचि ,

भोजन का नाम सुनने ,स्मरण करने ,देखने या स्पर्श करने से या गंध से ही अनिच्छा ,उद्वेग और द्वेष होना -भक्त्द्वेश,

क्रोध के कारण ,डर जाने से या द्वेष  के कारण मन के अनुकूल भोजन रहने पर भी भोजन ग्रहण करने क़ी इच्छा न होना -

अभक्तछंद के नाम से जाना जाता है।

आयुर्वेद इन सभी के पीछे शारीरिक और मानसिक कारण मानता है, आधुनिक विज्ञान भी गेस्ट्राइटीस,गेस्ट्रिककैंसर ,एनीमिया ,हाईपोक्लोरोहाईड्रीया आदि कारणों से इसे उत्पन्न होना मानता है। मानसिक कारणों में शोक,लोभ, क्रोध तथा मन के लिए अरुचि उत्पन्न करने वाले कारणों से इसकी उत्पत्ति  माना गया है।

आइये आपको हम कुछ साधारण आयुर्वेदिक नुस्खे बताते हैं जिससे इसे दूर किया जा सकता है ,लेकिन इनका सेवन आयुर्वेदिक चिकित्सक  के परामर्श से हो तो बेहतर होगा।

-भूना सफेद जीरा -250 मिलीग्राम ,सैंधा नमक -125 मिलीग्राम ,भूनी हींग -500 मिलीग्राम ,चीनी - 250मिलीग्राम ,काली मिर्च -125 मिलीग्राम ,पीपर-250 मिलीग्राम इन सबको सुबह- शाम  देने से रोगी में लाभ मिलता है।

-काली मिर्च-250मिलीग्राम ,सौंफ-250मिलीग्राम ,सैंधा नमक -250 मिलीग्राम ,जीरा -250 मिलीग्राम ,चीनी -2.5 ग्राम एवं भूनी हींग 500मिलीग्राम को चूर्ण के रूप में सुबह शाम गुनगुने पानी से लेना फायदेमंद रहता है।

-एक ही  प्रकार के भोजन को लगातार लेने से बचना चाहिए।

-रोगी को मनोनकूल  सादा एवं हल्का भोजन देना चाहिए।

-भोजन से पूर्व अदरख  या सौंठ  का प्रयोग  भी भूख बढाता है।

-कई बार मानसिक तनाव के कारण भी भूख नहीं लगती है,ऐसे में तनाव मुक्त होने मात्र से भूख लगने लगती है।

अत: हमें अपनी अग्नि का खय़ाल रखते हुए सात्विक,हल्का एवं स्वच्छ एवं पौष्टिक व् संतुलित आहार लेना चाहिए ,कहा भी गया है 'जैसा खाओगे अन्न वैसा रहेगा मन।

शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

ड्रिंक करने के बाद तबीयत हो जाए नासाज तो ये करें

रोजाना शराब पीने वाले लोगों को सामान्यत: नशा अधिक नहीं चढ़ता है। लेकिन जब क ोई किसी कारण या शोक से पहली बार या ओकेजनली ड्रिंक करता है तो  नशा ज्यादा चढ़ता है तो ऐसे में संभलना मुश्किल हो जाता है। कई बार पार्टी में वाइन, वोदका और रम की काकटेल भी घातक साबित हो जाती है। ऐसे में तबीयत बिगडऩे लगे तो नीचे लिखें घरेलु उपायों को अपनाएं.......

-ब्लैक काफी शराब के नशे को उतारने में मदद करती है।

-लेमन जूस से भी शराब का नशा उतरता है

- एक नींबू एक कप पानी में निचोड़कर पिलाने से लाभ होता है।

- शराबी के सिर पर ठंडा पानी डालने और पिसा हुआ धनिया-शक्कर मिलाकर देने से भी नशा उतरता है।

- धतूरे का विष या नशा उतारने में भी इमली का पना कारगर है।

- नींबू चूसने व अचार खाने से भी नशा हल्का पड़ जाता है।

- संतरा खाने से भी नशा उतर जाता है।

-गन्ने का रस पीने से भी नशा उतर जाता है

- किसी भी शराब को गन्ने के जूस के साथ पीना घातक हो सकता है।

- दही और छाछ से नशा उतर जाता है।

हिच्च हिच्च....हिचकी न रूके तो....

कुछ लोगों के स्नायुओं में उत्तेजना से तो कुछ को अपच के कारण हिचकी चलती है। हिचकी चलने के या बंद न होने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार हिचकी चलने के कारण सांस लेने में भी दिक्कत होती है।  कहते हैं हिचकी रोगी का ध्यान केंद्रित करने पर या पानी पीने पर बंद हो जाती है। लेकिन कई बार यह समस्या बहुत गंभीर रूप भी धारण कर लेती है ऐसे में ये घरेलु उपाय जरूर आजमाकर देखें.....

-हिचकी अगर अपच से हो तो पानी में खाने का सोडा डालकर एक गिलास पीने से ठीक हो जाती है।

- नीबू का रस शहद ये दोनों एक-एक चम्मच काला नमक मिलाकर खाने से हिचकी बंद हो जाती है।

- प्याज काट कर नमक डालकर हर घंटे खाने से खांसी नहीं होती है।

- साबुत उड़द जलते हुए कोयले पर, आग पर डाले और धुएं को सूंघे।

- सेंधा नमक पानी में घोलकर नाक में टपकाने से हिचकी बंद हो जाती है।

- मूली के चार पत्ते खाने से हिचकी बंद हो जाती है।

- हिचकी बंद नहीं हो तो पौदीने के पत्ते या नीबू चुसे।

- थोड़ा सा गरम-गरम घी पी लेने से हिचकी बंद होती है।

- सेंधा नमक पीसकर मिलाकर सूंघने से हिचकी नहीं चलती है।

- प्याज के रस में शहद से हिचकी बन्द हो जाती है।

- हींग हिचकी अधिक आती हो तो बाजरे के बराबर हींग को गुड़ में मिलाकर केले के साथ खाए।

- गन्ने का रस पीने से हिचकी बंद हो जाती है।

चंद अनोखे फंडे ....बन जाएं दिलकश खूबसूरती के मालिक

गौरा रंग और चमकदार त्वचा सभी की चाहत होती है। ज्यादा सांवले रंग के कारण कई बार शादी में भी समस्या होती है। अगर आप भी गौरी-गौरी त्वचा चाहते हैं। तो कुछ आसान आयुर्वेद नुस्खे ऐसे हैं जिनसे आपका सांवलापन पूरी तरह नहीं मगर काफी हद तक दूर हो सकता है। साथ ही इन नुस्खों से स्कीन तो हेल्दी होती ही है और मिलती है दिलकश खूबसूरती।

- रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ नियमित रूप से त्रिफला चूर्ण का सेवन करें।
- एक बाल्टी ठण्डे या गुनगुने पानी में दो नींबू का रस मिलाकर गर्मियों में कुछ महीने तक नहाने से त्वचा का रंग निखरने लगता है (इस विधि को करने से त्वचा से सम्बन्धी कई रोग ठीक हो जाते हैं)।
- आंवला का मुरब्बा रोज एक नग खाने से दो तीन महीने में ही रंग निखरने लगते है।
- गाजर का रस आधा गिलास खाली पेट सुबह शाम लेने से एक महीने में रंग निखरने लगता है। रोजाना सुबह शाम खाना खाने के बाद थोड़ी मात्रा में सांफ खाने से खून साफ होने लगता है और त्वचा की रंगत बदलने लगती है।
- प्रतिदिन खाने के बाद सौंफ का सेवन करे

बुधवार, 28 सितंबर 2011

कभी बीमार नहीं होना चाहते हैं? अपनाएं ये आसान नुस्खे

किसी सुविधा या साधन के बदले में कुछ खर्च करना पड़े तो फिर भी समझ में आता है, मगर तकलीफ और परेशानी के उठाने के साथ में धन भी खर्च करना पड़े तो अफसोस तथा दु:ख होना स्वाभाविक है। प्रदूषित हवा, पानी और भोजन के साथ जीवन बिताने की मजबूरी के चलते आज शायद ही ऐसा कोई बचा हो जो बगैर किसी दवा-दारू या डॉक्टरी सलाह के पूरी तरह से फिट हो।

लेकिन कुछ उपायों को अपनी नियमित दिनचर्या में शामिल करके इंसान अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को इस सीमा तक बढ़ा सकता है कि उस पर किसी बीमारी का असर हो ही नहीं। तो आइये जानते हैं उन उपायों को-



- त्रिफला जो कि आंवला, हरड़ और बहेड़ा का संयुक्त रूप होता है, इसे प्रतिदिन सोते समय गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। यह एक दिव्य रसायन है जिससे आपके रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहद स्ट्रांग हो जाती है।



- प्रतिदिन 5 तुलसी के पत्ते तथा दो-चार नीम की नई कोंपले खाली पेट खाने से शरीर में रोगों से लडऩे की क्षमता काफी बढ़ जाती है।



- अंकुरित अन्न और सलाद का नियमित सेवन करें।



- सुबह की ताजी हवा में दो-चार किलोमीटर का मार्निग वॉक करें।



- चुनिंदा आसन और प्राणायाम को अपनी नियमित दिनचर्या में शामिल करें।

सोमवार, 26 सितंबर 2011

क्या आप गैस और एसीडिटी से परेशान हैं?

आयुर्वेद में पेट की गड़बडिय़ों को उदर रोगों के अंतर्गत वर्णित किया गया है और अधिकांश रोगों में इसे भी एक महत्वपूर्ण कारण माना गया है। आपको आज हम कुछ ऐसी ही गड़बडिय़ों को दूर करने का आयुर्वेदिक उपाय बताते हैं।आयुर्वेद में पेट की गड़बडिय़ों में ग्रहणी,अतिसार,अरुचि,प्रवाहिका आदि रोग आते हैं,इनमें अधिकांश उदर रोगों का कारण मन्दाग्नि होता है, कुछ सरल आयुर्वेदिक नुस्खे आपको इन गड़बडिय़ों से बचा सकते हैं।

- नियमित रूप से 1-2 चम्मच सोंफ  का प्रयोग अग्नि को दीप्त करता है।

-1-1.5 ग्राम त्रिकटु (सौंठ,मरीच एवं पिप्पली ) चूर्ण  का प्रयोग भी अरुचि एवं अग्निमांद को दूर करता है।

-भोजन भूख से थोड़ा कम एवं मितभुक हो कर ही करना चाहिए।

-कुटज चूर्ण, विडंग चूर्ण एवं अविपत्तिकर चूर्ण को सममात्रा में मिलाकर 1-1.5 ग्राम की मात्रा में लेना पेट की गड़बड़ी को दूर करता है।

-हिन्ग्वासटक चूर्ण एवं लवणभास्कर चूर्ण का प्रयोग 1.5 से तीन ग्राम की मात्रा में करना पेट में अफारा या गैस बनाने के समस्या को दूर करता है।

-पंचसकार चूर्ण की 2.5 से 5 ग्राम की एक-एक मात्रा मल को साफकर पेट को हल्का रखता है।

-केवल त्रिफला चूर्ण की  नियमित 2.5-से 5 ग्राम की मात्रा उदर विकारों में रामबाण औषधि है।

-एक हरड ,दो बहेड़ा  एवं चार आंवलें का प्रयोग सभी प्रकार की  पेट से सम्बन्धित विकृतियों  को दूर करता है।

-भोजन में नमक की मात्रा 24 घंटे में 2.5ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए ,साथ ही अत्यधिक चटपटे पदार्थों के सेवन भी बचना चाहिए।

-भोजन ग्रहण करने के तत्काल बाद शयन की प्रवृति से बचना चाहिए।

-भोजन के साथ जल पीने के प्रवृति से भी बचना चाहिए।

-भोजन बहुत जल्दी -जल्दी बिना चबाकर नहीं लेना चाहिए।

- पूरे दिन में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ जल का  पान करना चाहिए।

-पथ्य (खाए जाने योग्य ) एवं अपथ्य ( न खाए जाने योग्य ) भोजन का ध्यान रखकर किया गया भोजन उदर रोगों को दूर रखता है।

ये हैं कुछ सामान्य पर उपयोगी बातें जिनका दैनिक जीवन में प्रयोग स्वस्थ एवं आराम से युक्त रोगमुक्त जीवन प्रदान करता है।

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