सोमवार, 21 नवंबर 2011

लहसुन की सिर्फ दो कली मिटा देगी इन जानलेवा बीमारियों को

जो कुछ भी हम रोजमर्रा के आहार में खाते-पीते हैं। उन सभी के अपने गुण-दोष होते हैं। रोटी, चावल, दाल, सब्जी, तथा उनमें डाले जाने वाले मसाले आदि सभी के कुछ न कुछ गुण हैं। अब जैसे लहसुन में एक नहीं अनगिनत गुण हैं। ऐसे ही लहसुन के एक गुणकारी प्रयोग की जानकारी दी जा रही हैं। 

लहसुन खून में बढ़ी चर्बी कोलेस्ट्रोलको कम करने का काम करता है। उच्च रक्तचाप भी अनेक मारक रोगों का बढ़ा कारण माना जाता है। लहसुन का प्रयोग इन दोनों ही बीमारियों को जड़ से नष्ट करने की क्षमता रखता है। बस इसमें एक ही कमी हैं, वह है इसकी दुर्गंध। लेकिन इसमें कोलेस्ट्रोल को ठीक करने की गजब की क्षमता होती है। 

रोज सबेरे बिना कुछ खाए- पीए दो पुष्ट कलियां छीलकर टुकड़े करके पानी के साथ चबाकर खा ले निगल जाए। इस साधारण से प्रयोग को नित्य करते रहने से रक्त में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल तो कम होगा ही, साथ ही उच्च रक्तचाप रोगियों का रोग भी नियंत्रित हो जाएगा। शरीर में कही भी ट्युमर होने की संभावना दूर हो जाती है।

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

घर पर बनाएं ये आयुर्वेदिक चूर्ण वैवाहिक जीवन भर जाएगा आनंद से

आज की व्यस्ततम जीवनशैली ,तनावभरी दिनचर्या और भौतिक सुख सुविधायें जुटाने की लालसा ने खुशहाल वैवाहिक जीवन को एक सपने की तरह बना दिया है। काम ने इस पवित्र कर्म के मूल में निहित भाव एवं उद्देश्य को समाप्त कर दिया है। काम आज दाम्पत्य जीवन की औपचारिकता भर रह गया है ,इन्ही कारणों से यौन संबंधों को लेकर असंतुष्ट  युगलों  की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है। अगर आपके साथ भी यही समस्या है आपको कमजोरी व क्षीणता महसूस होती है। अपने साथी को संतुष्ट नहीं कर पाते हैं तो नीचे लिखे आयुर्वेदिक नुस्खे को जरूर अपनाएं निश्चित ही फायदा होगा।



सामग्री- 
सकाकुल मिश्री, सालम मिश्री, काली मूसली और शतावर सभी 40-40 ग्राम। बहमन सफेद बहमन लाल तोदरी छोटी, तोदरी बड़ी सभी 20-20ग्राम। सुरवारी के बीज, इंद्र जौ मीठे, जावित्री, जायफल, सौंठ, कुलींजन सभी 10-10 ग्राम। 



निर्माण विधि-
 सारी औषधियों को अलग-अलग कुट पीसकर बाद में उक्त अनुपात में मिलाकर साफ सूखी शीशी में भरकर रखें।



सेवन विधि- 
पांच ग्राम की मात्रा लेकर इस चूर्ण को 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाट लें। दूध के साथ न लें। उसी से दवा खानी चाहिए। इस मदनानंद चूर्ण के सेवन से धातु क्षीणता, नामर्दी की शिकायत भी कुछ दिनों मिट जाती है। वास्तव में यह चूर्ण कामोत्तेजना जाग्रत करने का बहुत अच्छा उपाय है। अगर स्त्री प्रसंग से परहेज करके इस दवा का सेवन छ: महीने तक कर लिया जाए तो बहुत ही अच्छा है।

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

तिल के तेल का ये अनोखा फार्मूला कर देगा मुहांसों को जड़ से साफ

किशोरवस्था की समाप्ति और युवावस्था के आरंभ में कुछ युवक और युवतियों के चेहरे पर निकलने वाले मुहांसों पीडि़त हो जाते हैं। मुहांसों से कष्ट तो होता ही है, चेहरे भी भद्दा दिखाई देता है। जिनको मुहांसे निकलते हों उन्हें अपने खाने में गर्म प्रकृति पदार्थ, तले हुए, तेज मिर्च मसाले वाले, खट्टे तीखे पदार्थों को शामिल नहीं करना चाहिए। दोनों वक्त, सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले पेट साफ होना आवश्यक है। भोजन करते समय कौर 32 बार चबाना चाहिए। इतना करते हुए, मुहांसे ठीक करने के लिए, निम्रलिखित दवाई का सेवन करना चाहिए। 

सामग्री-पलाश के फूल, लाल चंदन, लाख, मजीठ, मुलहठी, कुसुम, खस, पदमाख, नील, कमल,बड़ की जटा, पाकड़ की मूल, कमल केशर, मेंहदी, हल्दी, दारुहल्दी और अनन्तमूल-सभी 16 द्रव्य 50-50 ग्राम। तिल का तैल 200 ml बकरी का दूध 200ml और पानी 3 लीटर। 

कैसे बनाएं-सब द्रव्यों को खूब कूट पीस कर महीन कपड़ छन चूर्ण कर लें। फिर तीन लीटर पानी में इन्हें इतनी देर तक उबालें कि पानी एक चौथाई बचे। इसे छान लें। अलग से केशर, मजीठ, मुलहठी, लाख व पतंग 10-10ग्राम ले कर लुगदी बनाकर इसमें डाल दें। फिर तैल व बकरी का दूध डाल कर मंदी आंच पर पकाएं। जब पानी व दूध जल जाए, सिर्फ तैल बचे, तब उतार कर ठंड कर लें और छान कर बाटल में भर लें। 

 मात्रा और सेवन विधि- अनामिका अंगुली से तैल मुहांसों पर लगा कर चेहरे को मलना चाहिए। एक बार सुबह स्नान करने से आधा घंटा पहले और दूसरी बार रात को सोने से आधा घंटा पहले इस तैल लगा कर मसाज करें। 

 लाभ-लगातार यह प्रयोग करने से मुहांसे तो ठीक होते ही हैं, साथ ही चेहरे की त्वचा उजली, कांतिपूर्ण और चिकनी होने से चेहरा चमकने लगता है। जिनका सुबह पेट साफ न होता हो वे शाम को सोने से पहले वैद्य पटनाकर काढ़ा, एक चम्मच थोड़े से पानी में मिला कर पी लिया। एक चम्मच से असर  हो तो दो चम्मच काढ़ा लिया करें। काढ़े की मात्रा ज्यादा हो जाने पर सुबह दस्त पतला होगा। ऐसे में काढ़े की मात्रा कम कर लें। तीन-चार दिन में काढ़े की मात्रा घटा और बढ़ाकर अपने अनुकूल मात्रा निश्चित कर लें। अनुकूल मात्रा में ही इस काढ़े का सेवन करें। इस पूरे प्रयोग से एक दो माह में मुहांसे गायब हो जाएंगे।

सर्दी स्पेशल: रोज इनमें से कुछ भी खाएं तो सालभर बीमारियां छू भी नहीं पाएगी

सर्दियों में अपनी आयु और शारीरिक अवस्था को ध्यान में रख कर उचित और आवश्यक मात्रा में, पौष्टिक शक्तिवर्धक चीजों को लेना हमारे शरीर को सालभर के लिए एनर्जी देता है। आयु और शारीरिक अवस्था के मान से अलग-अलग पदार्थ सेवन करने योग्य होते हैं। लेकिन ठंड में पौष्टिक पदार्थों का सेवन शुरू करने से पहले पेट शुद्धि यानी कब्ज दूर करना आवश्यक है। 
क्योंकि इन्हें पचाने के लिए अच्छी पाचन शक्ति होना जरूरी है। वरना पौष्टिक पदार्थों या औषधियों का सेवन करने से लाभ ही नहीं होगा। ऐसी तैयारी करके, सुबह शौच जाने के नियम का पालन करते हुए, हर व्यक्ति को अपना पेट साफ रखना चाहिए। ठीक समय 32 बार चबा चबा कर भोजन करना चाहिए।अब हम पहले ऐसे पौष्टिक पदार्थों की जानकारी दे रहे हैं। जो किशोरवस्था से लेकर प्रोढ़ावस्था तक के स्त्री-पुरुष सेवन कर अपने शरीर को पुष्ट, सुडौल, व बलवान बना सकते हैं। 
क्या खाएं सर्दियों में-
         - सोते समय एक गिलास मीठे कुनकुने गर्म दूध में एक चम्मच शुद्ध घी डालकर पीना चाहिए।
         -  दूध में मलाई और पिसी मिश्री मिलाकर पीना चाहिए।
         - एक बादाम पत्थर घिस कर दूध में मिला कर उसमें पीसी हुई मिश्री मिलाकर पीना चाहिए। 
         - सप्ताह में दो दिन अंजीर का दूध लें।
         - तालमखाना।
         - सफेद मुसली।
         - ठंडे दूध में एक केला और एक चम्मच शहद।
         - उड़द की दाल दूध पका कर बनाई हुई खीर।
         - प्याज का रस।
         - असगंध चूर्ण
         - उड़द की दाल। 
         - रोज सेवफल खाएं।
         - कच्चे नारियल की सफेद गरी। 
         -प्याज का रस दो चम्मच, शहद एक चम्मच, घी पाव चम्मच।

बुधवार, 16 नवंबर 2011

इन बातों का ध्यान न रखा तो हो जाएंगे इस लाइलाज बीमारी के शिकार


माना जाता है कि दमा यानी एस्थमा एक ऐसा रोग है जो एक बार हो जाए तो दम निकलने के बाद ही जाता है।आमतौर पर यह रोग अनुवांशिक होता है तो कुछ लोगों को मौसम के कारण हो जाता है। इसके कारण रोगी कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाते और जल्दी थक जाते हैं। जब दमा रोग से पीडि़त रोगी को दौरा पड़ता है तो उसे सूखी खांसी होती है और ऐंठनदार खांसी होती है। इस रोग से पीडि़त रोगी चाहे कितना भी बलगम निकालने के लिए कोशिश करें लेकिन फिर भी बलगम बाहर नहीं निकलता है। दमा रोग प्राकृतिक चिकित्सा से पूरी तरह से ठीक हो सकता है। लेकिन अगर यह रोग अनुवांशिक न हो तो कुछ बातों की सावधानी रखकर इस रोग से बचा जा सकता है।

दमा रोग होने का कारण:-



   - औषधियों का अधिक प्रयोग करने के कारण कफ सूख जाने से दमा रोग हो जाता है।

   - खान-पान के गलत तरीके से दमा रोग हो सकता है।

   - मानसिक तनाव, क्रोध तथा अधिक भय के कारण भी दमा रोग हो सकता है।

    - खून में किसी प्रकार से दोष उत्पन्न हो जाने के कारण भी दमा रोग हो सकता है।

    - नशीले पदार्थों का अधिक सेवन करने के कारण दमा रोग हो सकता है।

    - खांसी, जुकाम तथा नजला रोग अधिक समय तक रहने से दमा रोग हो सकता है।

    - नजला रोग होने के समय में संभोग क्रिया करने से दमा रोग हो सकता है।

    - भूख से अधिक भोजन खाने से दमा रोग हो सकता है।

    - मिर्च-मसाले, तले-भुने खाद्य पदार्थों तथा गरिष्ठ भोजन करने से दमा रोग हो सकता है।

    - फेफड़ों में कमजोरी, हृदय में कमजोरी, गुर्दों में कमजोरी, आंतों में कमजोरी, स्नायुमण्डल में कमजोरी तथा नाकड़ा रोग हो जाने के कारण दमा रोग हो जाता है।

    - मनुष्य की श्वास नलिका में धूल तथा ठंड लग जाने के कारण दमा रोग हो सकता है।

    - धूल के कण, खोपड़ी के खुरण्ड, कुछ पौधों के पुष्परज, अण्डे तथा ऐसे ही बहुत सारे प्रत्यूजनक पदार्थों का भोजन में अधिक सेवन करने के कारण दमा रोग हो सकता है।

    - मनुष्य के शरीर की पाचन नलियों में जलन उत्पन्न करने वाले पदार्थों का सेवन करने से भी दमा रोग हो सकता है।

    - मल-मूत्र के वेग को बार-बार रोकने से दमा रोग हो सकता है।

    - धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के साथ रहने या धूम्रपान करने से दमा रोग हो सकता है।


नहीं होगा कोई रोग, मैथी का ये अचूक प्रयोग ठंड में बना देगा आपकी सेहत

ठंड में आने वाली सारी हरे पत्तेदार सब्जियों को स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी माना गया है। अगर बात मेथी की हो तो मेथी तो वो सब्जी है जो खाने के स्वाद को और ज्यादा बड़ा देती है। मसालों, सब्जियों के बघार में,अचार में, पत्तियों की सब्जी और मेथी के पराठे बहुत चाव से खाए जाते हैं। मेथी का दवाई के रूप में उपयोग हजारों सालों से किया जाता रहा है। कमर दर्द, गठिया दर्द, प्रसव के बाद, डाइबिटीज के साथ ही जोड़ों के दर्द, आंखों की कमजोरी, शारीरिक दुर्बलता, मूत्र संबंधी विकार ये सब दूर होते हैं। इसका सेवन हर साल करते रहना चाहिए।

स्त्रियां भी इसका सेवन करके सदैव स्वस्थ रह सकती हैं एवं चिरयौवन प्राप्त कर सकती हैं। हर साल सर्दियों के मौसम में इसे लाग के रूप में खाया जाता है। माना जाता है ठंड में इसका सेवन करने से शरीर स्वस्थ व निरोगी रहता है।

 सामग्री- मेथीदाने- 500 ग्राम, सोंठ का बारीक पाउडर 250 ग्राम, दूध चार लीटर, घी 500 ग्राम, चीनी 1.5 किलो, सोंठ, छोटी पीपलामूल, अजवाइन, जीरा, कलौंजी, सौंफ, धनिया, तेजपत्ता, कचूर, दालचीनी, जायफल और नागरमोथा ये सब 10-10 ग्राम। 

बनाने की विधि- उक्त सभी कूट पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। अब दूध को एक साफ कड़ाई में डालकर आग पर चढ़ाएं। औटाने पर जब दूध आधा रह जाए, तब इसमें मेथी का पिसा चूर्ण तथा सोंठ का पिसा हुआ चूर्ण डाल दें। हिलाते रहें और मावा बना दें। अब घी डालकर इसकी सिकाई करें। गुलाबी रंग का होने तक सेकें । अब इसमें मावा और बाकी की सब पिसी हुई दवाईयां मिलाकर चलाएं। जब कुछ गाढ़ा सा हो जाए, तब नीचे उतार लें तथा या तो जमाकर बर्फी जैसी चक्की काट लें अथवा लगभग 10-10 ग्राम वजन के लड्डू बांध दें।

 

सेवन कैसे करें- इस लड्डू को सुबह के समय 200 ग्राम की मात्रा में खाकर ऊपर से दूध पीएं। इससे सभी तरह के वायु विकार समाप्त होते हैं। शरीर हष्ट-पुष्ट होता है। प्रसव के बाद स्त्रियां इस पाक का सेवन करें। उनका शरीर कांतिमान हो जाता है। जिन व्यक्तियों के जोड़ों में सून दर्द, घुटनों में दर्द, थकान सी महसूस होना, पैरों के तलवों में अत्याधिक पसीना आना, बायंटे आना व गैस संबंधित सभी बीमारियों में फायदा होता है।

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

एलर्जी के लिए ये छोटे-छोटे उपाय है रामबाण

एलर्जी एक ऐसा शब्द,जिसका प्रयोग व्यापक रूप से होता आया है, आपने यह भी कहते हुए सुना होगा कि यार मुझे उससे बात करने में एलर्जी होती है। ऐसा ही कुछ हमारे सजीव शरीर में भी होता है, एलर्जी हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधकक्षमता के अतिसक्रियता के कारण उत्पन्न होने वाले एक प्रतिक्रिया है ,खासकर तब जब प्रतिक्रिया किसी सामान्य एवं हानिरहित पदार्थ से हो रही हो तो वह पदार्थ एलर्जन कहलाता है। ये प्रतिक्रियाएं एक्वयार्ड,प्रेडिकटेबल एवं तीव्र होती हैं। आयुर्वेद शरीर रूपी क्षेत्र को एलर्जन रूपी बीज के प्रभाव  से  प्रतिरोधक क्षमता को संतुलित करने के  सिद्धांत पर कार्य करता है, अत: हानिरहित औषधियां एलर्जी से बचाव में अत्यंत कारगर सिद्ध होती हैं।
-सर्दी हो या गर्मी सुबह उठते ही नाक बंद हो जाने और लगातार छिंक आने से वे परेशान हैं  और कई आयुर्वेदिक उपचार लेने की बात कह रहे हैं : आप सब केवल नियमित रूप से गिलोय की ताजी डंठलों का रस तथा ताजे आंवलें का रस  निकालकर ,उन्हें नियमित रूप से 2-3 चम्मच की मात्रा में सेवन करें या करायें निश्चित लाभ मिलेगा,साथ ही पंचकर्म चिकित्सक के निर्देशन में नस्य लेना भी  एलर्जी से निजात दिलाने में मददगार होगा ,आप सभी गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद ,आधा चम्मच नींबू का रस को कुछ महीनों तक लगातार लें ,देखें आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में संतुलन आ जाएगा ,और आपको एलर्जी से सम्बंधित परेशानियों में अवश्य ही लाभ मिलेगा।


- शरीर में खुजली और सूजन , घास के खेतों में जानेपर होने वाली समस्या का निदान चाहा है, इसे 'अर्टीकेर्या - कहते हैं ,इसमें दवा खाने तक चकते नहीं बनते और दवा छोडते ही बन जाते हैं। योग की कुंजल क्रिया या कुशल चिकित्सक के निर्देशन में पंचकर्म  का वमन कर्म अत्यंत फायदेमंद होगा ,फिलहाल आप चित्रकादीवटी  एवं आरोग्य वर्धिनीवटी दो-दो गोली सुबह शाम गुनगुने पानी से लें ।

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बीमारी क्यों आती है?

 हर वस्तु, हर विचार, हर #व्यापार, हर #रिश्ता – सब कुछ #पंचतत्व से बना है। नाम बदले, रूप बदले, स्वाद बदले – लेकिन #तत्व नहीं बदलता। चावल व...