रविवार, 27 नवंबर 2011

न दवाई का झंझट न परहेज की परेशानी ये है मोटापे का आसान इलाज

अनकंट्रोल डाइट और बिगड़ती दिनचर्या के कारण दिनो-दिन बढ़ता मोटापा कम करना बहुत मुश्किल काम है। इसे कम करने के लिए या तो परहेज और दवाइयों का सहारा लेना पड़ता है या फिर कसरत करना पड़ती है। अगर आपको पता चले कि रोज सुबह सिर्फ 15 मिनट बैठकर इसे कम किया जा सकता है तो आपको यकीन नहीं होगा लेकिन ये सच है।

रोज सुबह 15 मिनट बैठकर अपनी सांस को कंट्रोल करें तो सुबह-सुबह कीप्राणवायु आपका मोटापा कम कर देगी। समझिए क्या और कैसे करना है आपको इसके लिए किसी शांत एवं शुद्ध वातावरण वाले स्थान का चयन करें। किसी भी सुविधाजनक आसन में बैठ जाएं। 

अब धीरे-धीरे सांस लें। सांस लेने की गति धीमी रखें। फिर सांस छोड़ें सांस, छोडऩे की गति तेज रखें। इस क्रिया में सामान्य गति से सांस लें और ताकत के साथ सांस बाहर निकालें। रोज सुबह ये काम करें और इस क्रिया को कम से कम 15 मिनट तक करें। इस क्रिया को कपाल भाति प्राणायाम भी कहा जाता है।



क्या-क्या फायदे हैं इसके

इस क्रिया से चेहरे पर हमेशा ताजगी, प्रसन्नता और शांति दिखाई देगी। कब्ज और डाइबिटिज की बीमारी से परेशान लोगों के लिए यह काफी फायदेमंद है। दिमाग से संबंधित रोगों में लाभदायक है। वजन को कंट्रोल करता है, जो लोग ज्यादा वजन से परेशान है वे इस क्रिया से बहुत कम समय में ही फायदा प्राप्त कर सकते हैं। इससे वजन संतुलित रहता है।



सावधानी

जो लोग आंखों और कान के रोग से पीडि़त हैं, वे इस क्रिया को किसी योग प्रशिक्षण से सलाह लेकर ही करें साथ ही ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो भी इस क्रिया को न करें।

काली मिर्च के अनूठे प्रयोग: हो जाएंगी ये सारी बीमारियां रफूचक्कर

किचन में जब चटपटा खाना बनाने की बात हो या सलाद को जायकेदार बनाना हो तो कालीमिर्च का प्रयोग किया जाता है। पिसी काली मिर्च सलाद, कटे फल या दाल शाक पर बुरक कर उपयोग में ली जाती है। इसका उपयोग घरेलु इलाज में भी किया जा सकता है।आज हम आपको बताने जा रहे हैं कालीमिर्च के कुछ ऐसे ही रामबाण प्रयोग।

- त्वचा पर कहीं भी फुंसी उठने पर, काली मिर्च पानी के साथ पत्थर पर घिस कर अनामिका अंगुली से सिर्फ फुंसी पर लगाने से फुंसी बैठ जाती है। 

- काली मिर्च को सुई से छेद कर दीये की लौ से जलाएं। जब धुआं उठे तो इस धुएं को नाक से अंदर खीच लें। इस प्रयोग से सिर दर्द ठीक हो जाता है। हिचकी चलना भी बंद हो जाती है। 

- काली मिर्च 20 ग्राम, जीरा 10 ग्राम और शक्कर या मिश्री 15 ग्राम कूट पीस कर मिला लें। इसे सुबह शाम पानी के साथ फांक लें। बावासीर रोग में लाभ होता है। 

- शहद में पिसी काली मिर्च मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से खांसी बंद हो जाती है। 

- आधा चम्मच पिसी काली मिर्च थोड़े से घी के साथ मिला कर रोजाना सुबह-शाम नियमित खाने से नेत्र ज्योति बढ़ती है। 

- काली मिर्च 20 ग्राम, सोंठ पीपल, जीरा व सेंधा नमक सब 10-10 ग्राम मात्रा में पीस कर मिला लें। भोजन के बाद आधा चम्मच चूर्ण थोड़े से जल के साथ फांकने से मंदाग्रि दूर हो जाती है। 

- चार-पांच दाने कालीमिर्च के साथ 15 दाने किशमिश चबाने से खांसी में लाभ होता है।

- कालीमिर्च सभी प्रकार के संक्रमण में लाभ देती है। 

- यदि आपका ब्लड प्रेशर लो रहता है, तो दिन में दो-तीन बार पांच दाने कालीमिर्च के साथ 21 दाने किशमिश का सेवन करे। 

- बुखार में तुलसी, कालीमिर्च तथा गिलोय का काढ़ा लाभ करता है। 

 - कालीमिर्च, हींग, कपूर का (सभी पांच-पांच ग्राम) मिश्रण बनायें। फिर इसकी राई के बराबर गोलियां बना लें। हर तीन घंटे बाद एक गोली देने से उल्टी, दस्त बंद होते है।

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

कभी नहीं होंगे बीमार अगर डेली लाइफ में ले आएंगे ये छोटे-छोटे सुधार

कहते हैं अगर किसी व्यक्ति की दिनचर्या नियमित हो और वह आयुर्वेद में बताए गए कुछ नियमों का पालन अपनी डेली लाइफ में करे तो कोई भी सुखपूर्वक निरोगी जीवन व्यतीत कर सकता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे ही कुछ टिप्स जिन्हें अपनाएंगे तो आप कभी बीमार नहीं होंगे।

- प्रात:काल 4 से 6 बजे के मध्य अर्थात सूरज उगने से पूर्व बिस्तर छोड़ दें।

- सुबह ब्रश व शौचादि से पहले ताम्बे के लोटे में रात्रि को रखा पानी पीयें।

- नाश्ता या भोजन हमेशा भूख से थोड़ा कम करें तथा योग्य आहार का ही सेवन करें ।

 -  भोजन के साथ -साथ पानी पीने की प्रवृति से बचें।

- रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिए आंवले  का सेवन नित्य करें।

- आहार में रेशेदार फल सब्जियों के अलावा दालों का सेवन, शरीर में किसी भी प्रकार के क्षय (टूट- फूट ) को ठीक करने में मददगार होता है।

- आहार में स्नेह अर्थात घी का नियंत्रित मात्रा में प्रयोग करें।

-  भोजन में लाल मिर्च का सेवन कम करें। 

- दिनचर्या में जानबूझकर,अनजाने में या असयंमित होकर किये गए आचरण को प्रज्ञापराध की श्रेणी में रखा जाता है,इससे से बचें।

- आहार स्वयं एक औषधी है,अत:ज्ञानेन्द्रिय को वश में करते हुए ही भोजन सहित अन्य आचरण करना स्वस्थ रहने में मददगार होता है।

- शुद्ध जल एवं वायु का सेवन आयुर्वेद अनुसार रोगों से मुक्ति का मार्ग है।

- गाय के दूध का नियमित रूप से सेवन करें।

- साल में एक बार पंचकर्म चिकित्सक के निर्देश में अवश्य करवाएं।

मंगलवार, 22 नवंबर 2011

घरेलु संजीवनी बूटी- ये है इन सारी बीमारियों की एक दवा

ज्यादा वर्कलोड के कारण थकान होना, कमजोरी महसूस होना, ये सब अच्छे लक्षण नहीं  है। ऐसे लोगों को अक्सर बुखार और सर्दी, खांसी  व स्नायुतंत्र जैसी समस्याएं जल्दी घेर लेती हैं। ऐसे में बार-बार कई तरह की ऐलोपैथिक दवाई लेना भी शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। इसलिए बार-बार  क्लिनिक के चक्कर लगाने से अच्छा है कि आप एक बार इन समस्याओं को जड़ से मिटाने के लिए नीचे लिखा नुस्खा जरुर आजमाएं। 

सामग्री- गुलाब के फूल, तुलसी के पत्ते, ब्राह्मी बूटी, खसखस, और शंखपुष्पी 300-300ग्राम। बनफशा, मुलहठी, सौंफ, तेजपान, 100-100ग्राम। लाल चंदन, बड़ी इलाइची, दालचीनी, लौंग, सौंठ, बदयान, काली मिर्च और असली केसर 10-10 ग्राम सबको अच्छी तरह पीसकर, छानकर बारीक चूर्ण कर लें।

 सेवन विधि- एक चम्मच चूर्ण एक लीटर पानी में डाल कर उबालें। उचित मात्रा में चीनी और दूध डालकर सुबह खाली पेट एक गिलास  पीएं। यह मात्रा चार व्यक्ति के लिए है। 

लाभ- इसके सेवन से शरीर के आंतरिक दोष दूर होते हैं। मानसिक  व शारीरिक थकावट  व निर्बलता दूर होती है। सिरदर्द, खांसी, गैस ज्वर, और उदर रोगों से छुटकारा मिलता है। स्मरण शक्ति और दिमागी ताकत बढ़ती हैं। स्नायुदौर्बल्य दूर होता है। दरअसल यह संजीवनी बूटी की तरह लाभकारी है।

शर्तिया नुस्खा- बिना दवाई व तेल करें झड़ते बालों व गंजेपन का इलाज

क्या आप झड़ते बालों से परेशान हैं?गंजेपन के कारण आपकी उम्र ज्यादा दिखने लगी है? झड़ते बालों के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे अपनाकर या तेल लगाकर थक चूके हैं पर असर नहीं हो रहा है? अगर आपके साथ भी ऊपर लिखी परेशानियां हैं, तो हम देने जा रहे हैं आपको आज एक नुस्खा। जिसे अपनाकर आप झड़ते बालों की समस्या से निजात पा सकते हैं।   



नुस्खा- इस बीमारी से निजात पाने के लिए योग शास्त्र में माण्डु की मुद्रा सबसे श्रेष्ठ उपाय बताया गया है।



माण्डुकी मुद्रा की विधि



इस मुद्रा के लिए किसी शांत एवं स्वच्छ वातावरण वाले स्थान का चयन करें। शांति में किसी भी सुविधाजनक आसन में बैठ जाएं। अब मुंह बंद करके जीभ को तालु में घुमाना चाहिए और सहस्रार से टपकती हुई बुंदों का जीभ से पान करें। यह माण्डुकी मुद्रा है।



माण्डुकी मुद्रा के लाभ



इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से बाल झडऩा बंद हो जाते हैं। असमय सफेद हो गए हो तो वह समस्या भी इस मुद्रा से दूर हो जाती है। इससे आपकी त्वचा चमकदार और निरोगी बनती है। इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से वात-पित्त एवं कफ की समस्या दूर हो जाएगी।

सोमवार, 21 नवंबर 2011

नारियल का अनूठा प्रयोग: हो जाएगी एसीडिटी की छुट्टी हमेशा के लिए

नारियल को भारतीय सभ्यता में शुभ और मंगलकारी माना गया है। इसलिए पूजा-पाठ और मंगल कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है। किसी कार्य का शुभारंभ नारियल फोड़कर किया जाता है। पूजा के प्रसाद में इसका प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग काड लिवर आइल के स्थान पर सेवन में किया जा सकता है। यह कच्चा और पका हुआ दो अवस्थाओं में मिलता है। नारियल का पानी पिया जाता है। इसका पानी मूत्र, प्यास व जलन शांत करने वाला होता है। 

 मुंह के छाले- मुंह के छाले होने पर नारियल की सफेद गिरी का टुकड़ा और एक चम्मच भर चिरोंजी मुंह में डालकर धीरे-धीरे चबाना व चूसना चाहिए। 

 पेट के कीड़े- बड़ी उम्र के व्यक्ति को अगर पेट में कृमि की समस्या है तो सूखे गोले का ताजा बूरा 10 ग्राम मात्रा में लेकर खूब चबा-चबाकर खा लें। इसके तीन घंटे बार सोते समय दो चम्मच केस्टर आइल, आधा कप गुनगुने गर्म दूध में डालकर तीन दिन तक पीएं। पेट के कीड़े मल के साथ निकल जाएंगे। 

 आधा सीसी- आधा सीसी वाला दर्द हो तो नारियल का पानी ड्रापर से नाक के दोनों तरफ दो-दो बूंद टपकाने से आधा सीसी का दर्द दूर होता है। 

 एसीडिटी- आजकल एसीडिटी यानी पित्त प्रकोप होना आम बात हो गई है। एसीडिटी से ग्रसित होने पर सीने व पेट में जलन, जी मचलाना, उल्टी होने जैसा जी करना या उल्टी होना, मुंह में छाले होना, सिरदर्द, होना पतले दस्त लगना आदि लक्षण प्रकट होते हैं। कच्चे नारियल की सफेद गिरी, खस और सफेद चंदन का बुरादा दस-दस ग्राम ले। एक गिलास पानी में डाल कर शाम को रख दें। सुबह इसे मसल कर छान कर खाली पेट पीने से एसीडिटी धीरे-धीरे खत्म होने लगेगी। 

लहसुन की सिर्फ दो कली मिटा देगी इन जानलेवा बीमारियों को

जो कुछ भी हम रोजमर्रा के आहार में खाते-पीते हैं। उन सभी के अपने गुण-दोष होते हैं। रोटी, चावल, दाल, सब्जी, तथा उनमें डाले जाने वाले मसाले आदि सभी के कुछ न कुछ गुण हैं। अब जैसे लहसुन में एक नहीं अनगिनत गुण हैं। ऐसे ही लहसुन के एक गुणकारी प्रयोग की जानकारी दी जा रही हैं। 

लहसुन खून में बढ़ी चर्बी कोलेस्ट्रोलको कम करने का काम करता है। उच्च रक्तचाप भी अनेक मारक रोगों का बढ़ा कारण माना जाता है। लहसुन का प्रयोग इन दोनों ही बीमारियों को जड़ से नष्ट करने की क्षमता रखता है। बस इसमें एक ही कमी हैं, वह है इसकी दुर्गंध। लेकिन इसमें कोलेस्ट्रोल को ठीक करने की गजब की क्षमता होती है। 

रोज सबेरे बिना कुछ खाए- पीए दो पुष्ट कलियां छीलकर टुकड़े करके पानी के साथ चबाकर खा ले निगल जाए। इस साधारण से प्रयोग को नित्य करते रहने से रक्त में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल तो कम होगा ही, साथ ही उच्च रक्तचाप रोगियों का रोग भी नियंत्रित हो जाएगा। शरीर में कही भी ट्युमर होने की संभावना दूर हो जाती है।

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