रविवार, 4 दिसंबर 2011

काम के बोझ की कितनी भी हो थकान चंद मिनटों में हो जाएगी उडऩ-छू

थकान या अनिच्छा एक ऐसी अदृश्य बीमारी है जिसका आज तक कोई हल नहीं मिल पाया है। यहां हम दे रहे हैं स्वचिकित्सा से जुड़ा एक ऐसा प्रयोग जो पूरी तरह से प्राकृतिक है। इस प्रयोग का प्रभाव या असर आप सिर्फ  चंद मिनिटों में ही जान सकते हैं। तो आइये जानते हैं इस आसान प्रयोग को....

 प्रयोग

डेस्क या टेबिल पर कोहनी टिकाकर बैठें, हाथों को सीने के सामने से लाते हुए हथेलियों को गालों के ऊपर से लाते हुए अपनी आंखें बंद करें। यदि आप घर में हैं तो लेटकर भी यह क्रिया दोहरा सकते हैं। ऐसा करते समय अपने घुटनों को मोड़ कर रखें। दोनों हथेलियों को तब तक आपस में  रगड़ें जब तक कि वे गर्म न हो जाएं, फिर उन्हें बंद आंखों के ऊपर रखें। गहरी सांसें भरें, इस तरह कि बंद आंखों के अंधेरे को महसूस कर सकें, थकी आंखों पर हथेलियों की गर्माहट का अनुभव करें।

इसे महसूस करते हुए मस्तिष्क को खाली कर लें। गहरी सांसें लें, किसी भी समस्या और तनाव का अनुभव न होने पाए। पांच-दस मिनट तक ऐसा करें। रात्रि में सोने से पहले एक बाल्टी में नमक मिला पानी लें। इस पानी में घुटनों तक पैरों को 15 मिनिटों तक डुबाकर रखें, ऐसा करने से पूरे दिन भर की थकान और नकारात्मक ऊर्जा जादुई रूप से गायब हो जाएगी।

केले खाएं और काबू पाएं इस जानलेवा बीमारी पर


यूं तो हर फल अपने अन्दर कुछ न कुछ प्राकृतिक गुणों को समाये रहता है,आपने कभी बंदरों को हार्टएटेक से मरते हुए सुना होगा ..नहीं कारण है , प्राकृतिक फलों का सेवन ,इन्हीं कन्द मूलों एवं फलों को खाकर हमारे ऋषि -मुनि लम्बी आयु को निरोगी रहकर बिताते थे।

फलों के इन्हें गुणों की पुष्टि आज के वैज्ञानिक भी कर रहे हैं। अब केले को ही ले लीजिये ,भारत के मनीपाल एवं जॉन हापकिंस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन से यह निष्कर्ष निकाला है, कि आप केला खाकर अपने रक्तचाप (ब्लड-प्रेशर ) को दस प्रतिशत तक  नियंत्रित कर सकते हैं।

केला उच्च रक्तचाप में दी जानेवाली दवा एस -इनहीबिटर के रूप में काम करता है। तो आज से ही नाश्ते में लें एक पूरा केला या फिर केले से बनाएं फ्रूट सलाद ,इससे मिलेगा पोटेशियम और विटामिन सी और रक्तचाप भी रहेगा नियंत्रित है न मजे की बात।

कम उम्र में नहीं सताएगी सफेद बालों की टेंशन ये है काले रखने का तरीका

हर इंसान की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जाती है। उसके शरीर में कई तरह के शारीरिक व मानसिक परिवर्तन होते हैं। ऐसे ही उम्र बढऩे के साथ बाल सफेद होना प्रकृति का नियम है, लेकिन कई बार अनुवांशिक कारण या हार्मोनल चैंज के कारण या अन्य कारणों से कम उम्र में ही बाल सफेद हो जाते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से इसे बालों का विकार भी कह सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपके बाल असमय सफेद न हो व लंबे समय तक काले बने रहें तो सिर्फ योग ही एक उपाय है जो आपके बालों को असमय सफेद होने से रोक सकता है। नीचे लिखे आसन को नियमित रूप से कर आप अपने बाल को लंबे समय तक काला बनाए रख सकते हैं।

सर्वांगासन की विधि: किसी सुविधाजनक स्थान पर कंबल या दरी बिछाकर शवासन में लेट जाएं। अपने दोनों हाथों को जांघों की बगल में तथा हथेलियों को जमीन पर रखें। पैरों को घुटनों से मोड़कर ऊपर उठाइएं तथा पीठ को कंधों तक उठाइएं। दोनों हाथ कमर के नीचे रखकर शरीर के उठे हुए भाग को सहारा दीजिएं। इस तरह ठुड्डी को छाती से लगाए रखें। अब सांस को रोके नहीं स्वाभाविक रूप से चलने दें।



यथाशक्ति पैर और धड़ को एक सीध में रखें। इस स्थिति में रुकने के बाद, पैरों को जमीन पर वापस ले आएं। पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए घुटनों को माथे के पास ले आएं। हाथों को जमीन रखते हुये शरीर और पैरों को धीरे-धीरे वापस शवासन में आ जाएं। अब शवासन में शरीर को शिथिल अवस्था में आ जाएं। आसन करते समय आंखों को खुला रखें।



सावधानियां - जल्दबाजी एवं हड़बड़ाहट में यह आसन न करें। इस आसन का अभ्यास पीठ दर्द, कमर दर्द, नेत्र रोगी और उच्च रक्तचाप के रोगी ने करें।



लाभ- लम्बी उम्र तक चेहरे पर चमक बनी रहती है। समय से पूर्व बाल सफेद नहीं होते हैं।  इसके नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव, निराशा, हताशा एवं चिंताएं आदि रोगों का नाश होता है। 

कड़वा काढ़ा नहीं घर का ये टेस्टी शर्बत करेगा सर्दी-खांसी,एसीडिटी का इलाज

बदलते मौसम के कारण सर्दी-खांसी, पेट खराब होना, एसीडिटी होना एक आम समस्या होती है। जिसका इलाज करने के लिए अधिकतर लोग घरेलु काढ़ा या कड़वी दवाईयां लेते हैं। अगर आप भी इन समस्याओं का इलाज करने के लिए कड़वी दवाईयां लेकर थक चूके हैं तो अपनाइए नीचे लिखा ये टेस्टी इलाज।

तुलसी की पत्तियों और गुड़, नीबू के साथ मिलकर स्वादिष्ट पेय तुलसी सुधा बनाया जाता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ साथ जुकाम, खांसी, सिरदर्द और पेट के गैस और एसीडिटी रोगों को खत्म करता है, पाचन के लिये अच्छा होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढा़ता है।

सामग्री- तुलसी की पत्तियां आधा कप,गुड़ - 3/4 कप, नीबू - 5 नीबू का रस (मध्यम आकार के)छोटी इलाइची 10, पानी 10 कप।

विधि - तुलसी की पत्तियों व नीबू का रस निकाल लीजिए। तुलसी की पत्तियां और इलाइची को नीबू के रस के साथ बारीक पीस लीजिये। पानी को गुड़ डालकर उबलने रख दीजिये, पानी में उबाल आने और गुड़ घुलने के बाद गैस बन्द बन्द कर दीजिये। पानी जब थोड़ा गरम रह जाय, तब गुड़ घुले पानी में तुलसी और इलाइची का पेस्ट जो नीबू के रस के साथ बानाया है, मिला कर 2 घंटे के लिये ढक कर रख दीजिये।

अच्छी तरह ठंडा होने के बाद तुलसी का शर्बत छान लीजिये, स्वादिष्ट तुलसी सुधा तैयार है। गर्मी के मौसम में ठंडा या नार्मल तापमान पर तुलसी सुधा पीजिये और सर्दियों में गरम गरम चाय की तरह से तुलसी सुधा पीजिये। तुलसी सुधा पेय को आप फ्रिज में रखकर 15 दिन तक पी सकते हैं

आसान प्रयोग: स्वमूत्र से एक महीने में डेंड्रफ और मुहांसे दोनों हो जाएंगे साफ


बढ़ते प्रदूषण या खाने-पीने की अनियमितता के कारण मुहांसे व डेंड्रफ से होने वाली परेशानी आजकल युवाओं में एक आम समस्या है। मुंहासों के कारण चेहरे पर दाग धब्बे हो जाते हैं वहीं डेंड्रफ के कारण बाल बहुत अधिक झडऩे लगते हैं।साथ ही रूखे और बेजान दिखने लगते हैं। दोनों ही समस्याओं से अगर आप भी परेशान हैं? इन्हें जड़ से मिटाना चाहते हैं तो स्वमूत्र से सस्ता और अच्छा इनका कोई इलाज नहीं है। नीचे लिखे स्वमूत्र के प्रयोग को अपनाकर आप अपने बाल व स्कीन दोनों को हेल्दी व चमकदार बना सकते हैं।

प्रयोग-

- स्वमूत्र को सिर के बालों की जड़ों में लगाकर पांच मिनट तक मालिश करके स्नान करें रूसी समाप्त हो जाएगी।

- स्वमूत्र के प्रयोग से मुंहासे भी ठीक हो जाते हैं। चेहरे पर स्वमूत्र लगाकर पांच-दस मिनट तक मसलें। आधे घंटे बाद धो लें।

- शेव करने के बाद स्वमूत्र लगाकर 15-20 मिनट मसाज करें। फिर आधे घंटे बाद धो लें। इससे चेहरे का रंग साफ होता है त्वचा चमकदार होती है।
सावधानी- स्वमूत्र का प्रयोग करते समय साबुन का प्रयोग न करें।

गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

घरेलु अमृत संजीवनी: कई जानलेवा लाइलाज बीमारियों की एक ग्यारंटेड दवा

कई बार बड़ी बीमारियों का इलाज करवाते हुए। हम थक जाते हैं लेकिन अच्छे से अच्छे और महंगा से महंगा इलाज करवाने  पर भी बीमारी ठीक नहीं हो पाती। ऐसे में हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा आजमाएं हुए सौ-प्रतिशत कारगर नुस्खे ही एक मात्र उम्मीद होते हैं। वाकई में ये नुस्खे काम भी करते हैं इन्हें आयुर्वेद की भाषा में रासायन कहा जाता है। ऐसा ही एक योग है अमृत संजीवनी रासायन योग जिसे आप घर पर ही बनाकर कई जानलेवा बीमारियों का इलाज कर सकते हैं। 

बनाने की विधि और सामग्री - अमृता, खस, नीम की छाल, मछेली, अडूसा, गोबर मुदपर्णी, सेमल, मूसली, शतावर, सभी को अलग-अलग कर  एक किलो लेकर जौकुट करके आठ गुने पानी में पकाएं। जब पानी 4 भाग शेष रह जाएं। तब एक किलो गुड़ (बिना मसाले का) अडूसा, शतावरी, आंवला, मछेली का कल्क प्रत्येक 160-160 ग्राम-काली गाय के घी में धीमी आंच पर पकाएं। 

घी मात्र जब शेष रह जाए तो छानकर खस, चंदन, त्रिजातक, त्रिकुटा, त्रिफला, त्रिकेशर ( नागकेशर, कमल केशर) वंश लोचन, चोरक, सफेद मुसली, असगंध, पाषाण भेद, धनिया, अडूसा, अनारदाना, खजूर, मुलैठी, दाख, निलोफर, कपूर, शीलाजीत, गंधक सभी दस-दस ग्राम लेकर कपड़छन करके  उपरोक्त घी में मिला दें।

मात्रा-सुबह खाली पेट 10 ग्राम घृत गौ- दूध में डालकर सेवन करें और एक घंटे तक कुछ भी ना खाएं।

गुण-सभी प्रकार के कैंसर में प्रथम व द्वितीय अवस्था तक के अलग-अलग अनुपान से, पुराना गठिया, घुटनो में सुजन व दर्द, साइटिका, अमाशय में पितरोग, नामर्दी, शुक्राणु का अभाव, शीघ्र पतन, पागलपन, अवसाद, बिगड़ी हुई खांसी, गलगंड, पीलिया, वात रोग, रक्तरोग, रसायन, वाजीकरण, श्वास रोग, गले के रोग, हृदय रोग, पिताशय की पथरी में लाभकारी। जो स्त्री रजोदोष से पीडि़त हो, जिस स्त्री के रजनोप्रवृति प्रारंभ ही न हुई हो, जो कष्ट पीडि़त हो तथा जिन स्त्रियों को बार-बार संतान होकर मर जाती हो, उन सभी को राहत मिलेगी। मासिक धर्म शुरू होकर बीच में ही बंद हो गया हो और अनेकों औषधी व मंत्रों के प्रयोग से संतान उत्पन्न न हुई हो उन्हें निश्चित ही संतान होगी।

सर्दी स्पेशल- हैरान रह जाएंगे ठंड में घी खाने के ये ढेरों फायदे जानकर

घी का नाम आते ही उसकी खुशबू ,स्वाद और न जाने क्या क्या हमारे दिलों दिमाग पर छा जाता है, हो भी क्यों न? हमने अपनी परम्परा से जो इसे पाया है। भले ही अंगरेजी में इसे क्लेरीफायडबटर के नाम से जाना जाता हो, पर देशी शुद्ध घी के अपने ही फायदे हैं। आयुर्वेद में भी घी को उदाहरण के रूप में दिया जाता है, जो संस्कारों द्वारा अपने गुणों को न छोडते हुए दूसरों के गुणों को भी अपने अन्दर समाहित कर लेता है। 16 वीं शताब्दी के ग्रन्थ भावप्रकाश पर यदि नजर डाला जाय तो इसे स्वाद को बढ़ाने वाला और ऊर्जा प्रदान करने वाला माना गया है।

शायद इसलिए हम इसे सदियों से अपने भोजन का अभिन्न हिस्सा मानते रहे हैं। घी केवल रसायन ही नहीं आपकी आँखों की ज्योति को भी बढाता है। ठंड में इसके सेवन को विशेष लाभदायी माना गया है।  इसके अपने गुणों के कारण ही मक्खन की जगह हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। हमारे देश में  बड़ी ही तसल्ली से मक्खन को धीमी आंच पर पिघलाते हुए पकाकर घी बनाया जाता है। 

इससे इसके तीन लेयर बन जाते हैं ,पहला लेयर पानी से युक्त होता है, जिसे बाहर निकाल लिया जाता है ,इसके बाद दूध के ठोस भाग को निकाला जाता है, जो अपने पीछे  एक सुनहरी सेचुरेटेड चर्बी को छोड़ जाता है ,जिसमें कंजुगेटेड लाईनोलीक एसिड पाया जाता है। यह  कंजुगेटेड लाईनोलीक एसिड शरीर के संयोजी उतकों को लुब्रीकेट करने एवं वजन कम होने से रोकने में मददगार के रूप में जाना जाता है। यह भी एक सत्य है कि, घी एंटीआक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। आयुर्वेद में घी को आतंरिक और बाह्य  दोनों ही प्रयोगों में सदियों से लाया जाता रहा है।

जोड़ों का दर्द हो, या हो त्वचा का रूखापन, या कराना हो आयुर्वेदीय पंचकर्म में शोधन, हर जगह इसका प्रयोग निश्चित है । हम जानते हैं, कि हमारा शरीर अधिकांशतया पानी में घुलनशील हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालता है। लेकिन घी चर्बी में घुलनशील हानिकारक रसायनों को हमारे आहारनाल से बाहर निकालता है। घी को पचाना आसान होता है, साथ ही इसका शरीर में एल्कलाईन फार्म में होनेवाला परिवर्तन  अत्यधिक एसिडिक खान-पान के कारण होनेवाले   पेट की सूजन (गेस्ट्राईटीस ) को  भी कम करता है। 

चूँकि धीमी आंच पर गर्म करने से दूध के ठोस तत्व बाहर निकल  जाते हैं, इसलिए यह लेकटोज फ्री होता है, और यह उन लोगों के लिए भी खाने योग्य है जिन्हें  साधारण डेयरी प्रोडक्ट हजम नहीं होते हैं। घी मेध्य है ,अर्थात हमारी बुद्धिमता (आई.क्यू,) को बढाता है ,और तंत्रिकाओं को पोषण देता है।इन्ही गुणों के कारण आयुर्वेदिक चिकित्सक इसे अवसाद,एंजायटी,एपीलेप्सी आदि मानसिक स्थितियों में प्रयुक्त कराते हैं।इसे गर्भवती महिलाएं भी ले सकती हैं तथा अपनी आनेवाली संतान को गुणवान एवं बुद्धिमान प्राप्त कर सकती हैं

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