मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

छोटी इलायची के बड़े कमाल: हो जाएंगी ये खतरनाक बीमारियां छू-मंतर

खाने के चीजों को सुगंधित बनाने वाली और उनका स्वाद बदलने के  वाली इलाइची का उपयोग हमारे देश में सबसे अधिक किया जाता है। इलायची छोटी और बड़ी दो प्रकार की होती हैं। बड़ी इलायची हल्की रूखी गर्म है। कफ पित्त, रक्तविकार खुजली, श्चास मूत्राशय के रोगों को दूर करती है। लेकिन ज्यादातर छोटी इलायची का उपयोग औषधी के रूप में किया जाता है। प्यास, शमन, पाचन आदि में छोटी इलाइची बहुत उपयोगी है।

इसके दानों को महीन पीस कर से छींके आकर सिर की पीड़ा दूर होती है। केले का अर्जीण दूर करने के लिए एक इलाइची खा लेना काफी है। इसके 20 ग्राम छिलके आधा लीटर पानी में उबाल कर काढ़ा बनाएं। चौथाई जल शेष बचे तब ठंडा कर एक-एक चम्मच विसूचिका के रोगी को पिलाने से आराम मिलता है। नकसीर फूटने पर नाक में से खून गिरता है, इस स्थिति में इलाइची के अर्क की 2-3 बूंदे बताशे में डालकर 2-2 घंटे से खिलाने पर नकसीर ठीक हो जाती है। इलायची के 5 तोला बीज, बादाम और पिस्ता के साथ भिगोकर महीन पीस लें। 

इसे दूध में पकाएं जब गाढ़ा हो जाए तो 3 पाव मिश्री मिलाकर धीमी आंच में पकने दें। जब हलवा जैसा हो जाए तो सेवन करें। इससे आंखों की कमजोरी दूर होती है। स्मरण शक्ति बढ़ती है।ककड़ी के बीज और इलायची के दाने समान मात्रा में मिलाकर  5-10 ग्राम मात्रा लेकर खूब चबाकर खाने या दूध में घोंट छान कर पीने से पथरी व मूत्रदाह में  लाभ होता है।इलायची बीज का चूर्ण और इसबगोल की भूसी समभाग में मिलाएं और आंवले के रस में यह मिश्रण डालकर बैर जैसी गोलियां बना लें। 

एक-एक गोली सुबह-शाम गाय के दूध से लें। इसके सेवन से स्वप्नदोष की समस्या दूर होती है।छोटी इलायची सुगंध से भरपूर होती है, इसलिए इसका इस्तेमाल माउथ फ्रेशनर के रूप में किया जाता है।कैफीन से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने में यह छोटी इलायची बड़े काम की चीज होती है। यह शरीर के शुध्दीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला अद्भुत मसाला होती है।यह शरीर में कफ बनने से रोकती है, इसके अलावा यह कफ, वात, पित्त तीनों के दुष्प्रभावों को रोकने में मददगार होती है।शरीर में श्वांस संबंधी रोगों को दूर करने में यह सहायक होती है।

यदि आप अस्थमा या खांसी से परेशान हैं तो थोड़ी सी इलायची का पाउडर शहद के साथ खाएं।छोटी इलायची शरीर में गैस उत्पन्न करने वाले रसायनों के प्रभाव को कम करती है और शरीर में एसिड के स्तर को नियंत्रित करती है।यह मसूड़ों और दांतों संबंधी इंफेक्शन से बचाव करने में भी सहायक होती है।छोटी इलायची से शरीर में होने वाली अशुध्दियों में कमी आती है।यदि आप मूत्र संक्रमण संबंधी समस्याओं से परेशान हैं तो थोड़ी सी छोटी इलायची को आंवला, दही या शहद के साथ मिलाकर खाएं। 

एसीडिटी होने पर कच्चे दूध पानी की लस्सी में इलाइची घोंट पीसकर प्रतिदिन पीने से लाभ होता है। गर्मी से सिर चढऩे,दुखने और भारी होने पर इलायची के दाने पानी में पीस कर माथे पर लेप करने और इसका चूर्ण सूंघने से आराम होता है।इलायची का चूर्ण एक माह तक या इसके तेल की 5 बूँद अनार के शर्बत के साथ पीने से जी घबराने और उल्टियाँ होने जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। यह इलाज हैजा में भी लाभकारी है।

कुछ नायाब नुस्खे: ये हैं सारी स्कीन प्रॉब्लम्स के निदान आपके लिए

आप शायद जानते हैं, कि हमारे शरीर में देश की ही तरह सुरक्षा की एक पंक्ति होती है ,जो धूल धुंए एवं विभिन्न विकिरणों एवं रसायनों के एक्सपोजर से शरीर को बचाती है। रक्षा की इस अग्रिम पंक्ति का नाम है, त्वचा। इसकी महत्ता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं, कि जब यही त्वचा जलकर नष्ट हो जाती  है, तो हमारा शरीर तमाम संक्रमणों के लिए एक खुला दरबार बन जाता है। 


स्किन पर पिम्पल्स होने की समस्या 
 हम कुछ नायाब नुस्खे बताते हैं। आप इनमें से किसी एक का प्रयोग करें 

1: तुलसी का रस ,पुदीने का रस ,चन्दन का पाउडर एवं गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगायें,तथा 15-20 मिनट बाद चेहरे को धो लें ,पानी पर्याप्त मात्रा में पीएं,रक्त शोधक प्राकृतिक औषधी जैसे खदिर ,नीम ,हल्दी आदि का सेवन करें निश्चित लाभ मिलेगा।

2.हल्दी एक चम्मच एवं नींबू का रस एक चम्मच लेकर पिम्पल्स वाली जगह पर लगायें।

3. हल्दी के पाउडर को शहद के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें तथा इसे रात में सोने से पहले प्रभावित हिस्से में लगायें,प्रात:काल इसे धो लें और ऐसा लगातार दो सप्ताह तक करें आपको पिम्पल्स से निजात मिल जाएगी।

4.कच्चा पपीता बीज सहित जूस बनाकर पिमप्ल्स पर लगायें आपको निश्चित लाभ मिलेगा।

5.एक भाग गुलाब जल,एक भाग नींबू का रस मिलाकर पिम्पल्स पर लगायें 20-30 मिनट छोड़ दें ,गुनगुने पानी से चेहरा धो लें यह भी काफी फायदेमंद घरेलु उपचार है।   

- ब्लैक  हेड्स है ,यह चेहरे पर काले धब्बे के रूप में दिखता है, इनमें से कोई एक घरेलु टिप्स 
आपको ब्लैक हेड्स से निजात दिलायेगी :-

1. आप चावल का आंटा,जौ का आंटा दरदरा पीस कर दूध में भिंगोकर हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज करें ,इसके अलावा पानी का भाप चेहरे पर लें आपको इस समस्या से छुटकारा मिलेगा।

 2. एक भाग नींबू का रस एवं एक भाग मूंगफली का तेल मिलाकर प्रभावित हिस्से में लगायें, ब्लैक हेड्स को ठीक करने के लिए यह अचूक नुस्खा है।

3. केवल उबले दूध में नींबू का रस मिलाकर भी चेहरे पर लगाने से  ब्लैक हेड्स एवं क्रेक (फटी हुई ) स्किन में लाभ मिलता है।

4.मूली के बीज का पाउडर का पेस्ट बनाकर हल्के हाथों से चेहरे पर लगायें,इससे भी ब्लैक हेड्स निकल  जाते हैं।

- व्हाईट हेड्स का उपचार ये  चंद  घरेलु प्राकृतिक उपाय हैं, जिन्हें आप सब आजमायें :-

1. कच्चे आलू को ग्राईंड कर पिप्म्पल्स,व्हाईट हेड्स या ब्लैक हेड्स पर लगायें और  देखें इसका फायदा।

2.अन्नानास के छिलके का पाउडर भुनकर पेस्ट  बनाएं और  नींबू के रस के साथ मिलाकर चेहरे पर लगायें आपको व्हाईट हेड्स से मुक्ति मिल जाएगी। 

3.सहिजन की फली और पत्तियों  का पेस्ट बनाकर आप यदि चेहरे पर  लगायें तो व्हाईट हेड्स ,ब्लैक हेड्स एवं पिम्पल्स सभी में लाभ मिलता है।

-आपकी स्किन तैलीय  है,आप अधिक तले भूने खान पान से बचें ,आधा चम्मच नींबू का रस तथा खीरे का रस नहाने से आधे घंटे पहले चेहरे पर लगायें यह उपचार आपके लिए फायदेमंद रहेगा। ओईली स्किन के लिए 
मड-क्ले मास्क का प्रयोग  भी उपयुक्त है। नींबू का रस समान भाग पानी के साथ मिलाकर घोल तैयार कर चेहरे पर लगाएं , अब  पहले गुनगुने पानी से फिर ठन्डे पानी से चेहरे को धोएं आपको निश्चित लाभ मिलेगा।
-
 चेहरे की त्वचा का टोन कम हो जाना, यानि झुर्रियों से संबंधित है ,ऐसी ही कुछ समस्या  निम्न   सरल उपाय आप आजमायें :-
1. अंडे के पीले  हिस्से (यॉक) को सप्ताह में एक बार चेहरे पर लगायें।

2. शहद ,ओलीव आयल को नित्य चेहरे पर लगाना अत्यंत फायदेमंद रहेगा।

आप पानी और दूध खूब पीयें ,योग एवं प्राणायाम का अभ्यास नित्य करें ,आपकी त्वचा झुर्रियों से मुक्त हो जायेगी ,आप किसी भी प्राकृतिक मॉइस्चराईजर का प्रयोग कर सकते हैं। 

-अपने चेहरे पर आये एक बड़े तिल से निजात पाने का उपाय 
 इस पर हल्दी एवं खाने वाला चूना तिल के ऊपर  लगाकर रात भर छोड़ दें ,संभवत: यह अपने आप ही गिर जाएगा ,मुहांसों के दाग हटाने के लिए ऊपर बताये गए उपायों में से किसी एक का प्रयोग करें।
 
आप प्रोटीन एव विटामिन -ई युक्त आहार का सेवन करें तथा उपरोक्त घरेलु टिप्स में से किसे एक का चयन कर नियमित प्रयोग करें।

1. नींबू एवं संतरे के छिलकों को सुखा लें इनका पाउडर बनाकर गुलाब जल एवं दही के साथ मिलाकर दाग धब्बों वाले हिस्से में लगायें आपको निश्चित ही लाभ मिलेगा।

2. टमाटर के रस को नींबू के रस के साथ मिला लें, इसे एक बोतल में फ्रिज में रख दें ,अब  इसे  नियमित रूप से रुई के फायदे की मदद से दाग वाले हिस्सों में लगायें ,आपके दाग धब्बे धीरे-धीरे गायब हो जायेंगे।

 

सोमवार, 5 दिसंबर 2011

कैसा भी हो दर्द और सूजन ये देहाती नुस्खा है पक्का शर्तिया इलाज

किसी भी प्रकार की भीतरी और बाहरी सूजन को दूर करने, दर्द और गैस को दूर करने के लिए उपयोगी निर्गुण्डों की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। इसका पौधा सारे भारत मे, विशेषकर गर्म प्रदेशों में पाया जाता है। आयुर्वेद में कहा गया है-

सिन्दुक: स्मृति दस्तिक कषाय: कटुकोलघु।

केश्योनेत्र हितोहन्ति शूल शोथाम मारुतान्।  

कृमि कुष्टारुचि श्लेष्व्रणन्नीला हितद्विधा।।

सिंदुरवारदलं जन्तुवात श्लेष्म हरं लघु। 

इस तरह के पौधे की गंध तीव्र और अरूचिकर गंध आती है। इसका सबसे ज्यादा उपयोग सूजन दूर करने में किया जाता है। हर प्रकार की सूजन दूर करने के लिए प्रयोग विधि इस प्रकार है।

 प्रयोग- इसके पत्तों को पानी में उबालें। जब भाप उठने लगे तब बरतन पर जाली रख दें। दो छोटे कपड़े पानी में भिगोकर निचोड़ ले। तह करके एक के बाद एक जाली पर रख कर गर्म करें। सूजन या दर्द के स्थान पर रख कर सेंक करें। चोंट मोंच का दर्द, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द और वात प्रकोप के कारण होने वाला दर्द दूर करने के लिए यह उपाय बहुत गुणकारी है। कफ,बुखार व फेफड़ों में सूजन को दूर करने के लिए इसके पत्तों का रस निकालकर 2 बड़े चम्मच मात्रा में, 2  ग्राम पिसी पिप्पली मिलाकर दिन में दो बार सुबह शाम पीएं व पत्तों को गर्म कर पीठ पर या छाती पर बांधने से आराम होता है।

एंटीबायोटिक भी कुछ नहीं लगते खराश मिटाने वाले इन रामबाण उपायों के आगे


गले में खराश की समस्या सामान्य रूप से वाइरस या बैक्टिरिया के संक्रमण के कारण होती है। कभी - कभी एंटिबायोटिक्स लेने पर भी खराश पीछा नहीं छोड़ती है। माना जाता है ऐसा पेट के एसिड में अनैसर्गिक कमी होने का कारण हो सकता है। ऐसे में घरेलु उपचार ही सबसे कारगर होते हैं। अगर लंबे समय से गले की खराश से परेशान हैं तो नीचे लिखे उपाय जरूर अपनाएं।



- 1-2 लहसुन की कलियाँ और 2लोंग ले कर उसका पेस्ट बनाये और उसे 1 कप मधु के साथ मिलाएं। इस घोल का 1 चम्मच सुबह शाम सेवन करें।



- गरम दूध में जरा सा हल्दी पावडर मिला के सोने से पहले सेवन करने पर भी आराम मिलता है।



- एक पूरा प्याज को थोड़े से पानी में उबालें।उसके बाद उसे पीस कर उसमे थोड़ा मक्खन नमक मिला ले और इस पेस्ट का सेवन करें। एक बार में ही आराम मिल जायेगा।



- शहद में अदरक का रस मिलाकर सेवन करें।



- सौंफ  चबाने से भी गले की खराश दूर होती है।



- तुलसी की पत्तियों को उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है।

सौ प्रतिशत कामयाब नुस्खा: ये कर देगा हाइब्लडप्रेशर और अनिद्रा की छुट्टी


 व्यस्त, तनावग्रस्त और अनियमित दिनचर्या की वजह से स्वास्थ्य को बिगाडऩे वाले अनेक रोग आज बहुतयात में लोगों को परेशान किए हुए है। आमतौर पर देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति ऐसे किसी रोग से पीडि़त हो जाता है, तो अन्य कई बिमारीयां उसे घेर लेती हैं।

आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां हैं, जो इन रोगों पर प्रभावी नियंत्रण करके शरीर को स्वस्थ बनाती है। कुछ ऐसी ही जड़ी बूटियों के मिश्रण से तैयार नुस्खा यहां बताया जा रहा है, जो उच्चरक्तचाप, अनिद्रा, मानसिक तनाव, दिल की धड़कनों का बढऩा, शरीर में जलन सी रहना आदि व्याधियों पर बहुत असरकारक  है।

सामग्री- अश्वगंधा, जटामांसी, नागरमोथा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, पुष्कर मूल, तगर, कपूर कचरी और बड़ी इलायची।

बनाने की विधि- इन सबकी बराबर-बराबर मात्रा लेकर कूट-पीसकर कपड़े से छान कर महीन चूर्ण तैयार कर लें। बस तैयार है, अनमोल नुस्खा। इसे साफ -सूखी शीशी में भरकर रख दें। रोग तथा रोगी की स्थिति के अनुसार डेढ़ से 3 ग्राम तक की मात्रा में रात में सोने से पहले पानी से लें। यदि रोग बढ़ा हुआ है, तब दिन में भी एक बार इतनी ही मात्रा में और ले सकते हैं। आयुर्वेदिक पद्धति पर आधारित उक्त नुस्खा भले ही तुरंत असर न दिखाए लेकिन यह रोग की जड़ पर प्रहार कर धीरे-धीरे उसे खत्म कर देता है।

ये है बिना दवाई, जवान रहने का अनोखा और कमाल का आसान तरीका

अगर आप बिना दवाई के हमेशा जवान बनें रहना चाहते है तो आपके लिए सबसे आसान और बिना खर्च का तरीका बताया जा रहा है। इस अनोखे तरीके से आप हमेशा जवान बने रहेंगे। ये आयुर्वेद का खास तरीका है। इसे करने में आपको परेशानी भी नहीं होगी न ही किसी प्रकार का कोई खर्च आपको करना पड़ेगा। इस प्रयोग से आपके चहरे पर हमेशा जवानी की चमक बनी रहेगी।



इस अनोखे तरीके में आपको सीत्कार का शब्द करते हुए सांस लेना है। इस अनोखे तरीके में आपको नाक से सांस नहीं लेना है बल्कि मुंह और होठों को गोलाकार बनाना है। जीभ के दाएं और बाएं के दोनों किनारों को इस प्रकार मोडऩा है कि जीभ का आकार गोलाकार हो जाए। इस गोलाकार जीभ को गोल किए गए होठों से मिलाकर इसके कोने को तालू से लगाना है। अब सीत्कार के समान आवाज करते हुए मुंह से सांस लें। फिर सांस रोक के नाक के दोनों छेदों से सांस छोड़ें । बार बार इस क्रिया को दोहराएं। इसे बैठकर या खड़े होकर भी किया जा सकता है। इस तरीके को आयुर्वेद में सीत्कारी प्राणायाम कहा जाता है।



क्या फायदा होता है इससे :इस अनोखे तरीके से आपके चेहरे पर चमक उत्पन्न हो जाती है। दिनभर स्फूर्ति और उत्साह बना रहता है। इसके नियमित अभ्यास से अनेक प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती है। नींद न आना, आलस और भूख-प्यास की समस्या खत्म हो जाती है। चेहरे की झुर्रियां समाप्त होकर त्वचा सुंदर बन जाती है। 

रविवार, 4 दिसंबर 2011

सुडौल बॉडी के लिए: इस नुस्खे के आगे अच्छे से अच्छे टॉनिक भी नहीं टिकेंगे





स्नायु दौर्बल्य, नपुसंकत्व,क्षीणशक्तिता, काम के प्रति अरूचि आदि कुछ ऐसी समस्याएं हैं। जिनसे कान्फिडेंस में कमी आती है। साथ ही मन को नैराश्य के भाव घेरने लगता है। लेकिन घबराए नहीं अगर आपके साथ भी शारीरिक बल से जुड़ी या कमजोरी की समस्या हो तो नीचे लिखे आयुर्वेदिक उपाय को जरूर अपनाएं।

सामग्री- वट वृक्ष की जटा का अग्रिम लाल रंग वाला भाग लेकर छाया में सुखाकर पीस लें। इस पिसे हुए चूर्ण की 100 ग्राम मात्रा लेकर उसको खरल में डालकर रोज 10 ग्राम वट का दूध डालकर खरल करते जाएं। इस प्रकार एक माह में 300 ग्राम दुग्ध खरल हो जाएगा। तब नुस्खा श्रेष्ठ फल देगा, यदि इतने दिन तक खरल करना संभव न हो तब 15 दिन तक खरल करना संभव हो तब 15 दिन में 150 ग्राम वट दुग्ध खरल करके 300 मि.ग्राम मात्रावत् गोलियां बनाकर रख लें।

सेवन विधि- एक-एक गोली सुबह शाम दूध, मधु, मक्खन, अथवा मलाई के साथ मिलाकर खाएं। 

गुण व उपयोग- इसके सेवन से शरीर का ढीलापन दूर होता है। शरीर सुडौल व सुगठित बनता है। कमजोरी मिटती है। पौरुष शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा इस  औषधी के नियमित सेवन से गैस्ट्रीक प्रॉब्लम्स भी धीरे-धीरे मिटती जाती है। अच्छे से अच्छे टॉनिक भी इस दवाई के आगे नहीं टिक पाता है।

Featured post

बीमारी क्यों आती है?

 हर वस्तु, हर विचार, हर #व्यापार, हर #रिश्ता – सब कुछ #पंचतत्व से बना है। नाम बदले, रूप बदले, स्वाद बदले – लेकिन #तत्व नहीं बदलता। चावल व...