रविवार, 11 दिसंबर 2011

इस लाजवाब फल के एक ग्लास ज्यूस से मिलेगी इन बड़े रोगों से मुक्ति

फल विटामिन से भरपूर होते हैं। इसीलिए बेहतर स्वास्थ्य के लिये बेहद फायदेमंद होते हैं। हाल ही में हुआ एक नवीन वैज्ञानिक शोध यह सिद्ध करता है कि फल न केवल स्वस्थ रहने के लिये बल्कि बीमार होने पर उससे छुटकारा पाने में भी काफी कारगर होते हैं। 

अनार भी एक ऐसा ही फल है जिसका स्वाद तो लाजवाब है ही साथ ही नियमित रूप से इसका ज्यूस लेने के भी अनेक फायदे हैं। तनाव आज एक मानसिक रोग के रूप में व्यापक महामारी का रूप लेता जा रहा है। मानसिक तनाव ही आगे चलकर अनिद्रा, डिप्रेशन, फ्रस्टेशन जैसी बीमारियों का रूप ले लेता है। 

सुखद समाचार यह है कि तनाव और तनाव से पैदा होने वाली दूसरी तमाम बीमारियों में अनार फल का ज्यूस बेहद फायदेमंद होता है। अगर आप वर्क प्रेशर से जूझ रहे हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है रोज एक ग्लास अनार का जूस पीना शुरु कर दीजिए वर्क प्रेशर कम हो जाएगा। ब्रिटेन के मारग्रेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि रोज आधा लीटर अनार का ज्यूस लेने से ब्लड प्रेशर सामान्य बना रहता है साथ ही यह स्ट्रेस हार्मोन भी व्यक्ति पर हावी नहीं होता है। 

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर आप तनाव से जूझ रहे हैं तो दो सप्ताह तक अनार का जूस रोज पिएं। तनाव दूर हो जाएगा।यूं तो सभी फलों के जूस में अलग अलग फायदे हैं लेकिन अनार का ज्यूस तनाव से मुक्त रखने में सर्वाधिक कारगर मददगार की भूमिका निभाता है। ब्लड प्रेशर, स्ट्रेस, अनिद्रा, फ्रस्टेशन, डिप्रेशन आदि समस्याओं में ताजा अनार ज्यूस बहुत तेजी से फायदा पहुंचाता है। इसलिये इनमें से किसी भी रोग से ग्रसित व्यक्ति को इसे तत्काल अपने रुटीन में शामिल करना चाहिये।

धनिये की पत्तियों में छुपा है सेहत का खजाना इन बीमारियों में होती है मददगार

धनिये की हरी-हरी पत्तियों की सुगंध किसी भी व्यंजन की सुंगध और उसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है। सब्जियों में हरे धनिये के साथ ही सुखे धनिये का उपयोग भी भारतीय भोजन में बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है। 

लेकिन हरे धनिए की कोमल पत्तियां सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं डाली जाती बल्कि इनका औषधीय महत्व भी है। इसका सेवन जाने-अनजाने ही आपको कई बीमारियों से निजात भी दिलाता है। आइये जानें कि धनिया किन-किन बीमारियों या परेशानियों में मददगार हो सकता है... 

- आंखों के लिए धनिया बड़ा गुणकारी होता है। थोड़ा सा धनिया कूट कर पानी में उबाल कर ठंडा कर के, मोटे कपड़े से छान कर शीशी में भर लें। इसकी दो बूंद आंखों में टपकाने से आंखों में जलन, दर्द तथा पानी गिरना जैसी समस्याएं दूर होती हैं। 

- हरा धनिया 20 ग्राम व चुटकी भर कपूर मिला कर पीस लें। सारा रस निचोड़ लें। इस रस की दो बूंद नाक में दोनों तरफ टपकाने से तथा रस को माथे पर लगा कर मलने से खून तुरंत बंद हो जाता है। 

- गर्भ धारण करने के दो-तीन महीने तक गर्भवती महिला को उल्टियां आती है। ऐसे में धनिया का काढ़ा बना कर एक कप काढ़े में एक चम्मच पिसी मिश्री मिला कर पीने से जी घबराना बंद होता है।

- पित्त बढ़ जाने से जी मिचलाना रहता हो तो हरा धनिया पीसकर उसका ताजा रस दो चम्मच की मात्रा में पिलाने से लाभ होता है। भोजन में हरे धनिये की ताजी पिसी चटनी का प्रयोग करते रहने से भी जी मिचलाना कम होता है। 

- धनिये की हरी पत्तियों को लहसुन, प्याज, गुड़, इमली, अमचूर, आंवला, नींबू, पुदीना आदि के साथ बारीक पीसकर चटनी के रूप में खाते रहने से पाचन क्रिया दुरुस्त बनी रहती है तथा भूख खूब लगती है। 

- सामान्य त्वचा रोगों तथा मौसम के बदलाव पर यदि खुजली होती हो तो उस स्थान पर हरे धनिया को पीसकर लगाने से खुजली दूर हो जाती है। 

- पित्त बढ़ जाने पर हरी-पीली उल्टियां आनी शुरू हो जाती हैं। इस अवस्था में हरे धनिया का रस निकालकर उसमें गुलाब जल मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

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आजकल अत्याधिक काम के बोझ व कम नींद ले पाने के कारण कम समय में थकान हो जाना कमजोरी महसूस होना आदि एक आम समस्या है। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो योगा करना आपके लिए बहुत जरूरी है। अगर आपके पास नियमित रूप से योगासन करने के लिए अधिक समय नहीं है तो इस आसन को सुबह-शाम 5 मिनट से शुरुआत कर धीरे-धीरे 15 मिनट तक समय बढ़ाते हुए रोज करें और पाएं चमत्कारिक असर।

 विधि- कर्ण पीड़ासन आसन का अभ्यास एकांत व साफ-स्वच्छ जगह पर करना चाहिए। इस आसन के लिए नीचे जमीन पर दरी य चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं। अब पूरे शरीर को ढीला छोड़ें। दोनों हाथों को दोनों बगल में कमर के पास लगाकर सीधा रखें तथा हथेलियों को नीचे की तरफ करके रखें। अब दोनों पैरों को एक साथ उठाकर धीरे-धीरे ऊपर सिर की ओर लाएं। अब दोनों पैरों को दोनो कान से सटाकर सिर के दोनों ओर रखें तथा पंजे व घुटनों को नीचे फर्श से टिकाकर रखें। इस स्थिति में कुछ देर तक रहे, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं और कुछ समय तक आराम करें। इसके बाद फिर इस क्रिया को करें। इस क्रिया को प्रतिदिन 5 बार करें।



लाभ-इस आसन के अभ्यास से स्नायु तंत्र (नर्वससिस्टम) मजबूत तथा क्रियाशील बनता है। यह आसन सुषुम्ना में मौजूद सभी नाडिय़ों को जगाता है, जिससे शरीर का रोम-रोम जाग उठता है। इस आसन को करने से पूरा शरीर स्वस्थ, शक्तिशाली तथा सक्रिय बना रहता है।

पुरुषों की सारी प्रॉब्लम्स को दूर कर देगा ये आसान तरीका

क्या आप दुर्बलता या कमजोरी से परेशान हैं?आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल नहीं है। सारी दवाओं और तेल का उपयोग करने के बाद भी कोई असर नहीं हो रहा है तो योग आपकी मदद कर सकता है। आप रोजाना नीचे लिखा

योगासन करें आपकी सारी समस्या बिना दवा के ही खत्म हो जाएगी।

आसन की विधि-आसन का अभ्यास स्वच्छ व साफ हवादार जगहो पर करें। 

आसन को करने के लिए नीचे दरी या चटाई बिछाकर बैठ जाएं। अब दाएं पैर को घुटने से मोड़कर पीछे की ओर ले जाएं और घुटने व पंजे को जमीन पर टिकाते हुए उस पर नितम्ब (हिप्स) रखकर बैठ जाएं। इसके बाद बाएं पैर को मोड़कर दाईं जांघ पर रखें। इसके बाद पूरे शरीर का भार दाएं पैर व घुटनों पर डालकर संतुलित करें। 

इस आसन की शुरूआती अवस्था में कठिनाई हो तो सहारे के लिए दीवार आदि का सहारे ले सकते हैं। अब अपने दोनों ह़ाथों को कमर पर रखकर जितनी देर सांस को रोक सके रोके और उसके बाद धीरे-धीरे सांस को छोड़े। आसन की इस स्थिति में अपनी दृष्टि को दोनों आंखों के बीच में लगाएं और मन को एकाग्र करें तथा भगवान का चिंतन करें। बाहरी चिंता को अपने मन में न आने दें। आसन की इस स्थिति में कुछ देर रहने के बाद यह क्रिया दूसरे पैर से भी करें।



विशेष- इस आसन को आरम्भ में करना कठिन होता है इसलिए आसन के शुरूआती अभ्यास में दीवार आदि का सहारा लें सकते हैं। इस आसन का प्रतिदिन अभ्यास करने से आसन करने में आसानी होती है। इस आसन में शारीरिक संतुलन बनाना आवश्यक है।



आसन से रोग में लाभ-अच्छे जीवन के लिए तथा स्वस्थ शरीर के लिए यह आसन अधिक लाभकारी है। इसके अभ्यास से गुदा व गुप्तेन्द्रिय के भीतरी अंग पुष्ट होते हैं। इस आसन से वीर्यनलिका पर दबाव पडऩे से अनैच्छिक वीर्यपात नहीं होता तथा स्वप्नदोष भी दूर होता है। प्रमेह तथा कामेंद्रियों का आन्तरिक प्रवाह सक्रिय होता है साथ ही कमजोरी भी दूर होती है।

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

बादाम के आयुर्वेदिक प्रयोग: सर्दी में इन्हें अपनाकर पाएं तलवार सा तेज दिमाग

उम्र चाहे कोई भी हो भूलने की समस्या आजकल बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सब में देखी जा सकती है। खान-पान मौसम के अनुसार न होने के कारण व अत्याधिक काम के बोझ के कारण याद्दाश्त का कमजोर होना एक आम समस्या बन गई है। हर आदमी अपनी भूलने की आदत से परेशान है लेकिन अब आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि बादाम के ये आयुर्वेदिक प्रयोग अपनाकर आप भी इस बीमारी से मुक्ति पा सकते हैं।

- भीगे हुए बादाम को काली मिर्च के साथ पीस लें या ऐसे ही खूब चबाचबाकर खाएं और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें।

- बादाम की छिलका रहित गिरी 100 ग्राम को गाय दूध 200 ग्राम में अच्छी तरह पीस लें। इसमें 400 ग्राम मिश्री मिलाएं और कलईदार या स्टील के पात्र में धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक पकाएं। फिर नीचे उतार कर चौड़े मुंह वाले पात्र में भरकर खूब घोंटे। जब ये श्वेत रंग का तैयार खमीरा खूब गाढ़ा हो जाए तब इसमें चांदी के वर्क तथा दस ग्राम छोटी इलायची का महीन चूर्ण मिला दें। ठण्डा होने पर कांच की बरनी में भर दें। इस प्रकार तैयार खमीरा बादाम की 10 से 30 ग्राम तक मात्रा प्रात: सेवन करते रहे दिमागी कमजोरी दूर हो जाती है।

- सात बादाम के रात को भिगोकर सुबह छिलका उतार कर बारीक पीस लें । इस पेस्ट को करीब 250 ग्राम दूध में डालकर तीन बार उबाल लें। इसके बाद इसे नीचे उतार कर एक चम्मच घी और दो चम्मच शक्कर मिलाकर ठंडा कर पीएं। 15 से 20 दिन तक इस विधि को करने से याददाश्त तेज होती है।

- एक चाय का चम्मच शंखपुष्पी का चूर्ण दूध या मिश्री के साथ रोजाना तीन से चार हफ्ते तक लें।

बुधवार, 7 दिसंबर 2011

सर्दी में होंठों को गुलाबी बनाएं व मुस्कुराहट को बचाएं इन नुस्खों के साथ

चाहे सर्दी हो या गर्मी किसी किसी के होंठ मौसम के बदलते रुख को सह नहीं पाते और फट जाते हैं। यहां तक की ये अपने निशान भी छोड़ देते हैं। बहुत सी महिलाएं अपने होठो को सुन्दर दिखाने के लिए लिपस्टिक का प्रयोग करती हैं। लेकिन लिपस्टिक के लगातार प्रयोग से अक्सर होठों की प्राकृतिक सुन्दरता खत्म हो जाती है और होठ काले पडऩे लगते हैं। अगर आप अपने होठों के फटने या कालेपन से परेशान हैं तो टेंशन न लें, नीचे दिए जा रहे कुछ आसान घरेलू नुस्खों से आप अपने होठों की सुन्दरता को चार चांद लगा सकते हैं। 
- अगर आपके होठ हमेशा रूखे रहते हैं तो थोड़ी सी मलाई में चुटकी भर हल्दी मिलाकर धीरे धीरे होठो पर मालिश करें होठों को फटने से बचाने के लिए रात में सोते समय सरसों के तेल को गुनगुना कर अपनी नाभि पर लगाएं। 
- अगर आपके होठों पर पपड़ी जम जाती है तो बादाम का तेल रात को सोते समय होंठो पर लगाएं। 
- गुलाब की पंखुडिय़ों को पीसकर उसमें थोड़ी सी ग्लिसरीन मिलाकर। इस मिक्सचर को रोजाना अपने होंठों पर लगाएं होंठों का कालापन जल्दी ही दूर होने लगेगा और लिपस्टिक लगाना बन्द कर दें। 
- दही के मक्खन में केसर मिलाकर होठों पर मलने से आपके होठ हमेशा गुलाबी रहेंगे।

बस दूध पीने के तरीके में इतना सा बदलाव कर पाइए सालों पुरानी कब्ज से छुटकारा

 तनाव, सही डाइट न लेने, खराब रुटीन, नींद पूरी न होने की वजह से अक्सर कब्ज की शिकायत हो जाती है। इससे शरीर में आलस रहता है और पेट व सिर में भी जोरों का दर्द होता है। इसके अलावा, और भी दूसरी बीमारियां शरीर में घर कर जाती हैं। अगर आप भी सालों पुरानी कब्ज की बीमारी से परेशान हैं तो इससे बचने के लिए इस नीचे लिखा नुस्खा जरूर अपनाएं:

 नुस्खा- कब्ज की शिकायत आमतौर पर देखी जाती है। बच्चों से लेकर वृद्ध तक इससे पीडि़त रहते हैं। मार्केट में जो भी कब्ज निवारक मिलते हैं। उनका बार-बार सेवन करना बहुत नुकसान पहुंचाता है। लोग कब्जनाशक चूर्ण खाने की आदत सी बना लेते हैं। रोज चूर्ण खाने वालों की आंते अपनी कार्यक्षमता गवां बैठती हैं। फिर बिना चूर्ण खाए उनका पेट ठीक नहीं रहता। 

जो लोग कब्ज से ज्यादा परेशान रहते हैं, जिन्हें लंबे समय से कब्ज बना रहता है। जो बार-बार कब्ज रहने से दुखी हैं, उनके लिए बादाम का तेल बेहतर रहता है। इससे आंत की कार्यक्षमता बढ़ती है। रात के समय गरम दूध में बादाम तेल की 3 ग्राम मात्रा मिलाकर सेवन करें।  प्रतिदिन तेल की मात्रा थोड़ी-थोड़ी बढ़ाकर 5-6 ग्राम तक ले जाएं। कुछ दिनों तक इसका सेवन करते रहने से बरसों बरस से परेशान कर रहा कब्ज भी खत्म हो जाता है।

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बीमारी क्यों आती है?

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