मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

थोड़े से शहद का ये नुस्खा दिल की बीमारियों के लिए है रामबाण

हृदय रोग आज के समय में किसी भी उम्र को अपना शिकार बना सकता है ,यह रोग आज भी मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। आधुनिक विज्ञान में हृदय रोगों को कार्डीयकडीजीज के नाम से जाना जाता है। 

हृदय रोगों में कोरोनरीहार्टडीजीज, कार्डीयोमायोपैथी, कार्डीयोवास्कुलरडीजीज, इस्चमीकहार्टडीजीज, हार्टफेलियर आदि अनेक रोग आते हैं। आज आपको हम एक अनुभूत प्रयोग (नुस्खा )बताते हैं,जो हृदय से सम्बंधित अनेक समस्याओं में कारगर है :-

-  घृतकुमारी के रस ,तुलसी के पत्ते के रस,पान के पत्ते का रस,ताजे गिलोय के पंचांग का  रस ,सेब का सिरका  एवं लहसुन की कली इन सबको समान मात्रा में उबालकर एक चौथाई शहद के साथ उबाल लें और नियमित एक चम्मच खाली पेट लें ,आपको हृदय रोगों से बचाव सहित रोगजन्य स्थितियों में हृदय को मजबूती प्रदान करने वाला अनुभूत योग है, यह ,आप प्रयोग करें और हृदय रोगों से बचे रहें।

छोटा सा आसान प्रयोग: अपनाकर डाइबिटीज को रखें कंट्रोल में हमेशा

वर्तमान समय में हर उम्र वाले लोगों में डाइबिटीज के रोगी देखे जा सकते हैं। डाइबिटीज एक ऐसा रोग है जो अगर एक बार इंसान को लग जाए तो उसे जिंदगी भर दवाईयां खानी पड़ती है। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो योग के कटिचक्रासन के माध्यम से आप इस पर काबू पा सकते हैं।



कटिचक्रासन पहली विधि- कटिचक्रासन का अभ्यास करने के लिए पहले सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच डेढ़ से दो फुट की दूरी रखें। अब कंधों की सीध में दोनों हाथों को फैलाएं। इसके बाद बाएं हाथ को दाएं कंधे पर रखें और दाएं हाथ को पीछे से बाईं ओर लाकर धड़ से लपेटे। सांस क्रिया सामान्य रूप से करते हुए मुंह को घुमाकर बाएं कंधों की सीध में ले आएं। इस स्थिति में कुछ समय तक खड़े रहें और फिर दाईं तरफ से भी इस क्रिया को इसी प्रकार से करें। इस क्रिया को दोनों हाथों से 5-5 बार करें। ध्यान रखें कि कमर को घुमाते हुए घुटने न मुड़े तथा पैर भी अपने स्थान से बिल्कुल न हिलें।

दूसरी विधि- इसके लिए पैरों के बीच 1 फुट की दूरी रखकर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को कंधों की सीध में सामने की ओर करें तथा दोनों हथेलियों को आमने-सामने रखें। अब सांस सामान्य रूप से लेकर हाथों को धीरे-धीरे घुमाकर दाईं बगल में कंधे की सीध में ले आएं। अब शरीर को भी धीरे-धीरे घुमाते हुए मुंह को बाईं ओर कंधे के सामने लाएं। इस स्थिति में दाएं हाथ को कंधे की सीध में रखें तथा बाएं हाथ को कोहनी से मोड़कर छाती से थोड़े आगे करके रखें। इस तरह इस क्रिया को दूसरी तरफ से भी करें।

सालभर बीमारियां पास नहीं आएंगी अगर सर्दी में ऐसे खाएं ये सेहतभरे दाने

सर्दी में लोग अपनी सेहत बनाने के लिए दादी व नानी के नुस्खों को अपनाते हैं। तरह-तरह के आयुर्वेदिक प्रयोग करते हैं ताकि सालभर शरीर स्वस्थ और निरोगी रहे। लेकिन हमारे बुजुर्ग शायद इस विषय में हमसे ज्यादा सोचते थे इसीलिए उन्होंने स्वाद और सेहत को एक साथ संजोया। 

यही कारण है कि तिल का उपयोग सर्दी में कई तरह से किया जाता है। दरअसल तिल के ये छोटे-छोटे दाने सेहत से भरपूर हैं। इसलिए तिल का प्रयोग घी व गुड़ के साथ करने से वर्षभर कई तरह के रोग दूर रहते हैं। साथ ही घर में बनी तिल पट्टी व बिजौरे भी शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।

 - यदि किसी को बार-बार यूरिन आने या खुलकर यूरिन न आने की समस्या है तो उसे पांच ग्राम तिल और पांच ग्राम गौखरू का काढा बनाकर दें। आराम मिलेगा।

- तिल के तेल में नीम की पत्तियां डालें। इस तेल की मालिश से मुंहासे व चर्म रोग से निजात मिलती है। 

- तिल के तेल से कोलेस्ट्रोल का स्तर घटता है। यह हृदय रोग को रोकने में भी सहायक है।

- खांसी से निजात दिलाने में तिल मदद करता है। चाय बनाते समय उसमें दो ग्राम तिल या दो-तीन तिल के पौधे की पत्तियां और जरा सी अदरक भी डालें। इस चाय के सेवन से खांसी जल्द ही ठीक हो जाएगी।

- रोज सुबह दस ग्राम काला तिल अच्छी तरह चबा-चबाकर खाने से मसूड़े स्वस्थ और दांत मजबूत होते हैं।

-  तिल, सोंठ, मेथी, अश्वगंधा व हल्दी बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर बना लें। रोज सुबह-शाम इसका सेवन करने से अर्थराइटिस से मुक्ति मिलती है। 

- तिल का सेवन कफ, सूजन, दर्द में राहत पहुंचाने में मदद करता है।

-  काले तिल को शुद्ध घी में भून लें। उन्हें पीसकर गुड़ पिघालकर दोनों को मिलाकर ठंडा कर लड्डू बांध लें। इस लड्डू के सेवन से बहुमूत्र की समस्या ठीक हो जाएगी।

सोमवार, 12 दिसंबर 2011

बिना दवा कंट्रोल करें थुलथुली काया अपनाएं लहसुन का ये अचूक चटपटा प्रयोग


आयुर्वेद के अनुसार यह मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय जब चौदह रत्नों में से एक अमृत भी हासिल हुआ तो देवताओं व दानवों में विवाद हो गया। तब ब्रह्मा ने देवताओं और दानवों को अलग-अलग पंक्तियों में बैठाकर अमृत बांटना शुरू किया। उस समय राहु नामक राक्षस ने देवताओं की पंक्ति में रूप बदलकर बैठ गया और अमृतपान कर लिया।

लेकिन जब देवताओं को पता चला कि वह राक्षस है तो भगवान विष्णु ने उसकी गर्दन काट दी लेकिन अमृत उसके हलक में पहुंच चूका था। इस घटना के दौरान दानव द्वारा पीए अमृत की कुछ बूंदे धरती पर बिखर गई उन्हीं बूंदों से धरती पर जिस पौधे की उत्पति हुई। वह लहसुन का पौधा था। इसलिए कहा जाता है कि लहसुन एक अमृत रासायन है। लेकिन चूंकी माना जाता है कि इसका प्रयोग करने वाले मनुष्य के दांत, मांस व नाखून बाल, व रंग क्षीण नहीं होते हैं। यह पेट के कीड़े मारता है व खांसी दूर करता है। लहसुन चिकना, गरम, तीखा, कटु, भारी, कब्ज को तोडऩे वाला व आंखों के रोग दूर करने वाला माना गया है। अगर आप थुलथुले मोटापे से परेशान हैं तो अपनाएं नीचे लिखे लहसुन के अचूक प्रयोग-

- लहसुन की पांच-छ: कलियां पीसकर मट्ठे में भिगो दें। सुबह पीस लें। उसमें भुनी हिंग और अजवाइन व सौंफ के साथ ही सोंठ व सेंधा नमक,    पुदीना मिलाकर चूर्ण बना लें। आधा तोला चूर्ण रोज फांकना चाहिए।

- लहसुन की चटनी तथा लहसुन को कुचलकर पानी का घोल बनाकर पीना चाहिए।

- लहसुन की दो कलियां भून लें उसमें सफेद जीरा व सौंफ सैंधा नमक मिलाकर चूर्ण बना लें। इसका सेवन सुबह खाली पेट गर्म पानी से करें।

बस थोड़ा सा नमक और छू-मंतर हो जाएगी टेंशन और थकान

ज्यादा वर्कलोड के कारण टेंशन व थकान हो जाना आजकल एक आम समस्या है।  इसीलिए यहां तक कि बड़े-बड़े होटलों में तो तनाव से छुटकारा दिलाने के नाम पर मंहगी से मंहगी मसाज थैरपी का प्रचलन चल पड़ा है। लेकिन अगर आप टेंशन और थकान से परेशान हैं तो नमक का ये आसान घरेलु प्रयोग से अपनाकर आप तनाव व थकान से तुरंत मुक्ति पा सकते हैं। मात्र 15 मिनिटों में ही आप इस प्रयोग के चमत्कारी प्रभाव से परिचित हो जाएंगे....



प्रयोग: दिन भर के तमाम कार्यों से निवृत्त होकर सोने से ठीक पहले यह प्रयोग करना चाहिये। 1 बाल्टी में सामान्य गर्म यानी गुनगुना पानी भर लें। इस पानी में लगभग 4 चम्मच साधारण और सस्ते से सस्ता यानी कि रुपय-दो रुपए किलो वाला नमक लेकर डालकर अच्छी तरह से मिला लें। अब इस नमक घुले हुए गुन-गुने पानी में अपने दोनों पैरों को घुटनों तक डुबों लें। पैरों को पानी में डुबाकर लगभग 10 से 15 मिनट तक रहें, इस बीच लगातार गहरी सांस लें और छोड़ें। प्रयोग के दोरान मन में किसी भी तरह के खयालों को जगह नहीं देना चाहिये।



वैज्ञानिक आधार: नमक सोडियम और क्लोराइड का मिश्रण होता है। सोडियम क्लोराइड के इस घोल की यह खाशियत होती है कि यह दिन भर के काम-काज के दोरान शरीर में बनी नेगेटिव एनर्जी को सोखकर व्यक्ति को पूरी तरह से  तनाव मुक्त कर देता है। इस प्रयोग के पूर्ण होने पर आप देखेंगे कि आपका सारा शारीरिक और मानसिक तनाव जा चुका है तथा आप फिर से कार्य करने के लिये पूरी तरह से रिचार्ज हो जाएंगे। इस प्रयोग का दूसरा कीमती लाभ यह होता है कि आपको गहरी और सुकून देने वाली नींद आती है। 

सिर्फ सात मिनट...और तन की दुर्गंध से मिल जाएगी आजादी हमेशा के लिए

क्या आप तन की दुर्गंध से परेशान हैं? रगड़-रगड़ कर नहाते हैं महंगे डिओ भी लगाते हैं। लेकिन बॉडी आर्डर है कि जाने का नाम ही नहीं लेता। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो चिंता मत कीजिए इसमें भी योगा आपकी मदद कर सकता है। माना जाता है कि सुप्तवज्रासन रोजाना कम से कम सात से पंद्रह मिनट तक करने से। रक्तसंचार सूक्ष्म तंतुओं की आवश्यकता के अनुसार तेज करता है तथा पसीने की बदबू को दूर करता है। यह आसन ग्रंथियों को मजबूत करता है तथा मेरूदंड को लचीला व मजबूत बनाता है। 

इस आसन से नाभि का टलना दूर होता है तथा बड़ी आन्त सक्रिय होती है और कोष्ठबद्धता मिटती है। इस आसन से ब्रोकाइटिस रोग दूर होता है तथा इस आसन से फेफड़े पूरी तरह से फूलते हैं, जिससे फेफड़े की सांस लेने की क्षमता बढ़ती है। जिसे आगे झुककर काम करने से कमर में दर्द रहता है, उसके यह आसन करने से दर्द ठीक होता है। इस आसन से नाडिय़ों का केन्द्र नाभि स्थान को ठीक करता है तथा मस्तिष्क, पेट, गले, व घुटनों के दर्द को दूर होता है। इससे गले के रोग, सर्वाइकल, टी.बी. व दमा आदि रोगो को दूर करता है। यह आसन आंखों की रोशनी को बढ़ाता है। 

सुप्त वज्रासन- यह आसन वज्रासन का विस्तृत रूप है। इस आसन को हलासन या कोई भी आगे की ओर किये जाने वाले आसनों के बाद करें। इस आसन में स्वाधिष्ठान चक्र, मेरूदंड तथा कमर के जोड़ पर ध्यान एकाग्र करना चाहिए।



आसन की विधि-  



      सुप्त वज्रासन स्वच्छ-साफ व हवादार तथा शांत स्थान पर करें। आसन के अभ्यास के लिए नीचे दरी या चटाई बिछाकर बैठ जाएं। अब दाएं पैर को मोड़कर पीछे की ओर दाएं नितम्ब (हिप्स) के नीचे रखें और बाएं पैर को मोड़कर बाएं नितम्ब के नीचे रखें। अब पंजों को मिलाते हुए एडिय़ों पर आसन की तरह बैठ जाएं तथा घुटनों को सटाकर रखें। अब धीरे-धीरे शरीर को पीछे की ओर झुकाते हुए पीठ के बल लेट जाएं। इसके बाद सिर को जितना सम्भव हो अंदर की ओर अर्थात पीठ की ओर करने की कोशिश करें। इससे शरीर कमानी की तरह बन जाएगा। आसन की स्थिति में दोनों हाथों को जांघों पर रखें। इसके बाद सांस समान्य रूप से ले और छोडें। इस स्थिति में 5 मिनट तक रहें और फिर धीरे- धीरे सामान्य स्थिति में आकर कुछ देर तक आराम करें और इसके बाद पुन: इस आसन को करें। इस तरह इस आसन को 3 बार करें।

    - सुप्त आसन की दूसरी स्थिति भी है- आसन की स्थिति में पहले की तरह पीठ के बल लेट जाएं और श्वासन क्रिया सामान्य रूप से करते हुए दोनों हाथों को कंधें की सीध में रखें। अब सांस लेकर पूरे शरीर का भार हथेलियों पर डालते हुए शरीर को ऊपर की ओर जितना सम्भव हो उठाएं और सांस को जितनी देर तक रोक सके रोककर इस स्थिति में रहें। इसके बाद धीरे-धीरे आसन की पहली स्थिति में आ जाएं और फिर सामान्य स्थिति में आ जाएं और श्वासन क्रिया सामान्य रखें। इस स्थिति में अंगुलियों को पीठ की ओर करके रखें। आपके शरीर का भार आपकी हथेली व कमर पर होना चाहिए। 

रविवार, 11 दिसंबर 2011

हाथों को आपस में ऐसे मिलाकर बैठने से सुंदरता में लग जाएंगे चार चांद

सुंदर दिखना हर लड़की की चाह होती है। इसीलिए वे अपने शरीर का पुरुषों से ज्यादा ध्यान रखती हैं लेकिन फिर भी अधिकांश महिलाओं का शरीर मोटापे का शिकार हो जाता है या ठीक से विकसित नहीं हो पाता। इन कारणों से कई बार उनमें हीन भावना विकसित हो जाती है। सही योगासन और मुद्राओं के आदि नियमित अभ्यास से महिलाएं अपना पूर्ण सौंदर्य प्राप्त कर सकती हैं।यहां हम एक मुद्रा जिसे हस्तपाद मुद्रा कहते हैं की जानकारी दे रहे हैं। इस मुद्रा के नियमित प्रयोग से स्त्रियों का शारीरिक सौंदर्य पूर्ण विकसित हो जाता है। शरीर के अंगों में कसावट आ जाती है।

हस्तपाद मुद्रा बनाने का तरीका

इस मुद्रा के अभ्यास के लिए किसी आरामदायक स्थान पर बैठ जाएं। अब दोनो हाथों की हथेलियों को पीछे की ओर से आपस में जोड़ लें। हाथों की सभी उंगलियां आपस में मिल जाती है इसे हस्तपात मुद्रा कहा जाता है। इस मुद्रा से सांस के रोग, गले के रोग जैसे- दर्द, सूजन या टॉन्सिल आदि में काफी आराम मिलता है। इसके नियमित अभ्यास से ये रोग आपसे दूर ही रहेंगे। हस्तपाद मुद्रा स्त्रियों के लिए बहुत ही ज्यादा लाभकारी है। जिन स्त्रियों का शरीर ठीक से विकसित नहीं हुआ है या शरीर ढीला पड़ गया है उनके लिए यह मुद्रा बेहद लाभदायक है। इसके नियमित इस्तेमाल से स्त्रियां सुंदर सुड़ौल और स्वस्थ हो जाती हैं। स्त्रियों का फिगर आकर्षक हो जाता है।

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