शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

छोटे-छोटे फंडे: इन्हें अपना लेंगे तो कभी नहीं होगी गैस और एसीडिटी

समय पर खाना न खाना, शरीर की आवश्यकता से अधिक भोजन आदि के कारण एसीडिटी होना एक आम समस्या है। साथ ही गैस का बनना, कब्जियत रहना और मुंह के छाले होना कहीं न कहीं पेट से ही जुड़ी हुई समस्याएं हैं। पेट में गैस व एसीडिटी होनी की छोटी सी समस्याएं कई बारजानलेवा भी हो सकती है। अगर आपको भी ये समस्याएं परेशान कर रही है तो अपनाइए नीचे लिखे छोटे-छोटे फंडों को और पाएं गैस व एसीडिटी से राहत हमेशा के लिए।



- प्रतिदिन जमकर भूख लगने पर ही भोजन करें।



- खाने के तुरंत बाद कभी भी चाय-काफी आदि का सेवन न करें।



- पके हुए बेल फल का उचित रीति से सेवन करें।



- हिंगास्टक चूर्ण, जो कि बाजार में बना बनाया मिलता है, खाने के बाद

उचित मात्रा में प्रतिदिन सेवन करें।



- भोजन में हरी सब्जियों और सलाद का सेवन अवश्य करें। चाय, मिर्च-मसाले,

पचने में भारी चीजों से बचें।



- भोजन करने के बाद वज्रासन में बैठें। रात्रि में बाईं करवट से ही सोएं।



- प्रतिदिन सुबह 2 से 3 कि. मी. मार्निग वॉक करें।



- सुबह उठकर 1-2 गिलास पानी जो तांबे के लोटे में रात भर रखा रहा हो, उसे पीना पेट के लिये बहुत फायदेमंद होता  है।

अस्सी की उम्र में भी दिखेंगे अठारह के आजमाएं ये देसी फंडा

वर्तमान समय में अनियमित खानपान व दिनचर्या के कारण समय से पहले बाल सफेद होना, कम उम्र में झुर्रियां आ जाना या अन्य ऐजिंग साइन एक आम समस्या है। ऐसे में दवाईयां या एंटीएंजिंग क्रीम युज करना काफी नहीं होगा। अगर आप वाकई लंबे समय तक जवान बने रहना चाहते हैं।अगर चाहते है कि अस्सी की उम्र में भी आपके शरीर में अठारह सी फूर्ति रहे तो नीचे लिखे योगासन को नियमित रूप से करें।

हलासन विधि - समतल जमीन पर आसन बिछाएं। आसन पर शवासन में लेट जाएं। श्वांस को अंदर भरकर दोनों पैरों को एक साथ ऊपर की और उठाना प्रारंभ करें। पैरों को ऊपर उठाते हुए सर्वांगासन में आइये, फिर पैरों को सिर के पीछे तक झुकाते हुए जमीन से स्पर्श कराइये। दोनों पैरों को घुटनों से न मुडऩे दें। पैरों को सीधा रखें। दोनों हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़ लें। हाथों की कोहनी को सीधा रखें। कुछ क्षण इसी तरह रुकने के बाद, सामान्य रूप से शवासन में आ जाइये। शरीर के तनाव को मिटाने के लिये आसन के अंत में कुछ देर शवासन में रहें।

लाभ - यह आसन थायराइड ग्रन्थि को प्रभावित करता है। इस आसन के करने से कण्ठकूपों पर दवाब पड़ता है जिससे थाइराइड़ संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। भावनात्मक संतुलन और तनाव निवारण के लिये यह आसन लाभप्रद है। इससे मेरुदण्ड लचीला बनता है जिससे आप लंबे समय तक जवान बने रहेंगे। इस आसन से पाचन तंत्र और मांसपेशियों को शक्ति मिलती है। इसके अभ्यास से पाचन तंत्र ठीक रहता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है। गले और वाणी से संबंधित बीमारियां दूर होती हैं। 

हलासन के अभ्यास से मन शांत और स्थिर होता है, तनाव दूर होता है। इसके नियमित अभ्यास से प्राण सूक्ष्म होकर सुषुम्ना नाड़ी में प्रवाहित होने लगता है।इसे करने से मन, आनंद और उत्साह से भरा रहता है तथा शरीर में स्फूर्ति और ताजगी बनी रहती है। साथ ही प्रतिदिन सुबह उठने के बाद खाली पेट एक चम्मच च्यवनप्राश लेना चाहिए। इसके बाद दूध पीएं। इसी तरह रात को सोने से पहले एक चम्मच च्यवनप्राश लें और फिर दूध पीएं। रोज अनार व चुकंदर का भी सेवन करें। खूब पानी पीएं। छ: से आठ घंटे गहरी नींद लें। घृतकुमारी के ज्यूस का नियमित रूप से सेवन करें। सदा जवान बने रहने के लिए आयुर्वेद में हरड़ को भी वरदान माना गया है।

गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

सर्दी स्पेशल: चार छुहारों का आयुर्वेदिक प्रयोग बना देगा आपकी हेल्थ


जिस तरह अधिक मोटापा किसी के लिए भी पेरशानी का कारण हो सकता है। उसी तरह ज्यादा दुबलापन भी कान्फिडेन्स में कमी कारण बनता है। अगर आप भी बहुत ज्यादा दुबलेपन से परेशान हैं व आप कमजोरी और दुबलेपन से सदा के लिये मुक्ति चाहते हैं और लोगों की उपेक्षा और घृणा से निजात पाना चाहते हैं तो नीचे दिये जा रहे छुहारे के प्रयोग को पूरे विश्वास के साथ एक बार अवश्य आजमाएं...



प्रयोग:

4 छुहारे एक गिलास दूध में उबाल कर ठण्डा कर लें। प्रात: काल या रात को सोते समय, गुठली अलग कर दें और छुहारें को खूब चबा-चबाकर खाएं और दूध पी जाएं। लगातार 3-4 माह सेवन करने से शरीर का दुबलापन दूर होता है, चेहरा भर जाता है। सुन्दरता बढ़ती है, बाल लम्बे व घने होते हैं और बलवीर्य की वृद्धि होती है। यह प्रयोग नवयुवा, प्रौढ़ और वृद्ध आयु के स्त्री-पुरुष, सबके लिए उपयोगी और लाभकारी है।

दमा:

दमा यानी सांस के रोगी को प्रतिदिन सुबह-शाम 2-2 छुहारे खूब चबाकर खाना चाहिए। इससे फेफड़ों को शक्ति मिलती है और कफ  व सर्दी का प्रकोप कम होता है।

गर्म दूध के इस नुस्खे से 20 मिनट में बाल हो जाएंगे शाइनी और सिल्की


आजकल बढ़ते प्रदूषण व अनियमित खान-पान के कारण बाल रूखे व बेजान हो जाते हैं। ऐसे में अपने बालों की खूबसूरती और मजबूती के लिये अधिकतर लोग बाजार के कैमिकल युक्त कंडिशनर का उपयोग करते हैं। लेकिन ये बाजार के कंडिशनर थोड़े समय के लिए भले ही बालों को चमकदार बना दें। परन्तु इसके लगातार प्रयोग से बालों को नुकसान पहुंचता है।

ऐसे में समस्या ये है कि बालों को बिना कंडिशनिंग के भी तो नहीं रखा जा सकता। अगर आप के  साथ भी यही समस्या है तो यहां दी जा रही है डीप कंडीशनर की एक बेहद आसान विधि जिसे कोई भी आसानी से कर सकताहै। आप इस आयुर्वेदिक डीप कंडीशनर का प्रयोग 20 दिन में एक बार करें। आप इस कंडीशनर को स्वयं घर पर झटपट बना सकते हैं तथा 20 मिनट में बालों की डीप कंडीशनिंग कर सकते हैं।

बनाने और लगाने की आसान विधि-

आधा कटोरी हरी मेहंदी पाउडर लेकर इसमें गर्म दूध (गाय का) डालकर पतला लेप बना लें। इसी लेप में एक बड़ा चम्मच आयुर्वेदिक हेयर ऑइल डालें। इसे अच्छी तरह से मिला लें। जब यह लेप ठंडा हो जाए तब बालों की जड़ों में लगाएं। 20मिनट छोड़कर आयुर्वेदिक शैंपू पानी में घोलकर बालों को धो लें। इस डीप कंडीशनर द्वारा आपके बालों को पोषण तो मिलेगा ही साथ ही उनमे बाउंस भी आ जाएगा।

टेस्टी-टेस्टी तरीका: ऐसे पीएं चाय तो वजन हो जाएगा कंट्रोल आसानी से

चाय को अधिकांशत: लोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते हैं। लेकिन फिर भी चाय को पसंद करने वाले या इसका सेवन करने वाले चाय को नहीं छोड़ पाते हैं। अगर आप भी अपनी चाय के सेवन की आदत से परेशान है तो ये आर्टिकल आपको खुश कर सकता है। दरअसल हम बताने जा रहे हैं कि चाय आपके लिए सिर्फ लाभदायक ही नहीं नुकसानदायक भी है।

चाय बढ़ते हुए वजन को कंट्रोल करने में बेहद मददगार होती है। यह बात एक

हालिया वैज्ञानिक शोध से पता चली है।शोध से ज्ञात हुआ है कि चाय में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो वजन कम करने में सहायक होते हैं। लेकिन हाल ही में हुई  एक नई रिसर्च के मुताबिक अगर चाय में दूध मिला दिया जाए तो मोटापे से लडऩे वाले तत्व उतने प्रभावकारी नहीं रहते। भारतीय वैज्ञानिक की ओर से की गई रिसर्च के मुताबिक चाय में वसा कम करने के कई तत्व होते हैं, लेकिन दूध में पाया

जाने वाला प्रोटीन वसा कम करने की इसकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है। चाय में पाए जाने वाले फ्लेविन्स और थिरोबिगिन्स शरीर की चर्बी घटाने और कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक होते हैं। असम की टी रिसर्च एसोसिएशन केरिसर्चरों ने चूहों पर शोध किया और उसमें यह पाया गया कि उच्च वसायुक्त भोजन खाने वाले चूहों का वजन घटाने में फ्लेविन्स और थिरोबिगिन्स जैसेतत्वों ने काफी अहम भूमिका निभाई। लेकिन गाय के दूध में प्रोटीन कीमात्रा अधिक होने के कारण इनका प्रभाव कम हो जाता है।

बुधवार, 14 दिसंबर 2011

छ: महीने में ये लाइलाज बीमारी हो जाएगी जड़ से साफ

सफेद दाग एक ऐसी समस्या जिसे अधिकतर लोग लाइलाज ही मानते हैं। लेकिन कुछ देहाती नुस्खे ऐसे है जिनसे समस्या कैसी भी हो या कितनी भी लाइलाज क्यों न हो उपचार संभव है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सफेद दाग के कुछ आजमाएं हुए देहाती नुस्खे जिनसे आपको निश्चित ही लाभ होगा।

   - आधा किलो चोपचीनी एक लीटर दूध में रात को भिगो दें। सुबह यदि सब दूध सोख ले तो थोड़ा और दूध डालकर आग पर पकाएं। जब चोपचीनी हाथ से छूने पर टूट जाए तो उतार कर के शीशी में भर लें। यह क्रम बनाएं रखें व रोज सुबह यह चूर्ण कर के शीशी भर लें। साथ ही रोज सुबह यह चूर्ण पांच ग्राम चाय वाले चम्मच से एक चम्मच मात्रा थोड़े शहद में मिलाकर खाली पेट चाट कर सेवन करें। चोपचीनी पंसारी की दुकार पर मिल जाती है। यह हल्के गुलाबी सफेद तथा कुछ ब्राउन रंग की वजनी और ठोस लकड़ी होती है। हल्की पोली याने खोखली लकड़ी उपयोगी नहीं होती। इसी के साथ एक प्रयोग और करना होगा। वर्षाकाल जोड़ीदार का एक पंवार, पमाड़ या चौकड़ी आदि नामों से पुकार जाता है। इसके पत्तों को उबाल कर रोटी में भरकर कचौड़ी या परांठे की तरह बनाकर या बेसन में मिलाकर भजिए बनाकर सेवन किया जा सकता है। इन पत्तों का किसी भी विधि से अधिक से अधिक मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए। एक माह के  अंदर ही त्वचा का रंग बदलने लगता है। छ: माह बाद यह रोग जड़ से गायब हो जाता है। 

- बाउची के बीज 50 ग्राम सांप की केंचुल को गौमूत्र के साथ मिट्टी के घड़े में डालकर सात दिन तक रखें। आठवें दिन सिल पर डालकर महीन पीसें और पीसते हुए गौमूत्र छिड़कते जाएं। इसे गाढ़ा रखें। पीसकर छोटी-छोटी टिक्की बनाकर छाया में सुखा लें। इस टिक्की को ताजे गौमूत्र में घिसकर दिन में दो बार सफेद दागों पर लेप कर दें। थोड़े दिन में दाग मिटने लगेंगे। गौमूत्र गाय की बछिया का मिल सके तो अति उत्तम अन्यथा गाय का ही मूत्र प्रयोग में लाना चाहिए। दवा के सेवन काल में तेल, गुड़ व खटाई का सेवन बंद कर दें।

खाने से जुड़ी इन बातों को याद न रखा तो कभी नहीं रह पाएंगे पूरी तरह स्वस्थ

खाने के विषय में हर व्यक्ति की अलग सोच और पसंद होती है। लेकिन खाने से जुड़ी कुछ गलतफहमियां ऐसी हैं जो हम में से अधिकांश लोगों को है। जैसे ज्यादा खाने से या मेवे व घी ज्यादा खाने से सेहत बनती है। ऐसी ही कुछ गलतफहमियां हैं। जिन्हे आज हम आपको बताने जा रहे हैं। ये खाने से जुड़ी कुछ ऐसी ही बातें हैं। जिनसे परिचित होना बहुत जरूरी है क्योंकि जब तक आप खाने से जुड़ी इन बातों से परिचित नहीं होंगे तब तक आप पूरी तरह स्वस्थ नहीं रह पाएंगे।

- आवश्यकता और पचाने के क्षमता से अधिक भोजन शरीर को ताकत की बजाय अधिक कमजोर ही बनाता है। इसलिए ज्यादा न खाएं।

-  पहले खाए हुए के पचने से पूर्व ही दोबारा खा लेने पर पाचन-तंत्र गड़बड़ा जाता है। इसलिए एक बार खाने के बाद पूरी तरह पेट खाली होने पर ही कुछ खाएं।

- ज्यादा घी-दूध, मेवे-मिठाई और पकवान खाने से नही बल्कि ऐसी भारी चीजों को पचाने क्षमता से शरीर की ताकत बढ़ती है। पाचन-शक्ति से अधिक पोष्टिक भोजन करने से कब्जियत की समस्या होने लगती है। इसलिए इन चीजों को अपनी पाचन शक्ति के अनुसार ही खाएं। 

- बेमेल भोजन करने से भी शरीर की शक्ति बर्बाद होती है। इसलिए ठंडा-गर्म या जिन चीजों का एक साथ सेवन निषिद्ध माना गया है। उनके सेवन से बचें।

- पर्याप्त परिश्रम या शारीरिक मेहनत करने से पहले ही बार-बार भोजन करते रहने से धीरे-धीरे शरीर बीमारियों का घर बनने लगता है।

- यह सोचना गलत है कि अंडे और मांसाहार करने से शरीर शक्तिशाली बनता है, आप रूखा-सूखा या शाकाहारी भोजन करके भी सर्वशक्तिशाली बन सकते हैं, बशर्ते आप की पाचन-शक्ति अच्छी होना चाहिये। शक्ति का प्रतीक घोड़ा जिंदगी भर सिर्फ घांस खाकर भी शक्तिशाली बन जाता है।

-  25-30 की उम्र पार करने बाद शरीर में पहले जैसी पाचन-शक्ति नहीं रह जाती इसीलिये 30 की आयु के बाद डटकर खाने की आदत को छोड़ देना चाहिये।

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