मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

शहद और लहसुन का शर्तिया नुस्खा: हो जाएंगे सफेद बाल भी काले


आयुर्वेद में कहा गया है कि लहसुन के नियमित इस्तेमाल से आप बढ़ती उम्र में भी युवापन का एहसास कर सकते हैं। लहसुन आंत के कीड़ों को निकाल देता है। घावों को शीघ्र भरता है। लेकिन इन तमाम रोगों में कच्चा लहसुन ही विशेष फायदेमंद होता है। न कि व्यवसायिक रूप में लहसुन से बनाई गई दवाई।

शायद वनस्पति जात की यह इकलौती वनस्पति है जिसमें सभी विटामिन और खनिज है। इसीलिए लहसुन बालों के लिए भी फायदेमंद है। केवल लहसुन का सेवन ही नहीं बल्कि इसके तेल से भी बालों से जुड़ी सारी समस्याओं से निजात पाई जा सकती है।

बाल झडऩा- 50 ग्राम सरसों का तेल, एक लहसुन की सब कलियां छीलकर डाल दें। मंदाग्रि में पकाएं। कलिया जल जाएं तो उतारकर, छानकर बोतल में भर दें। रोज रात को सोने से पहले मालिश करें।

बालों का पकना- उपरोक्त बनाए हुए तेल की मालिश आधा घंटा करना चाहिए।

बाल काले करना-5 कलियों को 50 मि.ग्राम जल में पीस लें फिर 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह सेवन करें।

मेथीदाने का अनोखा प्रयोग कर देगा कोलेस्ट्रोल व डाइबिटीज दूर

आयुर्वेद के अनुसार डाइबिटीज व मधुमेह में मेथी का सेवन बहुत लाभदायक माना गया है। मेथी को भारतभर में आमतौर पर सेवन किया जाता है। यदि मेथी की सब्जी लोहे की कढ़ाही में बनायी गई तो इसमें लौह तत्व ज्यादा बढ़ जाती है। एनीमिया यानी खून की कमी के रोगियों को यह बहुत फायदेमंद है।

किसी भी व्यक्ति की कैल्सियम की दिनभर की जरूरत 400 मि. ग्राम कैल्सियम मिल जाता है। विटामिन ए और सी भी मेथी में खूब रहता है। ये दोनों विटामिन मेथी दानों की तुलना में मेथी की सब्जी में ज्यादा होते है। साधारण मेथी चम्पा व कसूरी मेथी। मेथी व मेथी दाना डाइबिटीज रोगियों के लिए बहुत अधिक लाभदायक है।

यदि दिनभर में 25 से 100 ग्राम तक मेथी दाने किसी भी रूप में सेवन कर लिया जाए तो रक्त शुगर की मात्रा के साथ बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। रोगी राहत महसूस करता रहता है। पीसे हुए मेथी दाने 50 से 60 ग्राम मात्रा को एक ग्लास पानी में भिगो दें। 12 घंटे बाद छानकर पीएं। इस तरह से सुबह-शाम रोज दो बार पीते रहने से मधुमेह में आराम मिलता है। इसके अलावा मेथी के पत्तों की सब्जी भी खाएं।

ये है हर तरह की कमजोरी का आसान इलाज

यदि किसी वजह से कोई अपने आप को शारीरिक रूप से कमजोर महसूस करता है और पर्याप्त सावधानी के बाद भी निर्बलता दूर नहीं हो रही है, तो उन्हें भृंगासन की मदद लेना चाहिए। इस आसन की पूर्ण अवस्था मेंढक के समान हो जाती है इसीलिए इसे भृंगासन कहा जाता है। 



भृंगासन की विधि



किसी साफ एवं समतल स्थान पर कंबल या दरी बिछाकर बैठ जाएं। अब अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर ले जाएं। दाएं एड़ी को दाएं नितम्ब (हिप्प) से सटाकर और बाईं एड़ी को बाएं नितम्ब (हिप्प) से सटाकर रखें। दोनों पंजे व एडिय़ां आपस में मिलाकर रखें तथा दोनों घुटनों के बीच थोड़ी दूरी रखें। अब गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुके और अपने हाथों को कोहनियों से मोड़कर घुटनों के बीच रखकर कोहनी से हथेलियों तक के भाग को नीचे फर्श पर टिकाकर रखें। दोनों हाथों के बीच थोड़ी दूरी रखें तथा अंगुलियों को आपस में मिलाकर रखें। सिर को उठाकर रखें और नजरें सामने रखें। आसन की इस स्थिति में सांस को रोककर कुछ देर रुके। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठकर सामान्य स्थिति में एडिय़ों पर बैठ जाएं। कुछ क्षण रूके और फिर इस आसन को दोबारा करें। भृंगासन को कम से कम 5 से 10 बार करें।



भृंगासन के लाभ



भृंगासन करने से पाचनशक्ति मजबूत होती है तथा यह भूख को बढ़ाता है। यह आसन पेट के भारीपन को दूर करता है तथा पेट की गैस, कब्ज एवं अन्य पेट के सभी विकार को खत्म करता हैं। इस आसन को करने से कन्धों, हाथ व पैर आदि की कमजोरी दूर होती है। साथी शरीर स्वस्थ और निरोगी बनता है।

पांच आयुर्वेदिक नुस्खे: मिलेगी 30 दिनों में दमकती गोरी त्वचा

अक्सर कुछ लोग अपने सांवले रंग से परेशान रहते हैं। सांवला रंग कभी किसी के करियर में रुकावट बनता है तो कभी शादी ब्याह में। ज्यादातर लड़के लड़कियां भी अपने लिए गोरे रंग के हमसफर को प्रीफर करते है। अगर आप अपने सांवले रंग से परेशान हैं तो घबराइये नहीं कुछ आसान आयुर्वेद नुस्खे ऐसे हैं जिनसे आपका सांवलापन दूर हो सकता है।



  - एक बाल्टी ठण्डे या गुनगुने पानी में दो नींबू का रस मिलाकर गर्मियों में कुछ महीने तक नहाने से त्वचा का रंग निखरने लगता है (इस विधि को करने से त्वचा से सम्बन्धी कई रोग ठीक हो जाते हैं)।



- आंवला का मुरब्बा रोज एक नग खाने से दो तीन महीने में ही रंग निखरने लगते है।





- गाजर का रस आधा गिलास खाली पेट सुबह शाम लेने से एक महीने में रंग निखरने लगता है। रोजाना सुबह शाम खाना खाने के बाद थोड़ी मात्रा में सांफ खाने से खून साफ होने लगता है और त्वचा की रंगत बदलने लगती है।



 

- प्रतिदिन खाने के बाद सोंफ का सेवन करें। - रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ नियमित रूप से त्रिफला चूर्ण का सेवन करें। 

इस जानलेवा बीमारी को जड़ से मिटा देगा ये ज्यूस, वो भी बिना आपरेशन!

क्षमता से ज्यादा काम और मानसिक तनाव के कारण आजकल दिल से सम्बन्धित रोग बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन कोई भी एक नया व्यक्ति दिल के रोग से पीडि़त मिल ही जाता है। किसी-किसी को तो ये रोग इतने ज्यादा हद तक होजाते हैं कि उनका इलाज केवल एन्ज्योग्राफी या बायपास सर्जरी ही होता है। अगर आप इन रोगों से बचना चाहते हैं तो लौकी का रस आपकी बहुत मदद कर सकता है। अगर आपको दिल से सम्बन्धी कोई भी बीमारी हो तो लौकी का रस जरूर पीएं।।



लौकी का ज्यूस बनाने की विधि- सबसे पहले लौकी को धो ले फिर उसे कद्दूकस कर लें। कद्दूकस की हुई लौकी में तुलसी के सात पत्ते और पुदीने की पांच पत्तियां डाल कर उसे मिक्सर में पीस लें। रस की मात्रा कम से कम 150 ग्राम होनी चाहिए। अब इस रस में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर तीन चार पिसी काली मिर्च और थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर पीएं।



रस को पीने की विधि- 
यह रस किसी भी दिल के मरीज को दिन में तीन बार सुबह, दोपहर और शाम को खाने के बाद पिलाना चाहिए। शुरूआत के दिनों में रस कुछ कम मात्रा में लें और जैसे ही वह अच्छे से पचने लगे इसकी मात्रा बढ़ा दें।



विशेष- 
लौकी का रस पेट के विकारों को मल के द्वारा बाहर निकाल देता है। जिसके कारण शुरूआत में पेट में गडग़ड़ाहट और खलबली मच सकती है इससे घबराएं नहीं कुछ समय बाद यह अपने आप ठीक हो जाएगा। इस रस को पीने के साथ मरीज का अपनी पहले से चल रही दवाईयों को भी चालू रखना चाहिए पहले से चल रही दवाईयों को एकदम न छोड़ें।

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

नमक का ये आसान प्रयोग कर देगा हर तरह के बुखार की छुट्टी

बदलते मौसम में बुखार की चपेट में आना एक आम बात है। कभी वायरल फीवर के नाम पर तो कभी मलेरिया जैसे नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले लेता है। फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं। कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। पर घबराइए नहीं सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। इसके प्रयोग किसी भी तरह के बुखार को उतार देता है।



भुना नमक बनाने की विधि- खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर कॉफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें।जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से आपको बुखार कभी पलट कर नहीं आएगा।



विशेष.हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह वि धि नहीं अपनानी चाहिए।



- यह प्रयोग एक दम खाली पेट करना चाहिए इसके बाद कुछ खाना नहीं चाहिए और ध्यान रखें कि इस दौरान रोगी  को ठण्ड न लगे।



- अगर रोगी को प्यास ज्यादा लगे तो उसे पानी को गर्म कर उसे ठण्डा करके दें।



- इस नुस्खे को अजमाने के बाद रोगी को करीब 48 घंटे तक कुछ खाने को न दें। और उसके बाद उसे दूध चाय या हल्का दलिया बनाकर खिलाऐं।

दस मिनट का ये प्रयोग कर लेंगे तो चेहरा चमकने लगेगा

यदि आप मानसिक तनाव महसूस करते हैं। निराशा, हताशा एवं चिंताएं आदि समस्याएं सताती रहती हैं, तो प्रतिदिन योगासन करें। योगासन मन को शांति देता और स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक रहता है। साथ ही योग से आंखों की रोशनी और चेहरे की चमक भी बढ़ती है। सर्वांगासन आंखों और चेहरे के लिए काफी फायदेमंद है। 



सर्वांगासन की विधि - कसी सुविधाजनक स्थान पर कंबल या दरी बिछाकर शवासन में लेट जाएं। अपने दोनों हाथों को जांघों की बगल में तथा हथेलियों को जमीन पर रखें। पैरों को घुटनों से मोड़कर ऊपर उठाइएं तथा पीठ को कंधों तक उठाइएं। दोनों हाथ कमर के नीचे रखकर शरीर के उठे हुए भाग को सहारा दीजिएं। इस तरह ठुड्डी को छाती से लगाए रखें। अब सांस को रोके नहीं स्वाभाविक रूप से चलने दें। यथाशक्ति पैर और धड़ को एक सीध में रखें। इस स्थिति में रुकने के बादए पैरों को जमीन पर वापस ले आएं। पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए घुटनों को माथे के पास ले आएं। हाथों को जमीन रखते हुये शरीर और पैरों को धीरे.धीरे वापस शवासन में आ जाएं। अब शवासन में शरीर को शिथिल अवस्था में आ जाएं। आसन करते समय आंखों को खुला रखें।



सावधानियां- जल्दबाजी एवं हड़बड़ाहट में यह आसन न करें। इस आसन का अभ्यास पीठ दर्दए कमर दर्दए नेत्र रोगी और उच्च रक्तचाप के रोगी ने करें।



लाभ-  इसके नियमित अभ्यास से मानसिक तनावए निराशाए हताशा एवं चिंताएं आदि रोगों का नाश होता है। इससे आंखों का तेज बढ़ता है और चेहरा कांतिमय बनता है। स्त्रियों के स्वास्थ में इस आसन से विशेष लाभ होता है । स्त्रियों की मासिक धर्म से जुड़ी बीमारियों में राहत मिलती है। सर्वांगासन से शरीर के उन अंगों से रक्त संचार होने लगता है जहां रक्त संचार कम होता है। शरीर का प्रत्येक अंग स्वस्थ हो जाता है। इस आसन के प्रभाव से चेहरे पर झाइयां नहीं पड़ती हैं। लम्बी उम्र तक चेहरे पर चमक बनी रहती है। समय से पूर्व बाल सफेद नहीं होते हैं। नेत्र ज्योति अंत तक बनी रहती है। इस आसन के करने से मानसिक तनाव दूर होता है। क्रोध और चिड़चिडा़पन दूर होता है। बच्चों के बौद्धिक विकास में यह आसन विशेष लाभदायक है। इसके करने से मानसिक और आध्यात्मिक शक्तियां जाग्रत होती हैं तथा सतोगुण की वृद्धि होती है। 

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