रविवार, 1 जनवरी 2012

मैजिकल तरीका: बिना दवाई और झंझट के ऐसे करें हर बीमारी का इलाज

कहते हैं अगर स्वस्थ शरीर की चाहत है, तो पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरुरी है। शरीर की आवश्यकता से कम पानी कई बीमारियों का कारण बन सकता है। दरअसल पानी की कमी से कोशिकाएं शुष्क  हो जाती हैं। पानी को वरुण भी कहा जाता है। विज्ञान के अनुसार भी जल तत्व हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक माने गए हैं। इसलिए शरीर में तरलता बढ़ाने के लिए एक मुद्रा बताई गई है जिसे वरुण मुद्रा कहते हैं। इस मुद्रा को करने के एक नहीं अनेक फायदे

हैं, तो आइए जानते हैं कैसे बनाएं वरुण मुद्रा।



विधि- कनिष्ठा हाथ की सबसे छोटी अंगुली को कहा जाता है। कनिष्टा जल तत्व का प्रतीक है। जल तत्व और अग्रि तत्व को मिलाने से परिवर्तन घटित होता

है। कनिष्ठा अंगुली का अग्रभाग और अंगुष्ठ के अग्रभाग को मिलाने से वरुण मुद्रा बनती है।



आसान- सर्दी के समय में इनका सीमित प्रयोग करें। अन्य मौसम में कम से कम 24 मिनट करें। पूरा समय 48 मिनट है।



परिणाम- 

- शरीर का रूखापन दूर होता है। 

- शरीर की कांति व स्निग्धता बढ़ती है।

- त्वचा चमकीली व मुलायम बनती है।

-  चर्र्म रोग दूर होते हैं।

-  रक्त विकार दूर होते हैं।

- समय तक बना रहता है।

- बुढ़ापा जल्दी नहीं आता है।

- यह मुद्रा प्यास को बुझाती है।

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

चंद मिनटों में इस नुस्खे से गर्दन व कंधे का दर्द हो जाएगा रफूचक्कर

बदलते समय ओर परिस्थितियों को रोकना भले ही हमारे हाथों में न हो, लेकिन अपनी लॉइफ स्टाइल में आवश्यक फेरबदल करके हम कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से निजात पा सकते हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि आप दफ्तर से गर्दन और कंधे का दर्द के साथ में लेकर लोटते हैं तो नियमित व्यायाम जरूरी है। ऐसा करने से मांसपेशियों के दर्द में चंद मिनटों में ही राहत मिल सकती है। साफ-सुथरे स्थान पर चटाई बिछाकर बैठें। गर्म तौलिए को गर्दन के चारों ओर लपेट लें। कुछ सेकंड तक ऐसे ही रहें। इस क्रिया को छह बार दोहराएं।

तौलिए के दोनों किनारों को खींचकर पकड़ें और अपने कंधे के चारों ओर लपेटें। उंगलियों का हलका सा दबाव पिछले कंधे पर बनाए रखें। हथेलियों को इधर-उधर घुमाते रहें ताकि कंधे पर दबाव बना रहे। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद तौलिया हटा लें। इसे छह बार दोहराएं। व्यक्ति स्वाभाविक तौर पर सदा स्वस्थ नहीं रह सकता, इसलिए फिट बने रहने के लिए निरंतर प्रयास की जरूरत होती है

ब्लैक हेड्स और व्हाईट हेड्स में सौ-फीसदी कारगर हैं ये आयुर्वेदिक उपाय

चेहरे पर ब्लैक हेड्स होना एक आम समस्या है। दरअसल युवाअवस्था में ब्लैक हेड्स होने की एक वजह हार्मोनल डिसऑर्डर भी होता है। हारमोंस का बैलेंस बिगडऩे से ऑयल ग्लैंड्स ज्यादा ऑयल रिलीज करने लगते है, जिसकी वजह से पोर डिवेलप हो जाते हैं। यही ब्लैक हेड्स होने की वजह बनते हैं

 - चावल का आंटा,जौ का आंटा दरदरा पीस कर दूध में भिंगोकर हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज करें ,इसके अलावा पानी का भाप चेहरे पर लें आपको इस समस्या से छुटकारा मिलेगा।

- एक भाग नींबू का रस एवं एक भाग मूंगफली का तेल मिलाकर प्रभावित हिस्से में लगायें, ब्लैक हेड्स को ठीक करने के लिए यह अचूक नुस्खा है।

-  केवल उबले दूध में नींबू का रस मिलाकर भी चेहरे पर लगाने से ब्लैक हेड्स एव फटी हुई स्कीन में लाभ मिलता है।

- मूली के बीज का पाउडर का पेस्ट बनाकर हल्के हाथों से चेहरे पर लगायें,इससे भी ब्लैक हेड्स निकल जाते हैं।

- कच्चे आलू को ग्राईंड कर पिप्म्पल्स,व्हाईट हेड्स या ब्लैक हेड्स पर लगाएं।

- अन्नानास के छिलके का पाउडर भुनकर पेस्ट  बनाएं और  नींबू के रस के साथ मिलाकर चेहरे पर लगायें आपको व्हाईट हेड्स से मुक्ति मिल जाएगी।

- सहिजन की फली और पत्तियों  का पेस्ट बनाकर आप यदि चेहरे पर लगाएं तो व्हाईट हेड्स ,ब्लैक हेड्स एवं पिम्पल्स सभी में लाभ मिलता है।

ठंड में दस दिनों तक ऐसे खाएं दस दाख और देखें कमाल

आयुर्वेद के अनुसार ठंड मे ड्रायफ्रूटस के सेवन को बहुत लाभदायक माना गया है। दाख भी ऐसा ही एक ड्रायफ्रूट है। लेकिन बड़ी दाख यानी मुनक्का छोटी दाख से अधिक लाभदायक होती है। आयुर्वेद में मुनक्का को गले संबंधी रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। मुनक्का के औषधीय उपयोग इस प्रकार हैं-



- शाम को सोते समय लगभग 10 या 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर इन मुनक्कों को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा मुनक्का खाने से खून साफ होता है और नाक से बहने वाला खून भी बंद हो जाता है। मुनक्का का सेवन 2 से 4 हफ्ते तक करना चाहिए।



- मुनक्का का सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है। इससे मल-मूत्र भी साफ हो जाता है।



- भूने हुए मुनक्के में लहसुन मिलाकर सेवन करने से पेट में रुकी हुई वायु (गैस) बाहर निकल जाती है और कमर के दर्द में लाभ होता है।



-  250 ग्राम दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड मिलाकर सुबह पीएं। इससे वीर्य के विकार दूर होते हैं। इसके उपयोग से हृदय, आंतों और खून के विकार दूर हो जाते हैं। यह कब्जनाशक है।



- सर्दी-जुकाम होने पर सात मुनक्का रात्रि में सोने से पूर्व बीज निकालकर दूध में उबालकर लें। एक खुराक से ही राहत मिलेगी। यदि सर्दी-जुकाम पुराना हो गया हो तो सप्ताह भर तक लें।



- जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या नजला एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, उन्हें सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच मुनक्का बीजों को खूब चबाकर खा ला लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएं। दस दिनों तक निरंतर ऐसा करें।



- जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो मुनक्का बीज निकालकर रात को एक सप्ताह तक खिलाएं।

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

लहसुन व हींग का देसी प्रयोग, दांत के दर्द में दिखाएगा जादू सा असर

दांतों की सफाई न करने पर दांतों के बीच फंसे अन्न का कण बाहर नहीं निकल पाता है जिससे दांतों के बीच फंसे अन्न के कण रात को सोने पर मुंह से निकलने वाली लार के प्रभाव में आकर सडऩे लगते हैं। उन अन्न के कणों के सडऩे से दांतों की जड़े खोखली हो जाती हैं। खोखली जगहों में भोजन का अंश भरने से दांत सडऩे लगते हैं तथा दांतों में अत्यधिक तेज दर्द होने लगता है। अगर आप भी दांतों के दर्द से परेशान हैं तो नीचे लिखे देसी नुस्खों को एक बार जरूर आजमाएं।

 - लहसुन की एक कली थोडे से सैंधा नमक के साथ पीसें और इसे दुखने वाले दांत पर रख कर दबाएं यह एक रामबाण उपाय है।

- रोजान एक लहसुन कली चबाकर खाने से दांत की तकलीफ से छुटकारा मिलता है।

- दांत की केविटी में थोडी सी हींग भरदें। दर्द में राहत मिलेगी।

- तंबाकू और नमक महीन पीसलें। इस टूथ पावडर से रोज दंतमंजन करने से दांत के दर्द से मुक्ति मिल जाती है।

-  बर्फ का टुकडा दुखने वाले दांत के ऊपर या पास में रखें। बर्फ उस जगह को सुन्न करके लाभ पहुंचाता है।

- गरम पानी की थैली से सेक से भी राहत मिलती है।

-  प्याज को कूटकर लुग्दी दांत पर रखना हितकर उपचार है।

-  लौंग के तैल का फाया दर्द वाले दांत के मध्य रखने से निश्चित ही लाभ होगा। 

- दांत के दर्द के रोगी को दिन में 3-4 बार एक लौंग मुंह में रखकर चूसने की सलाह दी जाती है।

- पुदिने की सूखी पत्तियां पीसकर दांतों के बीच रखें, ऐसा दिन में 10 बार करने से लाभ मिलेगा।

- दो ग्राम हींग नींबू के रस में पीसकर पेस्ट बनाकर मंजन करें।

कुदरती फंडा: जवानी कायम रहेगी और छोटी-मोटी बीमारियां पास भी नहीं आएगी


हमेशा स्वस्थ और जवान रहना तो सभी चाहते हैं और इसके लिए कई औषधीयां और नुस्खे भी अपनाते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसा योगासन बताने जा रहे हैं, जिसे अपनाने से छोटी- मोटी बीमारियां आपके पास भी नहीं फटकेगी। इस आसन से हमारे शरीर की आंतरिक और बाह्य शक्ति में गुणोत्तर वृद्धि होती है। कुछ ही दिनों में इस आसन के लाभ नजर आने लगते हैं।



बकासन की विधि



समतल पर स्थान पर कंबल आदि बिछाकर बैठ जाएं। अब दोनों हाथों को अपने सामने भूमि पर रखें। सांस सामान्य रखें। दोनों घुटनों को हाथों की कोहनियों पर स्थिर कीजिएं। सांस अंदर की ओर लेते हुए शरीर का पूरा भार धीरे-धीरे हथेलियों पर आने दें और अपना शरीर ऊपर की ओर उठा लें। यह आसन काफी कठिन है परंतु निरंतर अभ्यास होने पर आसन की पूर्ण अवस्था प्राप्त की जा सकती है। परंतु ध्यान रखें यदि आपके हाथों में कोई परेशानी या बीमारी हो तो यह आसन ना करें।



बकासन के लाभ



बकासन में हमारे शरीर का पूरा भार हाथों पर होता है अत: इस आसन से हमारे हाथों के स्नायुओं को विशेष बल एवं आरोग्य मिलता है। मुख की कान्ति बढ़ती है। सुंदरता में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी होती है। जवानी बनी रहती है। शरीर हष्ट-पुष्ट बना रहता है। इस आसन को निरंतर करने से शरीर की कई छोटी-छोटी बीमारियां हमेशा दूर रहती है।

बुधवार, 28 दिसंबर 2011

ये फंडू टिप्स अपनाएं और तनाव को भूल जाएं

बहुत अधिक वर्किंग प्रेशर के कारण ऑफिस या वर्किंग प्लेस पर ही नहीं। मानसिक अशांति घर तक पीछा नहीं छोड़ती। इसका बुरा प्रभाव घर के रिश्तों पर भी पड़ता है। इससे बचने के लिए संयमित दिनचर्या की योजना बनाने से दिनभर के कार्य के बाद भी दिमाग शांत ही रहेगा और पारिवारिक रिश्ते हमेशा खुशियां देने वाले ही रहेंगे।

स्वस्थ और निरोगी शरीर के लिए आवश्यक है कि आप दिमाग शांति और सुकुन महसूस करें। परंतु आज के दौर में दिमाग को शांति मिलना लगभग असंभव सा ही है। फिर भी प्रयत्न करने पर आप कुछ हद तक मानसिक तनाव को दूर कर सकते हैं-

- दिन की शुरुआत योग, व्यायाम, ध्यान से आदि से करें।

- अपने जीवन साथी या अविवाहित अपने प्रेमी के साथ कुछ समय प्रतिदिन अवश्य बिताएं।

- लगातार लंबे समय पर कार्य न करें। थोड़ी-थोड़ी देर में शरीर और दिमाग को विश्राम अवश्य दें।

- खाना-पीना समय पर करें।

- किसी भी तरह की चिंता मित्रों के पलभर के साथ से ही दूर हो जाती है, इसलिए अच्छे मित्रों के साथ समय बिताएं।

- शांत संगीत मन को सुकून देता है, थोड़ा समय संगीत के लिए भी निकालें।

- मानसिक तनाव की सबसे बड़ी वजह होती है पैसा। पैसे जुड़ी समस्याओं जल्द से जल्द सुलझा लें।

- कार्य को समय पर पूरा करें और योजना बनाकर कार्य करें।

- एक साथ कई कार्य करने में उलझे, एक-एक कार्य निपटाएं।

- प्रतिदिन कम से कम 6-8 घंटे की सुकुन की नींद अवश्य लें।

Featured post

बीमारी क्यों आती है?

 हर वस्तु, हर विचार, हर #व्यापार, हर #रिश्ता – सब कुछ #पंचतत्व से बना है। नाम बदले, रूप बदले, स्वाद बदले – लेकिन #तत्व नहीं बदलता। चावल व...