गुरुवार, 19 जनवरी 2012

अनोखा 'पान' इसे खाकर, कैसा भी हो बुखार भाग जाएगा

बुखार सेहत से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है, जो हर किसी को किसी न किसी बहाने और किसी न किसी रूप में होते ही रहता है। कभी साधारण बुखार, तो कभी वायरल बुखार, तो कभी मलेरिया के रूप में यह हमारे ऊपर हमला करता है। कई बार यह कई दिनों तक जाने का नाम ही नहीं लेता और धीरे-धीरे हमें कमजोर भी कर देता है। 

अगर आपके  साथ भी ऐसी ही समस्या है। सर्दी लगकर बार-बार बुखार आता है। इस तरह ठंड लग कर आने वाला किसी भी प्रकार का बुखार (चाहे रोज आता हो, एक या दो दिन छोड़कर आता हो) इसके लिए पान में आकड़े (आकौआ, अर्क या मदार भी कहते हैं) का 2 बूंद दूध टपका कर पान मुंह में रख लें।

यह पान कत्था ,चूना, सुपारी आदि से जैसे पान बनाया और खाया जाता है। वैसे ही उसी प्रकार से रूचि अनुसार बने हुए पान में यह दूध 2 बूंद टपका कर पान मुंह में रख लें। इसे चबाएं और इसकी पीक निगलते रहें। पीक थूकना नहीं है। यह प्रयोग बुखार चढऩे से पहले ही कर लें। एक बार के प्रयोग से लाभ न हो तो दूसरी बार फिर बुखार चढऩे से पहले एक पान का सेवन और कर लें। वैसे दूसरी बार लेने का अवसर नहीं आता है। 

सोमवार, 16 जनवरी 2012

छोटे-छोटे उपाय: चेहरा चमकाएं, पहली नजर में छोड़े अपनी छाप

हर व्यक्ति चाहता है कि उसका व्यक्तित्व आकर्षक हो, कोई भी उससे मिले तो प्रभावित हो। इसके जरूरी है कि आप हर पल ऊर्जावान और जोश से भरपूर दिखाई दें आपके चेहरे पर हमेशा चमक बनी रहे।मुरझाया हुआ चेहरा किसी को आकर्षित नहीं सकता। पहली नजर में ही अपने व्यक्तित्व की अमिट छाप यदि किसी पर छोडऩा हो तो नीचे दिये उपायों को अपनाकर चेहरे पहले ज्यादा प्रभाशाली बनाया जा सकता है....नीचे दिये गए छोटे व सरल उपायों से त्वचा की चमक को बढ़ाया और लंबे समय तक टिका-कर रखा जा सकता है.... 



1. चेहरे पर कुदरती चमक लाने के लिये शुद्ध प्राकृतिक ग्वारपाठा यानी ऐलोविरा का ज्यूस हथेलियों पर लेकर चेहरे पर मसाज करते हुए लगाएं। और सूख जाने पर चेहरे को साफ गुनगुने पानी से धो लें। 7 दिनों के भीतर ही आप बदलाव देखकर दंग रह जाएंगे।



एक अन्य प्रयोग में दो चम्मच बेसन, हल्दी पावडर, गुलाब जल व शहद मिलाकर लेप बनाएं। इसे चेहरे व हाथ-पैरों और गर्दन पर लगाएं व 10 मिनट बाद  धो लें। इससे त्वचा निखर जाएगी।



2.  कच्चे दूध में हल्दी डालकर पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे और हाथ-पैरों पर लगाएं। 10 मिनट बाद धो लें। त्वचा निखर उठेगी।



3.  होठों को सुंदर और मुलायम बनाए रखने के लिए रात को सोते समय दूध की मलाई लगाएं, सुबह ठंडे पानी से धो लें।



4.  आंखों में जलन व काले घेरों को कम करने के लिए रात को सोते समय आंखों पर ठंडे दूध में रुई भिगोकर रखें।



5.  8-10 दिन में एक बार चेहरे को भाप अवश्य दें। इस पानी में पुदीना, तुलसी की पत्ती, नीबू का रस व नमक डालें। भाप लेने के बाद इसी गुनगुने पानी में 5 मिनट के लिए हाथों को रखें। हाथ की त्वचा निखर जाएगी।

इस जड़ का थोड़ा सा चूर्ण सभी की मिटा देगा कमजोरी बना देगा ताकतवर

अश्वगंधा एक झाड़ीदार पौधा है। आयुर्वेद में इस पौधे को बहुत ही उपयोगी माना गया है। इसकी जड़ें नर,नारी ,बालक ,बुजुर्ग सबके लिए एक टॉनिक का काम कर देती है। जड़ों के चूर्ण का सेवन अगर तीन महीने तक बच्चों को करवाया जाए तो कमजोर बच्चों के शरीर का सही विकास होने लगता है। यह जड़ी सभी प्रकार के वीर्य विकारों को मिटा करके बल-वीर्य बढाता है। साथ ही धातुओं को भी पुष्ट करती है। 

 साथ ही नसें भी सुगठित हो जाती हैं। लेकिन इससे मोटापा नहीं आता। गठिया, धातु, मूत्र तथा पेट के रोगों के लिए यह बहुत उपयोगी है। इससे आप खांसी, सांस फूलना तथा खुजली की भी दवा बना सकते हैं । इसका आप अगर नियमित सेवन शुरू कर दें तो आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ जायेगी जिसका दूर गामी परिरणाम यह होगा कि आप लंबे समय तक युवा बने रहेंगे बुढ़ापे के रोग आपसे काफी समय तक दूर रहेंगे। 

महिलाओं कि बीमारी में यह जड़ काफी लाभकारी है। इसके नियमित उपयोग से नारी की गर्भ-धारण की क्षमता बढती है ,प्रसव हो जाने के उपरांत उनमें दूध कि मात्रा भी बढती है तथा उनकी श्वेत प्रदर,कमर दर्द एवं शारीरिक कमजोरी से जुड़ी सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इसके नियमित सेवन से हिमोग्लोबिन तथा लाल रक्त कणों की सख्या में वृद्धि होती है। व्यक्ति की सामान्य बुद्धि का विकास होता है।

गुरुवार, 12 जनवरी 2012

सर्दी स्पेशल: घी-बादाम के इस प्रयोग से याददाश्त हो जाएगी तीन-गुना

अच्छा व नियमित खान-पान न होना भी याददाश्त कमजोर होने का बड़ा कारण है। इसीलिए लोग ठंड में घी और बादाम का सेवन करते हैं। लेकिन अगर घी व बादाम का सेवन आयुर्वेदिक तरीके से किया जाए तो किसी की भी याददाश्त तीन गुना बढ़ सकती है।

कैसे बनाएं बादाम घृत- बादाम का छिलका रहित गिरी और नारियल की गिरी 50-50 ग्राम खसखस व मगज 70-70 ग्राम, खरबूजे की गिरी 5 ग्राम, चिरौंजी 5 ग्राम और पिस्ता 5 ग्राम इन सबको कूट पीसकर रखें। फिर 400 ग्राम घी लालिमायुक्त होने तक गर्म करें और उक्त मिश्रण को डाल दें। तब घी का रंग बदलने लगे तब नीचे उतारकर छानकर सुरक्षित रखें।

इस प्रकार तैयार इस घृत बादाम को  दूध में मिलाकर सेवन करें। मस्तिष्क और तलुवों पर इस घी की मालिश भी उपयोगी है। इस घी के उपरोक्त प्रकार सेवन से दिमाग की निर्बलता, शुष्कता , आंखो की ज्योति बढ़ती है व मानसिक कार्य करने वालों के लिए बादाम घृत बहुत अधिक लाभदायक है। 

नोट- घी को छानने के बाद शेष पदार्थ को आटे में भूनकर मिलाकर और थोड़ी चीनी डालकर पंजीरी बनाकर सुबह नाश्ते के रुप में सेवन करें। बहुत उत्तम रहेगा।

सिर्फ दस मिनट का प्रयोग और सर्दी में घूम सकेंगे बिना स्वेटर


ठंड का मौसम चरम पर है। सर्दी की बढ़ती ठिठूरन और घटते टेम्परेचर से लोग परेशान हैं। ऐसे में ठंड से बचने के लिए स्वेटर, शॉल, टोपी स्कार्फ व मोजे इन सभी चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आखिर करें भी तो क्या और कोई तरीका भी तो नहीं इस ठंड से बचने का? अगर आप भी कुछ ऐसा ही सोचते हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं, एक ऐसे प्राणायाम के बारे में जिसे रोजाना करने से आपको ठंड में भी स्वेटर की जरुरत ही महसूस नहीं होगी। इस प्राणायाम को उज्जायी प्राणायाम कहा जाता है।

उज्जायी प्राणायाम विधि - सुविधाजनक स्थान पर कंबल या दरी बिछाकर बैठ जाएं। अब गहरी सांस लें। कोशिश करें कि पेट की मांसपेशियां प्रभावित न हो। गला, छाती, हृदय से सांस अंदर खींचे। जब सांस पूरी भर जाएं तो जालंधर बंध लगाकर कुंभक करें। (जालंधर बंध और कुंभक के संबंध में लेख पूर्व में प्रकाशित किया जा चुका है।) अब बाएं नासिका के छिद्र को खोलकर सांस धीरे-धीरे बाहर निकालें।

सांस भरते समय श्वांस नली का मार्ग हाथ से दबाकर रखें। जिससे सांस अंदर लेते समय सिसकने का स्वर सुनाई दे। उसी प्रकार सांस छोड़ते समय भी करें।उज्जायी प्राणायाम को बैठकर या खड़े होकर भी किया जा सकता है। कुंभक के बाद नासिका के दोनों छिद्रों से सांस छोड़ी जाती है। प्रारंभ में इस प्राणायाम को एक मिनिटि में चार बार करें। अभ्यास के साथ ही इस प्राणायाम की संख्या बढ़ाई जाना चाहिए।



प्राणायाम के लाभ



यह प्राणायाम सर्दी में काफी लाभदायक सिद्ध होता है। इस प्राणायाम के अभ्यास कफ रोग, अजीर्ण, गैस की समस्या दूर होती है। साथ ही हृदय संबंधी बीमारियों में यह आसन बेहद फायदेमंद है। इस प्राणायम को नियमित करने से ठंड के मौसम का भी ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है।
 

बुधवार, 11 जनवरी 2012

ठंड में पुरुष कर लें ये प्रयोग, ताकत के लिए और कुछ भी खाने की जरुरत नहीं रहेगी

आयुर्वेद में ठंड को खाने-पीने और सेहत बनाने के लिए सबसे बढिय़ा मौसम माना गया है। कहा जाता है कि सर्दियों के मौसम में सेवन की गई चीजों का प्रभाव शरीर पर सालभर रहता है। इसीलिए ठंड में सेहत बनाने के लिए लोग कई तरह की चीजों का सेवन करते हैं।

पुरुषों को तो आयुर्वेद में विशेषकर नपुंसकता दूर कर ठंड में ताकत देने वाली चीजों को प्रयोग करने को कहा गया है। आज हम बताने जा रहे हैं आपको एक ऐसा आयुर्वेदिक योग, जिसका प्रयोग करने के बाद पुरुषों को सालभर किसी भी तरह की ताकत बढ़ाने वाली दवाई या किसी अन्य चीज के इस्तेमाल की जरुरत नहीं होगी।

सामग्री - असगंध, सफेद मूसली, काली मूसली, कौंच के बीज, शतावर, ताल मखाना, बीजबंद, जायफल, जावित्री, ईसबगोल, नागकेशर, सोंठ, गोल मिर्च, लौंग, पीपर कमलगट्टे की गिरी, छुहारे, मुनक्का, चिरोंजी सब 50-50 ग्राम, मिश्री सवा दो किलो, घी 400 ग्राम। 

बनाने की विधि- मिश्री और घी को छोड़कर  शेष सारी औषधियों को अलग-अलग कूटपीस कर कपड़े से छान लें। सबको मिलाकर घी में भून लें।अब मिश्री की पतली चाशनी बनाकर उतार लें और सारी दवा इसमें डालकर अच्छी तरह मिलाकर उपर सोने व चांदी का वर्क मिला दें।

सेवन विधि - 10 से 20 ग्राम इस योग को चाटकर उपर से एक गिलास गरमागरम दूध पी जाएं। 

 लाभ -सर्दियों में कुछ दिन इसका लगातार सेवन करते रहने से नपुंसकता दूर होती है। वीर्य गाढ़ा और पुष्ट होता है। शरीर बलवान बन जाता है।इसके अलावा पेशाब में जलन, पथरी और वात रोग भी इसके लगातार सेवन से मिट जाते हैं।

बिना पैसे की ये दवा खूबसूरती को कर देगी सौ-गुना

हर व्यक्ति चाहता है कि उसका व्यक्तित्व आकर्षक हो, कोई भी उससे मिले तो प्रभावित हो। इसके जरूरी है कि आप हर पल ऊर्जावान और जोश से भरपूर दिखाई दें आपके चेहरे पर हमेशा चमक बनी रहे।मुरझाया हुआ चेहरा किसी को आकर्षित नहीं सकता। परंतु आजकल की दौड़भाग भरे जीवन में खुद को हमेशा ऊर्जावान बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। तो आकर्षक व्यक्तित्व के लिए प्रतिदिन कुछ समय ध्यान अवश्य करें साथ ही नटराज आसन व हंसासन करें। 



नटराज आसन-

समतल स्थान पर कंबल आदि बिछाकर दोनों पैर मिलाकर खड़े हो जाएं। इसके बाद बाएं पैर पर संतुलन बनाते हुए दाएं पैर को पीछे की ओर जितना अधिक से अधिक संभव हो ऊपर उठाएं। अब दाएं हाथ को पीछे करके ऊपर उठे दाएं पैर के टखनों को पकड़ लें। सिर को सीधा करके दाएं हाथों को ऊपर की ओर नाक के सीध में रखें। सांस सामान्य रखें। आसन की इस स्थिति में शरीर का संतुलन जितने देर तक बनाकर रखना सम्भव हो बनाकर रखें और सामान्य स्थिति में आ जाएं। इसके बाद सीधे होकर यह क्रिया दूसरे पैर से भी करें। इस क्रिया को दोनो पैरों से बदल-बदल कर करें।



 हंसासन- समतल स्थान पर कंबल आदि बिछाकर घुटनों के बल बैठ जाएं। अब दोनों हाथों को फर्श पर टिकाकर रखें। अंगुलियों को आगे की ओर करके व अंगुलियों को खोलकर रखें। दोनों हाथों के बीच 10 इंच की दूरी रखें। अब घुटनों को मोड़कर आगे की ओर और कोहनियों को मोड़कर पीछे की ओर करें। इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए दोनों हथेलियों पर जोर देकर अपने शरीर के पिछले भाग को ऊपर उठाएं तथा शरीर का पूरा भाग हथेलियों पर रखकर संतुलन बनाएं। अब गर्दन को आगे की ओर झुकाकर शरीर का आकार पक्षी की तरह बनाएं। इस स्थिति में 10 से 30 सैकेण्ड तक रहें और इस क्रिया को 2 से 3 बार करें। शुरु में यह अभ्यास कठिन होता है, परन्तु प्रतिदिन अभ्यास करने से यह सरल हो जाता है। आसन करते समय रखें सावधानी: इस आसन का अभ्यास शुरु में करना कठिन होता है। इस आसन की सभी क्रिया धीरे-धीरे करें तथा सांस लेने व छोडऩे की क्रिया सामान्य रुप से करें। आसन के लाभ: इस आसन से हाथ व पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती है तथा गर्दन का मोटापा कम होता है। इस से छाती मजबूत, तथा शरीर शक्तिशाली बनता है। इस आसन से चेहरे पर तेज, चमक तथा शरीर में स्फूर्ति व ताजगी आती है। नाड़ी-तंत्र (स्नायु तंत्र) सही रुप से काम करने लगता है, जिससे रक्त संचार (खून का बहाव) तेज हो जाता है।



सीत्कारी प्राणायाम-

सीत्कारी प्राणायाम में सीत्कार का शब्द करते हुए सांस लेने की क्रिया होती है। इस प्राणायम में नासिका से सांस नहीं ली जाती है बल्कि मुंह के होठों को गोलाकार बना लेते हैं और जीभ के दाएं और बाएं के दोनों किनारों को इस प्रकार मोड़ते हैं कि जीभ का का आकार गोलाकार हो जाए। इस गोलाकार जीभ को गोल किए गए होठों से मिलाकर इसके छोर को तालू से लगा लिया जाता है। अब सीत्कार के समान आवाज करते हुए मुख से सांस लें। फिर कुंभक करके नासिका के दोनों छिद्रों से सांस छोड़ी जाती है। पुन: इस क्रिया को दोहराएं। इसे बैठकर या खड़े होकर भी किया जा सकता है।इस प्राणायाम से चेहरे पर तेज, चमक आती है।

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