बुधवार, 1 फ़रवरी 2012
नानी के नुस्खे: ऐसे करें मौसमी जुकाम को जल्दी ठीक
बदलते मौसम के अनुसार कुछ लोगों का शरीर एडजस्ट नहीं कर पाता है। ऐसे में इम्युनिटी पॉवर कमजोर होने के कारण मौसमी रोगों का शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है। मौसमी रोगों में भी जुकाम एक ऐसा रोग है जो सबसे अधिक लोगों को प्रभावित करता है। इसीलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे घरेलु नुस्खे जिन्हें आजमाकर आप मौसमी जुकाम से जल्द ही छुटकारा पा सकते हैं।
-अधिक तेल घी युक्त पदार्थ, अधिक मसाले, मिर्च नहीं लें।
-ठंडे पदार्थ खाना तथा ठंडे पेय पीना भी रोग बढ़ाते हैं। इनसे बचें।
- नाक बंद है तो दालचीनी, कालीमिर्च, इलायची और जीरे के बीजों को बराबर मात्रा में लेकर एक सूती कपड़े में बांध लें और इन्हें सूंघें जिससे छींक आएगी।
- दो चम्मच गुनगुना पानी लें। इसमें चुटकी भर नमक डालें। इसे अपने दोनों नथुनों में चढ़ाएं।
- चनों की भाप या नाक को सेंक बहुत फायदा देती है। भुने गरम चने या जैसे भी हों, खाने से भी लाभ मिलता है।
- 10 ग्राम गेहूं की भूसी, पांच लौंग और कुछ नमक लेकर पानी में मिलाकर इसे उबाल लें और काढ़ा बनाएं। एक कप काढ़ा पीने से लाभ मिलेगा।
- सरसों के तेल को नाक में लगाने से भी काफी आराम मिलता है।
-अधिक तेल घी युक्त पदार्थ, अधिक मसाले, मिर्च नहीं लें।
-ठंडे पदार्थ खाना तथा ठंडे पेय पीना भी रोग बढ़ाते हैं। इनसे बचें।
- नाक बंद है तो दालचीनी, कालीमिर्च, इलायची और जीरे के बीजों को बराबर मात्रा में लेकर एक सूती कपड़े में बांध लें और इन्हें सूंघें जिससे छींक आएगी।
- दो चम्मच गुनगुना पानी लें। इसमें चुटकी भर नमक डालें। इसे अपने दोनों नथुनों में चढ़ाएं।
- चनों की भाप या नाक को सेंक बहुत फायदा देती है। भुने गरम चने या जैसे भी हों, खाने से भी लाभ मिलता है।
- 10 ग्राम गेहूं की भूसी, पांच लौंग और कुछ नमक लेकर पानी में मिलाकर इसे उबाल लें और काढ़ा बनाएं। एक कप काढ़ा पीने से लाभ मिलेगा।
- सरसों के तेल को नाक में लगाने से भी काफी आराम मिलता है।
किचन के डॉक्टर्स: छोटी-छोटी बीमारियों के कुछ मसालेदार इलाज
स्वास्थ्य संबंधी छोटी-मोटी समस्याएं हर घर में कभी न कभी घर के किसी न किसी सदस्य को हो ही जाती है। ऐसे में समय-असमय डॉक्टर के पास जाना या मामूली तकलीफ के लिए बिना डॉक्टर की सलाह लिए दवा लेना भी ठीक नहीं होता। ऐसी छोटी-मोटी बीमारियों का घरेलु इलाज करना ही बेहतर रहता है। भारतीय किचन के मसाले भी किसी औषधि से कम नहीं है आइए हम बताते हैं आपको छोटी-मोटी बीमारियों के कुछ मसालेदार इलाज:
- सर्दी ज्यादा परेशान कर रही हो तो छाती पर और सिर पर अजवाइन की पोटली से सेंक करके ओढ़कर सो जाएं। सर्दी से जल्द ही राहत मिलेगी।
- घी में सिकी हुई लोंग मुंह में रखें खांसी और खराश से छुटकारा मिलेगा।
- पानी में अजवाइन उबालकर इस अजवाइन वाले पानी की भाप घुटनों पर देने से घुटनों का दर्द ठीक होता है।
- थोड़ा-सा काला नमक, अजवाइन, सौंफ और मिलाकर चूर्ण बनाकर खाएं पेटदर्द में आराम मिलेगा।
- एक गिलास दूध में इलाइची पाउडर डालकर पीने से सिरदर्द बंद हो जाता है।
- एक चम्मच सरसों के तेल में एक चुटकी हल्दी और नमक मिलाकर दांतों पर हल्के-हल्के मालिश करने से दांत का दर्द दस से पंद्रह मिनट में ठीक हो जाता है।
- रात में सोने से पहले नाक में गाय के दूध से बने घी की दो-दो बूंदें डालने से माइग्रेन के दर्द से मुक्ति मिलती है।
- सर्दी ज्यादा परेशान कर रही हो तो छाती पर और सिर पर अजवाइन की पोटली से सेंक करके ओढ़कर सो जाएं। सर्दी से जल्द ही राहत मिलेगी।
- घी में सिकी हुई लोंग मुंह में रखें खांसी और खराश से छुटकारा मिलेगा।
- पानी में अजवाइन उबालकर इस अजवाइन वाले पानी की भाप घुटनों पर देने से घुटनों का दर्द ठीक होता है।
- थोड़ा-सा काला नमक, अजवाइन, सौंफ और मिलाकर चूर्ण बनाकर खाएं पेटदर्द में आराम मिलेगा।
- एक गिलास दूध में इलाइची पाउडर डालकर पीने से सिरदर्द बंद हो जाता है।
- एक चम्मच सरसों के तेल में एक चुटकी हल्दी और नमक मिलाकर दांतों पर हल्के-हल्के मालिश करने से दांत का दर्द दस से पंद्रह मिनट में ठीक हो जाता है।
- रात में सोने से पहले नाक में गाय के दूध से बने घी की दो-दो बूंदें डालने से माइग्रेन के दर्द से मुक्ति मिलती है।
मंगलवार, 31 जनवरी 2012
रोज ऐसे खाएं मुट्ठी भर चने...तो हेल्दी हो जाएंगे बॉडी, स्कीन और बाल
बड़े-बुजुर्ग कहते हैं चने रोज खाने वाले का शरीर बहुत स्वस्थ और ताकतवर बना रहता है। चने के सेवन से सुंदरता बढ़ती है साथ ही दिमाग भी तेज हो जाता है। इसलिए अगर आप भी उसके जैसे फुर्तीले बनना चाहते हैं तो चने का सेवन नियमित रूप से करना शुरू कर दीजिए।
इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स पाए जाते हैं। चने या दालें या किसी भी प्रकार के अनाज के दाने हमारा रोजाना के आहार में शामिल होना चाहिए, माना जाता है कि इन अनाज के दानों में एमीनो एसीड्स पाया जाता है, लेकिन अंकुरित होने के बाद इनकी पोषक वैल्यू कई गुनी बढ़ जाती है। हमारे शरीर की एक बहुत बड़ी आवश्यकता है।
अंकुरित हो कर ये दाने फाइबर से भरपूर, पाचक और पोषक हो जाते है। मोटापा घटाने के लिये नाश्ते में चना और चाय लें। अंकुरित चना 3 वर्ष तक खाते रहने से कुष्ट रोग में लाभ होता है। 250 ग्राम चने को एक किलो पानी में रात को भिगो दें। चांदनी रात हो तो इन्हें चांदनी में रखें। प्रात: इनको इतना उबालें कि चौथाई पानी रह जाए। इस पानी को पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। प्रात: अंकुरित चने का नाश्ता प्रत्येक परिवार को करना चाहिये।गुर्दे या मुत्राशय में पथरी हो तो रात को चने कि दाल एक मुट्ठी भिगो दें, सुबह इस दाल में शहद मिलाकर खाएं।
केवल चने की रोटी दस दिन तक खाते रहने से पेशाब में शक्कर आना बन्द हो जाता है। गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू पिलाएं। डॉक्टरों का कहना है कि चने में बहुत प्रोटीन होता है जो आपके शरीर के लिए बेहद जरूरी है। चना आपकी पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून साफ होता है जिससे आपकी त्वचा निखरती है।आपको यकीन नहीं होगा चना लोगों में यौन शक्ति को भी बढ़ाता है।चने का गरीबों का बादाम कहा जाता है क्योंकि ये सस्ता होता है लेकिन इसी सस्ती चीज में बड़ी से बड़ी बीमारियों की लडऩे की क्षमता है। चने से बालों का गिरना भी रूकता है क्योंकि इसमें उपस्थित प्रोटीन बालों को मजबूती प्रदान करता है।
इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स पाए जाते हैं। चने या दालें या किसी भी प्रकार के अनाज के दाने हमारा रोजाना के आहार में शामिल होना चाहिए, माना जाता है कि इन अनाज के दानों में एमीनो एसीड्स पाया जाता है, लेकिन अंकुरित होने के बाद इनकी पोषक वैल्यू कई गुनी बढ़ जाती है। हमारे शरीर की एक बहुत बड़ी आवश्यकता है।
अंकुरित हो कर ये दाने फाइबर से भरपूर, पाचक और पोषक हो जाते है। मोटापा घटाने के लिये नाश्ते में चना और चाय लें। अंकुरित चना 3 वर्ष तक खाते रहने से कुष्ट रोग में लाभ होता है। 250 ग्राम चने को एक किलो पानी में रात को भिगो दें। चांदनी रात हो तो इन्हें चांदनी में रखें। प्रात: इनको इतना उबालें कि चौथाई पानी रह जाए। इस पानी को पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। प्रात: अंकुरित चने का नाश्ता प्रत्येक परिवार को करना चाहिये।गुर्दे या मुत्राशय में पथरी हो तो रात को चने कि दाल एक मुट्ठी भिगो दें, सुबह इस दाल में शहद मिलाकर खाएं।
केवल चने की रोटी दस दिन तक खाते रहने से पेशाब में शक्कर आना बन्द हो जाता है। गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू पिलाएं। डॉक्टरों का कहना है कि चने में बहुत प्रोटीन होता है जो आपके शरीर के लिए बेहद जरूरी है। चना आपकी पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून साफ होता है जिससे आपकी त्वचा निखरती है।आपको यकीन नहीं होगा चना लोगों में यौन शक्ति को भी बढ़ाता है।चने का गरीबों का बादाम कहा जाता है क्योंकि ये सस्ता होता है लेकिन इसी सस्ती चीज में बड़ी से बड़ी बीमारियों की लडऩे की क्षमता है। चने से बालों का गिरना भी रूकता है क्योंकि इसमें उपस्थित प्रोटीन बालों को मजबूती प्रदान करता है।
सरल इलाज: परेशान नहीं करेगा सिरदर्द, बिना दवा के ही ठीक हो जाएगा
सिरदर्द एक आम समस्या है जिसके कई कारण हो सकते हैं। थोड़े समय तक या हल्का सिरदर्द तो किसी को भी हो सकता है। लेकिन अगर सिरदर्द बार-बार होता है तो आगे चलकर यह कई बीमारियों का कारण बन जाता है। अगर आप भी बार-बार होने वाले सिरदर्द से परेशान हैं तो नीचे लिखे आसनों को नियमित रूप से करें।
विधि-
ध्यान- इस आसन में सबसे पहले पद्मासन की मुद्रा में बैठें। दोनों हाथ ज्ञान मुद्रा में होंगे। आंखें बंद, गर्दन बिल्कुल सीधी रखें। चित्त बिल्कुल शांत करें और श्वास, प्रश्वास और प्रश्वसन आसन में बैठ जाएं।
योग मुद्रा- दोनों पैरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर पद्मासन की मुद्रा में आ जाएं। दोनों हाथों को पीछे ले जाकर कलाइयां पकड़ लें। उसके बाद धीरे-धीरे कमर को आगे की ओर झुकाते हुए अपनी ठोड़ी को जमीन पर लगाने की कोशिश करें।
चन्द्रभेदी प्राणायाम- पद्मासन में बैठें। गर्दन, कमर बिल्कुल सीधी रखें। दायें हाथ के अंगूठे से दाहिनी नाक को बंद करें। फिर नाक के बाएं छिद्र से सांस भरें और दाएं हाथ की उंगलियों से नाक को बंद करते हुए दाईं और से श्वास बाहर निकालें। इस प्राणायाम को 12-15 बार करें।
पवनमुक्त आसन- सबसे पहले पीठ के बल लेट जाइए। उसके बाद दायीं टांग को घुटनों से मोड़ते हुए अपनी छाती से लगाने का प्रयास करें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में मिला लें और ठोड़ी को घुटनों से मिलाने की कोशिश करें। बायीं टांग जमीन पर सीधी रहेगी। कुछ देर इसी मुद्रा में रहें। इसी प्रकार इस आसन को बायीं टांग से करें। इस आसन को कम से कम पांच बार दोहराएं।
वज्रासन- घुटनों को मोड़कर अपने शरीर का पूरा भार अपने दोनों पैरों की एडिय़ों पर रखकर बैठ जाएं। दोनों पैरों के पंजे आपस में मिले हों और दोनों एडिय़ां आपस में जुड़ी नहीं हों। दोनों हाथ घुटनों पर रखें। गर्दन, कमर और कंधे बिल्कुल सीधे और आंखें खुली रखें। इस आसन में कम-से-कम पांच मिनट तक बैठें।
शवासन- इसमें पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों के बीच एक से दो फुट का फासला रखें। दोनों हाथ जांघों के पास और दोनों हथेलियां ऊपर की ओर हों। इस आसन में हम अपने पूरे शरीर को आराम देते हैं और अपना सारा ध्यान सांस लेने और छोडऩे में लगाते हैं। इससे हम अपने अंतर्मन से शरीर के एक-एक अंग का अवलोकन करते हैं।
सावधानी-दमा, ब्रॉन्काइटिस, निम्न रक्तचाप के रोगी व गर्भवती महिलाएं ये आसन ना करें।
विधि-
ध्यान- इस आसन में सबसे पहले पद्मासन की मुद्रा में बैठें। दोनों हाथ ज्ञान मुद्रा में होंगे। आंखें बंद, गर्दन बिल्कुल सीधी रखें। चित्त बिल्कुल शांत करें और श्वास, प्रश्वास और प्रश्वसन आसन में बैठ जाएं।
योग मुद्रा- दोनों पैरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर पद्मासन की मुद्रा में आ जाएं। दोनों हाथों को पीछे ले जाकर कलाइयां पकड़ लें। उसके बाद धीरे-धीरे कमर को आगे की ओर झुकाते हुए अपनी ठोड़ी को जमीन पर लगाने की कोशिश करें।
चन्द्रभेदी प्राणायाम- पद्मासन में बैठें। गर्दन, कमर बिल्कुल सीधी रखें। दायें हाथ के अंगूठे से दाहिनी नाक को बंद करें। फिर नाक के बाएं छिद्र से सांस भरें और दाएं हाथ की उंगलियों से नाक को बंद करते हुए दाईं और से श्वास बाहर निकालें। इस प्राणायाम को 12-15 बार करें।
पवनमुक्त आसन- सबसे पहले पीठ के बल लेट जाइए। उसके बाद दायीं टांग को घुटनों से मोड़ते हुए अपनी छाती से लगाने का प्रयास करें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में मिला लें और ठोड़ी को घुटनों से मिलाने की कोशिश करें। बायीं टांग जमीन पर सीधी रहेगी। कुछ देर इसी मुद्रा में रहें। इसी प्रकार इस आसन को बायीं टांग से करें। इस आसन को कम से कम पांच बार दोहराएं।
वज्रासन- घुटनों को मोड़कर अपने शरीर का पूरा भार अपने दोनों पैरों की एडिय़ों पर रखकर बैठ जाएं। दोनों पैरों के पंजे आपस में मिले हों और दोनों एडिय़ां आपस में जुड़ी नहीं हों। दोनों हाथ घुटनों पर रखें। गर्दन, कमर और कंधे बिल्कुल सीधे और आंखें खुली रखें। इस आसन में कम-से-कम पांच मिनट तक बैठें।
शवासन- इसमें पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों के बीच एक से दो फुट का फासला रखें। दोनों हाथ जांघों के पास और दोनों हथेलियां ऊपर की ओर हों। इस आसन में हम अपने पूरे शरीर को आराम देते हैं और अपना सारा ध्यान सांस लेने और छोडऩे में लगाते हैं। इससे हम अपने अंतर्मन से शरीर के एक-एक अंग का अवलोकन करते हैं।
सावधानी-दमा, ब्रॉन्काइटिस, निम्न रक्तचाप के रोगी व गर्भवती महिलाएं ये आसन ना करें।
सोमवार, 30 जनवरी 2012
खराब फिगर को परफेक्ट बनाना है तो अपनाएं ये प्रयोग
महिला हो या पुरुष सुडौल शरीर किसी के भी सौन्दर्य को और अधिक बड़ा देता है। कई बार परफेक्ट फिगर न होना भी कान्फिडेन्स में कमी का कारण बन जाता है विशेषकर महिलाओं में । इसी कारण से कई बार उनमें हीन भावना विकसित हो जाती है। सही योगासन और मुद्राओं के आदि नियमित अभ्यास से महिलाएं अपना पूर्ण सौंदर्य प्राप्त कर सकती हैं। यहां हम एक मुद्रा जिसे हस्तपाद मुद्रा कहते हैं की जानकारी दे रहे हैं। इस मुद्रा के नियमित प्रयोग से स्त्रियों का शारीरिक सौंदर्य पूर्ण विकसित हो जाता है। शरीर के अंगों में कसावट आ जाती है।
हस्तपाद मुद्रा बनाने का तरीका
इस मुद्रा के अभ्यास के लिए किसी आरामदायक स्थान पर बैठ जाएं। अब दोनो हाथों की हथेलियों को पीछे की ओर से आपस में जोड़ लें। हाथों की सभी उंगलियां आपस में मिल जाती है इसे हस्तपात मुद्रा कहा जाता है।
हस्तपाद मुद्रा के लाभ
इस मुद्रा से सांस के रोग, गले के रोग जैसे- दर्द, सूजन या टॉन्सिल आदि में काफी आराम मिलता है। इसके नियमित अभ्यास से ये रोग आपसे दूर ही रहेंगे।
हस्तपाद मुद्रा स्त्रियों के लिए बहुत ही ज्यादा लाभकारी है। जिन स्त्रियों का शरीर ठीक से विकसित नहीं हुआ है या शरीर ढीला पड़ गया है उनके लिए यह मुद्रा बेहद लाभदायक है। इसके नियमित इस्तेमाल से स्त्रियां सुंदर सुड़ौल और स्वस्थ हो जाती हैं। स्त्रियों का फिगर आकर्षक हो जाता है।
इस मुद्रा से क्यों बढ़ती है सुंदरता
हस्तपाद मुद्रा से स्त्रियां की सुंदरता बढ़ती हैं क्योंकि हमारी कलाइयों के पीछे की मांसपेशियों का संबंध शरीर के कई अंगों से होता है। इस मुद्रा के माध्यम से वे मांसपेशियां एक्टिव हो जाती है और शरीर के अंगों में कसावट लाती है।
हस्तपाद मुद्रा बनाने का तरीका
इस मुद्रा के अभ्यास के लिए किसी आरामदायक स्थान पर बैठ जाएं। अब दोनो हाथों की हथेलियों को पीछे की ओर से आपस में जोड़ लें। हाथों की सभी उंगलियां आपस में मिल जाती है इसे हस्तपात मुद्रा कहा जाता है।
हस्तपाद मुद्रा के लाभ
इस मुद्रा से सांस के रोग, गले के रोग जैसे- दर्द, सूजन या टॉन्सिल आदि में काफी आराम मिलता है। इसके नियमित अभ्यास से ये रोग आपसे दूर ही रहेंगे।
हस्तपाद मुद्रा स्त्रियों के लिए बहुत ही ज्यादा लाभकारी है। जिन स्त्रियों का शरीर ठीक से विकसित नहीं हुआ है या शरीर ढीला पड़ गया है उनके लिए यह मुद्रा बेहद लाभदायक है। इसके नियमित इस्तेमाल से स्त्रियां सुंदर सुड़ौल और स्वस्थ हो जाती हैं। स्त्रियों का फिगर आकर्षक हो जाता है।
इस मुद्रा से क्यों बढ़ती है सुंदरता
हस्तपाद मुद्रा से स्त्रियां की सुंदरता बढ़ती हैं क्योंकि हमारी कलाइयों के पीछे की मांसपेशियों का संबंध शरीर के कई अंगों से होता है। इस मुद्रा के माध्यम से वे मांसपेशियां एक्टिव हो जाती है और शरीर के अंगों में कसावट लाती है।
रविवार, 29 जनवरी 2012
स्कीन के रूखेपन से परेशान हैं तो ...कास्मेटिक्स से बेहतर हैं ये घरेलु नुस्खे
सर्दियों में हेल्दी स्कीन वालों को भी रूखी त्वचा की परेशानी सताने लगती है। त्वचा की खूबसूरती कम होने लगती है और खुश्की बढऩे लगती है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते ही इसका इलाज कर लिया जाए नहीं तो खुश्की एक सुंदर और आकर्षक चेहरे को बेजान, कांतिहीन और खुरदरे चेहरे में बदल सकती है। हम बताएंगे कि कैसे हम अपनी त्वचा को खुश्की की नजर से बचा कर रख सकते हैं।
- चने के आटे को गुनगुने दूध में भिगो दें। थोड़ी देर रखने के बाद इसमें चंद बूंदे नींबू का रस निचोड़ दें। थोड़ी हल्दी मिलाएं और चेहरे पर लगा लें। 10 मिनट बाद इसे गुनगुने पानी की मदद से निकाल दें।
- रूखी त्वचा पर आप फलों का रस या गूदा इस्तेमाल कर सकती हैं। खूब पका हुआ केला मैश करें और शहद मिला लें। इसमें नीबू का रस मिला सकती हैं। इसे चेहरे पर लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दें। गुनगुने पानी से धो लें।
- उबटन के प्रयोग के कुछ समय बाद अच्छा टोनर लगा सकती हैं। गुलाब जल एक आम टोनर है।
- बेहतर होगा कि नियमित बादाम तेल या तिल के तेल से बॉडी मसाज कराएं। अगर यह संभव न हो तो नहाने के पानी में एक चम्मच तिल का तेल डालकर नहाएं।
- सर्दियों में ऑलिव ऑइल का प्रयोग अवश्य करें। नहाने के पानी में इसे मिला लें और फिर उस पानी से नहाएं।
- बहुत देर तक व बहुत गर्म पानी से न नहाएं, इससे त्वचा और रूखी हो जाती है। नहाने के बाद एक मग पानी में एक चम्मच शहद डालकर शरीर पर डालें, इससे शरीर कोमल हो जाएगा और आप सारा दिन तरोताजा महसूस करेंगी।
- इस मौसम में हाथों की कोहनियों की त्वचा काफी शुष्क हो जाती है और कभी-कभी वहां कालापन आ जाता है। अगर ऐसा हो तो एक नीबू के छिलके पर थोड़ी-सी पिसी हुई फिटकरी डालकर कुछ देर प्रभावित त्वचा पर हल्के हाथ से मलें।
- चने के आटे को गुनगुने दूध में भिगो दें। थोड़ी देर रखने के बाद इसमें चंद बूंदे नींबू का रस निचोड़ दें। थोड़ी हल्दी मिलाएं और चेहरे पर लगा लें। 10 मिनट बाद इसे गुनगुने पानी की मदद से निकाल दें।
- रूखी त्वचा पर आप फलों का रस या गूदा इस्तेमाल कर सकती हैं। खूब पका हुआ केला मैश करें और शहद मिला लें। इसमें नीबू का रस मिला सकती हैं। इसे चेहरे पर लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दें। गुनगुने पानी से धो लें।
- उबटन के प्रयोग के कुछ समय बाद अच्छा टोनर लगा सकती हैं। गुलाब जल एक आम टोनर है।
- बेहतर होगा कि नियमित बादाम तेल या तिल के तेल से बॉडी मसाज कराएं। अगर यह संभव न हो तो नहाने के पानी में एक चम्मच तिल का तेल डालकर नहाएं।
- सर्दियों में ऑलिव ऑइल का प्रयोग अवश्य करें। नहाने के पानी में इसे मिला लें और फिर उस पानी से नहाएं।
- बहुत देर तक व बहुत गर्म पानी से न नहाएं, इससे त्वचा और रूखी हो जाती है। नहाने के बाद एक मग पानी में एक चम्मच शहद डालकर शरीर पर डालें, इससे शरीर कोमल हो जाएगा और आप सारा दिन तरोताजा महसूस करेंगी।
- इस मौसम में हाथों की कोहनियों की त्वचा काफी शुष्क हो जाती है और कभी-कभी वहां कालापन आ जाता है। अगर ऐसा हो तो एक नीबू के छिलके पर थोड़ी-सी पिसी हुई फिटकरी डालकर कुछ देर प्रभावित त्वचा पर हल्के हाथ से मलें।
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