गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

इन बातों को जानकर आप भी कह उठेंगे तरबूज का जवाब नहीं!

 गर्मी में प्यास बुझाने में तरबूज का जबाब नहीं। इसे गर्मी में खाने से गर्मी से तो राहत मिलती ही है। साथ ही इसे खाने के अनेकों फायदे हैं। आइए जानते हैं तरबूज के बारे में कुछ ऐसी ही बातें जिन्हें जानकर आप कह उठेंगे तरबूज का जवाब नहीं। तरबूज का 70 से 80 प्रतिशत भाग खाया जाता है। लाल रंग के गूदे वाले तरबूज मेँ सबसे अधिक लाइकोपिन पाया जाता है । लाइकोपिन एंटीआक्सीडेंट की तरह काम करता है। 

तरबूज में बीटा केरोटिन भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है । इसके छिलके मेँ सिट्रलिन रसायन पाया जाता है जो शरीर में एर्जीमिन अमिनो एसिड बनाता है । यह एसिड शरीर से अमोनिया व अन्य विषैले पदार्थोँ को शरीर से बाहर निकालने में सहायता करता है। तरबूज विटामिन सी और ए का खजाना है।साथ ही मर्दो में प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को भी कम कर देता है। गर्मी के मौसम में इसका जमकर सेवन करें, क्योंकि यह विटामिन बी, बी6, बी1 का अच्छा स्रोत है। अगर हम कहे कि यह पानी से भरा होता है, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसमें 98 प्रतिशत तक जल होता है। अमीनो अम्ल भी प्रचुरता से पाया जाता है, यह अर्जीनाइन शरीर में चलने वाले यूरिया चक्र को प्रोत्साहित करता है। 

थाइमिन और मैग्नेशियम जैसे तत्व जो शरीर में उर्जा का उत्पादन और मांसपेशियों के क्षरण को रोकने का काम करते हैं, इसमें पाये जाते हैं। इसके सेवन से गुर्दे की पथरी, दमा, दिल संबंधी बीमारी और ऑथराइटिस का खतरा कम होता है। अगर आपके शरीर पर अतिरिक्त चर्बी है, तरबूज का सेवन करें। खाना खाने के उपरांत तरबूज का रस पीने से भोजन शीघ्र पच जाता है। इससे नींद भी अच्छी आती है। इसके रस से लू लगने का अंदेशा भी नहीं रहता। पोलियो रोगियों को तरबूज का सेवन करना बहुत लाभकारी रहता है, क्योंकि यह खून को बढ़ाता है और उसे साफ भी करता है। त्वचा रोगों के लिए यह फायदेमंद है। तपती गर्मी में जब सिरदर्द होने लगे तो तरबूज के आधा गिलास रस को पानी में मिलाकर पीना चाहिए। पेशाब में जलन हो तो ओस या बर्फ में रखे हुए तरबूज का रस निकालकर सुबह शकर मिलाकर पीने से लाभ होता है।

गर्मी में नित्य तरबूज का ठंडा-ठंडा शरबत पीने से शरीर को शीतलता तो मिलती ही है । साथ ही चेहरे पर एक चमक भी आ जाती है। इसके लाल गूदेदार छिलकों को हाथ-पैर, गर्दन व चेहरे पर रगडऩे से सौंदर्य निखरता है। सूखी खांसी में तरबूज खाने से खांसी का बार-बार चलना बंद होता है। तरबूज का गूदा लें और इसे ब्लैक हैडस के प्रभावित जगह पर धीरे- धीरे रगड़ें। एक ही मिनट उपरांत चेहरे को गुनगुने पानी से साफ कर लें।

आलू से हो सकती है आपकी कायापलट....ये पढ़ेंगें तो जान जाएंगें

वैसे तो आलू का चरबी बढ़ाने वाला वाला माना जाता है,लेकिन आलू के फायदे बहुत कम लोग जानते हैं। हम बताते हैं आपको आलू के कुछ ऐसे ही गुण जो शायद आप नहीं जानते होंगे। आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस तत्त्व होते हैं। आलू के प्रति 100 ग्राम में 1.6 प्रतिशत प्रोटीन, 22.6 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 0.1 प्रतिशत वसा, 0.4 प्रतिशत खनिज और 97 प्रतिशत कैलोरी ऊर्जा पाई जाती है।

- आलू उबालने के बाद बचे पानी में एक आलू मसलकर बाल धोने से आश्चर्यजनक रूप से बाल चमकीले, मुलायम और जड़ों से मजबूत होंगे। सिर में खाज, सफेद होना व गंजापन तत्काल रुक जाता है। 

- जलने पर कच्चा आलू कुचलकर जले भाग पर तुरंत लगा देने से आराम मिल जाता है। - आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा। 

- आलू के रस में नींबू रस की कुछ बूंदें मिलाकर लगाने से धब्बे हल्के हो जाते हैं।

- आलू के टुकड़ों को गर्दन, कुहनियों आदि सख्त स्थानों पर रगडऩे से वहां की त्वचा साफ एवं कोमल हो जाती है।

- आलू भूनकर नमक के साथ खाने से चर्बी की मात्रा में कमी होती है।

- झाइयों तथा झुर्रियों से छुटकारा पाने के लिए आलू के रस में मुल्तानी मिट्टी मिलाकर झाइयों और झुर्रियों पर लगाएं। बीस मिनट बाद चेहरा पानी से साफ कर लें।

-  भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज दूर करता है। आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है।

-  चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर खाएँ। इससे गठिया ठीक हो जाता है।

-  उच्च रक्तचाप के रोगी भी आलू खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है।

-  कच्चा आलू पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम काजल की तरह लगाने से 5 से 6 वर्ष पुराना जाला और 4 वर्ष तक का फूला 3 मास में साफ हो जाता है।

इससे हो जाएगा एसीडिटी का परमानेंट इलाज

कभी-कभी ज्यादा खा लेने पर एसीडिटी हो जाती है। इसके विपरित ज्यादा समय तक भुखे रहने पर भी एसीडिटी हो जाती है। ऐलोपेथिक दवाई लेने पर एसीडिटी से थोड़े समय के लिए निजात तो जरूर मिल जाती है लेकिन पूरी तरह छुटकारा नहीं मिलता है। इसीलिए एसीडिटी मिटाने के लिए आयुर्वेदिक देसी नुस्खे सबसे अधिक कारगर होते है।



आयुर्वेद और यूनानी पद्धति में तो शहद एक शक्तिवर्धक औषधी के रूप में लंबे समय से प्रयुक्त किया  जा रहा है। इसके विभिन्न गुण अब दुनिया भर में किए जा रहे शोधों से उजागर हो रहे हैं। दालचीनी और शहद का योग पेट रोगों में भी लाभकारी है। पेट यदि गड़बड़ है तो इसके लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता है और पेट के छाले भी खत्म हो जाते हैं। खाने से पहले दो चम्मच शहद पर थोड़ा-सा दालचीनी पावडर बुरककर चाटने से एसिडिटी में राहत मिलती है और खाना अच्छे से पचता है।

आम नहीं बहुत खास है ''आम '' इसमें छुपे इन गुणों को जानेंगे तो मानेंगे

आम को फलों का राजा माना जाता है। खाने में तो ये फल खट्टा-मीठा और स्वाद से भरा होता है। लेकिन आम के अंदर छुपे असली गुणों को बहुत कम लोग जानते हैं आम पर कही गई कहावत आम तो आम और गुठलियों के दाम एकदम सही है क्योंकि इस फल का छिलका और गुठलिया भी बहुत उपयोगी होते है आइए जानते हैं आम के कुछ ऐसे ही गुणों के बारे में....

100 ग्राम आम में पोषकता

पोषण     पका आम             हरा आम

ऊर्जा        74  किलोकैलोरी     44 किलोकैलोरी

रेशा        0.7   ग्राम             1.2 ग्राम

कैल्शियम   14   मि.ग्रा            10 मि.ग्रा

लौह         1.3   मि.ग्रा           5.4 मि.ग्रा

कैरोटीन     2743  माइक्रोग्राम    90 माइक्रोग्राम

विटामिन सी   16   मि.ग्रा          3 मि.ग्रा

- गर्मियों के मौसम में पका हुआ फल खाने से थकान और प्यास का अनुभव नहीं होता।

- ग्लूकोज कार्बोहाइड्रेट, फ्रक्टोज, सुक्रोज विटामिन सी आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

- आम की छाल का काढ़ा बनाकर घाव को धोने से पुराना से पुराना घाव भी भर जाता है।

- आम के ताजे पत्ते चबाने से मजबूत होते हैं और दांत के बहुत सारे रोग जड़ से खत्म हो जाते हैं।

-  पका आम आलस्य को दूर करता है तथा मूत्र संबंधी रोगों का सफाया करता है।

- आम के छिलके को ताजे पानी में पीसकर पिलाने से हैजा ठीक हो जाता है।

-  प्राकृतिक रूप से पका हुआ आम क्षयरोग यानी टीबी को मिटाता है।

-  जिन लोगों को शुक्रप्रमेह शारीरिक विकारों और वातादि यानी वायु संबंधी दोषों के कारण संतानोत्पत्ति न होती हो उनके लिए पका आम किसी      वरदान से कम नहीं है। मतलब कि संतान सुख से वंचित दंपत्ती के लिये आम बेहद लाभदायक  होता है। 

-  प्राकृतिक रूप से पके हुए ताजे आम के सेवन से पुरूषों में शुक्राणुओं की कमी,  नपुंसकता, दिमागी कमजोरी आदि रोग दूर होते हैं।

गिरते बालों का हर्बल इलाज: आसानी से मिलने वाली इस जड़ीबूटी से ऐसे करें शैम्पू

भृंगराज आस्टेरेसी कुल का पौधा है। यह प्राय: नम स्थानों में उगता है। यह लगभग पूरे संसार में पाया जाता है। आयुर्वेद में इसका तेल बालों के लिये बहुत उपयोगी माना जाता है। बालों को घने, काले और सुंदर बनाने के लिए भृंगराज का उपयोग कई तरह से किया जाता है। हम बताने जा रहे हैं आपको भृंगराज के कुछ ऐसे ही उपयोगी प्रयोग....  

- भृंगराज के पत्तों का रस निकालकर बराबर का नारियल तेल लें और धीमी आंच पर रखें। जब केवल तेल रह जाए, तो बन जाता है भृंगराज केश तेल। अगर धीमी आंच पर रखने से पहले आंवले का रस मिला लिया जाए तो और भी अच्छा तेल बनेगा। बालों में रूसी हो या फिर बाल झड़ते हों, तो इसके पत्तों का रस 15-20 ग्राम लें। 

- थोडा सुहागे की खील, भृंगराज और दही मिलाकर बालों की जड़ में लगाकर एक घंटे के लिए छोड़ दें। बाद में धो लें  नियमित रूप से ऐसा करने पर बाल सुंदर घने और मजबूत हो जाते हैं। 

- एसिडिटी होने पर भृंगराज के पौधे को सुखाकर चूर्ण बना लिया जाए और हर्रा के फलों के चूर्ण के साथ समान मात्रा में लेकर गुड के साथ सेवन कर लिया जाए तो एसिडिटी की समस्या से निजात मिल सकती है।

- त्रिफला, नील और भृंगराज तीनों एक एक चम्मच लेकर 50 मिली पानी में मिलाकर रात को लोहे की कड़ाही में रख देते है। प्रात: इसे बालों में लगाकर, इसके सूख जाने के बाद नहाना चाहिए। बाल नेचुरली काले हो जाएंगे।

- माईग्रेन या आधा सीसी दर्द होने पर भृंगराज की पत्तियों को बकरी के दूध में उबाला जाए व इस दूध की कुछ बूँदें नाक में डाली जाए तो आराम मिलता है। हाथी पाँव हो गया हो तो इसके पत्ते पीसकर सरसों का तेल मिलाकर लगाएं। 

-भृंगराज एवं आंवले लें के ताजे पत्तों को पीस कर बालों की जड़ों में लगायें ,साथ ही नीम,शिकाकाई ,आंवला, कालातिल, रीठा इन सब को साथ मिलाकर एक पेस्ट बना लें, यह आपके लिए एक हर्बल शैम्पू का काम करेगा जो बालों को कंडिशनिंग के साथ ही जड़ों को मजबूत बनाएगा। पेट साफ  रखने के लिए केवल त्रिफला के चूर्ण का प्रयोग करें ,यह आपके बालों के जड़ों को भी मजबूती प्रदान करेगा।

कुछ नेचुरल फेसपेक: इन्हें आजमा कर देखें, चेहरा एकदम चिकना हो जाएगा

चेहरे को चिकना और दाग-धब्बे रहित बनाने के लिए लोग कई तरह के कास्मेटिक्स का प्रयोग करते हैं। लेकिन कास्मेटिक्स के अधिक उपयोग से चेहरा अपनी नेचुरल शाइन खो देता है। इसीलिए अपनी स्कीन को हमेशा जवां बनाएं रखने के लिए घरेलू फेसपेक व स्क्रब से अच्छा कोई दूसरा उपाय नहीं है। मुल्तानी मिट्टी वाले फेसपेक को सबसे असरदार माना जाता है। कहा जाता है कि मुल्तानी मिट्टी सौन्दर्य का खजाना है। ये नेचुरल कंडीशनर भी है और ब्लीच भी। ये सौन्दर्य निखारने का सबसे सस्ता और आयुर्वेदिक नुस्खा है।



- आधा चम्मच संतरे का रस लेकर उसमें 4-5 बूंद नींबू का रस, आधा चम्मच मुल्तानी मिट्टी, आधा चम्मच चंदन पाउडर और कुछ बूंदें गुलाब जल की। इन सबको मिलाकर कर थोड़ी देर के लिए फ्रिज में रख दें। इसे लगा कर 15-20 मिनट तक रखें। इसके बाद पानी से इसे धो दें। यह तैलीय त्वचा का सबसे अच्छा उपाय है।

- तैलीय त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी में दही और पुदीने की पत्तियों का पाउडर मिला कर उसे आधे घंटे तक रखा रहने दें, फिर अच्छे से मिलाकर चेहरे और गर्दन पर लगाएं। सूखने पर हल्के गर्म पानी से धो दें। ये तैलीय त्वचा को चिकनाई रहित रखने का कारगर नुस्खा है



- अगर आपकी त्वचा ड्राई है, तो काजू को रात भर दूध में भिगो दें और सुबह बारीक पीसकर इसमें मुल्तानी मिट्टी और शहद की कुछ बूंदें मिलाकर स्क्रब करें।



- मुहांसों की समस्या से परेशान लोगों के लिए तो मुल्तानी मिट्टी सबसे कारगर इलाज है, क्योंकि मुल्तानी मिट्टी चेहरे का तेल सोख लेती है, जिससे मुहांसे सूख जाते हैं।



- मुल्तानी मिट्टी को एक कटोरे पानी में भिगो दें। दो घन्टे बाद जब मुल्तानी मिट्टी पूरी तरह घुल जाए तो इस घोल को सूखे बालों में लगा कर हल्के हाथ से बालों को रगड़े। पाँच मिनट तक ऐसा ही करें। गुनगुने पानी से सिर को धो लें। अगर बालों मे ज्यादा गंदगी मौजूद है इसलिए यह काम दोबारा न करें।

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

कुछ ऐसी बातें जो हर पुरुष को मालूम होनी चाहिए

कहते हैं सुखद वैवाहिक जीवन के लिए पति व पत्नी का हर तरह से स्वस्थ होना जरूरी है। स्वप्न दोष भी पुरुषों में होने वाली एक ऐसी समस्या है जो चेतन मन का नियंत्रण खो देने पर होती है तथा इस समस्या के कारण शरीर मन के किसी कोने में दबी पड़ी वासना के अनुसार प्रतिक्रिया करने लगता है। स्पप्नदोष की स्थिति के पीछे कई बार गलत खान-पान भी अहम् कारण होता है। आइये जाने उन प्रमुख कारणों को जिसके कारण किसी को स्पप्नदोष की स्थिति का सामना करना पड़ता है...



- गलत आहार-विहार करना यानी कि गलत समय पर, गलत चीजें, गलत तरीके से गलत मात्रा खाना और गलत व  अप्राकृतिक तरीके से अपनी दिनचर्या रखना।



- मन में भोग-विलास के वासनात्मक खयाल लाना या मन में काम-वासना के विचार करना।



- अधिक घी-दूध, मेवे-मिठाई, पौष्टिक चीजें... आदि का सेवन करना।



- खाने के तुरंत बाद सो जाना।



- सोने के बिल्कुल पहले गर्म दूध पीना।



- शरीर की आवश्यकता से अधिक भोजन करना।



- सोने से पहले कोई अश्लील साहित्य पढऩा, फिल्म देखना, या कामुकता के विचार करते हुए सोना।



- चंचल स्वभाव की स्त्रियों के साथ समय बिताना।



ये प्रमुख कारण हैं जिनके कारण किसी को स्पप्नदोष जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। इनके अतिरिक्त भी कुछ बायोलॉजिकल कारण हो सकते हैं लेकिन प्रमुख कारण यही हैं। इसीलिए सुखद वैवाहिक जीवन और स्वप्न दोष से बचने का ये सबसे अच्छा तरीका है।

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