बुधवार, 13 जून 2012

ऐसा एक गिलास जूस आपकी उम्र को कभी ढलने नहीं देगा

आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में हमेशा से ही शहतूत को सेहत के लिये बेहद लाभदायक बताया जाता रहा है। आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगों से भी यही बात साबित और सिद्ध हो रही है। हाल ही में हुई एक शोध में शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि शहतूत में एंटी एज यानी उम्र को रोकने वाला गुण होता है।

अध्ययन में यह पाया गया कि शहतूत बालों के लिये भी बेहद लाभदायक होता है। इसके नियमित सेवन से त्वचा जवां बनी रहती है।परीक्षण के दौरान देखा गया कि शहतूत में दूसरे लाभदायक फलों की तुलना में 79 प्रतिशत ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है।

डेली एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अध्ययन में पाया गया कि शहतूत के जूस में एंटीऑक्सीडेंट संतरे से दोगुना होता है। इसके अलावा शहतूत में रेजवर्टेरोल पाया जाता है जिसमें स्वास्थ को लाभ पहुंचाने वाला गुण पाया जाता है। रेजवर्टेरोल के बारे में माना जाता है कि यह शरीर में फैले प्रदूषण को साफ  करता है और संक्रमित चीजों को बाहर निकालता है। परीक्षण में पाया गया कि शहतूत में ऐसे गुण पाए जाते हैं जिससे आंखों की गड़बड़ी ठीक हो सकती है। यहां तक कि लंग कैंसर का जोखिम कम हो सकता है और कोलोन और प्रोस्टेट कैंसर से बचा जा सकता है।  

मंगलवार, 12 जून 2012

बालों को लंबा और चमकदार बनाना है तो जरुरी है ये सात चीजें खाना क्योंकि....




बाल लंबे होने के बावजूद एक खास बात जो ब्यूटी निखारती है, वह है बालों की चमक। अगर आप बालों को लंबा और चमकदार बनाना चाहते हैं तो  इसके  सिर्फ अच्छे उत्पादों का इस्तेमाल ही जरूरी नहीं बल्कि बालों की सही देखरेख भी जरूरी है। इसके साथ ही उपयुक्त आहार का सेवन ना किया जाएं तो भी बालों की ग्रोथ रूक जाती हैं। आइए जानें कैसे पायें लंबे बाल।


सामन फिश- भोजन में सामन फिश को शामिल करें। इसमें पर्याप्त मात्रा में ओमेगा 3 व विटामिन बी 12 पाया जाता है। जिससे हेयर फालिकल्स मजबूत होते हैं। अगर ओमेगा ३ और विटामिन बी १२ की कमी हो जाती है तो सिर की त्वचा से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं। साथ ही बाल भी रूखे और बेजान नजर आने लगते हैं।


सेम- सेम में पर्याप्त मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं। एक कप पके हुए बीन्स में कम से कम 9 से 13 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इसमें प्रोटिन पर्याप्त मात्रा में होता है इसलिए ये बालों के विकास में मदद करता है।


साबुत अनाज- साबुत अनाज खाने से भी बाल स्वस्थ होते हैं। साबुत अनाज में विटामिन बी, जिंक व आयरन पाया जाता है। ड्राय फ्रूटस- बादाम, काजू, मुंगफली, अखरोट आदि के पर्याप्त मात्रा में सेवन से ओमेगा ३, खनिज, सेलेनियम व जिंक आदि मिलते हैं जिससे बाल हेल्दी और शाईनी बन जाते हैं।


हरी सब्जियां- ब्रोकली, पालक व अन्य हरी सब्जियों में आयरन, विटामिन्स, कैल्शियम आदि मिलते हैं जो बालों की अच्छी ग्रोथ के लिए बहुत आवश्यक है।अंडे- अंडे में प्रोटिन, विटामिन बी 12, बायोटिन आदि पाए जाते हैं। इसे पकाते समय थोड़े आइल या बटर का उपयोग करें तो ये विटामिन और प्रोटिन बनाने में मदद करता है।


गाजर- हेल्दी स्केल्प और बालों की नेचुरल कंडिशनिंग के लिए गाजर का सेवन बहुत अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है।


लो-फैट डेयरी प्रोडक्टस- लो-फेट डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दही व पनीर में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। बालों को हेल्दी बनाना है तो इनका सेवन भी बहुत जरुरी है।

अगर वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं हैं तो ये करके


वर्तमान समय में  भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण वैवाहिक जीवन औपचारिकता भर रह गया है। इन्ही कारणों से यौन संबंधों को लेकर असंतुष्ट युगलों की संख्या में इजाफा हो रहा है, परिणाम झगड़े , तनाव अन्य कई तरह की शारीरिक व मानसिक व्याधियां। ऐसी स्थिति में आयुर्वेद एवं आयुर्वेदिक औषधियां मददगार हो सकती है तो आइए जानते हैं घर पर बनी कुछ ऐसी आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में जो आपका वैवाहिक जीवन खुशियों से भर देंगी...

- असगंध ,विधारा,शतावर ,सफेद मूसली ,तालमखाना के बीज ,कौंच बीज प्रत्येक 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर दरदरा कर कपड़े से छान लें तथा 350 ग्राम मिश्री मिला लें, इस नुस्खे को 5-10 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम ठन्डे दूध से लें ,लगातार एक माह तक लेने से यौन सामथ्र्य में वृद्धि अवश्य होगी।
- दालचीनी ,अकरकरा ,मुनक्का और श्वेतगुंजा को एक साथ पीसकर इन्द्रिय पर लेप करें तथा सम्भोग के समय कपडे से पोछ डालें ,यह योग इन्द्रियों में रक्त के संचरण को बढाता है।

- शुद्ध शिलाजीत 500 मिलीग्राम की मात्रा में ठन्डे  दूध में घोलकर सुबह शाम पीने से भी लाभ मिलता है।

- शीघ्रपतन की शिकायत हो तो धाय के फूल ,मुलेठी ,नागकेशर ,बबूलफली इनको बराबर मात्रा में लेकर इसमें आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर ,इस योग को 5-5 ग्राम की मात्रा में सेवन लगातार एक माह तक करें ,इससे शीघ्रपतन में लाभ मिलता है

।- कामोत्तेजना का बढाने के लिए कौंचबीज चूर्ण ,सफेद मूसली ,तालमखाना ,अस्वगंधा चूर्ण को बराबर मात्रा में तैयार कर 10-10 ग्राम की मात्रा में ठन्डे दूध से सेवन  करें निश्चित लाभ मिलेगा।ये चंद नुस्खें हैं, जिनका प्रयोग यौनशक्ति,यौनऊर्जा एवं पुरुषार्थ को बढाने में मददगार है। 

थोड़ी सी कालीमिर्च कर देगी इन सारे रोगों को ठीक

- कालीमिर्च का चूर्ण नाक में डालने से बेहोशी दूर होती है।

- सूजन पर कालीमिर्च का लेप करने से वह ठीक हो जाती है।

- काली मिर्च व तुलसी के पत्ते का काढ़ा बनाकर छानकर उसमें बताशा मिलाकर पीने से जुकाम ठीक होता है।

- कालीमिर्च व काला नमक अंदाज से लेकर दही  में मिलाकर पीने से खाना न पचने की समस्या दूर होती है।  

- कालीमिर्च को पीसकर पुराने गुड़ के साथ देने से नाक से गिरने वाला खून बंद हो जाता है। 

- कालीमिर्च को घी में मिलाकर या मिश्री के साथ सुबह उठते ही खाने से अनेक प्रकार के नेत्र रोग मिटते हैं।

- कालीमिर्च को पीसकर तेल में मिलाकर लकवे के रोगी को लेप करने से लाभ होता है। 

- त्वचा पर कहीं भी फुंसी होने पर, काली मिर्च को पानी के साथ पत्थर पर घिस कर अनामिका अंगुली से सिर्फ फुंसी पर लगाने से फुंसी खत्म जाती है। 

- काली मिर्च को सुई से छेद कर दिये की लौ से जलाएं। जब धुआं उठे तो इस धुएं को नाक से अंदर खीच लें। इस प्रयोग से सिर दर्द ठीक हो जाता है। हिचकी आना भी  भी बंद हो जाती है। 

- काली मिर्च 20 ग्राम, जीरा 10 ग्राम और शक्कर या मिश्री 15 ग्राम कूट पीस कर मिला लें। इसे सुबह-शाम पानी के साथ फांक लें। बवासीर रोग में लाभ होता है। 

- शहद में पिसी काली मिर्च मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से खांसी बंद हो जाती है। 

- आधा चम्मच पिसी काली मिर्च थोड़े से घी के साथ मिला कर रोजाना सुबह-शाम नियमित खाने से नेत्र ज्योति बढ़ती है। 

- काली मिर्च 20 ग्राम, सोंठ, पीपल, जीरा व सेंधा नमक सब 10-10 ग्राम मात्रा में पीस कर मिला लें। भोजन के बाद आधा चम्मच चूर्ण थोड़े से जल के साथ फांकने से मंदाग्रि (खाना न पचना) दूर हो जाती है। 

- चार-पांच दाने कालीमिर्च के साथ 15 दाने किशमिश चबाने से खांसी में लाभ होता है।

- कालीमिर्च सभी प्रकार के संक्रमण में लाभ देती है। 

- यदि आपका ब्लड प्रेशर लो रहता है, तो दिन में दो-तीन बार पांच दाने कालीमिर्च के साथ 21 दाने किशमिश का सेवन करे। 

- बुखार में तुलसी, कालीमिर्च तथा गिलोय का काढ़ा लाभ करता है। 

रोज पीना चाहेंगे टमाटर सूप जब जान लेंगे इसका ये अनोखा गुण.


यूं तो हर फल एवं सब्जियों में कुछ न कुछ औषधीय गुण होते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों की माने तो, अब टमाटर दर्द निवारक दवा एस्पिरिन का विकल्प हो सकता है। एस्पिरिन को दर्द निवारक के साथ-साथ खून पतला करने वाली दवा के रूप में जाना जाता है, अब ऐसे ही कुछ गुणों को टमाटर में भी देखा गया है।

टमाटर के बीजों से बनाए गए प्राकृतिक जेल, शरीर में खून के प्रवाह को बढ़ाने वाले तथा रक्त के थक्कों के बनने से रोकने वाले पाए गए हैं, यह बात हम नहीं रोवेट संस्थान के प्रोफेसर असीम दत्त रॉय के शोध के परिणाम कह रहे हैं। यूरोपीयन यूनियन के स्वास्थ्य अधिकारी तो पहले ही इस बात को मान चुके हैं। यह बात उन करोड़ों लोगों के लिए एक सुखद एहसास है ,जो अपने खून को पतला रखने के लिए एस्पिरिन का सेवन कर अल्सर जैसे दुष्प्रभाव को झेलने को मजबूर हैं।

प्रो. असीम दत्त रॉय के अनुसार आज तक इस जेल के  कोई भी साइड इफेक्ट नहीं देखे गए हैं, इस अध्ययन के अनुसार टमाटर के बीजों से बने जेल के सेवन के तीन घंटे के अन्दर ही यह रक्त के प्रवाह को बढ़ा देता है, तथा इसका अपना प्रभाव 18 घंटे तक बना रहता है। तो है न कमाल का टमाटर। पीएं टमाटर का सूप या टमाटर के बीजों का जेल और कर लें खुद को एस्पिरिन लेने की टेंशन से फ्री।

घरेलू नुस्खे: जीरे से करें इलाज ये है घर का वैद्य


- जीरा, अजवाइन, सोंठ, कालीमिर्च, और काला नमक अंदाज से लेकर चूर्ण कर लें। इसमें थोड़ी सी घी में भूनी हींग मिलाकर खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है। पेट का दर्द ठीक हो जाता है।

- जीरा, अजवाइन और काला नमक का चूर्ण रोजाना एक चम्मच खाने से तेज भूख लगती है और पेट की गैस शांत होती है।

 - 3 ग्राम जीरा और 125 मि.ग्रा. फिटकरी पोटली में बांधकर गुलाब जल में या उबाल कर ठंडा किए हुए 10 ग्राम जल में भिगो दें। आंख में दर्द होने पर या लाल होने पर इस रस को टपकाने से आराम मिलता है।

- दही में भूरे जीरे का चूर्ण मिलाकर खाने से डायरिया मिटता है।

-  जीरे को नींबू के रस में भिगोकर नमक मिलाकर गर्भवती स्त्री को देने उसका जी मचलाना बंद हो जाता है।

- सिरके के साथ जीरा देने से हिचकी बंद हो जाती है। 

- जीरे को गुड़ के साथ खाने से मलेरिया में लाभ पहुंचता है।

-  जीरा आयरन का सबसे अच्छा स्त्रोत है, जिसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर होती है। 

- एसीडिटी से तुरंत राहत पाने के लिए,  एक चुटकी कच्चा जीरा खाने से फायदा मिलता है।

- ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ लें। 

शतावरी के अचूक रामबाण: आजमाकर देखें ये है लाख दुखों की एक दवा

शतावरी एक चमत्कारी औषधि है जिसका उपयोग कई रोगों के इलाज में किया जाता है। यह पौधा झाड़ीनुमा होता है, जिसमें फूल व मंजरियां एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं और मटर के समान फल पकने पर लाल रंग के होते हैं। आयुर्वेद के आचार्यों के अनुसार, शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीर को रोगों से लडऩे की क्षमता प्रदान करता है। इसे शुक्रजनन,शीतल ,मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है। महर्षि चरक ने भी शतावरी को चिर यौवन को बरकार रखने वाला माना है। आधुनिक शोध भी शतावरी की जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं। अब हम आपको शतावरी के कुछ आयुर्वेदिक योग की जानकारी देंगे, जिनका औषधीय प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में करना अत्यंत लाभकारी होगा।

 - यदि आप नींद न आने की समस्या से परेशान हैं तो बस शतावरी की जड़ को खीर के रूप में पका लें उसमें थोड़ा गाय का घी डालें और ग्रहण करें। इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पाएंगे।

-शतावरी की ताजी जड़ को मोटा-मोटा कुट लें, इसका स्वरस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें। इस तेल को माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगाएं और लाभ देखें।

-यदि रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण - 1.5 ग्राम, वसा के पत्ते का स्वरस  2.5 मिली, मिश्री के साथ लें और लाभ देखें।

-प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने की समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण -पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है।

-पुरुष यौन शिथिलता से परेशान हो तो शतावरी पाक या केवल इसके चूर्ण को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है।

-यदि रोगी को मूत्र से सम्बंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है।

- शतावरी मूल का चूर्ण -2.5 ग्राम, मिश्री -2.5 ग्राम को एक साथ मिलाकर पांच ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह, प्री -मैच्योर इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष ) में लाभ मिलता है।

-शतावरी के जड़  के चूर्ण को पांच से दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ नियमित रूप से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है।

-वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का सेवन करने से ज्वर (बुखार) से मुक्ति मिलती है।

-शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन, दर्द एवं अन्य पित्त से सम्बंधित बीमारियों में लाभ मिलता है।

Featured post

बीमारी क्यों आती है?

 हर वस्तु, हर विचार, हर #व्यापार, हर #रिश्ता – सब कुछ #पंचतत्व से बना है। नाम बदले, रूप बदले, स्वाद बदले – लेकिन #तत्व नहीं बदलता। चावल व...