सोमवार, 21 सितंबर 2015

गुर्दे की पत्थरी का नुस्खा.


इस नुस्खे से कई रोगियों को लाभ हुआ.अन्य रोगी भी लाभ उठा सकें इसलिए नुस्खा प्रस्तुत है.
करीब दो किलो नीबूं का रस निकाल लें.यह रस लगभग एक लीटर होना चाहिए.इसे छान कर कांच की बड़ी बोतल मे भर कर इसमे मुट्ठी भर कौड़ियां डाल कर रख दें और 7-8 दिन तक हिलाएं नही.कौड़ियां पन्सारी की दुकान मे मिलती हैं नींबू के रस का रंग दुधिया हो जाएगा.अब रोजाना सुबह खाली पेटआधा कप रस अच्छी तरह बारिक छान कर पीना है.इसके एक घण्टे तक कुछ भी खांएं या पिएं नही.
रस खत्म होने तक ऐसे रोजाना सेवन करें.पत्थरी धीरे धीरे गल कर पेशाब के साथ निकल जाएगी.
और रोग मुक्त हो जाओगे.

सोमवार, 14 सितंबर 2015

सेहत से भरपूर है फ्रेंचबीन्स



बीन्स एक ऐसी सब्जी है जिसका प्रयोग लगभग हर तरह के भोजन में किया जाता है। यह सेहत से भरा एक पौष्टिक वि‍कल्प भी है। सलाद से लेकर, भोजन तक में प्रयोग की जाने वाली, प्रोटीन से भरपूर फ्रेंच बीन्स, किस तरह आपकी सेहत को और भी बेहतर बना सकती है, जानिए -

बीन्स की हरी पत्त‍ियों को भी सब्जी के रूप में भोजन में शामिल किया जाता है तथा सूखी हुई फलियों को राजमा या लोबिया के रूप में खाया जाता है।
1  फ्रेंच बीन्स में मुख्यत: पानी, प्रोटीन, कुछ मात्रा में वसा तथा कैल्सियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन, नियासीन, विटामिन सी आदि तरह के मिनरल और विटामिन मौजूद होते हैं।
 2  इनके अलावा बीन्स विटामिन बी2 का भी प्रमुख स्त्रोत है। प्रति सौ ग्राम फ्रेंच बीन्स से तकरीबन 26 कैलोरी मिलती है। राजमा में यही सब अधि‍क मात्रा में पाया जाता है इसलिए प्रति सौ ग्राम राजमा से 347 कैलोरी मिलती है।

3  बीन्स, घुलनशील फाईबर का अच्छा स्रोत है, जिसके कारण यह हृदय रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि प्रतिदिन एक कप पकी हुई बीन्स का प्रयोग करने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और इससे हृदयाघात की संभावना भी 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
 4  बीन्स में सोडियम की मात्रा कम तथा पोटेशियम, कैल्शि‍यम व मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है जो रक्तचाप को बढ़ने से रोकता है और हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है।

5 बीन्स का 'ग्लाइसेमिक इन्डेक्स' कम होता है जिससे अन्य भोज्य पदार्थों की अपेक्षा बीन्स खाने पर रक्त में शर्करा का स्तर अधि‍क नहीं बढ़ता । इसमें मौजूद फाइबर रक्त में शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं। यही कारण है, कि मधुमेह के रोगियों को बीन्स खाने की सलाह देते है।


6 बीन्स का रस शरीर में इन्सुलिन के उत्पादन को बढ़ावा देता है। इस वजह से मधुमेह के मरीजों के लिए बीन्स खाना बहुत लाभदायक माना जाता है।

7  फ्रेंच बीन्स किडनी से संबंधित बीमारियों में भी काफी फायदेमंद है। किडनी में पथरी की समस्या होने पर, आप लगभग 60 ग्राम बीन्स की पत्त‍ियों को चार लीटर पानी में करीब चार घंटे तक उबाल लें। फिर इसके पानी को कपड़े से छानकर करीब आठ घंटे तक ठंडा होने के लिए रख दें। अब इसे फिर से छान लें पर ध्यान रखें कि इस बार इस पानी को बिना हिलाए छानना है। इसे एक सप्ताह तक हर दो घंटे में पीने से अत्यधि‍क लाभ होता है।

8 होम्योपैथिक दवाओं में भी बीन्स बहुत काम आती है। ताजी बीन्स का उपयोग रूमेटिक, आर्थ्राइटिस तथा मूत्र संबंधी तकलीफ के लिए दवाई बनाने के लिए किया जाता है।

9  बीन्स में एन्टीआक्सीडेंट की मात्रा भी काफी होती है। एन्टीऑक्सीडेंट शरीर में कोशिकाओं की मरम्मत के साथ् ही त्वचा व दिमाग के लिए भी अच्छा माना जाता है। इसलिए इसका सेवन करने से कैंसर की संभावना कम हो जाती है। इसमें मौजूद फाईटोएस्ट्रोजन स्तन कैंसर के खतरे को भी कम हो सकता है।

10  इन सभी के अलावा बीन्स कैल्शियम का एक अच्छा स्त्रोत हैं, जो हड्डियों तथा दांतों दोनों के विकास में महत्वपूर्ण होता है।


बुधवार, 2 सितंबर 2015

इन 9 बातों में नहीं है दम, इनसे कभी नहीं होता वजन कम



अगर आप ये 9 काम हर रोज यह सोच कर करते हैं कि इनसे आपका वजन कम हो जाएगा, तो यह सिर्फ आपकी गलतफ    हमी है। मोटापा कम करने के ये सिर्फ मिथ हैं, जानिए इनके फैक्ट...
ज्‍यादा वर्कआउट करने से कभी भी वजन कम नहीं होता है। हर दिन नियमित रूप से व्‍यायाम करने से ही लाभ होता है।एक समय का खाना न खाना या अपनी खुराक में कटौती कर देने से भी आपके वजन में कमी आ जाएगी। बस खाने-पीने का नियम सही रखें।
फलों को खाने से कभी वजन नहीं बढ़ता। एक समय खाना न खाएं। फल ही खाएं। ये आपको एनर्जी देते हैं। फैट नहीं बढ़ाते हैं। इसी तरह यह भी आपकी गलतफहमी है कि ज्यादा पानी पीते रहने से मोटापा घटता है। यह सिर्फ एक मिथ है। पानी पीने से आपका पेट भर जाता है, लेकिन कैलोरी में कमी नहीं आती।
अपनी खुराक में कार्बोहाइड्रेट शामिल नहीं करते हैं, तो आपको कमजोरी आ जाएगी। इससे आप दुबले नहीं हो सकते हैं। बस इतना ध्यान रखने की जरूरत होती है कि आपको कितना कार्बोहाइड्रेट लेना है। कई लोगों का मानना है कि मीठा खाने से वो मोटे हो जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं है। डार्क चॉकलेट आदि खाने से आपके स्‍वास्‍थ्‍य को लाभ मिलेगा।
सिर्फ फाइबर का सेवन करना भी वजन कम नहीं कर सकता। फाइबर से आपको एनर्जी मिलती है, इसके अलावा आपकी पाचन क्रिया भी दुरुस्‍त रहती है। सिर्फ फाइबर के सेवन से शरीर में दुबलापन नहीं आता। सलाद ज्यादा खाने से भी वजन कम नहीं होता। इससे आपके शरीर में प्रोटीन की मात्रा अच्‍छी हो जाती है लेकिन वजन में कमी नहीं आती है।
जूस पीना भी मोटापे कम करने का जरिया नहीं है। वजन में कमी नहीं आती है जूस पीने से।

इन 5 चीजों को कभी दोबारा गर्म करके नहीं खाना चाहिए




खान-पान से जुड़ी इन 5 चीजों को दोबारा गर्म करके खाना छोड़ दीजिए, वरना फायदे की जगह होगा नुकसान...
आलू सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन दोबारा गर्म करके खाएंगे, तो पोषक तत्व खत्म हो जाएंगे और पाचन क्रिया पर उलटा प्रभाव पड़ेगा।
चुकंदर को कभी भी दोबारा गर्म करके नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से इसमें मौजूद नाइट्रेट समाप्त हो जाता है। अगर ज्यादा बन जाए, तो बिना गर्म किए खाएं।
मशरूम फ्रेश ही खाएं। दोबारा गर्म करके खाने से इसके प्रोटीन का कॉम्पोजिशन बदल जाता है और ये हानिकारक हो सकता है।
अंडे को दोबारा गर्म करके खाना हमेशा नुकसानदेह होता है। ऐसा करने से इसमें मौजूद प्रोटीन विषाक्त हो जाता है।
पालक को दोबारा गर्म करके खाना कैंसर का कारण भी हो सकता है। इसमें मौजूद नाइट्रेट दोबारा गर्म करने के बाद कुछ ऐसे तत्वों में बदल जाते हैं जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

रोज करते हैं लंबे समय तक ड्राइविंग, तो आ सकते हैं इन 5 बीमारियों की चपेट में!



घर से ऑफिस की दूरी ज्यादा है और आपको करनी पड़ रही है लंबी ड्राइविंग, तो जरूर गौर करें इन 5 बीमारियों पर, जो पैदा होती हैं लंबे समय तक ड्राइविंग करने से। समय रहते इन्हें पहचानें और कराएं तुरंत इलाज...
बैक पेन सताने लगता है। घुटनों का दर्द भी होने लगता है।
हैरानी होगी आपको यह जानकर कि ज्यादा देर तक ड्राइविंग करने से ब्लड शुगर लेवल बढऩे की संभावना बहुत ज्यादा रहती है। सेंट लुइस के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए रिसर्च में ये बात सामने आई है कि हाई ब्लड ग्लूकोज लेवल प्री डायबिटीज और डायबिटीज का खतरा पैदा करता है।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। बढ़ते हुए कोलेस्ट्रॉल से दिल के बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
लंबी ड्राइविंग से नींद की समस्या भी पैदा होती है। नींद न आने की समस्या के लोग शिकार हो जाते हैं।
डिप्रेशन का शिकार भी हो सकते हैं। सेंट लुइस के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए रिसर्च में ये बात भी सामने आई है कि रोजाना देर तक सफर करने से डिप्रेशन, चिंता, तनाव, थकान जैसी कई परेशानियां पैदा होने लगती हैं।

रात को सोने से पहले मोजे में रखें बस दो प्याज की स्लाइस, होंगे ये अनोखे फायदे



रात को सोने से पहले मोजे में एक प्याज की स्लाइस रखने के कई सेहत भरे फायदे होते हैं। मोजे में स्लाइस इस तरह रखें कि वह पूरी तरह पैर से टच हो। वरना नहीं मिलेगा कोई फायदा। प्याज में मौजूद फॉस्फोरिक एसिड खून की धमनियों में घुस कर खून को शुद्ध बनाता है।
पैरों के नीचे सीधे अलग-अलग तंत्रिका अंत (लगभग 7,000) होती हैं, जो कि शरीर के विभिन्न अंगों से जुड़ी हुई होती हैं। ये शरीर के भीतर एक शक्तिशाली बिजली के सर्किट की तरह से काम करते हैं, लेकिन ये जूते-चप्पल पहनने की वजह से निष्क्रिय हो जाते हैं। इसलिए कुछ घंटों के लिए नंगे पैर टहलना चाहिए।
प्याज में एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल गुण होते हैं, जो शरीर पर रडऩे से बैक्टीरिया और रोगाणुओं का नाश करता है। जब त्वचा प्याज में मौजूद फास्फोरिक एसिड सोख लेता है, तो खून शुद्ध होता है। सोने के दौरान प्याज मोजे में रखने से पैरों की गंध दूर होती है। टॉक्सिंस दूर होते हैं।
हार्ट के लिए अच्छा होता है। प्याज के टुकडे को पांव के बीच में रख कर सोने से हार्ट स्वस्थ रहता है।
पेट के संक्रमण से छुटकारा मिलता है। किडनी समस्या में भी मदद मिलती है। इसके अलावा छोटी आंत और मूत्राशय की समस्याओं से भी राहत मिलती है।  अगर आपको लगे कि आपको बुखार चढ़ रहा है, तो मोजे में प्याज की स्लाइस रख लें।

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

प्राणायाम के द्वारा मिलने वाले लाभ


प्राणायाम के द्वारा व्यक्ति को मिलने वाले वाले अनेक लाभ हैं-
•प्राणायाम द्वारा प्राण (वायु) को सुरक्षित रखने का अभ्यास किया जाता है। यह सांस विज्ञान पर आधारित क्रिया है। सांस लेना और छोड़ना जीवन का मुख्य आधार है। इस क्रिया द्वारा वैसे ही सांसों को अपने वश में किया जाता है, जैसे व्यक्ति अपने प्राण को वश में करता है।
•प्राणायाम के द्वारा सांसों पर नियंत्रण किया जाता है, जिससे सांस लेने व छोड़ने की गति कम हो जाती है और अधिक गहरी व लम्बी सांस लेने का अभ्यास हो जाता है। इससे सांसों को बचाने से आयु बढ़ती है और व्यक्ति अधिक समय तक जीवित रहता है। जो व्यक्ति अधिक हांफते हैं या जल्दी-जल्दी सांस लेते हैं, उनकी आयु कम होती जाती है और वह अकाल मृत्यु को भी प्राप्त करते हैं।
•वायुमण्डल में फैले ऑक्सीजन को ही प्राणवायु कहते हैं और जीवनी भी वायु को ही कहते हैं। अत: प्राणायाम के द्वारा हम उसी वायु को अधिक से अधिक अपने अंदर एकत्र करने की कोशिश करते हैं। इसलिए प्राणायाम के द्वारा हमारे अंदर वायु (प्राणशक्ति, जीवनी) की मात्रा अधिक हो जाने से प्राणशक्ति के साथ आयु और शारीरिक क्षमता भी बढ़ जाती है।
•प्राणायाम का अभ्यास करने वाले व्यक्ति को किसी प्रकार का रोग नहीं होता और इसका प्रतिदिन अभ्यास करने से शरीर में उत्पन्न हो चुका रोग भी खत्म हो जाता है।
•योग के अभ्यास के लिए प्राणायाम का अभ्यास आवश्यक है। ´घेरण्ड संहिता´ और ´हठयोग प्रदीपिका´ में प्राणायाम के महत्वों को बताते हुए कहा गया है कि प्राणायाम के अभ्यास के बिना प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि की प्राप्ति नहीं हो सकती है।
•प्राणायाम न केवल सांसों को संचित (बचाना) करने का अभ्यास होता है, बल्कि यह मन को शांत व स्थिर भी करता है। इससे बुद्धि का विकास होता है और चिंतन व मनन की क्षमता भी बढ़ती है।
•´योगदर्शन´ में प्राणायाम के बारे में बताते हुए कहा गया है कि इसके अभ्यास से बुद्धि व विवेक से अज्ञानता का नाश होता है। इससे व्यक्ति अंधकार रूपी अज्ञान से निकलकर ज्ञान रूपी प्रकाश में आ जाता है। इसके द्वारा मनुष्य के अंदर इतनी शक्ति आ जाती है कि वह अपने मन को जिस स्थिति में रखना चाहे, रख सकता हैं। इससे मन व इन्द्रियां वश में हो जाती हैं, जिससे प्रत्याहार के अभ्यास से समाधि तक के अभ्यास में लाभ मिलता है।
•प्राणायाम के अभ्यास से शुद्ध वायु का बहाव खून के साथ होने से शरीर के विकार दूर होते हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है और शरीर में लचक, स्फूर्ति, चुस्ती और सुन्दरता व चमक आ जाती है।
•प्राणायाम से इन्द्रियों में उत्पन्न होने वाले विकार दूर हो जाते हैं। इससे शरीर, मन और प्राण में स्थिरता व स्वास्थ्यता आती है। मनुस्मृति में कहा गया है कि जैसे आग में धातु आदि को गलाकर उसे आकार दिया जाता है, उसी तरह प्राणायाम के द्वारा इन्द्रियों, मन व मस्तिष्क के विकारों को दूर करके मन को स्वच्छ, निर्मल व धार्मिक विचारों को ग्रहण करने योग्य बनाया जाता है।
•मस्तिष्क की शक्तियों का कोई अंत नहीं है इसलिए प्राणायाम के द्वारा मानसिक शक्ति को बढ़ाकर अनेक असाधारण कार्य किये जा सकते हैं। मानसिक शक्तियों में से एक शक्ति इच्छाशक्ति भी है। मस्तिष्क को इच्छाशक्ति गति देती है, जिससे ´विचार´ जो मन की परमाणुमय शक्ति है, उसके सधने से कहीं भी आ जा सकते हैं। इस इच्छाशक्ति को कोई भी रोक नहीं सकता। अपने विचारों को अपने अंदर से ही उत्पन्न किया जा सकता है, जो प्रकृति का आवश्यक तत्व है। हमारे चारो ओर एक विद्युत शक्ति हमेशा मौजूद रहती है और यह विद्युत प्रवाह मनुष्य के अंदर भी होता है। इसे इच्छाशक्ति के अभ्यास के द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है और अपने अंदर की इच्छाशक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इच्छाशक्ति से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा का प्रवाह अंगुलियों के स्पर्श के द्वारा रोगों को भी खत्म करने में किया जा सकता है। ध्यान रखें कि इच्छाशक्ति के साथ ´प्राणायाम कुम्भक´ करना आवश्यक है। ´त्राटक´ के द्वारा दृष्टिशक्ति, कुम्भक के द्वारा सांस को इकट्ठा करके प्राण को बढ़ाने की शक्ति और मन के द्वारा इच्छाशक्ति बढ़ाने की शक्ति प्राप्त करने के बाद ही अपनी इच्छाशक्ति से दूसरों को प्रभावित किया जा सकता है। इसलिए इच्छाशक्ति को बढ़ाने के लिए भी प्राणायाम का अभ्यास आवश्यक है।
•प्राणायाम के अभ्यास से व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ जाती है और उसके अंदर दृढ़ विश्वास पैदा हो जाता है। इस तरह के विश्वासों से व्यक्ति असम्भव काम को भी करने में सफलता प्राप्त कर लेता है- जैसे अधिक वजन उठाना, सीने पर या पेट पर गाड़ी को चलाना, लोहे को मोड़ना आदि। कुछ व्यक्ति प्राणायाम की सिद्धि इस तरह प्राप्त कर चुके थे कि वे अपनी छाती पर हाथी को भी चढाकर करतब दिखाया करते थे।  प्राणायाम व ब्रह्यचर्य के बल पर किसी भी प्रकार के बल प्रयोग में व्यक्ति सक्षम हो सकता है। इस तरह की सभी क्रियाएं देवी चमत्कार नहीं है, बल्कि यह प्राणायाम की साधना का प्रभाव है।
•प्राणायाम के अभ्यास से मानसिक एवं स्नायु संबंधी रोगों का भी इलाज किया जाता है।
•बिना प्राणायाम के अभ्यास के ही रोगों को ठीक करने का असफल प्रयास करने वाले और लोगों को धोखा देने वाले व्यक्ति मूर्ख और अज्ञानी होते हैं। परन्तु प्राणायाम के अभ्यास से रोगों का उपचार कर उसे ठीक करते देखा गया है। इस तरह के रोगों को ठीक करने के लिए शक्ति प्राणायाम से ही मिलती है।
•प्राणायाम के द्वारा अनेक चमत्कारी कार्य किये जा सकते हैं। प्राणायाम के अभ्यास से व्यक्ति अपनी नाड़ी की गति व हृदय के गति को भी रोक सकता है। आकाश या पानी में भी चल सकता है। यह सभी योग प्राणायाम से ही करने सम्भव हो सकते हैं।

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