सोमवार, 22 सितंबर 2014

जूस पीने के नियम-


जब भी हम कोई तरल चीज पीते हैं, तो हमें धीरे-धीरे मुंह में घुमा-घुमा कर पीना चाहिये आब  चाहे वह जूस हो या फर पानी ही क्यों न हो। पानी भी धीरे-धीरे ही पीना चाहिये। इस प्रकार  पीने से हमारे मुंह में पैदा होने वाली गर्मी शांत हो जाती है तथा ये ठंडक हमारे पेट तक पहुंचती है। ऐसा करने से रक्त अधिक बनने की क्षमता पैदा होती है तथा रक्त संचार भी ठीक से होता है।
फल तथा सब्जियां सबके गुण-दोष को समझ लेना चाहिये कि हमें कौन सा फल सूट करता है या कौन सी सब्जी,उसी का जूस लें और अधिक जानकारी के लिये डाइटीशियन से भी परामर्श लें। ये रस तथा जूस रोगों के निवारण के साथ-साथ रोगों से बचाव कर शरीर को  भीतर से स्वच्छ भी बनाता है। जब तक अधिक आवश्यक न हो फल एवं सब्जियों का रस अलग-अलग ही पियें।
जूस की आवश्यकता- अति व्यस्तता के कारण हमारे पास सुबह इतना समय नहीं होता कि हम गरिष्ठ या ठोस आहार ले सकें। जिसे चबा-चबा कर खाने के लिए हमारे पास समय नहीं है। ऐसी स्थिति में जूस को हम पोषक आहार के रूप में ले सकते हैं। जूस पीने से, फास्ट फूड तथा दूषित भोजन से होने वाले दोष नष्ट हो जाते हैं। अक्सर बीमारियां दूषित पानी से होती हैं, जो जूस पीते रहने से पानी की कमी तो पूरी होती है साथ दूषित पानी से होने वाली तमाम बीमारियों से बचा भी जा सकता है। इन रसों में होने वाले पोषक तत्व दूषित पानी में होने वाले कीटाणुओं का सफाया करता है।
जूस कैसे पियें-वैसे तो जूस को निकालते साथ ही पीना चाहिये ये सच है, मगर आवश्यकता पड़ने पर इन्हें रखना ही पड़ा तो 35-38 डिग्री फॉरेनहाईट तापमान पर रखें। इससे जूस खराब नहीं होने पाता दूसरे इन्हें कांच की गहरे रंग की बोतल में रखें, जो उबलते पानी से साफ की गई हो। इन सभी चीजों का ध्यान रखते हुए भी रस, जूस तभी निकाल कर रखना चाहिये। जब अति आवश्यक हो वरना जूस निकाल कर तुरंत पीयें।
जूस के गुण –जूस पीने से खून साफ होता है। पेशाब अधिक होकर शरीर का टॉक्सिक बाहर निकलता है। जूस शरीर के क्षतिग्रस्त कोषों को पुनः निर्माण में सहायक होता है। फल हो या सब्जी इनका रस पीने से पाचन तंत्र पर अधिक जोर नहीं पड़ता और अधिक से अधिक पोषक तत्वों की प्राप्ति होती है।इसके बावजूद जूस को आवश्यकता से अधिक नहीं लेना चाहिये कारण फल के जूस अधिक अम्लीय(खट्टे) होते हैं, जो शरीर की प्राकृतिक अम्लता को बिगाड़ देंगे हैं।बीमारियों को मात दिया जा सकता है। रोगियों को दिये जाने वाले आहार में से रस एक पूरक आहार है। इससे रोगी को जल्दी लाभ मिलता है।

बालों को काला घना बनाने के तरीके


जैसे बालों को धोकर सुखा लें फिर प्याज का रस व एक चौथाई मात्रा में अदरक का रस गर्म नारियल तेल के साथ, आंवला पावडर, शिकाकाई पावडर, मेहंदी बालों को लगा दें। दो घंटे बालों को धो लें। चमत्कारी लाभ होगा। इसके अलावा नारियल तेल, बादाम तेल, जैतुन तैल, तिल का तेल नीम की सूखी पत्ती, आंवला,खसखस, शिकाकाई मिलाकर तेल उबाल लें इस तेल को रख लें। छानकर, इससे पुरानी रूसी जाती है।बाल झड़ने बंद हो जाते हैं। अन्य परेशानियों के लिये डॉक्टर का परामर्श लें।

बाल काले  ,घने करना- प्याज पीसकर बालों पर लेप करें बाल काले उगने लगेंगे।
सिर धोने से पहले सरसों का तेल में एक नींबू का रस मिलाकर सिर धोने से रूसी दूर हो जाती है तथा बालों की जड़ें मजबूत होती है।

रूसी दूर करने के लिये एक कप सिरका पानी मिलाकर लगाया जा सकता है। सप्ताह में एक बार बालों को दही,छाछ, नींबू के रस अथवा आंवले के पावडर से धोना चाहिये। रोयैदार तौलिया में लपेट कर सुखाना चाहिये झटकना नहीं चाहिये।

तेज धूप में न सुखायें। बाल अच्छी तरह सुखने के बाद कोई शुद्ध तेल लगाना चाहिये। हो सके तो नारियल का तेल ही लगायें।

दही से बाल धोने से बाल मुलायम, चमकीले, लम्बे हो जाते हैं। मस्तिष्क को भी बल मिलता है।

नीम व बैर के पत्तों को पानी में उबाल कर उससे सर धोने से झड़ना बंद हो जाते है।

भाप- सप्ताह में एक बार भाप भी देना चाहिये। गरम तौलिये से बाल को लपेट कर रखें।

जैतून तेल की मालिश भी करनी चाहिये। फिर गर्म पानी के तौलिये से भाप देना चाहिये।

नशीली चीजों का सेवन करने से बाल झड़ते हैं।

शैंपू में प्रायः रसायन एवं कैमिकल्स होते है। अतः नियमित प्रयोग से बालों को नुकसान होता है। बार-बार सिर में लगाने वाला, तेल बदलते नहीं रहना चाहिये।

सरसों, नारियल, आंवला तेल बालों के लिये फायदेमंद होता है। खुशबुदार तेल से बचना चाहिये। इससे असमय ही बाल सफेद होने की समस्या देखने में आती है।
दही में चुटकी भर काली मिर्च मिलाकर बाल धोने से बाल काले होते हैं।
आम के कोमल पत्ते और नर्म टहनियों का हरा-हरा पीसकर बालों में लगाने से कुछ ही हफ्तों में बालों का झड़ना पकना रूक जाता है।

मैथी के पत्ती को पीसकर बालों पर लगाएं साथ ही मैथी के बीज का चूर्ण आधा-आधा चम्मच रोज दो बार खाने से बालों के झड़ने पकने में बहुत फायदा होता है।

शिशु को स्तनपान(फीडिंग) कराने का तरीका




बच्चे   को स्तनपान (फीडिंग) कराना शुरू करवाना चाहिये कारण डिलिवरी कनाम  काहारमोन निकलता है जो मां का पहला दूध कहलाता है यह बहुत गाढा होता है शिशु  केलिये बहुत लाभकारी होता है। इम्यून पावर बढाता है तथा तमाक लड़ने की क्षमता  बढाता है।दिन में हर चार घंटे बाद तथा रात में छ: घंटे पर शिशु को दूध पिलाना चाहिये।  लोग शिशु को हर थोडी दिर में दूध पिलाने लगते हैं ये सोचकर कि शायद उसका पेट नहीं    भरा होगा।जल्दी जल्दी दूध पिलाने से बच्चे को भूख लगने का मौका आप  नहीं देते बल्कि  इससे उसका पेट खराब हो सकताहै। पाचन क्रिया बिगड़ सकती है दस्त लग सकते हैं  डिहाईड्रेशन हो सकता है।इतने छोटे शिशु को अलग से पानी  नहीं दिया जाता कारण मां के दूध से सारी जरूरतें पूरी हो जाती है। शिशु को मां के दूध के अलावा और कुछ नहीं देना चाहिये करीब तीन-चार माह तक।जितने दिन तक शिशु मां का दूध पीता है उतने तक मां को कोई ऐसी चीज नहीं खानी चाहिये जिससे मां को गैस या ठंड चढ़ जाये कारण इसका पूरा पूरा असर बच्चे के पेट पर पड़ता है यानि पेट दर्द,दस्त ,पेट में तनाव इत्यादि हो सकता है।कम से एक साल तक।इतने दिन तक मां का दूध अवश्य दें।छ माह पर उपर की चीजें खिलाना जैसे पतली खिचड़ी,साबुदाने का पानी,फल का जूस इत्यादि दें।इसके बाद वेजीटेबल खिचड़ी दे सकते हैं मिक्सी में ग्राइंड करके ताकि गले में न फंसे तथा आसानी से हजम भी हो जाय

नारियल पानी पीने के स्वास्थवर्धक गुण



गर्मियों में नारियल पानी के सेवन से, आपको दिव्य आनंद प्राप्त होगा। यह केवल आपको ताजगी ही नहीं, बल्कि इस में कई सारे स्वास्थवर्धक गुण भी छुपे हैं। नारियल पानी में विटामिन, मिनरल, इलेक्ट्रोलाइट्स, एंजाइमस्, एमिनो एसिड और साइटोकाइन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। आपको यह जान कर हैरानी होगी कि नारियल पानी महिलाओं के स्वािस्य्ना के लिये बहुत ही अच्छाय माना गया है। यदि पेशाब में जलन हो रही हो, डीहाड्रेशन हो गया हो, त्वयचा में निखार चाहिये हो या फिर मोटापा घटाना हो तो नारियल पानी पीजिये। नारियल की तासीर ठंडी होती है इसलिए नारियल का पानी हल्का, प्यास बुझाने वाला, अग्निप्रदीपक, वीर्यवर्धक तथा मूत्र संस्थान के लिए बहुत उपयोगी होता है। इसमें स्वास्थवर्धक गुण तो है ही, साथ ही इसकी ताजगी से भरा स्वाद इसे पूरे विश्व में लोकप्रिय बनाता है। आइये जानते हैं नारियल पानी के बारे में कुछ स्वागस्य्िश वर्धक बातें।
1. दस्तम मिटाए अगर आप दस्त से परेशान है, तो नारियल पानी का सेवन आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा, यह आपके शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। नारियल पानी में एमिनो एसिड, एंजाइमस्, डाइटेरी फाइबर, विटामिन सी और कई मिनरल जैसे पोटेशियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज पाए जाते हैं। साथ ही, इसका सेवन आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल और क्लोराइड को भी कम करता है।

2.पानी की कमी पूरी करे देश में, आज भी कई ऐसे प्रांत मौजूद है, जहाँ चिकित्सा की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं है। यहाँ, हाइड्रेशन के कारण गंभीर रुप से बीमार हुए मरीजों को नारियल पानी पीलाया जाए, तो यह उनके शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में लाभदायक साबित होगा।

3.मोटापा न बढाए क्योंकि इस में फैटस की मात्रा बहुत कम है, जिसके कारण यह आपका मोटापा भी कम कर सकता है और तृप्त महसूस कराता है। इसका सेवन, खाना खाने की इच्छा को भी कम करता है।

4. मधुमेह के लिये नारियल पानी का सेवन मधुमेह के रोगियों के लिये बहुत लाभदायक है। इस में मौजूद पोषक तत्व, शरीर में शक्कधर के स्तर को नियंत्रित रखते हैं। जो मधुमेह के रोगियों के लिये बहुत जरुरी है।
5. फ्लू में लाभकारी फ्लू और दाद, दोनों शरीर में वायरल इन्फेक्शन से होने वाली बीमारियाँ हैं। अगर कोई व्यक्ति इन बीमारियों की चपेट में आ गया है, तो नारियल पानी में मौजूद एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल गुण इस बीमारी से लडने में मदद करेंगे।

6. हाइपर्टेंशन और स्ट्रोक से बचाए पोटेशियम से भरपूर नारियल पानी आपको सेहतमंद बनाता है। साथ ही, इसका सेवन हाइपर्टेंशन और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद करता है।

7. किडनी स्टोनन से बचाए नारियल पानी में मौजूद मिनरल, पोटेशियम और मैग्नीशियम गुर्दे में होने वाली पथरी के खतरे को कम करते हैं।

8. झुर्रियों और मुंहासों के दाग मिटाए अगर आप हर रात, दो से तीन हफ्तों के लिये, अपने मुँहासों, धब्बों, झुर्रियों, स्ट्रैच माक्स, सेल्युलाईट और एक्जिमा पर नारियल पानी लगाएँगे, तो आपकी त्वचा बहुत साफ हो जाएगी।

9. एंटी एजिंग का काम करे कुछ अनुसंधानों अनुसार, नारियल पानी में मौजूद साइटोकिन्स, एंटी ऐजिंग, एंटी कासीनजन और एंटी थौंबौटिक्स से लडने में काफी फायदेमंद साबित हुए हैं।

10. कैंसर से लड़े कई प्रयोगशालाओं में यह भी पाया गया है कि नारियल पानी के कुछ संयुक्त पदार्थ जैसे सेलनियम में एंटी आॉक्सीडेंट गुण मौजूद है, जो कैंसर से लडने में मदद करते हैं।

11. पाचन में मददगार स्वाभाविक रुप से नारियल पानी में कई बायोएक्टिव एन्जाइमस् जैसे एसिड फॉस्फेट, कटालेस, डिहाइड्रोजनेज, डायस्टेज, पेरोक्सडेस, आर एन ए पोलिमेरासेस् आदि पाए जाते हैं। ये एनेजाइमस् पाचन और चयापचय क्रिया में मदद करते हैं।

12. बी कॉम्लयक्स से भरा नारियल पानी में बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन के राइबोफ्लेविन, नियासिन, थियामिन, पैरिडोक्सिन और फोलेट्स जैसे तत्व मौजूद है। मानव शरीर को इन विटामिन की आवश्कता होती है और इन्हें पूरा करने के लिए उसे अन्य पदार्थों पर निर्भर होना पडता है।

13. इलेक्ट्रो लाइट से भरपूर नारियल पानी में भरपूर मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट पोटेशियम पाया जाता है। 100 मिलीलीटक नारियल पानी में 250 मिलीग्राम पोटेशियम और 105 मिलीग्राम सोडियम होता है। कुल मिलाकर ये इलेक्ट्रोलाइट्स, दस्त के दौरान शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।

14. विटामिन सी ताजे नारियल पानी में कम मात्रा में विटामिन सी (ऐस्कोरबिक एसिड) होती है। इस में 4% या 2.5 मिलीग्राम आर डी ए होता है। विटामिन सी पानी में घुल जाने वाला एटीआॉक्सीडेंट है।

दूध पीने के नियम


सुबह के समय दूध कभी ना पीये+ जर्सी गाय के दूध कभी भी ना पीये

बोर्नविटा , होर्लिक्स के विज्ञापनों के चलते माताओं के मन में यह बैठ जाता है की बच्चों को ये सब डाल के दो कप दूध पिला दिया बस हो गया . चाहे बच्चे दूध पसंद करे ना करे , उलटी करे , वे किसी तरह ये पिला के ही दम लेती है . फिर भी बच्चों में केशियम की कमी , लम्बाई ना बढना , इत्यादि समस्याएँ देखने में आती है .आयुर्वेद के अनुसार दूध पिने के कुछ नियम है ---
- दोपहर में छाछ पीना चाहिए . दही की प्रकृति गर्म होती है ; जबकि छाछ की ठंडी .
- रात में दूध पीना चाहिए पर बिना शकर के ; हो सके तो गाय का घी १- २ चम्मच दाल के ले . दूध की अपनी प्राकृतिक मिठास होती है वो हम शकर डाल देने के कारण अनुभव ही नहीं कर पाते .
- एक बार बच्चें अन्य भोजन लेना शुरू कर दे जैसे रोटी , चावल , सब्जियां तब उन्हें गेंहूँ , चावल और सब्जियों में मौजूद केल्शियम प्राप्त होने लगता है . अब वे केल्शियम के लिए सिर्फ दूध पर निर्भर नहीं .
- बोर्नविटा , कॉम्प्लान या होर्लिक्स किसी भी प्राकृतिक आहार से अच्छे नहीं हो सकते . इनके लुभावने विज्ञापनों का कभी भरोसा मत करिए . बच्चों को खूब चने , दाने , सत्तू , मिक्स्ड आटे के लड्डू खिलाइए
- प्रयत्न करे की देशी गाय का दूध ले .
- जर्सी या दोगली गाय से भैंस का दूध बेहतर है .
- दही अगर खट्टा हो गया हो तो भी दूध और दही ना मिलाये , खीर और कढ़ी एक साथ ना खाए . खीर के साथ नामकी पदार्थ ना खाए .
- अधजमे दही का सेवन ना करे .
- चावल में दूध के साथ नमक ना डाले .
- सूप में ,आटा भिगोने के लिए , दूध इस्तेमाल ना करे .
- द्विदल यानी की दालों के साथ दही का सेवन विरुद्ध आहार माना जाता है . अगर करना ही पड़े तो दही को हिंग जीरा की बघार दे कर उसकी प्रकृति बदल लें .
- रात में दही या छाछ का सेवन ना करे .

शनिवार, 20 सितंबर 2014

जीर्ण रोगों का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार





       जब दूषित द्रव्य शरीर के बाहर नहीं निकलता है तो वह शरीर के किसी भाग में जमा होता रहता है और जिस भाग में जमा होता है वहां पर कई प्रकार के रोग हो जाते हैं और रोग के अनुसार ही बीमारियों का नाम दे दिया जाता है जैसे- क्षय (टी.बी.), कैंसर आदि।
जीर्ण रोगों का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-
•रोगी व्यक्ति को जीर्ण रोग होने के कारणों को सबसे पहले दूर करना चाहिए फिर इसके बाद इस रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करना चाहिए।
•जीर्ण रोगों का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक लगातार फलों का रस पीकर उपवास रखना चाहिए तथा इसके बाद कुछ दिनों तक फलों का सेवन करते रहना चाहिए। रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन गुनगुने पानी से एनिमा क्रिया करके अपने पेट की सफाई करनी चाहिए ताकि शरीर की गंदगी बाहर निकल सके।
•प्राकृतिक चिकित्सा से सभी प्रकार के जीर्ण रोग ठीक हो सकते हैं, लेकिन रोगी व्यक्ति को उपचार कराने के साथ-साथ कुछ खाने-पीने की चीजों का परहेज भी करना चाहिए तथा उपचार पर विश्वास रखना चाहिए तभी यह रोग ठीक हो सकता है।

तीव्र तथा जीर्ण रोगों का उपचार कराते समय रोगी व्यक्ति को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए-

•रोगी व्यक्ति को कोई भी ठंडा उपचार करने से पहले अपनी हथेलियों को रगड़-रगड़ कर गर्म कर लेना चाहिए और फिर इसके बाद उपचार करना चाहिए।
•रोगी व्यक्ति को ठंडा उपचार करने के बाद खुली हवा में टहलकर या हल्का व्यायाम करके अपने शरीर को गर्म करना चाहिए।
•रोगी व्यक्ति को गर्म उपचार करने से पहले पानी पीना चाहिए और सिर पर गीला तौलिया रखना चाहिए।
•रोगी व्यक्ति को अधिक लाभ लेने के लिए कभी भी ज्यादा उपचार नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे व्यक्ति को हानि पहुंचती है।
•जब रोगी व्यक्ति ठंडे पानी से उपचार कराता है तो उसे आधे घण्टे के बाद स्नान कर लेना चाहिए।
•रोगी व्यक्ति को भोजन करने के कम से कम ढाई घण्टे के बाद ही उपचार करना चाहिए।
•रोगी व्यक्ति को उपचार करने के बाद यदि कुछ खाना है तो उसे कम से कम आधा घण्टा रुककर ही उपचार करना चाहिए।

तृषा रोग के (तेज प्यास) लक्षण

तेज प्यास

    यह एक प्रकार का ऐसा रोग है जिसमें रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक प्यास लगती है। रोगी व्यक्ति जितना भी पानी पीता है उसे ऐसा लगता है कि उसने बहुत ही कम पानी पिया है और वह बार-बार पानी पीता रहता है।
तृषा रोग के (तेज प्यास) लक्षण-
   इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक प्यास लगती है तथा रोगी को अपना गला हर समय सूखा-सूखा सा लगता है।
तृषा रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-
•तृषा (तेज प्यास) रोग का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को एनिमा द्वारा अपना पेट साफ करना चाहिए और इसके बाद दिन में 2 बार कटिस्नान करना चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
•इस रोग से पीड़ित रोगी को रात को सोते समय अपनी कमर पर कुछ समय के लिए भीगी पट्टी लगाकर सोना चाहिए। इससे तृषा रोग (तेज प्यास) ठीक हो जाता है।
•तृषा रोग (तेज प्यास) का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने के लिए सबसे पहले रोगी को कुछ दिनों तक रसाहार तथा फलाहार भोजन करना चाहिए और इसके बाद धीरे-धीरे पानी पीना चाहिए।
•तृषा रोग को ठीक करने के लिए आसमानी रंग की बोतल के सूर्यतप्त जल को लगभग 50 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन 8 बार रोगी को सेवन करना चाहिए। इससे रोगी का रोग कुछ ही दिनों में ही ठीक हो जाता है।

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