रविवार, 12 जुलाई 2015

गंजेपन का सफल इलाज:-


 दिनों से देख रहा हूँ के लोग बालो कि समसया से काफ़ी परेशान हैं. जैसे की बाल झड़ना या बाल रहना ही ना.... तो उन सबके लिए एक बहुत ही आसान सा उपाय बता रहा हूँ कृपया लाभ उठायें...... 


कनेर के 60-70 ग्राम पत्ते (लाल या पीली दोनों में से कोई भी या दोनों ही एक साथ ) ले के उन्हें पहले अच्छे से सूखे कपडे से साफ़ कर लें ताकि उनपे जो मिटटी है वो निकल जाये.,. अब एक लीटर सरसों का तेल या नारियल का तेल या जेतून का तेल ले के उसमे पत्ते काट काट के डाल दें. अब तेल को गरम करने के लिए रख दें. जब सारे पत्ते जल कर काले पड़ जाएँ तो उन्हें निकाल कर फेंक दें और तेल को ठण्डा कर के छान लें और किसी बोटल में भर के रख लें.....
पर्योग विधि :- रोज़ जहाँ जहाँ पर भी बाल नहीं हैं वहां वहां थोडा सा तेल ले के बस 2 मिनट मालिश करनी है और बस फिर भूल जाएँ अगले दिन तक. ये आप रात को सोते हुए भी लगा सकते हैं और दिन में काम पे जाने से पहले भी... बस एक महीने में आपको असर दिखना शुरू हो जायेगा.. सिर्फ 10 दिन के अन्दर अन्दर बाल झड़ने बंद हो जायेंगे या बहुत ही कम... और नए बाल भी एक महीने तक आने शुरू हो जायेंगे......
नोट : ये उपाय पूरी तरह से tested है.. हमने कम से कम भी 10 लोगो पे इसका सफल परीक्षण किया है. एक औरत के 14 साल से बाल झड़ने बंद नहीं हो रहे थे. इस तेल से मात्र 6 दिन में बाल झड़ने बंद हो गये.

शनिवार, 18 अप्रैल 2015

डायबिटीज, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाती हैं ये सब्जियां


 खाने में लापरवाही और बेवक्त का खान-पान शरीर में कई सारी बीमारियों को पनाह देता है, इसलिए किसी भी बीमारी के होने पर डॉक्टर सबसे पहले खाने में सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। अगर हेल्दी रहने के साथ-साथ डॉक्टर के क्लिनिक के चक्करों से बचना चाहते हैं, तो अपनी डेली डाइट में सिर्फ कुछ सब्जियों को शामिल करके कई प्रकार की बीमारियों से बचा जा सकता है। कुछ ऐसी ही सब्जियों के बारे में जानिए और कोशिश करके हफ्ते में दो से तीन बार इन्हें जरूर खाएं।
मटर कोलेस्ट्रॉल संतुलित करता है
हरे मटर खाने से कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता और साथ ही शरीर में इसका संतुलन भी बना रहता है। इसमें बॉडी में ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने का गुण होता है। हरे मटर में ऐसे विटामिन होते हैं जो ऑस्टियोपोरोसिस से बचाते हैं। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर ने एक स्टडी में बताया कि मटर खाने से पेट के कैंसर होने का खतरा कम होता है। मटर में एंटी-इंफ्लेमेटरी कंपाउंड्स होते हैं और इसमें प्रचुर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं। ये आपको दिल की बीमारियों से भी बचाते हैं।
Other Vegetable and benefits: पालक आंखों के लिए फायदेमंद है, भिंडी डायबिटीज के रोगियों के लिए अच्छी है, चुकंदर कैंसर को रोकता है, करेला ब्लड शुगर कम करता है, लौकी मोटापा रोकने में कारगर है।

रफ बालों को सिल्की और शाइनी बनाने के 5 आसान तरीके


बाल यदि खूबसूरत हो तो व्यक्तित्व ज्यादा आकर्षक लगता है। चाहे पुरुष हो या महिलाएं सभी अपने बालों को शाइनी और सिल्की बनाने के लिए तरह-तरह के प्रोडक्ट्स यूज करते हैं, लेकिन इन प्रोड्क्टस से बालों को नुकसान होने का डर भी बना रहता है। इसीलिए घरेलू कंडिशनर ही बालों के लिए ज्यादा अच्छे होते हैं। यदि आप भी अपने रफ बालों से परेशान हैं तो आगे बताए गए घरेलू कंडिशनर अपनाएं। बाल सिल्की और शाइनी बन जाएंगे।
- एक कप बीयर को किसी बर्तन में गर्म करें, तब तक गर्म करें, जब तक वह आधा कप न रह जाए। गर्म करने से बीयर में से अल्कोहल भाप बनकर उड़ जाता है। अब इसे ठंडा होने दें, फिर उसमें एक कप अपना पसंदीदा शैम्पू मिला लें, याद रखें शैम्पू जो भी यूज करें, एक ही ब्रांड का हो। इस घोल को किसी बोतल में भरकर रख लें। जब भी बाल धोना हों इससे बाल धोएं, बेजान बाल भी चमकदार और खूबसूरत बन जाएंगे।
- केला बालों के लिए बहुत अच्छा माना गया है। केले को पीस लें और उसमें कुछ बूंदे शहद की डालें। इस पेस्ट को अपने सिर पर लगाएं और 30 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर ठंडे पानी से बाल धो लें।
- अपने बालों को शैंपू से धोने के बाद बीयर की कुछ बूंदे पानी में डालें और फिर उससे बालों को एक बार धोएं। बीयर से आपके बालों में चमक आएगी और वे प्राकृतिक रूप से मजबूत भी होगें।
- बालों को शाइनी बनाने के लिए शैंपू करने से पहले बालों में दही लगाएं। अगर सिर में रुसी है तो दही में थोड़ा नींबू का रस मिलाकर लगाएं। बाल स्मूथ हो जाएंगे।
- नारियल के तेल में नीम, तुलसी, शिकाकाई, मेथी, आंवले की पत्तियां डालकर उबाल लें व छानकर रख लें। इस तेल से पूरे सिर की मालिश करें और चमत्कार देखें।

साधारण घरेलू चीजें, इन्हें खाने से बढ़ने लगती है याददाश्त


क्या आप अक्सर छोटी-छोटी बातें भूल जाते हैं। क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप जरूरी बात भी भूल गए हों। जिन लोगों की भूलने की आदत होती है, वे बाद में कोई बात याद आने पर ये सोचते हैं कि इतनी जरूरी बात भूल कैसे गए। आज हम बताने जा रहे हैं कुछ खास ब्रेन फूड्स के बारे में। ये ब्रेन फूड ऐसे हैं, जिन्हें खाने से अल्जाइमर रोग नहीं होता है। साथ ही, दिमाग की ताकत भी बढ़ती है।
टमाटर- खट्टा-मीठा टमाटर खाने के जायके को बढ़ाता है। टमाटर में प्रोटीन, विटामिन, वसा आदि पाए जाते हैं। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है। टमाटर में लाइकोपीन होता है। यह शरीर की फ्री रैडिकल्स से रक्षा करता है। साथ ही, यह ब्रेन की सेल्स को डैमेज होने से भी बचाता है।
जैतून- जैतून केवल आपके स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि आपके चेहरे के लिए भी लाभदायक है। जैतून में अच्छी मात्रा में फैट पाया जाता है। इसलिए यह याददाश्त बढ़ाने का काम भी करता है।
दही- दही में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, खनिज, लवण, कैल्शियम और फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। दही का नियमित सेवन करने से कई लाभ होते हैं। यह शरीर में लाभदायी जीवाणुओं की बढ़ोत्तरी करता है और हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है। इसमें अमीनो एसिड पाया जाता है, जिससे दिमागी तनाव दूर होता है और याददाश्त बढ़ती है।
जायफल- जायफल को अपने विशेष स्वाद और सुगंध के लिए जाना जाता है। इसमें ऐसे तत्व होते हैं, जो दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। साथ ही, याददाश्त को बेहतर बनाते हैं।
तुलसी- तुलसी को हिंदू धर्म में देवी का रूप माना गया है। इसका उपयोग मसाले के रूप में भी किया जाता है। यह कई बीमारियों में औषधि का काम करती है। रोजाना तुलसी के 2-4 पत्ते खाने से बार-बार भूलने की बीमारी दूर हो जाती है।
अलसी- अलसी के बीज में बहुत सारा प्रोटीन और फाइबर होता है। इन्हें खाने से दिमाग तेज होता है।


केसर- केसर एक ऐसा मसाला है जो खाने के स्वाद को दोगुना कर देता है। केसर का उपयोग अनिद्रा दूर करने वाली दवाओं में किया जाता है। इसके सेवन से मस्तिष्क ऊर्जावान रहता है।

चाय- चाय में पाया जाने वाला पॉलीफिनॉल दिमाग को संतुलित रखने में मदद करता है। यह दिमाग को शांत और एकाग्र भी बनाता है। ग्रीन टी भी गुणों से भरपूर है। इसमें बहुत अधिक मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसीलिए इसके नियमित सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है। दिन भर में दो से तीन कप ग्रीन टी पीने से याददाश्त बढ़ती है।

हल्दी- हल्दी दिमाग के लिए एक अच्छी औषधि है। यह सिर्फ खाने के स्वाद और रंग में ही इजाफा नहीं करती है, बल्कि दिमाग को भी स्वस्थ रखती है। इसके नियमित सेवन से अल्जाइमर रोग नहीं होता है। साथ ही, यह दिमाग की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को रिपेयर करने का भी काम करती है।

अजवाइन की पत्तियां- यदि आप अपने खाने को अलग फ्लेवर देना चाहते हैं, तो अजवाइन की पत्तियों का उपयोग करें। अजवाइन की पत्तियां शरीर को स्वस्थ और जवान बनाए रखने में मदद करती हैं। दरअसल, अजवाइन की पत्तियों में पर्याप्त मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसीलिए यह दिमाग के लिए औषधि की तरह काम करती हैं। यही कारण है कि अरोमा थेरेपी में भी इसका उपयोग किया जाता है।
काली मिर्च- काली मिर्च में पेपरिन नाम का रसायन पाया जाता है। यह रसायन शरीर और दिमाग की कोशिकाओं को रिलैैक्स करता है। डिप्रेशन में यह रसायन जादू-सा काम करता है। इसीलिए यदि आप अपने दिमाग को स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं, तो खाने में काली मिर्च का उपयोग करें।
दालचीनी- अल्जाइमर रोगियों के लिए दालचीनी एक जबरदस्त दवा है। दालचीनी के नियमित सेवन से याददाश्त बढ़ती है और दिमाग स्वस्थ रहता है।

सरवाईकल स्पोंडीलाईटीस के लिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे


उठने,बैठने ,खाने,पीने और सोने के ढंग न होने के कारण जीवनशैली से संबंधित समस्याएं आम हो चली हैं। इनमें ही एक समस्या जो अक्सर लोगों को परेशान करती है नाम है 'सरवाईकल स्पोंडीलाईटीस 'आयुर्वेद में ग्रीवाशूल के अंतर्गत इसका उपचार प्रचलित है। इसमें कुछ अनुभूत योग काफी लाभदायक हैं जिनका चिकित्सक के मार्गदर्शन में प्रयोग किया जाना उचित है।
1. धतूरे के बीज 10 ग्राम + रेवंदचीनी 8 ग्राम + सोंठ 7 ग्राम + गर्म तवे पर फ़ुलाई हुई सफ़ेद फिटकरी 6 ग्राम + इसी तरह फ़ुलाया हुआ सुहागा 6 ग्राम + बबूल का गोंद 6 ग्राम इन सब औषधियों को बारीक पीस लें और धतूरे के पत्तों के रस से गीला करके उड़द के दाने के (125मिलीग्राम यानी एक रत्ती ) बराबर गोलियां बना लें। इस गोली को दिन में केवल एक बार गर्म पानी से दोपहर का भोजन करने के बाद ही लेना चाहिए। ध्यान रहे खाली पेट दवा हरगिज न लें।
2. वातगजांकुश रस की 1 गोली दिन में दो बार सुबह-शाम दशमूल काढ़े के साथ दो चम्मच लेना भी लाभकारी होता है।
3. महामाष तेल की तीन-तीन बूंदे दोनो कानों व नाक में सुबह-शाम डालना भी लाभकारी होता है
4. आभादि गुग्गुल की एक एक गोली महारास्नादि काढ़े के साथ दस से पंद्रह मिली की मात्रा में खाली पेट लेना भी लाभदायक होता है। ये तो कुछ अनुभूत योग हैं इसके अलावा पंचकर्म चिकित्सा भी सरवाईकल स्पोंडीलाईटीस के रोगियों में काफी कारगर होती है।

नोट :उपरोक्त नुस्खे महज पाठकों की जानकारी हेतु अनुभूत योग के रूप में प्रकाशित किए गए हैं, जिनका चिकित्सक के निर्देशन में प्रयोग किया जाना नितांत आवश्यक है।

कटहल ना खाने वाले भी मुरीद हो जाएंगे, जब जान लेंगे ये गुुण


कटहल एक ऐसी सब्जी है जो कई औषधीय गुणों से भरपूर है, लेकिन फिर भी बहुत कम लोग हैं, जो इसका सेवन नियमित रूप से करते हैं। कटहल का वानस्पतिक नाम आर्टोकार्पस हेटेरोफिल्लस है। इसके फलों में कई महत्वपूर्ण कार्बोहाइड्रेट के अलावा कई विटामिन भी पाए जाते है। सब्जी के तौर पर खाने के अलावा कटहल का अचार और पापड़ भी बनाया जाता है। आदिवासी अंचलों में कटहल का उपयोग अनेक रोगों के इलाज में किया जाता है। चलिए आज जानते हैं कुछ ऐसे ही चुनिंदा हर्बल नुस्खों के बारे में...
अल्सर में है बेहतरीन दवा
कटहल की पत्तियों की राख अल्सर के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होती है। हरी ताजा पत्तियों को साफ धोकर सुखा लें। सूखने के बाद पत्तियों का चूर्ण तैयार करें। पेट के अल्सर से ग्रस्त व्यक्ति को इस चूर्ण को खिलाएं। अल्सर में बहुत जल्दी आराम मिलेगा।
मुंह के छालों में असरदार
जिन लोगों को मुंह में बार-बार छाले होने की शिकायत हो, उन्हें कटहल की कच्ची पत्तियों को चबाकर थूकना चाहिए। आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार, यह छालों को ठीक कर देता है।

खाना जल्दी पचा देता है
पके हुए कटहल के गूदे को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाल लें। इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से जबरदस्त स्फूर्ति आती है। यही मिश्रण यदि अपच के शिकार रोगी को दिया जाए तो उसे फायदा मिलता है।
डायबिटीज में लाभदायक
डांग- गुजरात के आदिवासी कटहल की पत्तियों के रस का सेवन करने की सलाह डायबिटीज के रोगियों को देते हैं। यही रस हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए भी उत्तम है।

सौंफ खाने के इन खास तरीकों से दूर हो जाती हैं ये हेल्थ प्रॉब्लम्स


भारतीय रसोई घर में सौंफ का महत्वपूर्ण स्थान है। सौंफ का उपयोग न सिर्फ कुछ खास व्यंजनों में किया जाता है, बल्कि भोजन के बाद भी सौंफ बहुत शौक से खाई जाती है। खाने के बाद थोड़ी सी सौंफ खाने से कैल्शियम, सोडियम, फास्फोरस, आयरन और पोटेशियम जैसे तत्व हमारे शरीर को प्राप्त होते हैं। पेट से संबंधित कुछ बीमारियों में भी सौंफ के कुछ घरेलू नुस्खे बहुत कारगर साबित होते हैं। आज हम आपको सौंफ के कुछ खास टिप्स बता रहे हैं-
1. प्रतिदिन 5-6 ग्राम सौंफ खाना लिवर और आंखों के लिए फायदेमंद होता है। अपच संबंधी विकारों में भी सौंफ का सेवन बेहद उपयोगी है। सौंफ को तवे पर थोड़ा-सा सेंक कर खाने से पेट के रोगों में आराम मिलता है।
2. गुड़ के साथ सौंफ खाने से महिलाओं का मासिक धर्म नियमित होता है। यदि गले में खराश हो जाए तो सौंफ चबाना चाहिए। सौंफ चबाने से बैठा हुआ गला साफ हो जाता है।
3. रोजाना सौंफ खाने से खून साफ होता है व रक्त से संबंधित बीमारियों में लाभ होता है। खून साफ होने से त्वचा में भी चमक आ जाती है।
4. सौंफ के अर्क में 10 ग्राम शहद मिला कर इसका सेवन करें। खांसी में तत्काल आराम मिलेगा।
5. बेल का गूदा 10 ग्राम और 5 ग्राम सौंफ सुबह-शाम चबाकर खाने से अजीर्ण मिटता है और अतिसार में लाभ होता है।
6. सौंफ और मिश्री समान भाग में लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ दो माह तक लें। इससे आंखों की कमजोरी दूर होती है तथा नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है।


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