मंगलवार, 2 अगस्त 2011

दूध से सफेद व चट्टान से मजबूत दांत, सिर्फ तीन फंड़े


पूरे शरीर की बाहरी खूबसूरती काफी कुछ चेहरे बनावट और रंग-रूप पर निर्भर करती है। चेहरे में भी आंखों के बाद दांतों की बनावट और दिखावट का अहम् स्थान होता है। साफ सफेद ओर चमकते दांत किसी भी चेहरे की खूबसूरती में चार चांद लगा सकते हैं।




आयुर्वेद के 3 कीमती सूत्र:




1. आजकल के बच्चों के दांत सफ़ेद-सुन्दर नहीं होते क्योंकि टूथपेस्ट में डले हुए फ्लोराईड से दांत और हमारे शरीर की हड्डियां गलने, खराब होने लगती हैं। इस पर अनेक शोध हो चुके हैं। अत: पेस्ट के स्थान पर किसी आयुर्वेदिक या प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बने हुए मन्जन का प्रयोग करना चाहिये।




2. कभी-कभी अवसर मिलने पर नीम, बबूल, बिल्व आदि पेड़ों से प्राप्त दांतुन भी करते रहना चाहिये।




३. मल-मूत्र त्याग के समय दांत दबाकर बैठें और बाद में कुल्ला कर लें। इससे भी दांत मजबूत बनते हैं। असल में मल-मूत्र त्याग के समय हमारे दांतों की जडों में कुछ तेजाबी पदार्थ एकत्रित होकर उनकी जडों को कमजोर बना देते हैं। कुल्ला करने से ये तेजाबी तत्व निकल जाते हैं। हमारे पूर्वज तभी तो मल-मूत्र त्याग के बाद सदा कुल्ला किया करते थे।

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