बुधवार, 20 अप्रैल 2011

भूलने की आदत से पाएं छुटकारा, इस छोटे से उपाय से

भागदौड़ और बेहद व्यस्तताओं से भरी हुई आधुनिक जीवनशैली ने इंसान को शारीरिक रूप से ही नहीं, मन-मस्तिष्क के स्तर पर भी अस्त-व्यस्त कर दिया है। वैसे भी मशीनी युग में इंसान के अधिकांश शारीरिक और मानसिक कामों को आधुनिक मशीनों द्वारा किया जाने लगा है। इस अति मशीनीकरण ने जिंदगी को ज्यादा सुविधाजनक तो बना दिया है, पर साथ ही इसका सबसे बुरा असर यह हुआ है कि इससे मनुष्य की शारीरिक और मानसिक क्षमता में काफी गिरावट भी आ गई है।

कमजोर स्मरण शक्ति यानी यादाश्त की कमी की समस्या आज लगभग आम हो चुकी है। कमजोर स्मरण शक्ति के कारण व्यक्ति भूलने की आदत का शिकार हो जाता है। इस समस्या का प्रमुख कारण काम का तनाव, अधिक व्यस्तता और अनियमित दिनचर्या का होना है।

सभी चिकित्सा पद्धतियों में स्मरण शक्ति बढ़ाने के कई उपाय और औषधियां बताई गईं हैं, लेकिन ये दवाइयां कुछ समय के लिये असर दिखाकर फिर से निष्क्रीय हो जाती हैं। इसलिये यदि कोई भूलने की इस जटिल समस्या का स्थाई समाधान चाहता हो तो उसे योग में बताए गए इस उपाय को अवश्य आजमाना चाहिये..

- उगते हुए सूरज की ओर मुखातिब होकर आंखें बंद करके ध्यान मुद्रा में बैठें। अब मन में लगातार उठते हुए विचारों को आते हुए देेखें। योग में इसे ही साक्षी साधना भी कहा जाता है। इस अभ्यास को लगातार 15 दिनों तक करने से आपका मन एकाग्र होने लगेगा। और यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि इंसान को वही बात या घटना लंबे समय तक याद रहती है जिसमें उसका मन अधिक से अधिक एकाग्र होता है। अत: जो भी करें उस समय दूसरा कुछ भी नहीं सोचें हर समय पूरी तरह से वर्तमान में जीना सीखें। काम करते समय पिछली घटनाओं और भविष्य की चिंता से बिल्कुल दूर रहें। जो करें बस पूरी तरह से मन-मस्तिष्क से वहीं उपस्थित रहें। आप देखेंगे कि कुछ ही समय में आपकी भूलने की आदत बगैर किस दवाई के ही हमेशा के लिये मिट चुकी है।

मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

फल जो मुँहासे से बचाते हैं

मुँहासे से त्‍वचा की खूबसूरती सबसे ज्‍यादा प्रभावित होती है। ये उम्र के उस पड़ाव पर चेहरे पर निकल आते हैं जब खूबसूरती सबसे ज्‍यादा मायने रखती है। इसका कोई स्‍थाई इलाज नहीं है क्‍योंकि यह हार्मोंस के असंतुलन के कारण होता है। लेकिन खान पान में बदलाव करके इससे बचा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ फलों का सेवन नियमित रूप से किया जाए तो त्‍वचा को मुँहासे से बचाया जा सकता है।


अंगूर

यदि आपको अंगूर पसंद है तो यह आपके लिए अच्‍छी खबर है। यह आपकी त्‍वचा को मुँहासे से मुक्‍त रखता है। साथ ही यह त्‍वचा पर पड़ी मुँहासे के निशान को भी मिटाता है।


खुबानी

खुबानी में विटामिन सी और ए प्रचुर मात्रा में पाया जा‍ता है। यह आपकी निश्‍तेज त्‍वचा में जान डाल देता है। यह संवेदनशील त्‍वचा के लिए किसी दवा से कम नहीं है।


केला

केला फाइबर और विटामिन युक्‍त होता है। यह त्‍वचा को चमक प्रदान करता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह त्‍वचा को मुँहासे से बचाता है।


पपीता

आमतौर पर लोग पपीता पसंद नहीं करते हैं। लेकिन अपनी त्‍वचा से प्‍यार करते हैं तो पपीता को अपना दोस्‍त बनाएं। इसमें पाए जाने वाले एंजाइम डेड स्‍कीन को बाहर करता है और चेहरे पर चमक लाता है। इसमें विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो त्‍वचा के लिए कवच का काम करता है। इसका फेस पैक लगाने से त्‍वचा की पोर खुल जाती हैं। और ब्‍लैक हेड्स नहीं होते हैं। इससे रंग भी गोरा होता है

ताली योग बनाता है अंदर से मजबूत

हम जब खुश होते हैं तो ताली बजाते हैं लेकिन ताली मात्र खुशी का इजहार करने के लिए नहीं बजाया जाता बल्कि यह आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है।




जब आप अपनी दोनों हथेलियों को जोर-से एक-दूसरे पर मारते हैं। इस दौरान हाथों के सारे बिंदु दब जाते हैं और धीरे-धीरे शरीर में व्याप्त रोगों का सुधार होता है। लगातार ताली बजाने से शरीर के श्‍वेत रक्‍त कण मजबूत होते है, जिसके परिणामस्वरूप मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि होती है।




गैस, कब्ज, अपच, मानसिक तनाव, एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन से पीड़ित हैं तो दायें हाथ की चार अंगुलियों को बाएं हाथ की हथेलियों पर जोर-से मारना चाहिए और इस अभ्यास को सुबह-शाम कम-से-कम 5 मिनट करना चाहिए। धीरे-धीरे हम इन रोगों से मुक्त हो जाएंगे।



निम्न रक्तचाप के रोगियों को खड़े होकर दोनों हाथों को सामने लाकर ताली बजाते हुए नीचे से ऊपर की ओर गोलाकार घुमाएं और दिशा नीचे से ऊपर की ओर होनी चाहिए। यह निम्न रक्तचाप को सामान्य करने में बहुत ही लाभदायक तरीका है। ताली योग के द्वारा हृदय रोग, कमर दर्द, सरवाइकल जैसे रोग भी दूर होते हैं।



कैसे करें ताली योग दोनों हाथों की दसों अंगुलियों और हथेली को जोर-जोर से मारते हुए एक साथ एक ही जैसी आवाज में ताली योग का अभ्यास करें।



शुरू-शुरू में इसका अभ्यास कम-से-कम 2 मिनट अवश्य करना चाहिए और फिर इसको बढ़ाते हुए लगभग रोज 10 मिनट तक अभ्यास करना चाहिए

गैस, कब्ज और मुंह के छाले, अब नहीं होंगे

पेट की किसी न किसी समस्या से आज हर कोई पीडि़त है। शायद इसीलिये यह कहा जाने लगा है कि पेट में हर बीमारी की जड़े छुपी होती हैं। इतना ही नहीं रोग का समाधान भी अगर खोजना हो तो अंत में पेट की शरण में ही जाना पडता है। मस्तिष्क अगर जीवन का केन्द है, तो पेट भी स्वास्थ्य का केन्द्र ही है।

अनियमित खानपान और अनिश्चित दिनचर्या के कारण पेट की कोई न कोई समस्या होना आज आम बात हो गई है। पेट में गैस का बनना, कब्जियत रहना और मुंह के छाले होना कहीं न कहीं आपस में जुड़ी हुई समस्याएं हैं। पेट में गैस बनने की छोटी सी समस्या कई बार जानलेवा भी हो सकती है। तो चलिये कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खों से पेट की इन तीनों समस्याओं से छुटकारा पाएं हमेशा के लिये....

- पके हुए बेल फल का उचित रीति से सेवन करें।

- हिंगास्टक चूर्ण, जो कि बाजार में बना बनाया मिलता है, खाने के बाद उचित मात्रा में सेवन करें।

- भोजन में हरी शब्जियों और सलाद का सेवन अवश्य करें। चाय, मिर्च-मसाले, पचने में भारी चीजों से बचें।

- भोजन करने के बाद वज्रासन में बैठें। रात्रि में बाईं करवट से ही सोएं।

- प्रतिदिन सुबह 2 से 3 कि. मी. मार्निग वॉक करें

डाक्टर और दवा से गर पाना हो निजात तो करें ये 5 काम ! !

बच्चों की फीस, टेलीफोन-बिजली का बिल, दूध वाले का हिसाब....महीने के इन सब खर्चो के साथ ही अब एक नया खर्चा और जुड़ता जा रहा है। समस्या यह है कि यह खर्चा दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। किसी सुविधा या साधन के बदले में कुछ खर्च करना पड़े तो फिर भी समझ में आता है, मगर तकलीफ और परेशानी के उठाने के साथ में धन भी खर्च करना पड़े तो अफसोस तथा दु:ख होना स्वाभाविक है।

प्रदूषित हवा, पानी और भोजन के साथ जीवन बिताने की मजबूरी के चलते आज शायद ही ऐसा कोई बचा हो जो बगैर किसी दवा-दारू या डॉक्टरी सलाह के पूरी तरह से फिट हो।

लेकिन कुछ उपायों को अपनी नियमित दिनचर्या में शामिल करके इंसान अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को इस सीमा तक बढ़ा सकता है कि उस पर किसी बीमारी का असर हो ही नहीं। तो आइये जानते हैं उन उपायों को-

- त्रिफला जो कि आंवला, हरड़ और बहेड़ा का संयुक्त रूप होता है, इसे प्रतिदिन सोते समय गुनगुने पानी के साथ सेवन

करें। यह एक दिव्य रसायन है जिससे आपके रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहद स्ट्रांग हो जाती है।

- प्रतिदिन 5 तुलसी के पत्ते तथा दो-चार नीम की नई कोंपले खाली पेट खाने से शरीर में रोगों से लडऩे की क्षमता काफी

बढ़ जाती है।

- अंकुरित अन्न और सलाद का नियमित सेवन करें।

- सुबह की ताजी हवा में दो-चार किलोमीटर का मार्निग वॉक करें।

- चुनिंदा आसन और प्राणायाम को अपनी नियमित दिनचर्या में शामिल करें

आंखों के सामने अंधेरा क्यों? पाना हो छुटकारा तो करें.

आंखों के आगे अंधेरा होना, चक्कर आना, बाहरी दृश्य हिलते हुए, घूमते हुए या उल्टे सीधे नजर आना.....इसी तरह की जाने कि तनी ही समस्याएं हैं जिनका सीधा संबंध हमारी आंखों से होता है। एकाएक खड़े होने, झुकने या तेजी से घूम जाने पर अचानक आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। प्रकाश होते हुए भी अंधेरा लगना या चक्कर आने के कई शारीरिक और मानसिक कारण होते हैं।



शरीर का किसी बिमारी से ग्रसित होना, कमजोरी और थकावट होना, क्षमता से अधिक शरीर से काम लेना, नींद का पूरा न होना, आंखों के लिये आवश्यक प्राटीन्स औ विटामिन्स की कमी हो जाना आदि प्रमुख कारण हैं जिनके कारण यह समस्या पैदा होती है। नीचे दिये जा रहे कुछ कारगर उपायों को करने से इस रोग में तत्काल लाभ होता है-

-हरी पत्तेदार शब्जियों और सलाद का सेवन करें।

-प्रतिदिन 1 गिलास दूध में एक चम्मच घी डाल कर पीएं।

-रात को पानी में गलाकर रखी हुई दो बदाम सुबह खूब चबा-चबाकर खाएं।

-अंकुरित अन्न का प्रतिदिन नाश्ता करें।

-जितना संभव हो जल्दी सोएं और जल्दी उठें।


ऐसे बनें सुन्दर, गहरी और सम्मोहक आंखों के धनी! !

आखिर क्यों होता है किसी की आंखों में आकर्षण और सम्मोहन? क्या किन्हीं उपायों से ऐसा कर पाना संभव है? हर कोई चाहता है कि सभी उसे पंसद करें, उसकी तरफ ध्यान दें। लेकिन चाहना अलग बात है और हकीकत में वैसा ही हो पाना बड़ा दुर्लभ होता है। अच्छा और सम्पूर्ण व्यक्तित्व पाकर सभी के आकर्षण का केन्द्र बनना कौन नहीं चाहेगा। ऐसे कई कारण हैं जो इंसान के व्यक्तित्व को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। आंखें और चेहरा दोनों ही व्यक्तित्व के सर्वाधिक संवेदनशील केन्द्र होते हैं। सामान्य कद-काठी वाले व्यक्ति में भी कई बार गजब का आकर्षण होता है। यह अद्भुत आकर्षण उनमें उनकी खास आखों के कारण ही होता है।



नीचे दिये जा रहे इन आयुर्वेदिक और यौगिक उपायों को अपनाकर कोई भी अपनी आंखों में एक अनोखी चमक और प्रभाव पैदा कर सकता है-

- किसी योग विशेषज्ञ से सीखकर या मार्गदर्शन में प्रतिदिन रात्रि के प्रथम और अंतिम पहर में 25 से 30 मिनिट तक बिन्दु

त्राटक या दीप त्राटक का अभ्यास करें।

- किसी मार्गदर्शक के सहयोग से शीर्षासन या सर्वांगासन का नियमित अभ्यास करें।

- ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं, दिन में कई बार आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारें।

- शुद्ध और प्राकृतिक आहार-विहार करें। बाजारू खाने से यथा संभव बचें

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