बुधवार, 23 मार्च 2011
स्वप्नदोष से परेशान हैं?
साधारणतया योगासन भोजन के बाद नहीं किये जाते परंतु कुछ ऐसे आसन हैं जो भोजन के बाद भी किये जाते हैं। उन्हीं आसनों में से एक है ब्रह्मचर्यासन। यह आसन रात्रि-भोजन के बाद सोने से पहले करने से विशेष लाभ होता है।
ब्रह्मचर्यासन के नियमित अभ्यास से ब्रह्मचर्य-पालन में खूब सहायता मिलती है अर्थात् इसके अभ्यास से अखंड ब्रह्मचर्य की सिद्धि होती है। इसलिए योगियों ने इसका नाम ब्रह्मचर्यासन रखा है।
ब्रह्मचर्यासन की विधि
समतल स्थान पर कंबल बिछाकर घुटनों के बल बैठ जायें। तत्पश्चात् दोनों पैरों को अपनी-अपनी दिशा में इस तरह फैला दें कि नितम्ब और गुदा का भाग जमीन से लगा रहे। हाथों को घुटनों पर रख के शांत चित्त से बैठे रहें।
ब्रह्मचर्यासन के लाभ
इस आसन के अभ्यास से वीर्यवाहिनी नाड़ी का प्रवाह शीघ्र ही ऊध्र्वगामी हो जाता है और सिवनी नाड़ी की उष्णता कम हो जाती है, जिससे यह आसन स्वप्नदोषादि बीमारियों को दूर करने में परम लाभकारी सिद्ध हुआ है।
जिन व्यक्तियों को बार-बार स्वप्नदोष होता है, उन्हें सोने से पहले पांच से दस मिनट तक इस आसन का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। इससे उपस्थ इन्द्रिय में काफी शक्ति आती है और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
मंगलवार, 22 मार्च 2011
क्या आप बचना चाहते हैं हाईब्लडप्रेशर से...
-प्याज का रस और शुद्ध शहद बराबर मात्रा में मिलाकर रोज करीब दस ग्राम की मात्रा में लें।
- तरबूज के बीज की गिरि और खसखस दोनों को बराबर मात्रामें मिलाकर पीस लें रोज सुबह-शाम एक चम्मच खाली पेट पानी के साथ लें(यह प्रयोग करीब एक महीने तक नियमित करें )।
- मेथीदाने के चूर्ण को रोज एक चम्मच सुबह खाली पेट लेने से हाई ब्लडप्रेशर से बचा जा सकता है।
-खाना खाने के बाद दो कच्चे लहसुन की कलियां लेकर मुनक्का के साथ चबाऐं एसा करने से हाईब्लडप्रेशर की शिकायत नहीं होती।
क्या आपका पढ़ाई में मन नहीं लगता...?
आज अधिकांश लोगों की समस्या होती है उनका मन कहीं एक जगह नहीं लगता। ऐसा सबसे ज्यादा विद्यार्थियों के साथ होता है कि पढ़ाई में मन नहीं लगता। स्टडी के समय ध्यान कहीं ओर होता है। लगातार पढ़ाई के बाद भी कुछ याद नहीं रहता। इन सब की वजह मन की एकाग्रता की कमी है। एकाग्रता बढ़ाने के लिए योग में कई आसन है। जिनकी मदद से आप अपना ध्यान केंद्रीत रख सकते हैं। ऐसा ही एक आसन है भद्रासन।
भद्रासन की विधि- किसी हवा वाले स्थान पर चटाई बिछाकर घुटनों के बल खड़े हो जाएं। अब अपने दाएं पैर को घुटने से मोड़कर पीछे की ओर ले जाकर हिप्स के नीचे रखें। बाएं पैर को भी घुटने से मोड़कर पीछे की ओर ले जाकर हिप्स के नीचे रखें। घुटनों को आपस में मिलाकर जमीन से सटाकर रखें तथा पंजे को नीचे व एडिय़ों को ऊपर सटाकर रखें। अब अपने पूरे शरीर का भार पंजे व एडिय़ों पर डालकर बैठ जाएं। इसके बाद अपने दाएं हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ें तथा बाएं हाथ से दाएं पैर का अंगूठा पकड़ लें। अब सांस को अंदर खींच कर सिर को आगे झुकाकर रखें और कंधे को ऊपर खींचते हुए आगे की ओर करें। अब नाक के अगले भाग को देखते हुए भद्रासन का अभ्यास करें। इस सामान्य स्थिति में जब तक रहना सम्भव हो रहें और सिर को ऊपर करके सांस बाहर छोड़ें। पुन: सांस को अंदर खींचकर भद्रासन का अभ्यास करें।
लाभ- इस आसन में सिर के मध्य ध्यान लगाया जाता है, जिससे मन को स्थिर रखने में व मानसिक तनाव समाप्त होता है। मन की एकाग्रता के लिए यह आसन अधिक लाभकारी है, क्योंकि इसमें नाक के अगले भाग पर दृष्टि जमाने से मन स्थिर होता है। इससे शारीरिक स्वास्थ्य बना रहता है। इस आसन को करने से भूख बढ़ती है। फेफड़ों के लिए भी यह आसन लाभकारी होता है।
सोमवार, 21 मार्च 2011
बचना चाहते हैं बायपास सर्जरी से तो पीएं लौकी का रस
क्षमता से ज्यादा काम और मानसिक तनाव के कारण आजकल दिल से सम्बन्धित रोग बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन कोई भी एक नया व्यक्ति दिल के रोग से पीडि़त मिल ही जाता है। किसी-किसी को तो ये रोग इतने ज्यादा हद तक होजाते हैं कि उनका इलाज केवल एन्ज्योग्राफी या बायपास सर्जरी ही होता है। अगर आप इन रोगों से बचना चाहते हैं तो लौकी का रस आपकी बहुत मदद कर सकता है। अगर आपको दिल से सम्बन्धी कोई भी बीमारी हो तो लौकी का रस जरूर पिएं।
लौकी का ज्यूस बनाने की विधि- सबसे पहले लौकी को धो ले फिर उसे कद्दूकस कर लें। कद्दूकस की हुई लौकी में सात तुलसी के पत्ते और पांच पुदीने की पत्तियां डाल कर उसे मिक्सर में पीस लें। रस की मात्रा कम से कम 150 ग्राम होनी चाहिए। अब इस रस में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर तीन चार पिसी काली मिर्च और थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर पिऐं।
रस को पीने की विधि- यह रस किसी भी दिल के मरीज को दिन में तीन बार सुबह, दोपहर और शाम को खाने के बाद पिलाना चाहिए। शुरूआत के दिनों में रस कुछ कम मात्रा में लें और जैसे ही वह अच्छे से पचने लगे इसकी मात्रा बढ़ा दें।
विशेष- लौकी का रस पेट के विकारों को मल के द्वारा बाहर निकाल देता है। जिसके कारण शुरूआत में पेट में गडग़ड़ाहट और खलबली मच सकती है इससे घबराएं नहीं कुछ समय बाद यह अपने आप ठीक हो जाएगा। इस रस को पीने के साथ मरीज का अपनी पहले से चल रही दवाईयों को भी चालू रखना चाहिए पहले से चल रही दवाईयों को एकदम न छोड़ें।
दाग-धब्बों का हर्बल उपचार
आप अपनी त्वचा को कैसे कील-मुँहासों और दाग-धब्बों से दूर रख सकते हैं, इसके आसान से उपाय यहाँ बताए जा रहे हैं। 25 मिली ग्लिसरीन और 25 मिली शुद्ध गुलाब जल में 5 ग्राम सल्फर पावडर मिलाए। इस लेप को रात में चेहरे के दाग-धब्बे, मुँहासे पर लगाकर छोड़ दें। सबेरे पानी से चेहरा धोएँ। इस लेप से एक हफ्ते में आप एक्ने की प्रॉब्लम से निजात पा सकते हैं। बेहतरीन रिजल्ट पाने के लिए सप्ताह में 3 बार इसे लगाएँ।
संतरे के 20 ग्राम सूखे छिल्के, 5 ग्राम सूखे नीम के पत्ते लें और इन्हें पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में 5 ग्राम चूर्ण, चंदन चूर्ण और आटा मिलाएँ। इस मिश्रण में 5 मिली बादाम तेल और इतनी ही मात्रा में तिल का तेल मिलाएँ। अब इस उबटन को रातभर चेहरे पर लगाए रखें और सबेरे पानी से धो दें। इस उबटन को हफ्ते में 3-4 बार लगाएँ।
गुलाब पत्तियों, सेना, नीम, तुलसी और कासनी की 3 ग्राम (प्रत्येक) पत्तियों को उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें चीनी मिलाएँ। इस मिश्रण को छानकर इसमें चीनी मिलाएँ। इस मिश्रण को हर रात सोने से पहले पिएँ और आपको 15 दिनों में ही फर्क दिखाई देने लगेगा।
असरकारी उपाय, अवश्य आजमाएँ
* मूली ज्यादा खा ली हो तो चौथाई चम्मच अजवायन फाँक लें या मूली का ऊपरी मुलायम पत्ता खा लेने से गैस या अपच नहीं होती।
* मूली के तीन-चार पत्ते से खाने से हिचकी दूर होती है।
* केले ज्यादा खा लिए हों तो एक इलायची चबा लें, केला हजम हो जाएगा।
* बदन में थकावट का दर्द होने पर सरसों के तेल में नमक मिलाकर गुनगुना कर लें व पूरे बदन पर मालिश करके गर्म पानी से नहा लें। इससे राहत मिलेगी।
* जी मिचला रहा हो और उल्टी हो रही हो तो 4-5 लौंग, एक चम्मच चीनी में बारीक पीसकर चुटकी-चुटकी भर जीभ पर रखकर चाटने से आराम मिलता है।
* मूँग की दाल रात को भिगोकर सुबह उसमें 2 लौंग डालकर बनाया जाए तो ज्यादा पाचक होती है व गैस भी नहीं बनती।
* मेथी को अजवायन के संग बराबर मात्रा में लेकर पीस लें व खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ फाँक लें। गैस-अपच नहीं होगी और कब्ज भी नहीं रहेगा।
* साबुत काली मिर्च व मिश्री चबाने से गले की खराश तत्काल दूर हो जाती है।
* खुश्की के कारण फट रहे पाँव व फटी बिवाइयों में सरसों का तेल व मोम पिघलाकर सूखी मेहँदी बुरक दें व गुनगुना ही बिवाइयों में भरें, दो-तीन बार के प्रयोग में ही लाभ होगा।
डायबिटीज के लिए घरेलू नुस्खे
औसत आकार का एक टमाटर, एक खीरा और एक करेला, इन तीनों का ज्यूस निकाल कर रोज खाली पेट सेवन करें।
सौंफ के सेवन से भी डायबिटीज पर नियंत्रण संभव है।
काले जामुन डायबिटीज के मरीजों के लिए अचूक औषधि मानी जाती है।
नियमित रूप से दो चम्मच नीम का रस और चार चम्मच केले के पत्ते का रस लेना चाहिए। चार चम्मच आँवले का रस, गुडमार की पत्ती का काढ़ा भी मधुमेह नियंत्रण के लिए रामबाण है।
गेहूँ के पौधों में रोगनाशक गुण होते हैं। गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी जड़ से मिटा डालता है। इसका रस मनुष्य के रक्त से चालीस फीसदी मेल खाता है। इसे ग्रीन ब्लड भी कहते हैं। रोगी को प्रतिदिन सुबह और शाम में आधा कप जवारे का ताजा रस दिया जाना चाहिए।
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