विवाह के समय सूर्य का गोचर (Transit Sun) – Acharya Chandeshwara का सिद्धांत
यह सबसे महत्वपूर्ण classical clue है।
सूत्र (Results of marriage when transit Sun is from bride’s natal Sun):
| Transit Sun from Bride’s Natal Sun | Result |
|---|---|
| 1st (Same sign) | संतति नहीं / गर्भधारण में बाधा |
| 2nd | गरीबी, आर्थिक कठिनाई |
| 3rd | शुभ, सुख |
| 4th | दुःख, दुर्भाग्य |
| 5th | कम संतान |
| 6th | पति के प्रति बहुत स्नेह |
| 7th | पति से त्याग / अलगाव |
| 8th | चरित्र पर आरोप / अशुद्धता |
| 9th | गरीबी |
| 10th | शुभ, सुख |
| 11th | बहुत शुभ, संपत्ति |
| 12th | विधवा योग / दुख |
✔️ विशेष अपवाद (Exception Rule)
Acharya कहते हैं:
-
यदि सूर्य 2nd, 5th, या 9th में हो →
13 दिन बीत जाने के बाद परिणाम हानिरहित हो जाते हैं
(यानि sign-entry के 13 दिन बाद शादी की जा सकती है) -
BUT → यह अपवाद लागू नहीं होता:
1st, 4th, 7th, 8th, 12th में
(इनमें 13 दिन बाद भी विवाह नहीं)
▶️ प्रायोगिक उपयोग (How to use this rule)
Step 1 — लड़की की जन्म कुंडली में सूर्य देखें (Natal Sun sign)
उदाहरण: लड़की का सूर्य मिथुन में है।
Step 2 — वर्तमान गोचर-सूर्य किस राशि में है?
मान लें वर्तमान सूर्य कन्या में है।
Step 3 — जन्म-सूर्य से गणना करें
मिथुन → कन्या = 4th
→ निषेध (Do NOT marry)
Step 4 — अपवाद लागू है या नहीं?
4th में अपवाद लागू नहीं होता।
➡️ विवाह नहीं करना।
2️⃣ यदि अशुभ सूर्य में विवाह करना ही पड़े
Garga का सूत्र:
✔️ एक गाय का दान कराकर विवाह कर सकते हैं।
यह शांति-उपाय है।
3️⃣ विवाह के लिए नक्षत्र-शक्ति (Nakshatra Strength Clues)
सूत्र
-
विवाह के लिए स्थिर और मधुर नक्षत्र श्रेष्ठ हैं:
-
Rohini, Mrigashira, Punarvasu, Hasta, Swati, Anuradha, Revati
-
-
निम्न नक्षत्र avoid:
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Ardra, Aslesha, Jyeshtha, Moola, Purva Bhadrapada
-
▶️ प्रयोग
Step
-
विवाह का मुहूर्त चुनते समय चंद्रमा की नक्षत्रस्थिति देखें
→ यदि चंदमा उपरोक्त शुभ नक्षत्रों में है → विवाह शुभ
4️⃣ विवाह के लिए शुभ सप्ताह-दिन (Classical Marriage Weekdays)
-
Monday → भावनात्मक सामंजस्य
-
Wednesday → संबंध में संचार अच्छा
-
Thursday → समृद्धि
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Friday → प्रेम और सौभाग्य
Avoid:
-
Saturday → देरी, संघर्ष
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Tuesday → झगड़े, चोट, विभाजन
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Sunday → अहंकार और कठोरता
5️⃣ विवाह के समय ग्रह-बल (Graha-Bala) के छोटे सूत्र
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शुक्र प्रबल होना चाहिए
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चंद्रमा शुक्ल पक्ष में उत्तम
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गुरु शुभ भाव में
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शनि/राहु/केतु विवाह मुहूर्त को न देख रहे हों
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मंगल 8वें/7वें को न देखे
6️⃣ स्त्री-पुरुष की कुण्डली में आपसी आदान-प्रदान / दृष्टि
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लड़के का शुक्र लड़की के चंद्रमा से शुभ संबंध
-
लड़की का चंद्रमा लड़के के गुरु से अनुकूल
-
दोनों के लघ्नेश में शत्रु-दृष्टि न हो
→ वैवाहिक सुख।
7️⃣ विवाह के समय चंद्रमा की दशा / अंतर्दशा
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चंद्रमा की कृपा या वर्षमान दशा मे विवाह हो
-
चंद्रमा का 8th lord से संबंध न हो
8️⃣ विवाह के लिए दिक्-बाल / दिशा-बल
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शुभ दिशा का ग्रह मजबूत
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7th lord को पूर्व, उत्तर, ईशान से शक्ति मिलती है
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7th lord पश्चिम/दक्षिण में कमज़ोर
9️⃣ विवाह में “Navamsa Activation Principle”
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विवाह के समय चंद्रमा से 7th Navamsa शुभ बिंदु में हो
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चंद्रमा नवांश का 7th or 10th से आच्छादित न हो
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चंद्रमा नवांश के 8th में न पड़े
10️⃣ वधू-पक्ष सूर्य आधारित सूत्र (Rare Classical Rule)
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विवाह के समय लड़की के सूर्य से
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3rd, 10th, 11th → श्रेष्ठ
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1st, 4th, 7th, 8th, 12th → अशुभ
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2nd, 5th, 9th → 13 days after entry allowed
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